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देहरादून में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी, सभी स्कूल-आंगनवाड़ी केंद्र बंद

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देहरादून: मौसम विभाग द्वारा जारी की गई ‘रेड’ अलर्ट की चेतावनी के बाद, देहरादून जिला प्रशासन ने 18 सितंबर 2025 को सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों के साथ-साथ आंगनवाड़ी केंद्रों में छुट्टी की घोषणा की है। यह फैसला जनपद में भारी बारिश, आंधी-तूफान, और बिजली गिरने की संभावना को देखते हुए लिया गया है।

जिलाधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार, मौसम विभाग ने सुबह 01:25 बजे से भारी बारिश और तेज हवाओं के साथ कहीं-कहीं वज्रपात की चेतावनी दी है। इसके कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ जैसी घटनाएं होने की आशंका है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कक्षा 1 से 12 तक के सभी शैक्षणिक संस्थानों और आंगनवाड़ी केंद्रों को एक दिन के लिए बंद रखने का निर्णय लिया गया है।

प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे आवश्यक सावधानी बरतें और मौसम सामान्य होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें। जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं।

हस्तशिल्प और हथकरघा कला को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने शिल्पकारों को किया सम्मानित

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देहरादून: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड हस्तशिल्प और हथकरघा कला को बढ़ावा देने के लिए शिल्पकारों को सम्मानित किया। बुधवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में उत्तराखंड हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषद द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में, उन्होंने प्रदेश के 11 शिल्पकारों को उत्तराखंड शिल्प रत्न पुरस्कार से नवाजा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हस्तशिल्प पर आधारित विभिन्न स्टॉलों का भी निरीक्षण किया।

​उत्तराखंड की पहचान हैं पारंपरिक कलाएं

​मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की बुनाई और हस्तशिल्प कला अपनी विविधता, पारंपरिक डिजाइन और गुणवत्ता के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। उन्होंने शिल्पकारों और बुनकरों को राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का संवाहक बताया। मुख्यमंत्री ने हर्षिल की ऊनी शॉल, मुनस्यारी-धारचूला की थुलमा, अल्मोड़ा की ट्वीड, छिनका की पंखी और पिछौड़े के डिजाइनों की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन्होंने उत्तराखंड को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार में पहचान दिलाई है। उन्होंने बताया कि आजकल भांग और बांस के रेशों से बने वस्त्रों की मांग भी काफी बढ़ रही है।

​आपदा पीड़ितों के प्रति संवेदना

​कार्यक्रम की शुरुआत में, मुख्यमंत्री ने हाल ही में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई आपदा में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि दी और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आपदा प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास कार्यों को तेज गति और संवेदनशीलता के साथ पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

​“वोकल फॉर लोकल” को मिल रहा बढ़ावा

​मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई “वोकल फॉर लोकल”, “लोकल टू ग्लोबल” और “मेक इन इंडिया” जैसी पहलों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये पहलें शिल्पियों और बुनकरों के सामाजिक-आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना, राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम और प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान जैसी योजनाओं का भी जिक्र किया, जो कारीगरों के समग्र विकास में सहायक हैं।

​आत्मनिर्भर उत्तराखंड की ओर कदम

​मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार भी शिल्पी पेंशन योजना, बुनकर क्लस्टर सशक्तिकरण, कौशल विकास प्रशिक्षण और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से स्थानीय उत्पादों के प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने जनता से स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, जिससे आत्मनिर्भर भारत का संकल्प और मजबूत होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के शिल्पी और बुनकर अपनी रचनात्मकता से राज्य को आत्मनिर्भर और देश का अग्रणी राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

​सम्मानित शिल्पकारों की सूची

​कार्यक्रम में उत्तराखंड शिल्प रत्न पुरस्कार से सम्मानित होने वालों में उत्तरकाशी से जानकी देवी, भागीरथी देवी और महिमानंद तिवारी बागेश्वर से इंद्र सिंह; अल्मोड़ा से श्री लक्ष्मण सिंह और भूपेंद्र सिंह बिष्ट; हल्द्वानी (नैनीताल) से जीवन चंद्र जोशी और मोहन चंद्र जोशी; नारायण नगर मल्लीताल नैनीताल से जानकी बिष्ट; क्वालिटी कॉलोनी हल्दूचौड़ हल्द्वानी से जगदीश पांडे; और चमोली से श्री प्रदीप कुमार और गुड्डी देवी शामिल थीं।

