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सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ कानून के इन प्रावधानों पर लगाई रोक

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नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र में पारित वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद लागू कर दिया गया था, लेकिन इसके कई प्रावधानों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर की गईं। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अगुवाई वाली दो जजों की बेंच ने कानून को रद्द करने से तो इनकार किया, लेकिन इसके कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और राजीव धवन ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा, जबकि केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता मौजूद रहे। कोर्ट ने कहा कि वक्फ बोर्ड और परिषद की संरचना से जुड़े नियमों में संतुलन आवश्यक है।

कोर्ट का फैसला

  • सदस्यता की शर्तें: अधिनियम में प्रावधान था कि केवल पाँच साल से अधिक समय से इस्लाम धर्म का पालन करने वाले ही वक्फ बोर्ड के सदस्य बन सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त को फिलहाल स्थगित कर दिया है। जब तक राज्य सरकारें उचित नियम नहीं बनातीं, यह लागू नहीं होगा।

  • गैर-मुस्लिमों की संख्या: संशोधित कानून में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान था। अदालत ने स्पष्ट किया कि वक्फ बोर्ड में अधिकतम तीन और केंद्रीय वक्फ परिषद में अधिकतम चार गैर-मुस्लिम सदस्य ही हो सकते हैं। साथ ही, जहाँ संभव हो, बोर्ड का सीईओ मुस्लिम सदस्य ही बनाया जाए।

  • कलेक्टर के अधिकार: अधिनियम में जिला कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वे यह तय करें कि जिस संपत्ति पर वक्फ का दावा है, वह सरकारी है या निजी। अदालत ने इस प्रावधान पर रोक लगाते हुए कहा कि नागरिकों के निजी अधिकारों पर निर्णय लेने का अधिकार कलेक्टर को देना ‘शक्तियों के पृथक्करण’ के सिद्धांत के विरुद्ध है।

गौरतलब है कि यह अधिनियम अप्रैल 2025 में संसद से पास हुआ था। लोकसभा में 288 और राज्यसभा में 232 सांसदों ने इसके पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद 5 अप्रैल को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इसे मंजूरी दी थी। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि कानून तो प्रभावी रहेगा, लेकिन उसके कुछ विवादित प्रावधान फिलहाल लागू नहीं होंगे।

दो माह में 97 नाबालिग हुए लापता, पुलिस ने 87 को सकुशल बरामद किया

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देहरादून। बीते दो माह में जनपद के विभिन्न थाना क्षेत्रों से 97 नाबालिग बच्चों के लापता होने के मामले सामने आए। पुलिस की त्वरित कार्यवाही और अथक प्रयासों से इनमें से 87 बच्चों को उत्तराखंड सहित दिल्ली, मुंबई, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों से सकुशल बरामद कर लिया गया है।

पुलिस जांच में सामने आया कि 62 नाबालिग अपने परिजनों की डांट अथवा बात न मानने से नाराज होकर घर से चले गए थे। वहीं 24 बच्चे परिजनों को बिना बताए घूमने निकल पड़े या सोशल मीडिया के प्रभाव में आकर घर से बाहर गए। इसके अलावा 11 नाबालिगों को अन्य व्यक्तियों ने बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाया। इन मामलों में पुलिस ने अपहरण की गंभीर धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

अधिकारियों के अनुसार नाबालिगों की गुमशुदगी की सूचना पर पुलिस तत्काल अपहरण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित करती है। साथ ही, बरामदगी के बाद बच्चों और उनके परिजनों की काउंसलिंग भी कराई जा रही है, ताकि अभिभावक बच्चों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील रह सकें।

फिलहाल 10 नाबालिगों की तलाश अभी जारी है। इनमें कुछ मामलों में पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए लापता बच्चों से संपर्क भी स्थापित किया है। उदाहरण के तौर पर, पटेलनगर क्षेत्र से लापता एक नाबालिग युवती लुधियाना में नौकरी कर रही है और उसने वीडियो कॉल के माध्यम से पुलिस को जानकारी दी है कि वह अपनी मर्जी से गई है तथा जल्द ही देहरादून लौटेगी।

