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ऋषिकेश पहुंचे सुपरस्टार रजनीकांत, मुनि की रेती में स्वामी दयानंद आश्रम में किए दर्शन

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ऋषिकेश : मशहूर अभिनेता रजनीकांत शनिवार को अपने दोस्तों के साथ मुनि की रेती, शीशमझाड़ी स्थित स्वामी दयानंद आश्रम पहुंचे। आश्रम में उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती के समाधि स्थल पर उनकी मूर्ति पर पुष्पांजलि अर्पित की और श्रद्धांजलि दी। इसके बाद, रजनीकांत ने आश्रम में ध्यान साधना की और गंगा घाट पर आयोजित गंगा आरती में हिस्सा लिया।

आश्रम प्रबंधक गुणानंद रयाल ने बताया कि रजनीकांत शनिवार सुबह 11 बजे आश्रम पहुंचे और उन्होंने स्वामी शुद्धानंद सरस्वती से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। रविवार सुबह नाश्ते के बाद रजनीकांत द्वाराहाट के लिए रवाना होंगे, जहां वे महा अवतार बाबा की गुफा के दर्शन करेंगे। इसके बाद वे पंतनगर होते हुए दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे।

रजनीकांत की यह आध्यात्मिक यात्रा उनके प्रशंसकों और आश्रम के आगंतुकों के बीच चर्चा का विषय रही। उनकी सादगी और आध्यात्मिक रुचि ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।

बड़कोट के धराली गांव में बाघ की दहशत, घोड़े को बनाया शिकार

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बड़कोट : तहसील बड़कोट के राजगढ़ी-धराली क्षेत्र में तेंदुए का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार तड़के तेंदुए ने धराली गांव के ग्राम प्रधान जगवीर सिंह रावत की खच्चर को मार डाला।

स्थानीय लोगों के अनुसार, तेंदुआ धराली और डख्याट गांव के बीच कई बार घूमते हुए देखा गया है, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है। ग्रामीणों ने अपर यमुना वन प्रभाग से तेंदुए को जल्द से जल्द पकड़ने और प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

इस मामले में अपर यमुना वन प्रभाग के प्रभागीय वन अधिकारी रविंद्र पुंडीर ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के लिए एक विशेष टीम गठित करने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ ही, प्रभावित परिवार को नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा।

 

10 लाख नहीं, ₹25 लाख और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे सरकार : इष्टवाल

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देहरादून : उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में जंगली जानवरों, विशेषकर गुलदारों और बाघों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री श्री सुबोध उनियाल ने जंगली जानवरों के हमले में जनहानि के मुआवजे की राशि को ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख करने की घोषणा की है। हालांकि, स्थानीय लोग इस राशि को बढ़ाकर ₹25 लाख करने और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल मुआवजे का सवाल नहीं, बल्कि उनके जीवन और सुरक्षा के अधिकार का मुद्दा है।

पिछले पांच दिन पहले ढंगसोली ग्रामसभा में एक महिला पर सुबह-सुबह गुलदार ने हमला किया। वहीं, आज सुबह धरासू में घास काटने गई एक अन्य महिला को बाघ दिखाई दिया, जिसके बाद वह भयभीत होकर किसी तरह अपनी जान बचाकर भाग निकली। ऐसी घटनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में जनसुरक्षा की गंभीर स्थिति को उजागर करती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली जानवरों के डर से वे अपने ही घरों में कैद होकर रह गए हैं। सुबह-शाम घर से बाहर निकलना भी जोखिम भरा हो गया है, जिसके चलते लोग मजबूरन गांव छोड़कर पलायन कर रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहाड़ी लोग अपने गांवों में रहना चाहते हैं, अपने घरों को बेहतर बनाना चाहते हैं, लेकिन जब सुरक्षा ही नहीं मिलेगी, तो वे कैसे गांवों में टिके रहेंगे? एक ग्रामीण ने सवाल उठाया, “क्या जंगली जानवरों की जान की कीमत इंसानों से अधिक है? आखिर कब तक हम गुलदारों के भय में जीने को मजबूर रहेंगे?”

