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धामी कैबिनेट की बैठक में कई अहम फैसले, जियो थर्मल नीति को मंजूरी

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए गए। बैठक में प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र को मजबूती देने के उद्देश्य से जियो थर्मल नीति को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। यह नीति राज्य में वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

प्रमुख फैसले

1. जियो थर्मल नीति को मंजूरी:
राज्य में भू-तापीय (Geothermal) ऊर्जा के संभावित उपयोग को लेकर तैयार की गई जियो थर्मल नीति को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी है। यह नीति प्रदेश को हरित ऊर्जा की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने में सहायक होगी।

2. पुलों की क्षमता बढ़ाने हेतु विशेष इकाई:
राज्य में पुलों की संरचनात्मक मजबूती और भार वहन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। यह इकाई पुलों के निर्माण और सुदृढ़ीकरण कार्यों की निगरानी करेगी।

3. सतर्कता विभाग के ढांचे में विस्तार:
भ्रष्टाचार रोकथाम और प्रशासनिक निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए सतर्कता विभाग में 20 नए पदों को स्वीकृति दी गई है। इसके बाद विभागीय कुल पदों की संख्या 132 से बढ़कर 156 हो गई है।

4. जीएसटी विभाग में भी ढांचा विस्तार:
राज्य में राजस्व संग्रहण को मजबूती देने के लिए वाणिज्य कर (GST) विभाग में भी पदों की संख्या बढ़ाई गई है। यह विस्तार विभागीय कार्य क्षमता को बढ़ावा देगा।

5. नए खनिजों के लिए खनन न्यास की स्थापना:
राज्य में नए खनिज स्रोतों के दोहन और क्षेत्रीय विकास के लिए जिला व राज्य स्तर पर खनन न्यास (Mining Trusts) स्थापित किए जाएंगे। इन न्यासों का उद्देश्य खनिज से प्राप्त राजस्व का स्थानीय विकास में समुचित उपयोग करना होगा।

महाराष्ट्र के बाद अब बिहार में चुनाव की चोरी की साजिश- राहुल गांधी का BJP-JDU पर गंभीर आरोप

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पटना : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बिहार में मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भाजपा-जेडीयू गठबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पहले महाराष्ट्र में वोट की चोरी हुई और अब यही खेल बिहार में दोहराया जा रहा है। पटना में आयोजित महागठबंधन की बंद सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि यह संस्थान अब सत्ता के दबाव में काम कर रहा है।

राहुल गांधी ने कहा, “महाराष्ट्र मॉडल को हमने समझ लिया है, इसलिए बिहार में नया मॉडल लाया गया है, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि बिहार की जनता जागरूक है और अपने अधिकारों की रक्षा करना जानती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा-जेडीयू सरकार चुनाव आयोग के साथ मिलकर दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के वोट काटने की साजिश रच रही है।

महाराष्ट्र में 10% ज्यादा वोटर कैसे जुड़े?

राहुल गांधी ने महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच महज कुछ महीनों में एक करोड़ नए वोटर सूची में जुड़ गए। “जब हमने डेटा का विश्लेषण किया तो पाया कि जहां-जहां वोटर बढ़े, वहां एनडीए को बढ़त मिली। एक महीने में 4000-5000 वोटर जोड़ दिए गए, वहीं गरीब तबके के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए,” उन्होंने कहा। राहुल का आरोप है कि जब कांग्रेस ने चुनाव आयोग से वोटर लिस्ट और वीडियोग्राफी मांगी, तो आयोग चुप्पी साध गया और बाद में वीडियोग्राफी का कानून ही बदल दिया गया।

“बिहार में भी साजिश, लोकतंत्र पर हमला”

राहुल गांधी का कहना है कि अब वही साजिश बिहार में रची जा रही है। भाजपा-जेडीयू गठबंधन राज्य में करोड़ों लोगों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश कर रहा है। “यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है, एक तरह की ‘वोटबंदी’ है,” उन्होंने कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे और उनकी पार्टी बिहार की जनता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी ताकत से लड़ेंगे।