आज चार साल की मासूम रिया का आज है जन्मदिन, 12 सितंबर को गुलदार ने बनाया था निवाला

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पौड़ी : आज, 17 सितंबर 2025, पूरा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन उत्साह के साथ मना रहा है। चारों ओर बधाइयों और शुभकामनाओं का दौर चल रहा है। उत्तराखंड में भी सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस अवसर को धूमधाम से मना रही है। लेकिन, इस उत्सव की चकाचौंध के बीच एक ऐसी हकीकत सामने आती है, जो हमारे समाज और प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है।

यह कहानी है पोखड़ा ब्लॉक के श्रीकोट गांव की चार साल की मासूम रिया की, जिसका जन्मदिन भी आज है, लेकिन उसके घर में खुशियों की जगह मातम पसरा हुआ है।
कांग्रेस प्रदेश सचिव कवींद्र ईष्टवाल ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बधाई दी है।

साथ उन्होंने इस मुद्दे को उठाते हुए एक गंभीर सवाल रखा है, जब पूरा देश प्रधानमंत्री के जन्मदिन में डूबा है, तब उस मासूम बच्ची के परिवार की सुध लेने वाला कोई क्यों नहीं है? रिया, जिसके घर में आज उत्सव की तैयारी होनी चाहिए थी, वहां सन्नाटा और दुख का माहौल है। एक गुलदार ने न केवल रिया की जान ली, बल्कि एक परिवार की खुशियों को भी छीन लिया। लेकिन, सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ मुआवजा देकर खत्म हो जाती है?

मुआवजा: समाधान या पल्ला झाड़ने का बहाना?
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष कोई नई बात नहीं है। गुलदार, भालू और अन्य जंगली जानवरों के हमले आए दिन लोगों की जान लेते हैं। रिया जैसे मासूम बच्चे और उनके परिवार इस संघर्ष की त्रासदी का शिकार बनते हैं।

वन विभाग और सरकार की ओर से मुआवजा देना एक औपचारिक प्रक्रिया बन चुकी है। मुआवजा देकर प्रशासन अपना कर्तव्य पूरा मान लेता है, और सरकार इसे अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करती है। लेकिन, क्या मुआवजा किसी परिवार के खोए हुए सदस्य को वापस ला सकता है? क्या यह उस मां के दर्द को कम कर सकता है, जिसने अपनी बेटी को खो दिया? क्या यह उस परिवार की आर्थिक और भावनात्मक रिक्तता को भर सकता है, जिसका सहारा छिन गया?

सत्ताधारी दल की संवेदनहीनता
कवींद्र ईष्टवाल का यह बयान गंभीर सवाल उठाता है कि सत्ताधारी दल के नेता, जो प्रधानमंत्री के जन्मदिन को उत्सव के रूप में मना रहे हैं, क्या वे उस चार साल की मासूम रिया के परिवार की पीड़ा को समझने की कोशिश कर रहे हैं? श्री कोट गांव में रिया के परिजनों से मिलने या उनकी मदद करने के लिए कोई प्रतिनिधि क्यों नहीं पहुंचा? यह संवेदनहीनता न केवल प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि हमारी प्राथमिकताएं कितनी असंतुलित हैं। एक तरफ बड़े-बड़े आयोजन और उत्सव, दूसरी तरफ उन परिवारों की अनदेखी, जिनके घरों के चिराग बुझ चुके हैं।

मानव-वन्यजीव संघर्ष: एक गंभीर चुनौती
उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या है, जिसका समाधान केवल मुआवजे तक सीमित नहीं हो सकता। जंगलों के कटने, पर्यावरण असंतुलन और मानव अतिक्रमण के कारण वन्यजीवों का मानव बस्तियों में प्रवेश बढ़ रहा है। इस समस्या का समाधान तलाशने के लिए सरकार को ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाने होंगे। कुछ संभावित उपाय हो सकते हैं:

