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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग परीक्षा में सीबीआई जांच की संस्तुति

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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग  आयोजित परीक्षा  नकल प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति  अनुमोदित 

देहरादून 1 अक्टूबर।मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की हाल ही में आयोजित परीक्षा में नकल प्रकरण की सीबीआई जांच की संस्तुति को अनुमोदित कर दिया है। सरकार का यह निर्णय युवाओं के हितों और भविष्य की पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

हाल ही में मुख्यमंत्री धामी स्वयं बेरोजगार संघ के धरना स्थल पर पहुंचे थे, जहाँ उन्होंने युवाओं के बीच जाकर इस मामले की सीबीआई जांच कराने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री ने युवाओं से सीधे संवाद कर उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के मन में किसी भी प्रकार की शंका या संदेह नहीं रहना चाहिए। इसीलिए राज्य सरकार ने मामले को राज्य की एजेंसियों तक सीमित रखने के बजाय केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने का निर्णय लिया है। सीबीआई जांच से पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच होगी और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

नवरात्रि का भव्य आयोजन: एमडीडीए HIG परिवार की ओर से किया गया यज्ञ, दुर्गा और कन्या पूजन

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देहरादून : एमडीडीए एचआईजी परिवार द्वारा नवरात्रि के पावन अवसर पर एक भव्य, दिव्य और विशाल आयोजन का प्रबंध किया गया।

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इस मौके पर सामूहिक दुर्गा पूजन, नव दुर्गा यज्ञ और कन्या पूजन का आयोजन किया गया।

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एमडीडीए एचआईजी परिवार के सभी सदस्यों ने यज्ञ में अपनी सहभागिता निभाई। खास बात यह रही कि यज्ञ में सभी परिवारों की ओर से एक मुट्ठी चावल, एक मुट्ठी हवन सामग्री, 100 ग्राम घी और श्रद्धा के पुष्प अर्पित किए गए।

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उत्तराखंड: आपदा पीड़ितों के लिए पहुंची जुबिन की राहत, नौटियाल परिवार बना देवदूत

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देहरादून: उत्तराखंड में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने पहाड़ी क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई है। सड़कें टूट गई हैं, लोगों के घर, खेत-खलिहान, मवेशी और रोजगार के साधन इस आपदा की भेंट चढ़ गए हैं। कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया है। इस संकट की घड़ी में उत्तराखंड के सुपुत्र और बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक जुबिन नौटियाल और उनका परिवार प्रभावित लोगों के लिए संकटमोचक बनकर सामने आए हैं।

जुबिन नौटियाल और उनके पिता, भाजपा नेता रामशरण नौटियाल ने देहरादून के सहस्त्रधारा क्षेत्र के कार्लीगाड़ और मझाड़ा गांवों में आपदा पीड़ित परिवारों को सहायता राशि प्रदान की। रामशरण नौटियाल ने स्वयं प्रभावित परिवारों को चेक वितरित किए और उनके दुख-दर्द में शामिल हुए। कार्लीगाड़ के निवासी मोहर सिंह ने नम आंखों से बताया कि आपदा के सैलाब में उनका 20 वर्षीय बेटा उनकी आंखों के सामने दलदल में डूब गया। इस हृदय विदारक पल को याद करते हुए वे फफक-फफक कर रो पड़े। रामशरण नौटियाल ने गमगीन मन से उन्हें सांत्वना दी और उनका दुख बांटा।

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जुबिन नौटियाल ने न केवल पीड़ितों का दुख साझा किया, बल्कि बेघर हुए परिवारों को अपने और परिवार की ओर से तात्कालिक आर्थिक सहायता भी प्रदान की। इसके साथ ही, रामशरण नौटियाल ने इन गांवों के प्रभावित परिवारों को कंबल और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की। गौरतलब है कि जुबिन इससे पहले भी कोरोना काल में जौनसार बावर क्षेत्र में करोड़ों रुपये की राशन सामग्री और दवाइयां बांटकर लोगों की मदद कर चुके हैं।

