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अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद विपक्ष एकजुट, राहुल गांधी ने ममता बनर्जी से की बात

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नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। घटना के बाद विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाते हुए हमले की कड़ी निंदा की है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने दावा किया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फोन कर अभिषेक बनर्जी के स्वास्थ्य की जानकारी ली और हरसंभव मदद का भरोसा दिया।

शनिवार देर रात पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने कहा कि राहुल गांधी ने उनसे फोन पर बात की और अभिषेक बनर्जी के इलाज के लिए हर संभव सहयोग की पेशकश की। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अभिषेक को हैदराबाद या देश के किसी भी अन्य स्थान पर बेहतर इलाज के लिए भेजा जा सकता है।

सोनारपुर में हुआ हमला

जानकारी के अनुसार, यह घटना दक्षिण 24 परगना जिले के सोनारपुर क्षेत्र में उस समय हुई, जब अभिषेक बनर्जी चुनाव के बाद हुई हिंसा से प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके काफिले का विरोध करते हुए कथित तौर पर हमला कर दिया।

घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें प्रदर्शनकारियों को टीएमसी नेता के खिलाफ नारेबाजी करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में कुछ लोग पत्थर, अंडे और जूते फेंकते भी नजर आ रहे हैं। धक्का-मुक्की के दौरान अभिषेक बनर्जी की शर्ट फट गई और सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

‘यह पूर्व नियोजित साजिश थी’ : अभिषेक

हमले के बाद अभिषेक बनर्जी ने इसे सुनियोजित साजिश करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि घटनास्थल पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था। अभिषेक ने कहा कि उन पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई और पूरी घटना पहले से योजनाबद्ध प्रतीत होती है।

अस्पतालों पर दबाव डालने का आरोप

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कुछ प्रभावशाली लोग अस्पतालों और डॉक्टरों पर दबाव बना रहे हैं ताकि अभिषेक बनर्जी का समुचित इलाज न हो सके। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल प्रशासन ने उन्हें बताया कि उन्हें पुलिस की ओर से धमकी भरे फोन कॉल प्राप्त हो रहे हैं। ममता ने कहा कि डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन दबाव में हैं, लेकिन वे अपना कर्तव्य निभाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।

राहुल गांधी ने की निंदा

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी निर्वाचित सांसद पर हमला केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं बल्कि लोकतंत्र और जनता के जनादेश पर हमला है। राहुल गांधी ने लिखा कि राजनीतिक मतभेदों को हिंसा का आधार नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग करते हुए अभिषेक बनर्जी के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।

विपक्ष का समर्थन, भाजपा ने आरोप खारिज किए

घटना के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने इसे गंभीर साजिश बताते हुए राजनीतिक हिंसा की संस्कृति पर चिंता जताई। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि हमले के पीछे भाजपा समर्थित तत्वों का हाथ है। हालांकि भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि भाजपा का इससे कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि यह स्थानीय लोगों का स्वतःस्फूर्त विरोध हो सकता है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए शांति बनाए रखने और कानून को हाथ में न लेने की अपील की।

अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला बता रहे हैं, जबकि भाजपा अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार करार दे रही है।

BIG BREAKING : भारी बारिश के चलते केदारनाथ यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित, यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया

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रुद्रप्रयाग। जनपद रुद्रप्रयाग में लगातार हो रही वर्षा और मौसम विभाग द्वारा जारी ऑरेंज अलर्ट के मद्देनजर प्रशासन ने एहतियातन केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोक दिया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग के निर्देश पर यह निर्णय लिया गया।

मौसम विभाग ने जनपद में भारी बारिश के साथ आंधी-तूफान की प्रबल संभावना जताई है। देर रात से ही क्षेत्र में लगातार वर्षा जारी है, जिससे यात्रा मार्ग पर जोखिम की स्थिति बन गई है। प्रशासन ने केदारनाथ पैदल मार्ग पर आवागमन कर रहे सभी यात्रियों को तत्काल प्रभाव से निकटतम होल्डिंग सेंटरों एवं सुरक्षित स्थानों पर रोकने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन के अनुसार मौसम की स्थिति सामान्य होने तक किसी भी श्रद्धालु को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यात्रा मार्ग पर तैनात सभी सेक्टर मजिस्ट्रेट, पुलिस बल, डीडीआरएफ, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ तथा अन्य संबंधित विभागों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