जंगल और बस्तियों के बीच बफर जोन: मानव बस्तियों और जंगलों के बीच सुरक्षित बफर जोन बनाए जाएं, ताकि वन्यजीवों का बस्तियों में प्रवेश कम हो।

जागरूकता और प्रशिक्षण: स्थानीय लोगों को वन्यजीवों से बचाव के लिए प्रशिक्षित किया जाए और जागरूकता अभियान चलाए जाएं।

तकनीकी समाधान: गुलदारों और अन्य जानवरों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन, सीसीटीवी और सेंसर जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाए।
पुनर्वास और सुरक्षा: प्रभावित परिवारों को न केवल आर्थिक मदद, बल्कि भावनात्मक और सामाजिक समर्थन भी प्रदान किया जाए।

पटना हाई कोर्ट ने राहुल गांधी, चुनाव आयोग, मेटा, गूगल, एक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को नोटिस जारी किया

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पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पटना हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश पीबी बाजंथ्री की खंडपीठ ने विवेकानंद सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राहुल गांधी, भारत निर्वाचन आयोग, मेटा, गूगल, एक्स (ट्विटर) और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी माता के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित की जा रही है।

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता संतोष कुमार, संजय अग्रवाल और प्रवीण कुमार ने कोर्ट से आग्रह किया कि संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया जाए कि ऐसी सामग्री के प्रसार को तत्काल रोका जाए और सभी पोर्टलों से इसे हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उत्तराखंड : 13 साल की बच्ची की दुष्कर्म के बाद हत्या, गन्ने के खेत में खून से लथपथ मिला शव, सड़कों पर उतरे लोग

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काशीपुर : उधम सिंह नगर जिले के जसपुर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में 13 साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म और बेरहमी से हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बच्ची का शव गन्ने के खेत में खून से लथपथ हालत में मिला, जिसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। गुस्साए ग्रामीणों ने हत्यारोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जसपुर-काशीपुर हाईवे और सरकारी अस्पताल के बाहर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया।

गन्ने के खेत में मिला बच्ची का शव

जानकारी के मुताबिक, बच्ची का शव गांव के पास गन्ने के खेत में खून से सना हुआ मिला। परिजनों ने बताया कि बच्ची घर से कुछ ही दूरी पर थी। उसके शरीर पर चाकू के कई गहरे घाव, टूटा हुआ बायां हाथ और खून से सना पजामा था। परिजन और ग्रामीण उसे तुरंत जसपुर के सरकारी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

डॉ. आशु सिंघल, चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी जसपुर: “बच्ची की मौत हो चुकी थी। उसके मुंह से झाग निकल रहा था, पेट और हाथों पर चाकू के गहरे निशान थे। बाएं हाथ की दोनों हड्डियां टूटी थीं। परिजनों ने दुष्कर्म के बाद हत्या की आशंका जताई है।

ग्रामीणों में आक्रोश, हाईवे जाम

घटना की खबर फैलते ही गांव और आसपास के लोग सड़कों पर उतर आए। गुस्साए ग्रामीणों ने जसपुर-काशीपुर हाईवे और सरकारी अस्पताल के बाहर सड़क जाम कर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जब तक दोषियों को गिरफ्तार कर कड़ी सजा नहीं दी जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जसपुर और आसपास के थानों की पुलिस मौके पर तैनात की गई।

पुलिस ने शुरू की जांच

जसपुर सीओ दीपक कुमार सिंह ने बताया कि अभी तक परिजनों की ओर से लिखित तहरीर नहीं मिली है, लेकिन पुलिस ने स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी है। यह बेहद गंभीर मामला है, और जांच में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मौत का सटीक कारण स्पष्ट होगा। दोषियों को जल्द गिरफ्तार कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