इस मौके पर रामशरण नौटियाल ने कहा, “जुबिन और नौटियाल परिवार उत्तराखंड के सुख-दुख में हमेशा साथ हैं। चाहे कोरोना काल हो या वर्तमान आपदा, हम हर संभव तरीके से लोगों की मदद के लिए तत्पर हैं।” उन्होंने बताया कि नौटियाल परिवार उत्तराखंड के कई अन्य क्षेत्रों में भी आपदा पीड़ितों की सहायता कर रहा है।

जुबिन नौटियाल की ओर से कार्लीगाड़ और मझाड़ा गांवों के कृपाल सिंह, सुमेर चंद, प्रेम सिंह, सुंदर सिंह, मोहर सिंह, राम सिंह सहित कई अन्य परिवारों को सहायता राशि प्रदान की गई।

आज जब उत्तराखंड के पहाड़ और इसके निवासी आपदा के दंश से जूझ रहे हैं, जुबिन नौटियाल और उनका परिवार देवदूत बनकर हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। उनकी यह पहल न केवल पीड़ितों के लिए राहत का काम कर रही है, बल्कि समाज के सामने मानवता की मिसाल भी पेश कर रही है।

अमेरिका में सरकारी शटडाउन: गैर-जरूरी सेवाएं ठप, ट्रंप की छंटनी की धमकी

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वॉशिंगट: अमेरिका मंगलवार रात (30 सितंबर 2025) एक बड़े सरकारी शटडाउन की चपेट में आ गया, जब सीनेट अस्थायी फंडिंग बिल को मंजूरी देने में विफल रही। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थिति को और जटिल करते हुए संघीय कर्मचारियों की बड़े पैमाने पर छंटनी की धमकी दी है। बुधवार सुबह से गैर-जरूरी सरकारी सेवाएं ठप हो चुकी हैं, जिसका असर हवाई यात्रा, आर्थिक रिपोर्ट्स और छोटे व्यवसायों के लिए लोन पर पड़ रहा है।

सीनेट में गतिरोध, बिल खारिज

सीनेट में 55-45 के वोट से फंडिंग बिल खारिज होने के बाद सरकार का कामकाज प्रभावित हुआ है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सत्र में न होने और रिपब्लिकन-डेमोक्रेट्स के बीच समझौते की कमी के कारण आखिरी मिनट में समाधान की उम्मीद धूमिल है। सीनेट के रिपब्लिकन नेता जॉन थ्यून ने कहा, “सप्ताहांत में दोबारा प्रयास हो सकता है, लेकिन अभी गतिरोध टूटने के आसार नहीं हैं।”

लाखों कर्मचारियों पर संकट

लगभग 7,50,000 संघीय कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी (फर्लो) पर भेजे जाने की आशंका है, जिसमें से 50,000 तत्काल प्रभावित हो सकते हैं। ट्रंप प्रशासन ने कुछ कर्मचारियों को बर्खास्त करने की भी चेतावनी दी है। हालांकि, सेना, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और सोशल सिक्योरिटी जैसी आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन इनके कर्मचारियों को भी वेतन नहीं मिलेगा।

शटडाउन का व्यापक असर

  • नेशनल पार्क और संग्रहालय: नेशनल पार्क्स और स्मिथसोनियन म्यूजियम्स बंद हो गए हैं। ये 6 अक्टूबर तक फंडिंग पर चल सकते हैं, लेकिन उसके बाद पूरी तरह ठप हो जाएंगे।

  • आर्थिक डेटा प्रभावित: लेबर डिपार्टमेंट का ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स बंद होने से 3 अक्टूबर को होने वाली मासिक जॉब रिपोर्ट जारी नहीं होगी। इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और अस्पष्ट हो रही है।

  • छोटे व्यवसाय: स्मॉल बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन के लोन प्रोसेसिंग और फेडरल हाउसिंग एडमिनिस्ट्रेशन के मॉर्टगेज इंश्योरेंस पर रोक लग गई है।

  • हवाई यात्रा: हवाई अड्डों पर लंबी लाइनें और उड़ानों में देरी की आशंका है।

शटडाउन क्या है?