इसी तरह प्रेमनगर क्षेत्र से लापता एक किशोर परिजनों द्वारा फोन रीचार्ज न कराने से नाराज होकर घर से चला गया था और दोस्तों को बताया कि वह काम की तलाश में बाहर गया है। पुलिस का कहना है कि सभी लंबित मामलों में पूर्ण संजीदगी से प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि शेष लापता बच्चों को भी जल्द सकुशल बरामद किया जा सके।

पहलगाम आतंकी हमला: ऑपरेशन सिंदूर और क्रिकेट के मैदान पर भारत का जवाब

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नई दिल्ली: हाल ही में पहलगाम में हुए नृशंस आतंकी हमले, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी, ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस बर्बर घटना के जवाब में, भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नामक एक साहसिक अभियान चलाया, जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में स्थित आतंकी ठिकानों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया। इस सैन्य कार्रवाई ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख को स्पष्ट कर दिया।

इस गंभीर घटनाक्रम के बाद से ही भारत में पाकिस्तान के साथ खेलों में बहिष्कार की मांग जोर पकड़ रही थी। राष्ट्र की भावनाएं उफान पर थीं, और हर कोई चाहता था कि आतंकवाद के खिलाफ हर मोर्चे पर सख्त संदेश दिया जाए।

सूर्यकुमार यादव का भावनात्मक बयान: जीत सैनिकों को समर्पित

इन परिस्थितियों के बीच, भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव ने हालिया जीत के बाद एक बड़ा और भावनात्मक बयान दिया। उन्होंने कहा, “हमने टीम के तौर पर फैसला लिया था। हम यहां सिर्फ खेलने आए थे और मैदान पर जवाब दिया। कुछ चीजें खेल भावना से ऊपर होती हैं।

हम पहलगाम हमले के पीड़ितों के साथ मजबूती से खड़े हैं। यह जीत हम अपने उन सैनिकों को समर्पित करते हैं जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में हिस्सा लिया और बहादुरी दिखाई। उम्मीद है कि वे हम सभी को प्रेरित करते रहेंगे और जब भी हमें मौका मिलेगा, हम उन्हें मैदान पर मुस्कुराने का और कारण देंगे।”

सूर्यकुमार यादव का यह बयान केवल एक खेल जीत की घोषणा नहीं था, बल्कि यह देश के सैनिकों के प्रति सम्मान, पहलगाम के पीड़ितों के प्रति संवेदना और आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत संदेश था। टीम इंडिया ने खेल के मैदान पर न केवल अपने प्रतिद्वंद्वी को हराया, बल्कि देश की भावनाओं का भी प्रतिनिधित्व किया।

यह जीत उन सभी सैनिकों को समर्पित है जिन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अदम्य साहस का परिचय दिया और देश की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार रहते हैं। यह घटनाक्रम एक बार फिर साबित करता है कि खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और एकजुटता का प्रतीक भी हो सकते हैं।