सरकार द्वारा वन्यजीव संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों ने वन अधिनियम में संशोधन की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को जनहानि, फसल क्षति और निरंतर भय से मुक्ति मिल सके। इसके साथ ही क्षेत्रीय रेंजर अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई का अधिकार देने की मांग भी उठ रही है, ताकि उन्हें हर बार उच्च अधिकारियों से अनुमति लेने की जरूरत न पड़े।

ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया है कि वन्यजीवों को सुरक्षित क्षेत्रों में रखा जाए, जहां से वे मानव बस्तियों में प्रवेश न कर सकें। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार को जनहित और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए ऐसी नीति बनानी चाहिए, जो मानव जीवन की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।

इस मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोग बिना डर के अपने गांवों में जीवन यापन कर सकें। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करे और पलायन की इस मजबूरी को रोके।

IIT रुड़की का इनोवेशन: भूसे से बने पर्यावरण-अनुकूल टेबलवेयर, प्लास्टिक प्रदूषण और पराली जलाने की समस्या का समाधान

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रुड़की : IIT रुड़की ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। संस्थान की इनोपैप लैब ने औरंगाबाद की पैरासन मशीनरी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से गेहूं के भूसे से पर्यावरण-अनुकूल, बायोडिग्रेडेबल और खाद्य-सुरक्षित टेबलवेयर विकसित किया है। यह नवाचार न केवल पराली जलाने और एकल-उपयोग प्लास्टिक प्रदूषण की दोहरी चुनौतियों का समाधान करता है, बल्कि किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत भी प्रदान करता है।

“मिट्टी से मिट्टी तक” के सिद्धांत पर आधारित यह तकनीक गेहूं के भूसे को मोल्डेड, जैव-अवक्रमणीय और कम्पोस्टेबल टेबलवेयर में परिवर्तित करती है, जो उपयोग के बाद प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाता है। यह प्रौद्योगिकी स्वच्छ भारत, आत्मनिर्भर भारत और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDG 12 और 13) के अनुरूप है।

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IIT रुड़की के कागज प्रौद्योगिकी विभाग के प्रो. विभोर के. रस्तोगी, जिन्होंने इस परियोजना का नेतृत्व किया, ने कहा, “हमारा शोध दर्शाता है कि फसल अवशेषों को उच्च-गुणवत्ता वाले, पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों में बदला जा सकता है। यह तकनीक पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी प्रदान करती है।”

भारत में प्रतिवर्ष लगभग 35 करोड़ टन कृषि अवशिष्ट उत्पन्न होता है, जिसका अधिकांश हिस्सा जला दिया जाता है, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। यह नवाचार न केवल इस समस्या को हल करता है, बल्कि कृषि अपशिष्ट को संपदा में बदलकर चक्रीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देता है।

IIT रुड़की के निदेशक प्रो. कमल किशोर पंत ने कहा, “यह नवाचार पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने और स्वच्छ भारत, मेक इन इंडिया जैसे राष्ट्रीय अभियानों को मजबूती देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह शोध से व्यावहारिक प्रभाव तक की यात्रा का एक शानदार उदाहरण है।”

इस परियोजना में पीएचडी छात्रा जैस्मीन कौर और पोस्ट-डॉक्टरल शोधकर्ता डॉ. राहुल रंजन ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। यह नवाचार न केवल पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान करता है, बल्कि किसानों, उद्योगों और समाज को एक स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देता है।

कोल्ड्रिफ सिरप पर प्रतिबंध, छिंदवाड़ा में 9 बच्चों की मौत के बाद सरकार सख्त

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छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कोल्ड्रिफ कफ सिरप के सेवन से 9 बच्चों की दुखद मृत्यु के बाद राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस सिरप की बिक्री पर पूरे प्रदेश में तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। इस घटना ने पूरे मध्य प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है, और सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप के कारण हुई बच्चों की मृत्यु अत्यंत दुखद और अस्वीकार्य है। इस सिरप की बिक्री को मध्य प्रदेश में पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।” उन्होंने यह भी घोषणा की कि सिरप बनाने वाली कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगाई जा रही है। यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित एक फैक्ट्री में निर्मित होता है।