जिला प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

आपदा, भूस्खलन, मार्ग अवरोध या किसी अन्य आपात स्थिति में सहायता के लिए जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र (डीईओसी) के हेल्पलाइन नंबर 8958757335 एवं 8218326386 पर संपर्क किया जा सकता है। वहीं पुलिस सहायता के लिए डायल-112 सेवा उपलब्ध है। प्रशासन ने मौसम में सुधार होने के बाद ही यात्रा को पुनः सुचारु रूप से संचालित किए जाने की बात कही है।

सोमनाथ मैदान में गूंजी देशभक्ति की हुंकार, 1170 अग्निवीरों ने ली राष्ट्र रक्षा की शपथ

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अल्मोड़ा। ऐतिहासिक सोमनाथ मैदान शनिवार को देशभक्ति और गौरव के अद्भुत माहौल का साक्षी बना, जब 1170 अग्निवीरों ने भव्य पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेकर भारतीय सेना का हिस्सा बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया। “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों से पूरा मैदान गूंज उठा और समारोह में उपस्थित परिजनों व गणमान्य लोगों ने इस गौरवपूर्ण क्षण का साक्षात्कार किया।

करीब छह माह के कठिन, अनुशासित और सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अग्निवीरों के सातवें बैच ने सेना की वर्दी धारण कर मातृभूमि की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। समारोह का शुभारंभ विभिन्न धर्म गुरुओं द्वारा अग्निवीरों को राष्ट्र रक्षा की शपथ दिलाने के साथ हुआ। इसके बाद जवानों ने शानदार मार्च पास्ट और परेड का प्रदर्शन कर अपने अनुशासन, दक्षता और सैन्य कौशल का परिचय दिया।

परेड की सलामी कुमाऊं रेजिमेंटल सेंटर (केआरसी) के कमांडेंट ब्रिगेडियर विजयंत महादिक ने ली। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद अग्निवीर बहादुरगढ़ द्वार से कदमताल करते हुए सोमनाथ मैदान पहुंचे और आकर्षक परेड का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर ब्रिगेडियर महादिक ने अग्निवीरों और उनके परिजनों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय सेना में भर्ती होना गौरव और सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि देश सेवा का अवसर हर किसी को नहीं मिलता और जो युवा राष्ट्र रक्षा के लिए स्वयं को समर्पित करते हैं, वे वास्तव में भाग्यशाली होते हैं।

उन्होंने कहा कि अग्निवीरों ने अपनी पहली अग्निपरीक्षा सफलतापूर्वक पार कर ली है और अब वे हर चुनौती का सामना करते हुए देश की सुरक्षा के लिए सदैव तैयार रहेंगे। कुमाऊं रेजिमेंट के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यहां प्रशिक्षित सैनिकों ने हमेशा देश की सीमाओं और राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

ब्रिगेडियर महादिक ने अग्निवीरों के अभिभावकों का विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय सेना और पूरा देश उन परिवारों का ऋणी है जिन्होंने अपने पुत्रों को राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित किया है। उन्होंने कहा कि जवानों के पीछे उनके परिवारों का त्याग और समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

परेड के बाद अग्निवीरों में विशेष उत्साह देखने को मिला। भारतीय सेना का हिस्सा बनने की खुशी उनके चेहरों पर साफ झलक रही थी। वहीं, विभिन्न राज्यों से पहुंचे परिजनों के लिए यह अवसर भावुक और गर्व से भरा रहा। अपने बेटों और भाइयों को सेना की वर्दी में देखकर परिजनों की आंखों में खुशी और गर्व साफ दिखाई दिया।

समारोह में डिप्टी कमांडेंट कर्नल प्रभु रामदास वामन, प्रशिक्षण बटालियन कमांडर कर्नल मोहित वर्मा, कैप्टन रोबिन, सूबेदार मेजर राजेश कुमार, सूबेदार प्रकाश चंद, पंकज कुमार, हवलदार भगत सिंह, अल्का कौशिक सहित सेना के अनेक अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। परेड के उपरांत सभी अग्निवीरों को भारतीय सेना की कुमाऊं एवं नागा रेजिमेंट की विभिन्न पलटनों में तैनाती के लिए भेजा जाएगा, जहां वे देश की सुरक्षा और सेवा के अपने दायित्वों का निर्वहन करेंगे।

शॉर्ट सर्किट से टीन शेड में लगी आग, तीन परिवारों का सामान जलकर राख

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उत्तरकाशी। जिला मुख्यालय स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय के पीछे स्थित कॉलोनी में शनिवार देर रात शॉर्ट सर्किट के कारण भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से एक टीन शेड और उसमें रखा घरेलू सामान पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि या पशुहानि नहीं हुई।

जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं ने बताया कि देर रात आग लगने की सूचना मिलते ही आपदा आपातकालीन परिचालन केंद्र द्वारा तत्काल फायर सर्विस, पुलिस एवं क्यूआरटी टीम को मौके पर रवाना किया गया। सुरक्षा के मद्देनजर प्रभावित क्षेत्र की विद्युत आपूर्ति तुरंत बंद कराई गई तथा जल संस्थान के सहयोग से हाइड्रेंट पंप संचालित कर अग्निशमन कार्य शुरू किया गया।

सूचना मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। फायर सर्विस, पुलिस और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीम ने करीब दो घंटे तक लगातार प्रयास कर आग को आसपास के क्षेत्रों में फैलने से रोका। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती तो आग निकटवर्ती मकानों को भी अपनी चपेट में ले सकती थी।

कड़ी मशक्कत के बाद रात्रि लगभग 1:30 बजे आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। प्रभावित टीन शेड में तीन परिवार निवास कर रहे थे, जिनका घरेलू सामान आग में जलकर नष्ट हो गया।

प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। घटना के बाद क्षेत्र में चिंता का माहौल है, जबकि स्थानीय लोगों ने राहत एवं बचाव दलों की त्वरित कार्रवाई और समन्वित प्रयासों की सराहना की। प्रशासन की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया।

मुख्य फार्मेसी अधिकारी महाबीर रवांल्टा सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त, स्वास्थ्य सेवा में 37 वर्षों का गौरवशाली सफर पूर्ण

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पुरोला/उत्तरकाशी। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला में मुख्य फार्मेसी अधिकारी के पद पर कार्यरत श्री महाबीर रवांल्टा  शनिवार 29 मई  को 37 वर्ष 4 माह 6 दिन की दीर्घ, निष्कलंक एवं प्रेरणादायी शासकीय सेवा पूर्ण कर सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर स्वास्थ्य केन्द्र परिवार, सहकर्मियों एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके योगदान को याद किया।

10 मई 1966 को उत्तरकाशी जनपद के सीमांत गांव सरनौल में जन्मे महाबीर रवांल्टा ने कठिन परिस्थितियों के बीच अपनी शिक्षा पूरी की। प्रारंभिक शिक्षा महरगांव में प्राप्त करने के बाद उन्होंने राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय जोशियाड़ा में जनपद स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इसके बाद राजकीय कीर्ति इंटर कॉलेज उत्तरकाशी से इंटरमीडिएट की शिक्षा पूरी की। पारिवारिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा और सेवा के प्रति अपने संकल्प को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

फार्मेसी में डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद उन्होंने स्वास्थ्य सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। साथ ही उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त कर अपनी शैक्षणिक यात्रा को भी आगे बढ़ाया। अपने सेवाकाल की शुरुआत 25 जनवरी 1989 को स्पेशल पुलिस फोर्स, के साथ उत्तरप्रदेश के  मुरादाबाद से करने वाले रवांल्टा ने भारत-तिब्बत सीमा के दुर्गम क्षेत्रों में भी सेवाएं दीं। वहां उन्होंने सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और ‘सीमा प्रहरी’ स्मारिका के संपादन सहित विभिन्न आयोजनों के लिए सम्मानित हुए।

25 सितंबर 1991 से स्वास्थ्य विभाग में अपनी सेवाएं देते हुए उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र धरपा एवं वैरा फिरोजपुर सहित कई स्थानों पर कार्य किया। रोगियों के प्रति उनका आत्मीय व्यवहार, सहज उपलब्धता और निस्वार्थ सेवा भाव उन्हें जनता के बीच अत्यंत लोकप्रिय बनाता रहा। पल्स पोलियो जैसे राष्ट्रीय अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका को विशेष रूप से सराहा गया।

उत्तराखंड गठन के बाद उत्तराखंड लौट आए, वर्ष 2010 में उनकी तैनाती अति प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आराकोट में हुई, जहां उन्होंने अत्यंत विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन किया। चिकित्सक के अभाव में वर्षों तक केन्द्र की जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने परिवार नियोजन, नेत्र शिविर, कोविड-19 टीकाकरण, मिजल्स-रुबेला अभियान सहित अनेक राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को सफलतापूर्वक संचालित किया।