तेजस्वी यादव का तीखा हमला

सभा में मौजूद राजद नेता तेजस्वी यादव ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा, “अब पहले वोटर लिस्ट से नाम काटेंगे, फिर राशन बंद कर देंगे।” उन्होंने कहा कि आयोग बार-बार नोटिफिकेशन बदल रहा है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना लाजिमी है। तेजस्वी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि “वह अब खुद ही हाईजैक हो चुके हैं, न बोल सकते हैं, न निर्णय ले सकते हैं।”

मुख्यमंत्री धामी की सुरक्षा में लापरवाही, पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ करेंगे जांच, वन विभाग में मचा हड़कंप

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देहरादून : मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक सामने आई है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 6 जुलाई को हुए भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री को जिस जिप्सी में सैर कराई गई, उसकी फिटनेस 5 साल पहले ही खत्म हो चुकी थी। मामले का खुलासा होते ही मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर वन विभाग तक हड़कंप मच गया है। प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।

वन विभाग के प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) ने बताया कि इस मामले की जांच पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ रंजन कुमार मिश्रा को सौंपी गई है। वे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक द्वारा सीएम को कराई गई सफारी में इस्तेमाल की गई जिप्सी की स्थिति, नियमों के उल्लंघन और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जांच करेंगे। मिश्रा अपनी रिपोर्ट जल्द उच्च अधिकारियों को सौंपेंगे।

5 साल पहले खत्म हो चुकी थी फिटनेस

मामला 6 जुलाई, रविवार का है, जब मुख्यमंत्री धामी नैनीताल जनपद स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के भ्रमण पर थे। उनके साथ पार्क निदेशक साकेत बडोला भी उसी जिप्सी में मौजूद थे। लेकिन जांच में सामने आया कि जिस जिप्सी में मुख्यमंत्री सवार थे, उसकी फिटनेस 22 अगस्त 2020 को ही समाप्त हो चुकी थी। यानी एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को नियमों को ताक पर रखकर एक अवैध और असुरक्षित वाहन में जंगल सफारी कराई गई।

मंत्री भी मान चुके हैं गलती

वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल स्वयं इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि जिप्सी की फिटनेस समय पर न कराना विभाग की गलती थी। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि अब जबकि विभाग गलती स्वीकार चुका है, तो जांच का दायरा क्या होगा? क्या कार्रवाई महज खानापूर्ति बनकर रह जाएगी, या जिम्मेदार अफसरों पर भी गाज गिरेगी?

पिछले मामलों में भी जांचें बनीं औपचारिकता

इससे पहले राजाजी टाइगर रिजर्व में हुई एक दुर्घटना में 6 लोगों की मौत के बाद भी विभाग जांच के नाम पर डेढ़ साल से अधिक का वक्त निकाल चुका है। वहां भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब कॉर्बेट प्रकरण में भी क्या यही दोहराव होगा?

मूसलधार बारिश से तबाही, पुल बहा, मकानों को ख़तरा

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पिथौरागढ़ जिले की धारचूला तहसील स्थित तल्ला दारमा घाटी के ग्राम पंचायत उमचिया में हुई तेज बारिश और लगातार गरज-चमक के कारण क्षेत्र में भारी तबाही मच गई। क्षेत्र से बहने वाली नेहल गाड़ का जलस्तर अचानक खतरनाक स्तर तक पहुंच गया, जिससे भारी नुकसान हुआ। बताया जा रहा है कि ऊपरी इलाकों में बादल फटने की आशंका है।

इस आपदा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत 2.13 करोड़ रुपये की लागत से बना 36 मीटर लंबा मोटर पुल बह गया, जो सोबला को उमचिया से जोड़ता था। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग का तीजम और वतन तोक को जोड़ने वाला लकड़ी का पुल भी पानी की तेज धार में बह गया। इससे क्षेत्र का संपर्क पूरी तरह कट गया और आवागमन बाधित हो गया।