सीएम ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही मध्य प्रदेश सरकार ने तमिलनाडु सरकार से इस मामले की जांच करने का अनुरोध किया था। शुक्रवार सुबह प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। कंपनी और इसके उत्पादों की गहन जांच शुरू कर दी गई है ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

राज्य सरकार ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लिया है और जनता से अपील की है कि वे कोल्ड्रिफ सिरप का उपयोग न करें। इस घटना ने दवा उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

UKSSSC परीक्षा से पहले फर्जीवाड़े का खुलासा: UP के अभ्यर्थी ने भरे तीन फर्जी फॉर्म, मुकदमा दर्ज

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देहरादून : उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की सहकारी निरीक्षक भर्ती परीक्षा से ठीक पहले फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गाजियाबाद के मोदीनगर निवासी सुरेंद्र कुमार नामक अभ्यर्थी ने फर्जी दस्तावेजों और जानकारियों के आधार पर तीन अलग-अलग आवेदन जमा किए।

फर्जी शैक्षिक, जाति और स्थायी प्रमाणपत्रों के साथ-साथ तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों और फर्जी सेवायोजन विभाग की कर्मचारी आईडी का इस्तेमाल किया गया। गोपनीय जांच के बाद शुक्रवार को रायपुर थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

डाटा जांच में खुला फर्जीवाड़ा

UKSSSC की ओर से 5 अक्टूबर को होने वाली सहकारी निरीक्षक भर्ती परीक्षा से पहले आवेदनों की स्क्रूटनी के दौरान संदिग्ध गतिविधियां पकड़ में आईं। आयोग ने गोपनीय जांच के आदेश दिए, जिसमें गाजियाबाद के भोजपुर, मोदीनगर के कनकपुर निवासी सुरेंद्र कुमार का फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि उसने तीन अलग-अलग मोबाइल नंबरों से तीन आवेदन भरे। अपने पिता के नाम की स्पेलिंग में हेरफेर कर उसने तीनों फॉर्मों में अलग-अलग पहचान बनाई।

फर्जी प्रमाणपत्रों का जाल

जांच में सुरेंद्र के दस्तावेजों की पोल खुल गई। उसने जमा किए गए शैक्षिक प्रमाणपत्रों में फर्जीवाड़ा किया, जिसमें उसने तीन बार ग्रेजुएशन पास करने का दावा किया। इसके अलावा, बिना हस्ताक्षर वाला फर्जी स्थायी प्रमाणपत्र उत्तराखंड सरकार की ओर से जारी दिखाया गया। ओबीसी जाति प्रमाणपत्र भी जाली पाया गया। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि आरोपी ने परीक्षा में अनुचित लाभ लेने के इरादे से यह सारा फर्जीवाड़ा रचा।

पुलिस की कार्रवाई

जांच अधिकारी और SOG प्रभारी इंस्पेक्टर मुकेश त्यागी ने सुरेंद्र कुमार के खिलाफ रायपुर थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। एसएसपी ने बताया कि आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई है, और जल्द ही उसे हिरासत में लिया जाएगा।

आयोग की सख्ती

UKSSSC ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और कड़े कदम उठाने का फैसला किया है। उधर, इस घटना ने उत्तराखंड में चल रही भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में प्रधानाचार्य सीमित विभागीय परीक्षा को लेकर भी शिक्षक संगठनों में विरोध देखा गया था, जहां कुछ संगठनों ने उपवास कर अपनी नाराजगी जताई।

तेज रफ्तार कार का कहर, लोगों को कुचला, दो महिलाओं की मौत, तीन घायल

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गाजियाबाद: गाजियाबाद के जीटी रोड पर राकेश मार्ग कट के पास शनिवार सुबह करीब 6 बजे एक तेज रफ्तार कार ने सैर कर रहे चार लोगों को टक्कर मार दी। इस भीषण हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग और कार चालक गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने प्रारंभिक जांच में चालक को नींद की झपकी आने को हादसे की वजह बताया है।