जखोल, ओसला, लिवाड़ी, सिरगा, डामटी और अन्य दुर्गम गांवों तक पैदल पहुंचकर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही। वर्ष 2013 की आपदा और 2019 की आराकोट त्रासदी जैसे कठिन समय में भी उन्होंने अग्रिम पंक्ति में रहकर अपने दायित्वों का निर्वहन किया।

17 फरवरी 2025 को मुख्य फार्मेसी अधिकारी के रूप में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पुरोला में कार्यभार ग्रहण करने के बाद भी उन्होंने अपनी कार्यकुशलता, अनुशासन और सकारात्मक कार्यशैली से संस्थान को नई ऊर्जा प्रदान की। अल्प कार्यकाल के बावजूद उन्होंने सहकर्मियों और आमजन के बीच अपनी विशेष पहचान बनाई।

स्वास्थ्य सेवा के अतिरिक्त साहित्य, लोकसंस्कृति और रंगमंच के क्षेत्र में उनकी सक्रियता भी उन्हें एक बहुआयामी व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करती है। उनके योगदान को याद करते हुए स्वास्थ्य केन्द्र परिवार ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सुखद भविष्य की कामना की।

विदाई समारोह में वक्ताओं ने कहा कि महाबीर रवांल्टा का सेवाकाल केवल सरकारी दायित्वों के निर्वहन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सेवा, समर्पण, मानवीय संवेदनाओं और लोकमंगल के उच्च आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर समाज के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनके अनुभव, मार्गदर्शन और कर्मनिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।

भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष परमार्थ निकेतन ऋषिकेश गंगा आरती में हुए शामिल

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IMG 20260530 WA0048वोगंगा तट पर गूंजे आध्यात्म और संस्कृति के स्वर, मुख्यमंत्री धामी व भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने की भव्य गंगा आरती

•गंगा भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना की जीवंत धारा : नितिन नबीन

देहरादून/ पौड़ी । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एवं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने शुक्रवार 29 मई को ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन पहुंचकर विधिवत गंगा पूजन एवं भव्य गंगा आरती में सहभाग किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने मां गंगा से देश एवं प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।

परमार्थ निकेतन घाट पर आयोजित गंगा आरती के दौरान श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। वेद मंत्रों, भजन-कीर्तन और दीपों की अलौकिक छटा के बीच मुख्यमंत्री एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने मां गंगा की आराधना कर प्रदेश की उन्नति, जनकल्याण एवं विश्व शांति के लिए प्रार्थना की।

इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने उपस्थित संत-महात्माओं, श्रद्धालुओं एवं जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मां गंगा के पावन तट पर आना सदैव आत्मीय एवं आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और सनातन परंपरा की जीवंत धारा है, जिसने सदियों से देश की आध्यात्मिक चेतना को पोषित किया है।

उन्होंने कहा कि भारत की संत परंपरा ने हर कठिन और विपरीत परिस्थिति में समाज को दिशा देने का कार्य किया है। जब-जब देश सामाजिक, सांस्कृतिक या वैचारिक चुनौतियों से गुजरा, तब संतों और ऋषियों ने अपने तप, त्याग और ज्ञान के माध्यम से समाज को नई ऊर्जा एवं मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भारत की तपस्या, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों की परंपरा सदियों से जनमानस में जीवित रही है और संत समाज ने इस महान विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य किया है।

परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद मुनि ने मुख्यमंत्री एवं अतिथियों का स्वागत करते हुए गंगा संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन एवं मानव सेवा के संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर निरंतर नयी ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है तथा राष्ट्रहित में लिए गए निर्णयों से देश की प्रतिष्ठा विश्वभर में बढ़ी है।

इस अवसर पर जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरी, निरंजन अखाड़े के महामंडलेश्वर कैलाशानंद जी गिरी, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी, गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी, राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत, स्थानीय विधायक रेनू बिष्ट, उपजिलाधिकारी चतर सिंह चौहान सहित विभिन्न अधिकारी, संत-महात्मा, श्रद्धालु एवं देश-विदेश से आए पर्यटक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

देहरादून में आयोजित हुआ अंतर्राष्ट्रीय ब्रिक्स अकादमिक सम्मेलन

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देहरादून में आयोजित हुआ अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स अकादमिक मिड-टर्म सम्मेलन का आयोजन

• भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 की थीम “रिज़िलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” पर केंद्रित रहा सम्मेलन