जलस्तर बढ़ता देख 50 से अधिक परिवारों ने अपने घर खाली कर दिए और ऊंचाई पर स्थित स्कूलों व गोरखा रेजिमेंट की पोस्ट में जाकर रात बिताई। लोग पूरी रात भय और असुरक्षा में जागते रहे। भूस्खलन से बिष्ट कॉलोनी में आठ से अधिक मकान खतरे की जद में आ गए हैं। वहीं, दो बिजली के खंभे बह जाने से क्षेत्र में बिजली आपूर्ति ठप हो गई है। धारचूला के एसडीएम जितेंद्र वर्मा ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही राजस्व विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया है। नुकसान का आंकलन किया जा रहा है और प्रभावितों को आवश्यक मदद उपलब्ध कराई जाएगी।

बड़ा पुल हादसा : पुल गिरने से नदी में गिरे वाहन, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

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वडोदरा : गुजरात के वडोदरा जिले के पादरा क्षेत्र में बुधवार सुबह एक बड़ा हादसा हुआ। वडोदरा को आणंद से जोड़ने वाले महिसागर नदी पर बने गंभीरा पुल का एक हिस्सा अचानक ढह गया, जिससे चार वाहन नदी में जा गिरे। अब तक चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश के लिए बचाव अभियान तेज़ी से जारी है।

पुलिस और स्थानीय प्रशासन मौके पर मौजूद हैं। सुबह करीब 7:30 बजे यह हादसा हुआ, जब पुल से गुजरते वक्त दो ट्रक, एक वैन और एक बाइक समेत कई वाहन नदी में गिर गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक जोर की आवाज आई और देखते ही देखते पुल का एक बड़ा हिस्सा नदी में समा गया।

पुलिस निरीक्षक विजय चरण ने जानकारी दी कि अब तक चार लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। वहीं, घटनास्थल से प्राप्त वीडियो में देखा जा सकता है कि पुल का एक भाग पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। एक टैंकर पुल के ढहे हुए हिस्से में अटका दिखाई दे रहा है, जबकि एक बाइक हवा में लटकी हुई नजर आ रही है।

गंभीरा पुल को मध्य गुजरात के सबसे अहम पुलों में माना जाता है, जो वडोदरा और आणंद को सौराष्ट्र क्षेत्र से जोड़ता है। राज्य राजमार्ग से जुड़े इस पुल के गिरने से इलाके में यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। हादसे के बाद पुल के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं।

अधिकारियों ने बताया कि राहत और बचाव कार्य के लिए NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें सक्रिय हैं। नदी में गिरे बाकी वाहनों और लोगों की तलाश जारी है। पुल गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया है कि पुल की संरचना और रखरखाव को लेकर जांच होगी कि कहीं लापरवाही तो नहीं हुई।

कांग्रेस ने किसान नेताओं के साथ सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण कार्यालय पर बोला धावा, चुनाव रद्द करने की मांग

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देहरादून। लिब्बररेहड़ी सहकारी गन्ना विकास समिति लिमिटेड, मंगलौर के हालिया चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने सोमवार को शास्त्रीनगर स्थित सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के अध्यक्ष तारा दत्त पांडे के कार्यालय पर जमकर हंगामा किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत, एआईसीसी सचिव एवं मंगलौर विधायक काजी निजामुद्दीन, प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के नेतृत्व में किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव रद्द करने की मांग लेकर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचा।

नेताओं ने आरोप लगाया कि समिति चुनावों में सत्ता पक्ष भाजपा ने दबाव डालकर न केवल उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की, बल्कि अपात्र लोगों से मतदान करवाया गया और वैध मतों में पेंसिल से निशान लगाकर उन्हें अवैध घोषित कर दिया गया। इससे सत्ता पक्ष के प्रत्याशियों को गलत तरीके से जीत दिलाई गई।

पूर्व मुख्यमंत्री हरिश रावत ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर सरकार हर स्तर के चुनावों में हस्तक्षेप कर परिणाम अपने पक्ष में मोड़ने का प्रयास करेगी तो सहकारिता जैसे जनांदोलन का अंत हो जाएगा। काजी निजामुद्दीन ने कहा, अगर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग इसी तरह चलता रहा तो जनता का चुनावों और सहकारिता पर से भरोसा उठ जाएगा।