भाजपा ने घोषित किए प्रदेश पदाधिकारी, आदित्य कोठारी बाहर

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देहरादून : भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड ने आखिरकार अपनी नई प्रदेश पदाधिकारी टीम की घोषणा कर दी है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के निर्देश पर जारी सूची में संगठन के विभिन्न मोर्चों, विभागों और पदों पर कुल 42 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बार की टीम में संतुलन साधने की कोशिश दिखाई देती है। पार्टी ने गढ़वाल और कुमाऊं दोनों मंडलों से नेताओं को बराबरी का प्रतिनिधित्व देने के साथ ही महिला और युवा चेहरों को भी आगे लाया है।
सबसे बड़ा बदलाव यह रहा कि भाजपा के युवा चेहरे आदित्य कोठारी को पदाधिकारियों की सूची से बाहर कर दिया गया है। माना जा रहा है कि यह निर्णय संगठन में संतुलन और नए समीकरणों को देखते हुए लिया गया है।
प्रदेश महामंत्री
नई टीम में दीप्ति रावत (पौड़ी), कुंदन परिहार (बागेश्वर) और तरुण बंसल (नैनीताल) को प्रदेश महामंत्री बनाया गया है। इनमें दीप्ति रावत पहली महिला महामंत्री के तौर पर संगठन में नई ऊर्जा का संचार करेंगी।
प्रदेश उपाध्यक्ष
प्रदेश उपाध्यक्ष पद पर आठ नेताओं को जगह मिली है। इनमें अनिल गोयल (देहरादून महानगर), राजेन्द्र सिंह बिष्ट (नैनीताल), श्रीपाल राणा (उधमसिंह नगर), आशा नौटियाल (रुद्रप्रयाग), स्वामी यतीश्वरानंद (हरिद्वार), शैलेन्द्र सिंह बिष्ट (कोटद्वार), राकेश गिरी (रुड़की) और डॉ. स्वराज विधिन (उत्तरकाशी) शामिल हैं।
प्रदेश मंत्री
प्रदेश मंत्रियों की लिस्ट भी काफी लंबी है। इसमें सतीश लखेड़ा (चमोली), आदित्य चौहान (देहरादून महानगर), नलिन भट्ट (टिहरी), दीपिका बहरा (पिथौरागढ़), नेहा जोशी (देहरादून महानगर), गुंजन सुडियाल (काशीपुर), नितिन मेहरा (चंपावत) और गौरव पांडे (अल्मोड़ा) को जिम्मेदारी दी गई है।
मीडिया और संगठन
कोषाध्यक्ष: पुनीत मित्तल (देहरादून महानगर)
मुख्य प्रवक्ता: सुरेश जोशी (पिथौरागढ़)
मीडिया प्रभारी: मनवीर सिंह चौहान (उत्तरकाशी) को लगातार तीसरी बार यह जिम्मेदारी मिली है।
सोशल मीडिया संयोजक: हिमांशु संगतानी (ऋषिकेश)।
इसके अलावा सोशल मीडिया, आईटी, प्रकोष्ठ और सह-संयोजक स्तर पर भी कई नए चेहरों को जगह मिली है।
मोर्चों में बंटवारा
महिला मोर्चा: रुचि चौहान भट्ट (ऋषिकेश)
किसान मोर्चा: महेन्द्र सिंह नेगी (नैनीताल)
अनुसूचित जाति मोर्चा: बलवीर दुन्नियाल (चमोली)
अनुसूचित जनजाति मोर्चा: डॉ. प्रेम सिंह राणा (उधमसिंह नगर)
अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चा: नेत्रपाल मौर्य (उधमसिंह नगर)
अल्पसंख्यक मोर्चा: अनीस गौड़ (रुड़की)
बड़ा संदेश
भाजपा की इस नई टीम से साफ झलकता है कि पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। गढ़वाल और कुमाऊं का संतुलन साधने के साथ ही महिला, युवा और विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देकर भाजपा ने संगठनात्मक संदेश देने की कोशिश की है। वहीं, कुछ पुराने नाम बाहर कर नए चेहरों को तरजीह देने से यह भी संकेत मिलता है कि संगठन बदलाव और नये प्रयोगों के लिए तैयार है।

उत्तराखंड: बदमाश ने कल सब इंस्पेक्टर पर किया था फायर, आज खुदको गोली से उड़ाया

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देहरादून – हरिद्वार में पुलिस से मुठभेड़ के बाद फरार हुए एक बदमाश ने देहरादून में आत्महत्या कर ली है। बदमाश ने खुद को गोली मारकर अपनी जान ले ली। यह घटना देहरादून के लक्ष्मण चौक के पास हुई। हरियाणा क्राइम ब्रांच का दारोगा को गोली मारने के बाद से ही बदमाश फरार था। घटना के बाद हरिद्वार से एक पुलिस टीम देहरादून के लिए रवाना हो गई थी।

क्या है पूरा मामला?