शुक्रवार 29 मई को देहरादून में अंतरराष्ट्रीय ब्रिक्स अकादमिक मिड-टर्म सम्मेलन का आयोजन किया गया। दून विश्वविद्यालय में आयोजित हुए सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया सहित 11 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। सम्मेलन में समकालीन वैश्विक चुनौतियों तथा उनके समाधान पर विचार-विमर्श किया गया।

सम्मेलन का उद्घाटन उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन, दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल, ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. हर्ष वी. पंत तथा भारत सरकार के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव एवं ब्रिक्स उप-शेरपा श्री शंभू एल. हक्की द्वारा किया गया।

उद्घाटन सत्र में रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज़ (RIS) के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे।
सम्मेलन की थीम “बिल्डिंग फॉर रिज़िलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रही, जो वर्ष 2026 के लिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता की केंद्रीय थीम है। हिमालयी राज्य उत्तराखंड में आयोजित इस सम्मेलन में विशेष रूप से लचीलापन और सतत विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई।

सम्मेलन में तीन प्रमुख विषयगत सत्र आयोजित किए गए। इनमें खंडित वैश्विक अर्थव्यवस्था के बीच हरित औद्योगिक परिवर्तन, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के माध्यम से जैव विविधता संरक्षण तथा न्यायसंगत हरित परिवर्तन के लिए जलवायु वित्त के विस्तार जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।

विचार-विमर्श से हरित औद्योगिक परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण तथा जलवायु वित्त के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने तथा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।

शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 1,092 अंक टूटा

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नई दिल्ली: सप्ताह के अंतिम कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार में आखिरी घंटे में अचानक आई तेज बिकवाली ने निवेशकों को झटका दे दिया। बीएसई सेंसेक्स 1,092 अंक यानी 1.44 फीसदी टूटकर 74,775.74 अंक पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 359.40 अंक यानी 1.5 फीसदी गिरकर 23,547.75 अंक पर आ गया।

बाजार में यह गिरावट अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव और संघर्षविराम को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच देखने को मिली। दोनों देशों के बीच 60 दिन के संघर्षविराम पर सहमति बनने की खबरें आईं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की ओर से अभी तक औपचारिक मंजूरी नहीं मिलने से निवेशकों में चिंता बनी रही।

तेज गिरावट के चलते बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 466 लाख करोड़ रुपये रह गया। लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ है।

सेंसेक्स के 26 शेयर लाल निशान में

सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 26 गिरावट के साथ बंद हुए। सबसे ज्यादा दबाव पावरग्रिड के शेयर में देखा गया, जिसमें करीब 4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा इंडिगो, बजाज फाइनेंस, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाटा स्टील, सन फार्मा, एनटीपीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज, महिंद्रा एंड महिंद्रा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर के शेयरों में भी कमजोरी रही।

वहीं दूसरी ओर टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, लार्सन एंड टुब्रो और एशियन पेंट्स के शेयर बढ़त के साथ बंद हुए।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन

ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.79 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स मामूली 0.13 फीसदी की बढ़त के साथ बंद हुआ।

सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल और ऑटो सेक्टर में सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। वहीं रियल्टी सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव का असर

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड करीब 93.79 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता रहा।

इस बीच ईरान की सेना की ओर से संदिग्ध ठिकानों पर मिसाइल हमलों की खबरें भी सामने आई हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि ईरान ने कुवैत की दिशा में मिसाइल दागी और होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ड्रोन गतिविधियां बढ़ाई हैं। इन घटनाओं ने वैश्विक बाजारों में निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते आने वाले कारोबारी सत्रों में भी बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है।

जमानत मामलों में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तुरंत आदेश और रिहाई के दिए निर्देश

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नई दिल्ली। Supreme Court of India ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों, खासकर जमानत याचिकाओं में हो रही देरी पर गंभीर चिंता जताते हुए देशभर की अदालतों के लिए अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चीफ जस्टिस Justice Surya Kant और जस्टिस Joymalya Bagchi की पीठ ने कहा कि जमानत अर्जियों पर आदेश उसी दिन सुनाए जाने चाहिए। यदि किसी आदेश को सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अगले दिन तक सुनाकर वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत या सजा निलंबन का आदेश पारित होते ही जेल प्रशासन को तत्काल सूचित किया जाए, ताकि विचाराधीन कैदी या दोषी की रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनिश्चित की जा सके।

संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अदालत ने कहा कि यदि किसी फैसले का केवल ऑपरेटिव हिस्सा सुनाया जाता है, तो उसका विस्तृत और कारणयुक्त आदेश 15 दिनों के भीतर अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी फैसले को सुरक्षित रखने के चार महीने के भीतर सुनाया नहीं जाता है, तो संबंधित पक्ष हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से संपर्क कर सकता है। ऐसी स्थिति में मामले को दूसरी बेंच को सौंपने पर विचार किया जा सकेगा।