सूर्यकांत धस्माना ने तो साफ कहा, “भाजपा को लोकतंत्र और पारदर्शिता से परहेज़ है। पंचायत से लेकर लोकसभा तक हर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश लोकतंत्र को खतरे में डाल रही है।

वहीं, सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण अध्यक्ष तारा दत्त पांडे ने प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद स्पष्ट किया कि चुनाव संपन्न हो चुके हैं, ऐसे में अब कोई कार्यवाही केवल सहकारिता न्यायाधिकरण के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा, “प्राधिकरण केवल चुनाव से पूर्व तक ही कार्रवाई कर सकता है।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी सहकारिता चुनावों में अगर अनियमितताएं जारी रहीं और प्राधिकरण ने उचित कार्यवाही नहीं की तो कांग्रेस को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा।

प्रतिनिधिमंडल में वीरेंद्र रावत, चौधरी योगेन्द्र सिंह राठी, चौधरी वीरेंद्र सिंह, सचिन चौधरी, दीपक कुमार, विक्रांत प्रधान, संजय प्रधान, देवेंद्र सिंह, अनुज सलार, अंकित जटराना, देवेंद्र चौधरी, अविनाश कुमार, ऋषिपाल, सुमित कुमार समेत अन्य शामिल रहे।

रिवर्स पलायन के प्रेरणास्रोत बने बिमला गुंज्याल और यशपाल नेगी : मुख्यमंत्री धामी

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देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) बिमला गुंज्याल और पूर्व कर्नल यशपाल सिंह नेगी को ग्राम प्रधान निर्विरोध चुने जाने पर बधाई दी है। उन्होंने इसे उत्तराखंड में रिवर्स पलायन का एक प्रेरणादायक और सराहनीय उदाहरण बताया है।

बिमला गुंज्याल को सीमांत जनपद पिथौरागढ़ की गुंजी ग्राम पंचायत और कर्नल यशपाल सिंह नेगी को जनपद पौड़ी के बिरगण ग्राम पंचायत का प्रधान निर्विरोध चुना गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों का पंचायत व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी करना न केवल लोकतंत्र को मजबूती देता है, बल्कि उनके अनुभव से गांवों को नई दिशा भी मिलती है।

मुख्यमंत्री धामी ने विश्वास जताया कि गुंजी और बिरगण आने वाले समय में मॉडल ग्राम पंचायतों के रूप में विकसित होंगे और अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बनेंगे।

उन्होंने कहा कि ये उदाहरण बताते हैं कि सेवा-निवृत्ति के बाद भी व्यक्ति समाज और गांव की प्रगति में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। राज्य सरकार ऐसे हर प्रयास को प्रोत्साहित करने और पूर्ण सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ग्रामीण आजीविका, कृषि, बागवानी और स्वरोजगार के माध्यम से गांवों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उनका मानना है कि यही प्रयास रिवर्स पलायन की परंपरा को मजबूती देंगे और उत्तराखंड के गांवों को फिर से जीवंत बनाएंगे।

कांवड़ मेला-2025: सीएम धामी ने तैयारियों की समीक्षा, सख्त सुरक्षा और प्रबंधन के निर्देश

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देहरादून। आगामी कांवड़ मेला-2025 की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने पूर्व वर्षों की व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए कानून व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का विश्लेषण किया और इस बार किसी भी प्रकार की चूक न हो, इसके लिए सुधारात्मक कदम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विशाल धार्मिक आयोजन में तोड़फोड़, उपद्रव या अन्य अवांछनीय घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन और सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। साथ ही शिविर संचालकों, वॉलंटियरों और धर्मशालाओं या होटलों में ठहरने वालों का संपूर्ण सत्यापन कराया जाए।