शनिवार शाम को हरिद्वार में हुई मुठभेड़ के दौरान हरियाणा क्राइम ब्रांच के दारोगा को गोली मारकर सुनील कुमार उर्फ सुनील कपूर फरार हो गया था। पुलिस की शुरुआती जाँच में सामने आया है कि सुनील ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से दारोगा को गोली मारी थी। दारोगा को इलाज के लिए एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया गया है, जहाँ अब उनकी हालत पहले से बेहतर है।

घटना के बाद पुलिस की टीमें पूरी रात बदमाश की तलाश में थीं, लेकिन उसका पता नहीं चल पाया था। इसके बाद हरियाणा एसटीएफ की टीम ने भी हरिद्वार पहुंचकर मामले की जांच की।

देहरादून में हुई घटना

फरार होने के बाद बदमाश सुनील देहरादून पहुंचा और लक्ष्मण चौक के पास उसने खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। हरिद्वार पुलिस ने देहरादून पहुंचकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

उत्तराखंड में भारी बारिश का कहर: ऋषिकेश में जलसैलाब, यात्री बस फंसी

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ऋषिकेश: उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश अब आफत बनकर सामने आ रही है। आज सुबह ऋषिकेश में मात्र दो घंटे की मूसलाधार बारिश ने पूरे जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। शहर के प्रमुख मार्गों, जैसे श्यामपुर बाईपास, मनसा देवी रोड और ढालवाला में भारी जलजमाव देखा गया।

गंगोत्री हाईवे पर फंसी यात्रियों से भरी बस

बारिश का सबसे ज्यादा असर गंगोत्री हाईवे पर देखने को मिला। जलसैलाब के साथ आए मलबे के कारण यात्रियों से भरी एक बस और उसके पीछे कई छोटे वाहन फंस गए। अचानक आई इस आपदा से बस में बैठे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और वे मदद के लिए चिल्लाने लगे।

सूचना मिलने पर, पुलिस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद सभी यात्रियों को बस से सुरक्षित बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। फिलहाल, हाईवे पर यातायात बहाल करने का काम जारी है।

प्रशासन की अपील

स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें और नदियों तथा पहाड़ी नालों के पास न जाएं। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के लिए भी भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे स्थिति और भी बिगड़ सकती है।

प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना: ग्रामीण भारत में क्रांति की एक नई गाथा

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नई दिल्ली: प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) भारत के ग्रामीण परिदृश्य को बदल रही है। यह केवल सड़कें नहीं, बल्कि लाखों लोगों के लिए जीवनरेखाएँ बना रही है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 तक इस योजना के तहत कुल 8,38,611 किमी ग्रामीण सड़कों और 12,146 पुलों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 7,83,727 किमी सड़कें और 9,891 पुल पहले ही बन चुके हैं।

यह योजना न केवल ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ रही है, बल्कि रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही है। मध्य प्रदेश के मंडला जिले में बरबास्पुर और कुरला गाँव इसका एक बेहतरीन उदाहरण हैं, जहाँ 2018-19 में एक पुल के निर्माण से 2,000 ग्रामीणों को बारिश के मौसम में अलगाव से मुक्ति मिली।

विभिन्न चरण और प्रगति

पीएमजीएसवाई को कई चरणों में लागू किया गया है, ताकि ग्रामीण कनेक्टिविटी को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा सके।

  • पीएमजीएसवाई चरण-I (2000): इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में सभी मौसम में सड़क संपर्क प्रदान करना था। जुलाई 2025 तक, इस चरण के तहत 99.7% आवासों को जोड़ा जा चुका है।
  • पीएमजीएसवाई चरण-II (2013): इस चरण में मौजूदा ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया, ताकि ग्रामीण बाजारों और विकास केंद्रों तक पहुँच आसान हो सके।
  • पीएमजीएसवाई चरण-III (2019): इसका लक्ष्य 1.25 लाख किमी मौजूदा सड़कों और प्रमुख ग्रामीण संपर्क मार्गों को उन्नत करना है, जो ग्रामीण कृषि बाजारों, स्कूलों और अस्पतालों को जोड़ते हैं।