घटना की जानकारी मिलते ही जसपुर के विधायक आदेश चौहान अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इसे समाज को झकझोर देने वाली घटना करार देते हुए कहा, “पुलिस-प्रशासन पर दबाव बनाया जाएगा ताकि दोषियों को कठोर सजा मिले।” बीजेपी जिला अध्यक्ष मनोज पाल ने भी अस्पताल पहुंचकर आश्वासन दिया कि पार्टी अपने स्तर पर हरसंभव प्रयास करेगी ताकि अपराधियों को सजा मिले।

लोगों में भारी आक्रोश

इस जघन्य अपराध ने स्थानीय समुदाय में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाएं चिंता का विषय हैं, और प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है और शांति बनाए रखने की अपील की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जो इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है।

भाजपा नेता नारायण सिंह राणा ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की, भेंट किया ‘चंद्रहास’ तलवार

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नई दिल्ली : वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता नारायण सिंह राणा ने दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान से उनके सरकारी आवास पर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने क्षत्रिय शूरवीरों का प्रतीक ‘चंद्रहास’ तलवार भेंट की। राणा ने उत्तराखंड में बंजर हो रही कृषि भूमि, परित्यक्त खेत-खलिहानों और खंडहर होते मकानों की गंभीर स्थिति से मंत्री जी को अवगत कराया।

राणा ने बताया कि उत्तराखंड, जो कृषि, पशुपालन, बागवानी और पर्यटन पर आधारित प्रदेश है, में प्राकृतिक संसाधनों के माध्यम से रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए प्राकृतिक संसाधन आधारित आजीविका संवर्धन और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं, ताकि सीमित संसाधनों के साथ भी रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।

उन्होंने टिहरी गढ़वाल जिले के सुदूरवर्ती गांव ऐंदी में कार्यरत ‘देवांशी समाजसेवी संस्था’ के प्रयासों पर प्रकाश डाला। यह संस्था लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित कार्य कर रही है, जिसमें होमस्टे, पशुपालन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, अंगोरा खरगोश पालन, मशरूम उत्पादन, बागवानी और सब्जी उत्पादन जैसे क्षेत्रों में व्यापक प्रशिक्षण का अनुभव शामिल है।

राणा ने प्रस्ताव रखा कि उत्तराखंड के सभी जनप्रतिनिधियों, ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत सदस्यों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। यह प्रशिक्षण उन्हें ग्रामीण विकास का वाहक बनाएगा, जिससे वे अपने क्षेत्रों और गांवों में उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित कर सकें।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने राणा के सुझावों की सराहना की और आश्वासन दिया कि उत्तराखंड में सतत विकास के लिए उठाए गए मुद्दों पर भविष्य की नीतियों में विचार किया जाएगा।

उत्तराखंड में भारी तबाही, अब तक 15 शव बरामद, 10 से ज्यादा लापता

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देहरादून में देर रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। अब तक 15 शव बरामद हो चुके हैं, जबकि 10 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। कई मजदूरों के बहने की भी सूचना है। प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें लगातार राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं।

भारी बारिश और भूस्खलन से जिलेभर में सड़कों, पुलों और संपत्तियों को बड़ा नुकसान पहुंचा है। देहरादून-पांवटा राजमार्ग पर टोंस नदी पुल के पास सड़क बह जाने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया है। फुलेट गांव में एक मकान गिरने से आठ मजदूर दब गए, जिनमें से दो को स्थानीय लोगों ने निकाल लिया है। वहीं, ठाकुरपुर में हालात इतने बिगड़े कि लोग जान बचाने के लिए बिजली के खंभों और ऊंची जगहों पर चढ़ने को मजबूर हुए। एनडीआरएफ की टीम ने मोर्चा संभालकर कई लोगों को सुरक्षित निकाला।

सुबह तक अलग-अलग स्थानों पर एक हजार से ज्यादा लोग फंसे थे, जिन्हें बचाव दलों ने रेस्क्यू किया। इनमें मसूरी के हेरिटेज होटल और लिटिल हैवन होटल, रायपुर, डालनवाला, प्रेमनगर और पौंधा के इलाकों के लोग शामिल थे।

इस बीच, गुच्चुपानी के दुकानदारों ने प्रशासन पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि हर साल टैक्स बढ़ाया जाता है, लेकिन सुरक्षा और सुविधा के नाम पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते। दुकानदारों ने दुकानों और नदी के बीच मजबूत पुश्ता बनाने और गर्मी के मौसम में पानी रोकने-छोड़ने की व्यवस्था की मांग फिर दोहराई।

मौसम विभाग ने देहरादून समेत चमोली, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। 21 सितंबर तक प्रदेशभर में भारी बारिश की संभावना जताई गई है। प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने, नदी-नालों से दूर रहने और किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत सूचना देने की अपील की है।

AI को सदैव मानवता की सेवा में प्रयोग करना होगा : लोकसभा अध्यक्ष

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  • लोकसभा अध्यक्ष ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में “फेथ एंड फ्यूचर : इंटेग्रटिंग एआई विद स्पिरिचुअलिटी” विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का किया उद्घाट.
  • भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा को विश्व तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है एआई : लोकसभा अध्यक्ष.
  • प्रौद्योगिकी का सच्चा उद्देश्य मानव जीवन को समृद्ध और उन्नत बनाना है : लोकसभा अध्यक्ष.

हरिद्वार : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को सदैव मानवता की सेवा करनी चाहिए और इसे मनुष्य पर नियंत्रण का साधन नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई को आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक जिम्मेदारी से जोड़ा जाना आवश्यक है, तभी यह समाज के लिए कल्याणकारी शक्ति बन सकता है।

बिरला ने यह उद्गार हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय में “फेथ एंड फ्यूचर : इंटेग्रटिंग एआई विद स्पिरिचुअलिटी” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किए। यह सम्मेलन फ्यूचर ऑफ लाइफ इंस्टीट्यूट (अमेरिका) के सहयोग से आयोजित किया गया है।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य मानव जीवन को समृद्ध और उन्नत करना है, उसे प्रतिस्थापित करना नहीं। उन्होंने कहा कि यद्यपि एआई अनेक चुनौतियाँ प्रस्तुत करता है, किन्तु इसमें नवाचारपूर्ण समाधानों के बीज भी निहित हैं। भारत की नैतिकता और सत्य की मूलभूत शक्ति का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन मूल्यों को विश्व स्तर पर साझा किया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि एआई भारत की प्राचीन ज्ञान और परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रसारित करने का सशक्त माध्यम बन सकता है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि एआई जैसी शक्तिशाली तकनीक को विवेक और धैर्य के साथ संतुलित किया जाना चाहिए ताकि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ सकें। उन्होंने यह भी कहा कि करुणा, सहानुभूति और मानवीय मूल्यों के आधार पर ही एआई और आध्यात्मिकता का संगम सही दिशा में आगे बढ़ेगा और एक न्यायसंगत एवं समानतामूलक भविष्य की नींव रखेगा। बिरला ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और लोककल्याण जैसे क्षेत्रों में एआई की परिवर्तनकारी क्षमता का भी उल्लेख किया और कहा कि इससे करोड़ों लोगों के जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

भारत के प्राचीन आदर्श “वसुधैव कुटुम्बकम्” (सम्पूर्ण विश्व एक परिवार है) और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” (सभी सुखी हों) का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि एआई का विकास समावेशी और समानतामूलक होना चाहिए, ताकि इसके लाभ सम्पूर्ण मानवता तक पहुँच सकें। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह सम्मेलन आध्यात्मिकता और आधुनिक प्रौद्योगिकी के बीच सार्थक वैश्विक संवाद की शुरुआत करेगा और मानवता को अधिक करुणामय एवं नैतिक भविष्य की ओर अग्रसर करेगा।

उत्तराखंड: ग्रामीणों ने की गुलदार के आतंक से निजात की मांग, मुख्यमंत्री और वन मंत्री को भेजा ज्ञापन

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पौड़ी: पौड़ी गढ़वाल के चौबट्टाखाल क्षेत्र में लगातार बढ़ रही गुलदार की घटनाओं से दहशतजदा ग्रामीणों ने अब शासन-प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग की है। चौबट्टाखाल तहसील के पोखड़ा क्षेत्र के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और वन मंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी के माध्यम से भेजकर अपनी समस्याएं और मांगें रखीं।

ग्रामीणों का कहना है कि गांवों के आसपास गुलदार का आतंक बढ़ता जा रहा है, जिससे लोग खेतों और रास्तों पर जाने से डरने लगे हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि गाँवों से सटे 100 मीटर क्षेत्र को गुलदार मुक्त बनाया जाए। इसके लिए घास-फूस, जंगली झाड़ियाँ और अनावश्यक पेड़-पौधों की सफाई कराई जाए। साथ ही मुख्य मार्गों और विद्यालयों तक जाने वाले रास्तों के किनारों की झाड़ियों को नियमित रूप से काटा जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि संवेदनशील गांवों में प्राथमिकता के आधार पर जालीनुमा बाड़ लगाई जाए और सुरक्षा चाहने वाले ग्रामीणों को बंदूक का लाइसेंस दिया जाए। वहीं, जंगलों में वन्यजीवों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था की जाए ताकि वे रिहायशी इलाकों की ओर न आएं। ग्रामीणों ने यह भी माँग की कि बाघ और गुलदार की गिनती कराई जाए और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए कॉलर आईडी लगाई जाए।

ग्रामीणों ने कहा कि जानवरों की संख्या के हिसाब से गाँवों के आसपास पर्याप्त पिंजरे लगाए जाएँ और वन विभाग लगातार गश्त करे। अवैध शिकार रोकने के लिए पेट्रोलिंग टीम गठित की जाए और जंगलों को शिकार प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जाए। साथ ही जंगलों में आग लगाने वालों पर सख्त सजा का प्रावधान किया जाए।

ज्ञापन में मुआवज़े को लेकर भी प्रमुख मांगें रखी गई हैं। ग्रामीणों ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति की जानवरों के हमले में मृत्यु होती है तो उसके परिवार को कम से कम 25 लाख रुपये का मुआवज़ा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। वहीं घायल व्यक्ति या घायल पशु को भी उचित मुआवज़ा मिले।

ग्रामीणों ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेने की भी सिफारिश की है। उन्होंने एआई आधारित चेतावनी प्रणाली, सेंसर और कैमरों के इस्तेमाल, मोबाइल ऐप और सामुदायिक डेटाबेस बनाने जैसी पहल की माँग की, ताकि गुलदार की गतिविधियों पर समय रहते नज़र रखी जा सके। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो गुलदार आतंक से जनजीवन और अधिक असुरक्षित हो जाएगा।

Uttarakhand : टॉस नदी में बह गए दस मजदूर, छह की मौत, सहस्त्रधारा में एक शव मिला

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देहरादून: जिले के प्रेमनगर- क्षेत्र में परवल टॉस नदी ने सोमवार को कहर बरपाया। अचानक पानी का तेज़ बहाव आने से नदी किनारे काम कर रहे दस मजदूर बह गए। हादसे में छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि बाकी लापता मजदूरों की तलाश की जा रही है।

सूचना मिलते ही पुलिस और रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुँचीं। नया गांव चौकी क्षेत्र में पुलिस ने मृतकों के शव बरामद कर पंचायतनामा की कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज़ कर दिए हैं।

जिला प्रशासन का कहना है कि भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। प्रभावित क्षेत्र में एसडीआरएफ और पुलिस की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं।

देहरादून में देर रात बादल फटने से भारी तबाही हुई है। कुछ मजदूरों के बह जाने की भी सूचना मिली है। इस बीच मौसम विज्ञान केंद्र ने देहरादून, चमोली, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, बागेश्वर और नैनीताल जिलों के कई क्षेत्रों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है। अन्य जिलों में भी तेज बारिश की संभावना जताई गई है। विभाग के अनुसार 21 सितंबर तक पूरे प्रदेश में बारिश का दौर तेज बना रह सकता है।