उन्होंने सभी प्रमुख स्थलों पर एक्सरे सिस्टम, अग्निशमन यंत्र, फायर टेंडर और संबंधित कर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए। खाद्य और पेय पदार्थों की गुणवत्ता जांच, जलजनित बीमारियों की रोकथाम, सीसीटीवी व ड्रोन से निरंतर निगरानी, और अभिसूचना तंत्र को सक्रिय रखने की बात कही। भीड़ प्रबंधन में वॉलंटियरों की मदद लेने और यातायात के लिए अलग प्लान बनाकर प्रचार-प्रसार करने पर भी जोर दिया गया।

आतंकी खतरों को देखते हुए ATS और विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। हरिद्वार, नीलकंठ महादेव मंदिर जैसे स्थलों पर एम्बुलेंस, बैकअप, और सादे वस्त्रों में महिला व पुरुष सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की बात कही गई। जल पुलिस और गोताखोरों को अलर्ट मोड में रखने के निर्देश भी दिए गए।

यात्रा मार्गों पर लाउडस्पीकर और डीजे के उपयोग को नियंत्रित करने, ब्लैक स्पॉट चिन्हित कर सुधार करने और कांवड़ियों को ‘क्या करें और क्या न करें’ की जानकारी पेम्फलेट, होर्डिंग और सोशल मीडिया के जरिए देने की बात कही गई। साथ ही यात्रियों को लाठी-डंडा, नुकीली वस्तुएं ले जाने से रोकने का प्रचार अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने शराब, मांस और मादक पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध सख्ती से लागू कराने को कहा। महिला श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए उनके लिए विशेष पुलिस प्रबंध, महिला घाट और धर्मशालाओं में व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

अंतरराज्यीय समन्वय बढ़ाकर सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान, सोशल मीडिया पर अफवाहों पर नजर और तत्काल खंडन के निर्देश भी बैठक में दिए गए।

मुख्यमंत्री ने सभी विभागीय सचिवों और पुलिस महानिरीक्षकों को आगामी तीन दिनों में स्थलीय निरीक्षण कर तैयारियों की समीक्षा करने और अपने-अपने विभागों की कार्य योजनाओं को अंतिम रूप देने को कहा।

बैठक में गृह सचिव शैलेश बगोली, डीजीपी दीपम सेठ, आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन, गढ़वाल और कुमाऊं आयुक्त सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

चौहान बनाम चौहान या तीसरा विकल्प?

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देहरादून : उत्तराखंड के त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों की हलचल अब अपने चरम पर है। इस शोरगुल के बीच देहरादून जिला पंचायत की एक सीट ने विशेष ध्यान खींचा है, जहां सियासी जंग अब केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच न रहकर दो राजनीतिक घरानों, मुन्ना सिंह चौहान और प्रीतम सिंह की प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है।

मुकाबला सिर्फ दो परिवारों का?

फिलहाल, भाजपा की ओर से मधु चौहान और कांग्रेस की ओर से अभिषेक सिंह को संभावित दावेदार माना जा रहा है। लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी गर्म है कि क्या यह मुकाबला सिर्फ इन्हीं दो परिवारों तक सीमित रहेगा, या कोई तीसरा चेहरा भी उभरेगा?

देहरादून की राजनीति में जौनसार क्षेत्र से जुड़े कुछ प्रभावशाली चेहरे ऐसे भी हैं, जो पर्दे के पीछे से अपनी बिसात बिछा रहे हैं। ये वे नाम हैं जो सीधे सामने नहीं आते, लेकिन निर्णयों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। माना जा रहा है कि ऐसे चेहरे भी अपने उम्मीदवारों को सामने लाकर चुनावी समीकरण को नया मोड़ दे सकते हैं।

पारिवारिक सियासी विरासत

यह सीट लंबे समय से चौहान बनाम चौहान प्रतिस्पर्धा की गवाह रही है। एक ओर हैं मधु चौहान, जो दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं और विकासनगर के विधायक मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी हैं। दूसरी ओर हैं कांग्रेस के अनुभवी नेता प्रीतम सिंह, जो छह बार चकराता से विधायक रह चुके हैं। उन्होंने इस बार अपने बेटे अभिषेक सिंह को चुनावी रणभूमि में उतार कर एक नई पीढ़ी की राजनीति की शुरुआत कर दी है। इस लड़ाई को अब सिर्फ वर्तमान की नहीं, बल्कि राजनीतिक उत्तराधिकार की नींव के रूप में भी देखा जा रहा है।