पीठ ने आगे कहा कि जब किसी फैसले का पूरा और कारणयुक्त आदेश खुली अदालत में सुनाया जाता है, तो उसे 24 घंटे के भीतर वेबसाइट पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि इन निर्देशों का उद्देश्य किसी विशेष जज या हाई कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाना नहीं है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी सुनिश्चित करना

करोड़ों की कोठी में अकेलेपन की मौत: राजिंदर नगर में बुजुर्ग ननद-भाभी के शव मिलने से उठे कई सवाल

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के मध्य जिले स्थित राजिंदर नगर इलाके में एक घर के भीतर दो बुजुर्ग महिलाओं के शव मिलने से सनसनी फैल गई। मृतकों की पहचान 80 वर्षीय सरोज बाला और उनकी भाभी चंद्रकांता के रूप में हुई है। शुरुआती जांच में पुलिस को घर में जबरन प्रवेश या संघर्ष के कोई संकेत नहीं मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि दोनों की Sham एक-दो दिन पहले हुई होगी।

यह घटना सिर्फ दो महिलाओं की मौत भर नहीं, बल्कि महानगरों में बढ़ते अकेलेपन और रिश्तों के टूटते दायरे की दर्दनाक तस्वीर बनकर सामने आई है।

कामवाली को बदबू से हुआ शक
पुलिस के मुताबिक, बृहस्पतिवार सुबह घरेलू सहायिका जब घर पहुंची तो अंदर से तेज दुर्गंध आ रही थी। कई बार आवाज देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो एक महिला का शव बिस्तर पर और दूसरी का शव फर्श पर पड़ा मिला।

मध्य जिला पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि घर के सभी दरवाजे अंदर से बंद थे और जांच के दौरान किसी तरह की लूटपाट, संघर्ष या जबरन घुसपैठ के संकेत नहीं मिले हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।

20 करोड़ की कोठी, लेकिन जिंदगी में सन्नाटा
स्थानीय लोगों के अनुसार जिस मकान में दोनों महिलाएं रहती थीं उसकी कीमत करीब 20 करोड़ रुपये बताई जा रही है। हालांकि, इतनी बड़ी संपत्ति के बावजूद दोनों की जिंदगी बेहद सीमित और अकेलेपन से भरी थी।

सरोज बाला अविवाहित थीं और बिजली विभाग से सेवानिवृत्त हुई थीं। उनके भाई भारतीय सेना में थे, जिनका कोरोना काल के दौरान निधन हो गया था। भाई की पत्नी चंद्रकांता लंबे समय से बीमार थीं और घर से बाहर नहीं निकलती थीं। दोनों की कोई संतान नहीं थी।

पड़ोसियों का कहना है कि दोनों महिलाओं को बहुत कम बाहर आते-जाते देखा जाता था। पास की मदर डेयरी के दुकानदार ने बताया कि महीने में एक-दो बार ही उन्हें दूध लेते देखा जाता था।

“पड़ोसी नहीं, सिर्फ पता बनकर रह गए लोग”
इस घटना ने राजधानी की सामाजिक संवेदनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों की आबादी वाले शहर में दो बुजुर्ग महिलाएं अकेले जिंदगी और मौत से जूझती रहीं, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी।

स्थानीय निवासी श्रीधर ने बताया कि कभी-कभार सरोज बाला से मुलाकात हो जाती थी, लेकिन वे बेहद कम बोलती थीं। आसपास रहने वाले अधिकतर लोग उन्हें सिर्फ चेहरे से जानते थे।

पुलिस कई एंगल से कर रही जांच
पुलिस का कहना है कि गर्मी, बीमारी, कमजोरी या लंबे समय से चली आ रही मानसिक और शारीरिक परेशानियां मौत की वजह हो सकती हैं। हालांकि, फिलहाल आत्महत्या समेत सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

पुलिस घरेलू सहायिका और आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही है तथा महिलाओं के अन्य परिजनों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। यह घटना एक बार फिर उस सवाल को सामने खड़ा करती है कि आधुनिक शहरों में ऊंची इमारतें और करोड़ों की संपत्ति तो बढ़ रही है, लेकिन इंसानी रिश्ते और सामाजिक जुड़ाव लगातार कमजोर होते जा रहे हैं।