नई और हरित प्रौद्योगिकियों का उपयोग

पीएमजीएसवाई ग्रामीण सड़क निर्माण में टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा दे रही है। अगस्त 2025 तक, 1,66,694 किमी सड़कों को नई और हरित प्रौद्योगिकियों का उपयोग करके मंजूरी दी गई है, जिनमें से 1,24,688 किमी का निर्माण हो चुका है। इसमें औद्योगिक और नगरपालिका कचरे जैसे फ्लाई ऐश, प्लास्टिक, और रबर का उपयोग शामिल है, जिससे लागत कम होती है और पर्यावरण पर प्रभाव भी घटता है।

विशेष परियोजनाओं के साथ एकीकरण

PMGSY को कई अन्य सरकारी पहलों के साथ एकीकृत किया गया है, ताकि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को भी लाभ मिल सके।

  • धर्ती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (DA-JGUA): यह पहल आदिवासी समुदायों के समग्र विकास पर केंद्रित है, जिसमें पीएमजीएसवाई-IV सामाजिक बुनियादी ढाँचे के अंतर को भरता है।
  • प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (PM-AJAY): इस योजना के तहत 40% या अधिक अनुसूचित जाति की आबादी वाले आवासों को प्राथमिकता दी जा रही है।
  • पीएम जन-मन (PM-JANMAN): यह विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) के विकास के लिए है, जिसके तहत 6,506 किमी सड़कों को मंजूरी दी गई है।

गुणवत्ता निगरानी और पारदर्शिता

गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक तीन-स्तरीय गुणवत्ता निगरानी प्रणाली लागू की गई है। इसके अलावा, ऑनलाइन प्रबंधन, निगरानी और लेखा प्रणाली (OMMAS) जैसे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं। ठेकेदारों को अब प्रदर्शन-आधारित अनुबंधों के तहत भुगतान किया जाता है, जो काम की गुणवत्ता पर आधारित होता है।PMGSY भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरी है। यह न केवल ग्रामीण इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ा रही है, बल्कि सामाजिक-आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह योजना भारत की ग्रामीण आबादी के लिए एक उज्जवल भविष्य की नींव रख रही है।

लगातार बारिश और भूस्खलन से वैष्णो देवी यात्रा 14वें दिन भी स्थगित

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जम्मू-कश्मीर: जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश और भूस्खलन के कारण श्री माता वैष्णो देवी की यात्रा को अगले आदेश तक के लिए अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है। श्राइन बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि प्रतिकूल मौसम के चलते पिछले 14 दिनों से यह यात्रा लगातार स्थगित है, जिससे हजारों तीर्थयात्री फंसे हुए हैं और उनमें निराशा का माहौल है।

बोर्ड ने सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धालुओं को सूचित किया है कि “भवन और ट्रैक पर लगातार बारिश के कारण 14 सितंबर से शुरू होने वाली श्री माता वैष्णो देवी यात्रा अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है। श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे आधिकारिक संचार माध्यमों के माध्यम से अपडेट रहें।”

अधिकारियों ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए कहा कि भूस्खलन से मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते ब्लॉक हो गए हैं, जिससे यात्रा करना बेहद असुरक्षित है। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग भी कई जगहों पर बाधित है, जिससे संपर्क और भी मुश्किल हो गया है।

श्राइन बोर्ड ने जताया आभार

इससे पहले, श्राइन बोर्ड ने यात्रा के अस्थायी निलंबन के दौरान श्रद्धालुओं के धैर्य और सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया था। बोर्ड ने कहा, “यात्रा का फिर से शुरू होना हमारी सामूहिक आस्था और दृढ़ता की पुष्टि है और बोर्ड इस पवित्र तीर्थयात्रा की सुरक्षा और गरिमा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।”

पहले भी हुई थी दुर्घटना

गौरतलब है कि 26 अगस्त को हुए एक बड़े भूस्खलन के बाद वैष्णो देवी यात्रा को स्थगित कर दिया गया था, जिसमें 34 लोगों की मौत हो गई थी और कई घायल हुए थे। यह हादसा अर्धकुंवारी स्थित इंद्रप्रस्थ भोजनालय के पास हुआ था। लगातार यात्रा स्थगित रहने से न केवल श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है, बल्कि इस यात्रा पर निर्भर स्थानीय व्यवसायों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