हादसे में न्यू कोट गांव निवासी सावित्री देवी (60 वर्ष) और मीनू प्रजापति (56 वर्ष) की मौत हो गई। दोनों सुबह की सैर के लिए निकली थीं, जब यह हादसा हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की रफ्तार इतनी तेज थी कि टक्कर के बाद दोनों महिलाएं कई फीट दूर जा गिरीं और मौके पर ही दम तोड़ दिया।

घायलों की हालत गंभीर

हादसे में श्याम विहार कॉलोनी निवासी विपिन शर्मा और न्यू कोट गांव निवासी कमलेश शर्मा गंभीर रूप से घायल हुए हैं। दोनों को तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत स्थिर लेकिन नाजुक बताई जा रही है। कार चालक मंजूल (नेहरू नगर निवासी) भी हादसे में घायल हुआ है और उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती किया गया है।

नींद की झपकी बनी हादसे की वजह

पुलिस के अनुसार, कार चालक मंजूल बुलंदशहर से अपने घर नेहरू नगर लौट रहा था। प्रारंभिक जांच में पता चला कि कार पहले डिवाइडर से टकराई और फिर अनियंत्रित होकर सैर कर रहे लोगों से जा भिड़ी। गाजियाबाद थाना प्रभारी ने बताया, “हादसे की मुख्य वजह चालक को नींद की झपकी आना प्रतीत होता है। कार की तेज रफ्तार ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।” पुलिस ने चालक के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया है और आगे की जांच जारी है।

स्थानीय लोगों में आक्रोश

हादसे के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है। राकेश मार्ग कट पर अक्सर तेज रफ्तार वाहनों के कारण हादसे होते रहते हैं। निवासियों ने प्रशासन से इस क्षेत्र में स्पीड ब्रेकर और ट्रैफिक सिग्नल लगाने की मांग की है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “यहां हर हफ्ते कोई न कोई हादसा होता है। प्रशासन को अब जागना चाहिए।”

धराली आपदा पीड़ितों के लिए यमुनाघाटी का जनसहयोग: 8 परिवारों को मिली आर्थिक मदद

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धराली: यमुनाघाटी के लोगों के जनसहयोग से एकत्रित आर्थिक सहायता राशि को धराली गांव के आपदा प्रभावित परिवारों तक पहुंचाया गया। इस नेक कार्य के लिए स्थानीय निवासियों ने मिलकर 1,77,671 रुपये की धनराशि चंदे के रूप में एकत्र की थी, जिसे आपदा में जान गंवाने वाले 8 परिवारों के बीच बांटा गया।

हमारी टीम के सदस्यों, महाबीर पंवार (माही) और घनश्याम नौटियाल, ने धराली गांव पहुंचकर उन 8 परिवारों को 21,000 रुपये प्रति परिवार की आर्थिक सहायता प्रदान की, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। ये सभी परिवार मूल रूप से धराली गांव के निवासी हैं। इसके अतिरिक्त, 10,000 रुपये की राशि ग्राम सभा के कोष में जमा करने के लिए ग्राम प्रधान अजय सिंह नेगी को सौंपी गई।

यह सहायता राशि यमुनाघाटी के लोगों के आपसी सहयोग और उदारता का प्रतीक है, जिसने पीड़ित परिवारों को न केवल आर्थिक बल्कि भावनात्मक समर्थन भी प्रदान किया। टीम ने प्रत्येक परिवार के घर जाकर उन्हें सांत्वना दी और सहायता राशि सौंपी।
इस पुण्य कार्य में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति हमारी टीम और धराली गांव के निवासी हृदय से आभार व्यक्त करते हैं। आपका यह सहयोग उन परिवारों के लिए एक बड़ा संबल बना है, जो इस त्रासदी से जूझ रहे हैं।

उत्तराखंड में भारी बारिश और बर्फबारी का अलर्ट, 5 से 7 अक्टूबर तक बरतें सावधानी

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देहरादन: उत्तराखंड में मौसम विभाग ने 5 से 7 अक्टूबर तक भारी से बहुत भारी बारिश, बर्फबारी, ओलावृष्टि और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान गर्जन के साथ बिजली चमकने और 30-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है।