अमेरिका में सरकार चलाने के लिए हर साल बजट पास करना जरूरी होता है। यदि सीनेट और हाउस सहमत नहीं होते, तो फंडिंग रुक जाती है, जिससे गैर-जरूरी सरकारी एजेंसियां बंद हो जाती हैं। कर्मचारियों को बिना वेतन छुट्टी पर भेजा जाता है। 1981 से अब तक अमेरिका में 15 बार शटडाउन हो चुका है, और यह पांचवीं सबसे बड़ी शटडाउन स्थिति बन सकती है।

व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया

व्हाइट हाउस ने एक ज्ञापन जारी कर पुष्टि की है कि शटडाउन मंगलवार-बुधवार की रात से शुरू हो गया है। ट्रंप की छंटनी की धमकी को डेमोक्रेट्स ने “राजनीतिक बदला” करार दिया है, जबकि रिपब्लिकन इसे डेमोक्रेट्स की असहमति का नतीजा बता रहे हैं।

आगे क्या?

विश्लेषकों का कहना है कि यह शटडाउन अनिश्चितकाल तक चल सकता है, जैसा कि 2018-19 में 35 दिनों तक चला था। इससे अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है। कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच बातचीत जारी है, लेकिन फिलहाल कोई समाधान नजर नहीं आ रहा।

उत्तराखंड: पत्रकार राजीव प्रताप की संदिग्ध मौत पर सनसनी, राहुल गांधी ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थानीय मुद्दों पर मुखर पत्रकार राजीव प्रताप की रहस्यमयी मौत ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। 18 सितंबर से लापता राजीव का शव 28 सितंबर को जोशियाड़ा बैराज की झील से बरामद हुआ, जिसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसे ‘भयावह’ बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। राज्य सरकार ने मामले की गहन जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया है।

घटनाक्रम की पूरी जानकारी

18 सितंबर 2025: लापता होने की शुरुआत

राजीव प्रताप (उम्र लगभग 35 वर्ष), जो ‘दिल्ली-उत्तराखंड लाइव’ नामक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चलाते थे, 18 सितंबर की रात करीब 11 बजे उत्तरकाशी के गंगोत्री क्षेत्र से रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए। वह अपने एक दोस्त से कार उधार लेकर गंगोत्री की ओर गए थे। परिवार के अनुसार, राजीव हाल ही में उत्तरकाशी जिला अस्पताल की बदहाली और वहां हो रहे भ्रष्टाचार पर एक वीडियो रिपोर्ट तैयार कर रहे थे। इस रिपोर्ट के बाद उन्हें धमकियां मिल रही थीं, हालांकि परिवार ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।

19 सितंबर: कार की बरामदगी

अगले दिन, 19 सितंबर को राजीव की उधार ली गई कार भागीरथी नदी के किनारे स्यूंणा गांव के पास क्षतिग्रस्त अवस्था में मिली। कार में राजीव नहीं थे, लेकिन उनके दोस्त ने बताया कि वह रास्ते में ही उतर गया था। परिवार ने तुरंत उत्तरकाशी कोतवाली में लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

20 सितंबर से तलाशी अभियान

जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के निर्देश पर एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स), एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) और स्थानीय पुलिस की टीमें तलाशी अभियान में जुट गईं। सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड्स की जांच शुरू हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, राजीव की मौत आंतरिक चोटों से हुई, जो संदिग्ध परिस्थितियों में लग रही हैं।

28 सितंबर: शव बरामद

10 दिनों की तलाश के बाद, 28 सितंबर को सुबह करीब 10:40 बजे जोशियाड़ा बैराज की झील में एक शव दिखाई दिया। आपदा प्रबंधन विभाग को सूचना मिलते ही पुलिस, एनडीआरएफ और क्विक रिस्पॉन्स टीम (क्यूआरटी) ने शव को बाहर निकाला। परिवार ने शव की पहचान राजीव प्रताप के रूप में की। शव को जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत गहन जांच के आदेश दिए।

राहुल गांधी का बयान

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर इस घटना को ‘दुखद और भयावह’ बताया। उन्होंने लिखा, “उत्तराखंड के युवा पत्रकार राजीव प्रताप जी का लापता होना और फिर मृत पाया जाना सिर्फ़ दुखद नहीं, भयावह है। इस मुश्किल वक्त में शोकाकुल परिवार को अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं और उनके साथ खड़ा हूं।”

राहुल ने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा, “बीजेपी राज में आज ईमानदार पत्रकारिता भय और असुरक्षा के साये में जी रही है। जो सच लिखते हैं, जनता के लिए आवाज़ उठाते हैं, सत्ता से सवाल पूछते हैं – उन्हें धमकियों और हिंसा से चुप कराने की कोशिश की जा रही है। राजीव जी के साथ हुआ पूरा घटनाक्रम ऐसे ही षड़यंत्र की ओर इशारा करता है।” उन्होंने अविलंब निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की।

उत्तराखंड पुलिस ने 30 सितंबर को एसआईटी का गठन किया, जिसका नेतृत्व उत्तरकाशी के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) जनक सिंह पंवार करेंगे। एसआईटी कॉल रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, धमकियों की जांच और कार के तकनीकी आकलन पर फोकस करेगी। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने कहा कि सभी पहलुओं की गहन जांच होगी।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेट ने भी एक्स पर पोस्ट कर सवाल उठाए, “उत्तराखंड में लगातार भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने वाले पत्रकार राजीव प्रताप कुछ दिनों से गायब थे। अब उनका शव जोशियाड़ा बैराज में मिला है।

उनकी पत्नी का आरोप है कि अस्पताल की बदहाली पर रिपोर्ट के बाद धमकियां मिल रही थीं। क्या है सच बोलने की क़ीमत?” आम आदमी पार्टी (आप) ने भी बीजेपी शासित राज्यों में पत्रकारों की असुरक्षा पर चिंता जताई।

मुख्यमंत्री धामी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करेगी। मीडिया जगत में भी शोक की लहर है, और कई संगठनों ने न्याय की मांग की है।

बीकेटीसी सहायक अभियंता सहित तीन‌ कार्मिक सेवानिवृत्त

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श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति में सहायक अभियंता सहित तीन कार्मिक सेवानिवृत्त

•बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने दी शुभकामनाIMG 20250930 WA0197

•श्री केदारनाथ धाम में मुख्य कार्याधिकारी विजय प्रसाद थपलियाल की उपस्थिति में सहायक अभियंता गिरीश देवली की सेवानिवृत्त पश्चात विदाई।

• श्री बदरीनाथ धाम से दफेदार एवं श्री नृसिंह मंदिर जोशीमठ से बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की उपस्थिति में सहायक लक्ष्मण नेगी सेवानिवृत्त

श्री बदरीनाथ/ श्री केदारनाथ,/ ज्योर्तिमठ: 30 सितंबर। श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी) में कार्यरत सहायक अभियंता गिरीश देवली सहित दफेदार कुलानंद पंत तथा सहायक लक्ष्मण नेगी 60 वर्ष अधिवर्षता आयु पूरी करने के बाद आज सेवानिवृत्त हो गये
इस अवसर पर श्री बदरीनाथ – केदारनाथ मंदिर समिति ( बीकेटीसी)अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने अपने संदेश में सेवानिवृत्त कार्मिकों को शुभकामनाएं दी तथा उनके दीर्घ जीवन की कामना की है।
बीकेटीसी मीडिया प्रभारी डा. हरीश गौड़ ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि श्री केदारनाथ धाम बीकेटीसी कार्यालय में बीकेटीसी मुख्य कार्याधिकारी/ कार्यपालक मजिस्ट्रेट विजय प्रसाद थपलियाल की उपस्थिति में आयोजित विदाई समारोह में सहायक अभियंता गिरीश देवली को फूल-मालाएं पहनाकर सम्मानित किया गया।श्री केदारनाथ धाम का स्मृति चिन्ह, अभिनंदन पत्र भेंट कर विदाई दी गयी। इस अवसर पर मुख्य कार्याधिकारी ने कहा कि सहायक अभियंता देवली ने मंदिर समिति हित में निष्ठापूर्वक कार्य किया विदाई समारोह में केदारनाथ धाम प्रभारी अधिकारी यदुवीर पुष्पवान सहित पुजारी बागेश लिंग,आदि मौजूद रहे ।