नेपाल में शांति की बहाली, अंतरिम सरकार में कैबिनेट विस्तार की तैयारी

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काठमांडू: नेपाल में सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार के गठन के बाद राजनीतिक स्थिरता धीरे-धीरे लौट रही है। देश भर से कर्फ्यू हटा लिया गया है, और जनजीवन सामान्य होने लगा है। इस बीच, नवनियुक्त अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की आज अपनी कैबिनेट का विस्तार कर सकती हैं।

प्रधानमंत्री कार्की ने शुक्रवार रात को शपथ ग्रहण करने के बाद रविवार सुबह 11 बजे सिंह दरबार में अपना कार्यभार संभाला। उनके सहयोगी बताते हैं कि वह मंत्रिमंडल विस्तार को अंतिम रूप देने के लिए जेन-जी आंदोलन के सलाहकारों और प्रमुख हस्तियों से लगातार परामर्श कर रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि मंत्रिमंडल छोटा और सुव्यवस्थित होगा, जिसमें 15 से अधिक मंत्री नहीं होंगे।

मंत्रिमंडल के लिए संभावित नाम

काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने वाले संभावित नामों में कानूनी विशेषज्ञ ओम प्रकाश आर्यल, पूर्व सेना अधिकारी बालानंद शर्मा, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आनंद मोहन भट्टाराई और माधव सुंदर खड़का शामिल हैं। चिकित्सा क्षेत्र से डॉ. भगवान कोइराला और डॉ. संदुक रुइत जैसे प्रमुख नामों पर भी विचार किया जा रहा है।

ऑनलाइन वोटिंग का सहारा

एक अनोखी पहल के तहत, जेन-जी आंदोलन के सदस्य भी इन नामों पर ऑनलाइन वोटिंग के जरिए आम सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अगर सहमति बनती है तो मंत्रिमंडल को आज शाम तक शपथ दिलाई जा सकती है, हालांकि इसमें सोमवार तक की देरी भी हो सकती है। फिलहाल, प्रधानमंत्री कार्की ने गृह, विदेश और रक्षा सहित लगभग दो दर्जन मंत्रालय अपने पास रखे हैं।

संसद भंग, 5 मार्च 2026 को चुनाव

राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री कार्की की सिफारिश पर संसद (प्रतिनिधि सभा) को भंग कर दिया। अब देश में नए सिरे से संसदीय चुनाव 5 मार्च 2026 को होंगे।

जनजीवन हुआ सामान्य, सोमवार से स्कूल खुलेंगे

कई दिनों की अशांति के बाद, काठमांडू घाटी समेत पूरे देश में जनजीवन पटरी पर लौट रहा है। शनिवार को कर्फ्यू हटा लिया गया, जिसके बाद दुकानें और बाजार फिर से खुल गए हैं। सड़कों पर वाहनों की आवाजाही भी सामान्य हो गई है। अधिकारियों ने घोषणा की है कि काठमांडू महानगरपालिका क्षेत्र में सोमवार से स्कूल खुलेंगे, जो 8 सितंबर से बंद थे।

अशांति और आंदोलन का कारण

यह पूरा घटनाक्रम केपी शर्मा ओली सरकार के खिलाफ शुरू हुए जेन-जी आंदोलन का परिणाम है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के विरोध में शुरू हुए इस आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था, जिसमें कम से कम 51 लोगों की जान गई। हिंसक प्रदर्शनों के कारण ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा था।

सीएम धामी ने दून अस्पताल में भर्ती पत्रकार मोहन भुलानी का जाना हाल

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचकर वरिष्ठ पत्रकार मोहन भुलानी का हालचाल जाना। भुलानी पिछले कुछ दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं।

मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। उन्होंने भुलानी के परिजनों से भी भेंट कर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पत्रकारों के योगदान का सम्मान करती है और संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ी है। उन्होंने अस्पताल प्रशासन को निर्देश दिए कि भुलानी के इलाज में कोई कसर न छोड़ी जाए। इस अवसर पर अपर सचिव बंशीधर तिवारी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी उपस्थित रहे।