5 अक्टूबर 2025: देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर, पिथौरागढ़ और नैनीताल जनपदों में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली, तेज हवाएं (40-50 किमी/घंटा) और तीव्र से अति तीव्र बारिश की संभावना है।

6 अक्टूबर 2025:

उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, देहरादून और हरिद्वार में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश, बर्फबारी (4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में), ओलावृष्टि और अति तीव्र से अत्यंत तीव्र बारिश की संभावना है।

पिथौरागढ़, बागेश्वर, टिहरी, पौड़ी और नैनीताल में भारी बारिश, ओलावृष्टि और तीव्र से अति तीव्र बारिश हो सकती है।

राज्य के सभी जनपदों में गर्जन के साथ बिजली चमकने, तेज हवाएं (40-50 किमी/घंटा) और तीव्र से अति तीव्र बारिश की संभावना है।

7 अक्टूबर 2025:

उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर, देहरादून, चम्पावत, नैनीताल और रुद्रप्रयाग में कहीं-कहीं भारी बारिश, बर्फबारी (4000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में), गर्जन के साथ बिजली और तीव्र से अति तीव्र बारिश की संभावना है।

सभी जनपदों में गर्जन के साथ बिजली, तेज हवाएं (30-40 किमी/घंटा) और तीव्र से अति तीव्र बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने लोगों से सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन को भी आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने शुरू किया वन्य जीव सप्ताह, जनहानि पर सहायता राशि बढ़कर 10 लाख

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देहरादून : उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को देहरादून जू में वन्य जीव प्राणी सप्ताह का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि वन्य जीवों के हमले में होने वाली जनहानि पर दी जाने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव हमारी सनातन संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने मां दुर्गा के वाहन शेर, गणेश जी के मूषक, और भगवान शिव के साथ नंदी जैसे प्रतीकों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मानव और प्रकृति के बीच सह-अस्तित्व के प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की 14.77% भूमि संरक्षित क्षेत्रों, जैसे 6 राष्ट्रीय उद्यानों, 7 वन्यजीव विहारों और 4 संरक्षण आरक्षित क्षेत्रों के रूप में सुरक्षित है, जो राष्ट्रीय औसत 5.27% से कहीं अधिक है। यह राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की हरियाली और वन्यजीव देश-विदेश से लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राज्य सरकार पर्यटकों की सुविधाओं के साथ-साथ वनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कटिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने वन विभाग को प्रत्येक जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल को विकसित करने और प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखते हुए उसे पर्यटकों के लिए सुलभ बनाने का निर्देश दिया।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी के बीच संतुलन स्थापित करने की बात कही। उन्होंने बताया कि नए इको-टूरिज्म मॉडल पर काम चल रहा है, ताकि लोग प्रकृति से जुड़ें, लेकिन पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। साथ ही, मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए ड्रोन और जीपीएस जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि बाघ, गुलदार, हाथी और हिम तेंदुए जैसे वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है, लेकिन इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। इसके समाधान के लिए स्थानीय लोगों को आजीविका के नए अवसर प्रदान किए जा रहे हैं, ताकि वे वन संरक्षण में सक्रिय भागीदार बनें।

मुख्यमंत्री ने ‘सीएम यंग ईको-प्रिन्योर’ योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत नेचर गाइड, ड्रोन पाइलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर और इको-टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में युवाओं को उद्यमी बनाया जा रहा है। इसके अलावा, प्रत्येक जिले में इको क्लब के माध्यम से छात्रों के लिए वन्यजीवों से संबंधित शैक्षिक यात्राएं आयोजित की जा रही हैं।

उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे जंगल सफारी या धार्मिक स्थलों पर गंदगी न फैलाएं और पर्यावरण संरक्षण में योगदान दें। इस अवसर पर वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि वन और वन्यजीवों का संरक्षण हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने इकोनॉमी, इकोलॉजी और टेक्नोलॉजी के समन्वय से प्रदेश के विकास पर जोर दिया।