श्री बदरीनाथ धाम अतिथि सभागार में धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल एवं प्रभारी अधिकारी/मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान की उपस्थिति में आयोजित विदाई समारोह में दफेदार कुलानंद पंत को फूलमालाओं से सम्मानित कर स्मृति चिह्न भैंट किया गया। इस अवसर पर कुलानंद पंत के पारिवारिक सदस्य भी मौजूद रहे।सभी अधिकारियों कर्मचारियों ने कुलानंद पंत को बधाई दी।

विदाई समारोह में वेदपाठी रविंद्र भट्ट,सहित सभी अधिकारियों कर्मचारियों ने दफेदार का स्वागत किया।

श्री नृसिंह मंदिर ज्योर्तिमठ कार्यालय सभागार में बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती की उपस्थिति में सेवानिवृत्त के अवसर पर आज सहायक लक्ष्मण सिंह नेगी को फूल-मालाएं तथा शाल ओढ़ाकर सम्मानपूर्वक विदाई दी गयी।उन्हे स्मृति चिन्ह, अभिनंदन पत्र भेंट किया। इस अवसर पर बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने सहायक लक्ष्मण नेगी को कुशल कार्मिक बताया विदाई समारोह में मुख्य प्रशासनिक अधिकारी गिरीश चौहान सहित सभी अधिकारी कर्मचारी मौजूद रहे।

DRDO की नई तैयारी : भविष्य की जंग में रोबोट सैनिक और एआई हथियार तैयार

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नई दिल्ली : भारत की रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) तेजी से उन्नत तकनीकों पर काम कर रही है। रोबोटिक सिस्टम, स्वचालित उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI ) आधारित प्रणालियों का विकास सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाने, खतरनाक परिस्थितियों में नुकसान न्यूनतम करने और युद्धक्षेत्र में बेहतर निर्णय क्षमता हासिल करने के उद्देश्य से हो रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ये तकनीकें दुश्मन देशों से निपटने की तैयारी में मील का पत्थर साबित होंगी।

ह्यूमनोइड रोबोट

DRDO के पुणे स्थित रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) ने एक ह्यूमनोइड रोबोट विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। यह रोबोट खतरनाक मिशनों में सैनिकों को जोखिम से बचाने के लिए डिजाइन किया जा रहा है। इसके ऊपरी और निचले हिस्सों के प्रोटोटाइप पहले ही तैयार हो चुके हैं। रोबोट खतरनाक वस्तुओं को संभालने, अवरोधों को हटाने और दरवाजे खोलने-बंद करने जैसे कार्य कर सकेगा। यह दिन-रात दोनों स्थितियों में कार्य करने में सक्षम होगा।

AI -आधारित हथियार

DRDO और अन्य भारतीय संस्थाओं द्वारा विकसित हो रही एआई-आधारित हथियार प्रणालियां युद्ध के परिदृश्य को बदलने वाली हैं। इनमें प्रमुख हैं:

गन ऑन ड्रोन: DRDO  ने ऐसी ड्रोन प्रणाली विकसित की है, जिसमें ड्रोन पर लगी बंदूक लक्ष्य की पहचान कर कमांड सेंटर से मिले आदेश पर निशाना साध सकती है।

एक्सोस्केलेटन सूट: यह शक्ति-वर्धक पोशाक सैनिकों की थकान कम करेगी और उनकी कार्य अवधि बढ़ाएगी। वर्तमान में विकास के चरण में है।

सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड रोबोटिक्स (सीएआईआर) के प्रोजेक्ट्स: इसमें इंटेलिजेंट अनमैन्ड सिस्टम्स, कंप्यूटर विजन, पाथ-प्लानिंग, स्लैम (सिमुल्टेनिअस लोकलाइजेशन एंड मैपिंग), टैक्टिकल सेंसर नेटवर्क और स्वार्म रोबोटिक सिस्टम शामिल हैं।

दक्ष: बम निष्क्रिय करने वाला रोबोट, जो खतरनाक वस्तुओं की पहचान कर उन्हें सुरक्षित रूप से निष्क्रिय करता है।

कब तक तैयार?

ह्यूमनोइड रोबोट प्रोजेक्ट का लक्ष्य 2027 तक महत्वपूर्ण परीक्षण और विकास पूरा करना है। हालांकि, तकनीकी चुनौतियां, विश्वसनीयता, नियंत्रण प्रणाली और नैतिक-कानूनी दिशा-निर्देशों के कारण सेना में शामिल होने में और समय लग सकता है। अन्य एआई प्रणालियां भी क्रमिक परीक्षण के बाद ही परिचालन में आएंगी।

सैनिकों की जान बचाने से लेकर सीमा सुरक्षा तक

ये तकनीकें सैनिकों को सीधे खतरे से बचाएंगी। आतंकवाद विरोधी अभियानों, बम निष्क्रियण, खतरनाक इलाकों में गश्त जैसे कार्यों में उपयोगी साबित होंगी। मनुष्यों की जान जोखिम में डाले बिना मिशन पूरे किए जा सकेंगे। एआई-सेंसर और स्वचालित लक्ष्य पहचान से निगरानी, गश्त और सीमा सुरक्षा जैसे दैनिक कार्यों में दक्षता बढ़ेगी। सतर्कता और निर्णय लेने की गति में वृद्धि होगी, जिससे युद्धक्षेत्र में भारत को मजबूत बढ़त मिलेगी। समाज के लिए भी यह मानव जीवन की रक्षा सुनिश्चित करेगी।

जोखिम और चिंताएं

इन तकनीकों के साथ चुनौतियां भी जुड़ी हैं। एआई गलत जानकारी दे सकता है या सेंसर/डेटा फ्यूजन में त्रुटियां हो सकती हैं। मानव नियंत्रण का स्तर, गलतियों की जिम्मेदारी और नैतिक मुद्दे प्रमुख चिंताएं हैं। इसके अलावा, उच्च लागत, प्रशिक्षण, मरम्मत और डेटा संचालन जैसी व्यावहारिक कठिनाइयां भी हैं। डीआरडीओ इन मुद्दों को संबोधित करने के लिए निरंतर शोध कर रही है।

डीआरडीओ के ये प्रयास भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये तकनीकें न केवल सैन्य क्षमता बढ़ाएंगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की तकनीकी पहचान को मजबूत करेंगी।

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद बवाल, सीएम धामी का सख्त रुख

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देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार रात सोशल मीडिया पर पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर चौकी में हुए बवाल ने तूल पकड़ लिया। इस घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है।

अशांति फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि त्योहारों के समय ऐसी हरकतें जानबूझकर अशांति फैलाने के लिए की जा रही हैं। उन्होंने इसे उन ताकतों की साजिश बताया जो एक मजबूत भारत को देखना नहीं चाहतीं। सीएम ने कहा, “एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संकल्प ऐसी ताकतों को बर्दाश्त नहीं हो रहा। सम्मान तभी सार्थक है जब वह आचरण में दिखाई दे। जो भी अराजकता फैलाकर प्रदेश का माहौल खराब करेगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

धार्मिक अराजकता पर जीरो टॉलरेंस

सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में किसी भी प्रकार की धार्मिक कट्टरता या अराजकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके लिए सख्त कानून बनाए गए हैं, और पुलिस को पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से नुकसान की पूरी भरपाई वसूल की जाएगी।

हथियार के साथ की हमले की कोशिश

जानकारी के अनुसार, इस बवाल के दौरान भीड़ में शामिल एक नाबालिग ने धारदार हथियार के साथ धार्मिक नारे लगाते हुए एक घर में घुसकर हमले की कोशिश की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित किया और उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस की सख्ती, जांच जारी

पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए कई उपद्रवियों को हिरासत में लिया है। घटना की गहन जांच की जा रही है ताकि इसके पीछे की साजिश और दोषियों का पता लगाया जा सके। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

इस घटना ने शहर में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है, लेकिन प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में बताया है। मुख्यमंत्री ने जनता से एकजुटता बनाए रखने और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने की अपील की है।

पति ने डंडे से वार कर पत्नी की हत्या की, जमीन विवाद बना हत्या का कारण

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हरिद्वार: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है। रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के सेक्टर 5 में पति-पत्नी के बीच हुए विवाद ने इतना भयावह रूप ले लिया कि पति ने डंडे से वार कर अपनी पत्नी की हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी पति फरार हो गया, लेकिन पुलिस ने उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया।

विवाद ने ली पत्नी की जान

पुलिस के अनुसार, मृतका मंजू की शादी करीब 22 साल पहले घनश्याम के साथ हुई थी। घनश्याम मूल रूप से उत्तर प्रदेश के नजीबाबाद का रहने वाला है, लेकिन लंबे समय से काम के सिलसिले में हरिद्वार में रह रहा था। दंपति का एक बेटा भी है। मंजू के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें उन्होंने बताया कि घनश्याम शराब की लत के कारण अक्सर मंजू के साथ मारपीट करता था। नशे में वह कई बार इस कदर बेकाबू हो जाता था कि उसे अपने कृत्यों का होश ही नहीं रहता था।

जमीन विवाद बना हत्या का कारण

शिकायत में यह भी खुलासा हुआ कि मंजू के नाम कुछ जमीन थी, जिसे घनश्याम अपने नाम करवाना चाहता था। मंजू को आशंका थी कि शराब की लत के चलते घनश्याम जमीन को बेच देगा, इसलिए उसने जमीन अपने नाम से हटाने से इनकार कर दिया। इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता रहता था। पुलिस के अनुसार, सोमवार, 29 सितंबर को इसी विवाद के चलते घनश्याम ने मंजू के सिर पर डंडे से वार कर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद वह मौके से फरार हो गया।

पुलिस ने आरोपी को दबोचा

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी घनश्याम को गिरफ्तार कर लिया। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमेंद्र डोबाल ने बताया, “आरोपी पहले संविदा कर्मी था और लंबे समय से शराब की लत से जूझ रहा था। वह अक्सर अपनी पत्नी के साथ मारपीट करता था। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्या की मुख्य वजह जमीन का विवाद था या कोई अन्य कारण।”

समाज में दहशत

इस घटना ने स्थानीय निवासियों में दहशत पैदा कर दी है। पुलिस ने मामले की जांच तेज कर दी है और जल्द ही पूरे मामले का खुलासा करने की बात कही है। मंजू के परिवार ने इस घटना से गहरा सदमा व्यक्त किया है और न्याय की मांग की है।

स्वच्छता और संसाधन संरक्षण में आध्यात्मिकता व मीडिया की भूमिका पर विशेष कार्यक्रम

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देहरादून : भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान (ICAR-IISWC), देहरादून ने 29 सितंबर 2025 को स्वच्छता अभियान के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन संरक्षण को वैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों के साथ जोड़ने पर बल दिया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत “स्वच्छता अभियान के संदर्भ में धर्म की प्रासंगिकता” विषय पर एक ऑनलाइन सत्र के साथ हुई। उत्तर प्रदेश के बृंदावन से महाराज आचार्य शुभम आनंद जी ने अपने प्रेरक प्रवचन में कहा कि सच्ची स्वच्छता मन से शुरू होती है और यह बाहरी वातावरण में भी परिलक्षित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि स्वच्छ मन, विनम्र वाणी और अच्छा दैनिक आचरण स्वच्छ पर्यावरण का निर्माण करते हैं, जो व्यक्ति और समाज को सुख प्रदान करता है। घर, मोहल्ले और प्राकृतिक संसाधनों को स्वच्छ रखना न केवल ईश्वर को अर्पण है, बल्कि मानवता की सेवा भी है।

इसके साथ ही, संस्थान ने “स्वच्छता और संसाधन संरक्षण” पर एक प्रेस और मीडिया मीट का आयोजन किया। इस मीट में पंजाब केसरी के गौरव मिश्रा औरप्रांजल, अमर उजाला के विजेंद्र श्रीवास्तव, नवोदय टाइम्स के अरविंद कुमार सिंह, और डीडी न्यूज के सचिन कुमार व मनोज ने सक्रिय भागीदारी की। उन्होंने स्वच्छता अभियान को जाति, पंथ और सामाजिक बाधाओं से परे ले जाकर समाज के व्यापक हित में इसे एक जन आंदोलन बनाने पर अपने विचार साझा किए।

संस्थान के निदेशक डॉ. एम. मधु ने नदियों, जलाशयों, घरों और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिक, सामाजिक और आध्यात्मिक मूल्यों को एकीकृत कर पर्यावरण संरक्षण के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता दोहराई।

डॉ. एम. मुरुगानंदम, प्रधान वैज्ञानिक और पीएमई व केएम इकाई के प्रभारी ने मीडिया प्रतिनिधियों, अतिथि वक्ताओं और प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और संसाधन संरक्षण के लिए आत्म-नियमन और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से जन आंदोलन बनाने का प्रयास है।

वरिष्ठ वैज्ञानिक इंजी. एस.एस. श्रीमाली ने महाराज जी और अतिथि वक्ताओं का परिचय दिया और स्वच्छता अभियान के आध्यात्मिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। चर्चा में यह उभरकर सामने आया कि सभी प्रमुख धर्म स्वच्छता को पवित्र गुण मानते हैं। स्वच्छता केवल नागरिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुशासन भी है जो विश्वास को सामाजिक कार्यों से जोड़ता है।

चर्चा में उचित नियमों, दिशानिर्देशों और उनके ईमानदार कार्यान्वयन के महत्व पर भी बल दिया गया। स्कूली बच्चों, नागरिक निकायों, नीति निर्माताओं और समाज के सभी वर्गों को 2047 तक भारत को स्वच्छ और सशक्त बनाने के लिए एकजुट होकर काम करने की आवश्यकता बताई गई।

कार्यक्रम में 110 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 40 ऑनलाइन शामिल हुए। इनमें प्रमुख वैज्ञानिकों जैसे डॉ. एस.के. दुबे (ICAR-CSSRI, करनाल), डॉ. एके सिंह, डॉ. अंबरीश कुमार, डॉ. जे.एम.एस. तोमर, डॉ. बांके बिहारी, डॉ. राजेश कौशल, डॉ. विभा सिंघल, डॉ. मतबर सिंह राणा, डॉ. इंदु रावत, डॉ. रमा पाल, और डॉ. सादिकुल इस्लाम के साथ-साथ अनिल कुमार चौहान, एम.एस. चौहान, सोनिया चौहान, राकेश कुमार, इंजी. अमित चौहान, प्रवीण कुमार तोमर, धर्मपाल जैसे अन्य गणमान्य शामिल रहे।

महाराज जी के साथ दैनिक जीवन की दुविधाओं और व्यक्तिगत व सामाजिक कल्याण में स्वच्छता के महत्व पर भी जीवंत चर्चा हुई। कार्यक्रम का समन्वय डॉ. मुरुगानंदम और उनकी टीम – इंजी. एस.एस. श्रीमाली, इंजी. अमित चौहान, अनिल चौहान, और मीनाक्षी पंत ने किया।

कार्यक्रम का समापन कर्मचारियों, प्रतिभागियों और मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा स्वच्छता को न केवल एक अभियान बल्कि जीवनशैली के रूप में अपनाने की सामूहिक शपथ के साथ हुआ। इस शपथ में धार्मिक मूल्यों और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रेरणा लेने का संकल्प लिया गया।