पर्दे के पीछे से भी चल रहा है खेल

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस चुनाव के माध्यम से 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भी ज़मीन तैयार की जा रही है। कई ऐसे लोग, जो आज नजर नहीं आ रहे, पर्दे के पीछे से रणनीति बना रहे हैं। ये “छिपे हुए खिलाड़ी” आने वाले समय में समीकरण को उलट-पलट सकते हैं।

पुराना अनुभव बनाम नई उम्मीद

प्रीतम सिंह के भाई चमन सिंह दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। मधु चौहान ने भी दो बार यह पद संभाला है। अब प्रीतम सिंह अपने भाई की जगह बेटे को आगे कर रहे हैं, जबकि मधु चौहान एक बार फिर दावेदारी के लिए तैयार हैं। यह परंपरा बनाम परिवर्तन की सीधी लड़ाई बन चुकी है।

चुनावी समीकरण और जनता की समीक्षा

हालांकि पंचायत चुनाव पार्टी चिह्नों पर नहीं लड़े जाते, लेकिन हर कदम पर राजनीतिक रंग साफ दिखाई देता है। भाजपा मधु चौहान को महिला सशक्तिकरण और विकास कार्यों के नाम पर जनता के सामने पेश कर रही है। कांग्रेस की रणनीति पुराने जनाधार और परिवर्तन की उम्मीद के इर्द-गिर्द घूमती है। लेकिन, एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि जनता अब केवल पहचान से नहीं, कामकाज से भी फैसला करेगी। दो बार अध्यक्ष रह चुकी मधु चौहान के कार्यकाल की समीक्षा भी जनता करेगी, और ये समीक्षा चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती है।

क्या है तीसरे विकल्प की तैयारी ?

बात सिर्फ साख और सत्ता की नहीं, विकल्प की भी है। कई लोग अब यह सवाल भी उठा रहे हैं, क्या देहरादून की राजनीति को दो ही परिवारों तक सीमित रखा जाना चाहिए? क्या कोई तीसरा विकल्प सामने आना चाहिए जो परंपरागत राजनीति को चुनौती दे सके?

चुनावी रण अभी बाकी है

देहरादून जिला पंचायत की यह सीट अब एक साधारण चुनावी मुकाबले से कहीं आगे बढ़ चुकी है। यह प्रतिष्ठा, प्रभाव, पीढ़ी और परिवर्तन का युद्ध है। भाजपा और कांग्रेस के दिग्गज परिवारों की सीधी भिड़ंत के साथ-साथ पर्दे के पीछे से तीसरे मोर्चे की तैयारी ने इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। कुलमिलाकर देखा जाये तो अभी तस्वीर अधूरी है…लेकिन, रंग भरने शुरू हो चुके हैं।

उत्तराखंड : बादल फटने की सूचना, SDRF की टीम राहत-बचाव के लिए रवाना

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चमोली: जिले के नंदप्रयाग घाट से आगे स्थित मुख गांव के पास बादल फटने की सूचना मिल रही है। अच्छी खबर यह है कि फिलहाल अब तक किसी प्रकार की जनहानि की सूचना नहीं है। राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) की टीम को मौके पर रवाना कर दिया गया है।

जानकारी के अनुसार मुख गांव पास बादल फटने के बाद तेज बारिश शुरू हो गई, जिससे क्षेत्र की सड़कें मलबे से बाधित हो गई हैं। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीआरएफ की टीम राहत एवं बचाव कार्यों के लिए रवाना कर दी गई। स्थानीय प्रशासन भी मौके पर स्थिति का जायजा लेने में जुटा हुआ है।

इधर, मौसम विभाग ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अगले 48 घंटे के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं।