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केदारनाथ में टूटा 2024 का रिकॉर्ड, श्रद्धालुओं की संख्या 16.56 लाख के पार

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देहरादून। चारधाम यात्रा फिर रफ्तार पकड़ गई है। बारिश और बर्फबारी के बावजूद यात्रियों में भारी उत्साह बना हुआ है। केदारनाथ यात्रा ने नया रिकॉर्ड बनाया है। आज बुधवार को यहां श्रद्धालुओं की संख्या 16 लाख 52 हजार के पार पहुंच गई, जबकि अभी धाम कपाट बंद होने में 14 दिन का समय बचा है। वर्ष 2024 में पूरे यात्राकाल में 16 लाख 52 हजार 76 यात्री केदार दर्शन के लिए पहुंचे थे।

बुधवार को केदारनाथ धाम में 5614 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। केदार धाम के कपाट आगामी 23 अक्टूबर को भैयादूज के अवसर पर बंद होंगे। अभी यात्रा 15 दिन और चलेगी। इस प्रकार यहां यात्रियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया है। बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में भी अब यात्रियों की संख्या बढ़ी है।

प्रदेश सरकार की ओर से श्रद्धालुओं के उत्साह को देखते हुए सुरक्षित यात्रा के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। यात्रा मार्ग में सुरक्षा जवानों की तैनाती की गई है। यात्रा मार्ग पर यातायात सुचारू बना रहे, इसके लिए भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील स्थानों पर मलबे की सफाई के लिए जेसीबी की व्यवस्था की गई है।

बता दें कि इस वर्ष 30 अप्रैल को गंगोत्री एवं यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया था। इसके बाद दो मई को केदारनाथ और चार मई को बदरीनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए थे। मानसून सीजन में अतिवृष्टि, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं के चलते चारधाम यात्रा बुरी तरह प्रभावित हुई है। प्रकृति की विनाशलीला में गंगोत्री धाम का महत्वपूर्ण पड़ाव धराली बुरी तरह तबाह हो गया। मार्ग बुरी तरह तहस-नहस हो जाने से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा को रोकना पड़ा था।

बारिश थमने पर भी यहां यात्रा को बहाल करना बड़ी चुनौती था, लेकिन शासन-प्रशासन की टीमों ने युद्धस्तर पर कार्य कर आम जनजीवन की बहाली के साथ ही यात्रा मार्गों को सुचारू किया। दोनों धामों की यात्रा भी सुरक्षा इंतजामों के साथ शुरू हो गई। प्रशासन की ओर से यात्रियों को अभी भी एहतियात बरतने की सलाह दी गई है। यात्रियों को बार-बार आगाह किया गया है कि मौसम खराब होने पर यात्रा करने से बचें। यदि यात्रा मार्ग में हैं, तो सुरक्षित स्थान पर शरण लें।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी जिलाधिकारियों से कहा है कि श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी यात्रा मार्गों पर आवश्यक यात्री सुविधाओं और सुरक्षा से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा जाए। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। आपातकालीन स्थिति में बिना किसी देरी के राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया जाए।

करवा चौथ 2025: 200 साल बाद बन रहा दुर्लभ योग, इतने बजे दिखेगा चांद 

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कल कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर पूरे देश में करवा चौथ का पावन पर्व मनाया जाएगा। सुहागिन महिलाएं अपने पतियों की दीर्घायु और सुखमय जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखेंगी। सोलह श्रृंगार कर पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत करेंगी और शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद ही व्रत का पारण करेंगी।

इस बार करवा चौथ पर 200 वर्ष बाद दुर्लभ शिववास योग बन रहा है, जो वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि लाने वाला माना जा रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 बजे से 7:11 बजे तक है, जिसमें महिलाएं करवा माता, शिव-पार्वती और चंद्रमा की आराधना करेंगी। सरगी का समय सुबह सूर्योदय से पहले रहेगा।

चांद के दर्शन का समय: राज्यवार जानकारी

करवा चौथ का मुख्य आकर्षण चंद्रमा के दर्शन हैं। मौसम साफ रहने की उम्मीद के बीच चांद के निकलने का समय विभिन्न राज्यों में थोड़ा भिन्न है। द्रिक पंचांग के अनुसार, अधिकांश शहरों में चांद रात 8:13 बजे के आसपास दिखाई देगा। नीचे प्रमुख राज्यों और शहरों में अनुमानित चंद्रोदय समय दिया गया है (स्थानीय समयानुसार, मौसम पर निर्भर) रहेगा।

राज्य/शहर चांद निकलने का अनुमानित समय
उत्तराखंड (देहरादून) रात 8:10 बजे
उत्तर प्रदेश (लखनऊ) रात 8:13 बजे
दिल्ली-एनसीआर रात 8:14 बजे
पंजाब (अमृतसर) रात 8:15 बजे
हरियाणा (चंडीगढ़) रात 8:12 बजे
राजस्थान (जयपुर) रात 8:18 बजे
मध्य प्रदेश (भोपाल) रात 8:13 बजे
महाराष्ट्र (मुंबई) रात 8:30 बजे
गुजरात (अहमदाबाद) रात 8:25 बजे
बिहार (पटना) रात 8:20 बजे

ये समय द्रिक पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित हैं। यदि बादल छाए रहें तो चांद देरी से दिख सकता है, इसलिए धैर्य रखें। ज्योतिषियों का कहना है कि कृतिका नक्षत्र में चंद्रोदय होने से इस व्रत का फल दोगुना मिलेगा। देशभर में बाजारों में करवा सामग्री, मेहंदी और श्रृंगार वस्तुओं की खरीदारी जोरों पर रही। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में महिलाएं पारंपरिक गढ़वाल-कुमाऊंनी परिधानों में सजीं, तो दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों में आधुनिक टच के साथ उत्सव मनाया जा रहा है। विशेषज्ञों ने व्रती महिलाओं को हल्का भोजन और पर्याप्त आराम की सलाह दी है।

फ्लाइट में यात्री को दिया वेज की जगह नॉनवेज खाना, दम घुटने से मौत

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कतर एयरवेज की एक उड़ान में हुई दुखद घटना ने विवाद खड़ा कर दिया है। शाकाहारी यात्री डॉ. अशोका जयवीरा की कथित तौर पर गलती से परोसे गए मांसाहारी भोजन के कारण दम घुटने से मृत्यु हो गई। उनके बेटे ने एयरलाइन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है और मुआवजे की मांग की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, डॉ. जयवीरा, जो सख्त शाकाहारी थे, को उड़ान के दौरान गलती से मांसाहारी भोजन परोस दिया गया। जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो एक फ्लाइट अटेंडेंट ने कथित तौर पर उन्हें मांस हटाकर बाकी भोजन खाने की सलाह दी। दुर्भाग्यवश, इसके परिणामस्वरूप दम घुटने की घटना हुई, जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

डॉ. जयवीरा के बेटे द्वारा दायर मुकदमे में दावा किया गया है कि कतर एयरवेज ने यात्री की खानपान संबंधी प्राथमिकताओं का पालन करने में विफलता दिखाई, जिसके कारण यह घातक घटना हुई। परिवार ने नुकसान के लिए जवाबदेही और मुआवजे की मांग की है।

कतर एयरवेज ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में खानपान आवश्यकताओं के प्रबंधन को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, साथ ही भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल की मांग की जा रही है।

जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत मामले में तमिलनाडु की कंपनी के मालिक गिरफ्तार

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मध्य प्रदेश | तमिलनाडु की एक फार्मास्युटिकल कंपनी श्रीसन फार्मा द्वारा निर्मित कोल्ड्रिफ कफ सिरप के कारण मध्य प्रदेश में कम से कम 20 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। इस भयावह त्रासदी ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। मध्य प्रदेश पुलिस ने कंपनी के मालिक एस. रंगनाथन को चेन्नई से गिरफ्तार कर लिया है। इस सिरप के सेवन से कई राज्यों में बच्चों की मौत की खबरें सामने आ रही हैं, जिसने स्वास्थ्य और नियामक तंत्र की खामियों को उजागर किया है।

मिलावटी सिरप ने मचाया कोहराम

पुलिस की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है कि कोल्ड्रिफ सिरप में मिलावट थी, जो बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुई। मध्य प्रदेश में यह सिरप बड़े पैमाने पर वितरित किया गया था। इसके सेवन के बाद कई बच्चों की हालत बिगड़ गई और अस्पतालों में भर्ती होने के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। पीड़ित परिवारों में गुस्सा और दुख व्याप्त है, क्योंकि उन्होंने अपने मासूम बच्चों को इस त्रासदी में खो दिया। छिंदवाड़ा के पुलिस अधीक्षक अजय पांडे ने बताया, “श्रीसन फार्मा के मालिक एस. रंगनाथन को चेन्नई में गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें चेन्नई की अदालत में पेश किया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड के बाद छिंदवाड़ा लाया जाएगा।”

जांच में तेजी, कंपनी के दस्तावेज जब्त

रंगनाथन की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने श्रीसन फार्मा के खिलाफ जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में खुलासा हुआ है कि सिरप के निर्माण में गुणवत्ता मानकों की घोर अनदेखी की गई, जिसके परिणामस्वरूप यह जहरीला उत्पाद बाजार में पहुंचा। मध्य प्रदेश पुलिस ने चेन्नई में कंपनी के कार्यालय पर छापेमारी की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए।

अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही, सिरप के वितरण नेटवर्क और उन दवा दुकानों की भी जांच की जा रही है, जिन्होंने इस उत्पाद को बेचा। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे कोल्ड्रिफ सिरप का उपयोग तुरंत बंद करें और अपने बच्चों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करें।

नियामक तंत्र पर सवाल

इस घटना ने फार्मास्युटिकल उद्योग में नियामक प्रक्रियाओं की गंभीर खामियों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए कड़े गुणवत्ता नियंत्रण और नियमित निरीक्षण अनिवार्य हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले में सख्त कार्रवाई का वादा किया है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की घोषणा की है।

आगे की कार्रवाई

श्रीसन फार्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो चुकी है। रंगनाथन से पूछताछ में मिलावट के स्रोत और कंपनी की लापरवाही के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है। इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को इस सिरप के स्टॉक को तुरंत जब्त करने और इसके वितरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। यह त्रासदी एक चेतावनी है कि दवा उद्योग में गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करना कितना महत्वपूर्ण है। प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार और प्रशासन से इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

रूस की तरफ से युद्ध लड़ रहे भारतीय युवक को यूक्रेन ने पकड़ा, बताई पूरी कहानी

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यूक्रेन : यूक्रेन-रूस युद्ध के मैदान में एक नई मोड़ आ गया है। यूक्रेनी सेना ने मंगलवार को दावा किया कि उन्होंने एक भारतीय युवक को गिरफ्तार किया है, जो रूसी सेना की तरफ से लड़ रहा था। 23 वर्षीय राहुल वर्मा (काल्पनिक नाम, गोपनीयता के लिए) की यह कहानी न केवल युद्ध की क्रूरता को उजागर करती है, बल्कि भारत के उन युवाओं की मजबूरियों को भी सामने लाती है जो गरीबी और बेरोजगारी के चक्रव्यूह में फंसकर विदेशी युद्धक्षेत्रों में अपनी जान जोखिम में डाल लेते हैं।

एक गरीब परिवार का सपना

राहुल का जन्म उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव, बिजनौर जिले के हरदेवपुर में हुआ था। उसके पिता रामस्वरूप एक किसान थे, जो सूखे की मार झेलते हुए परिवार को दो वक्त की रोटी मुश्किल से मुहैया करा पाते थे। राहुल की मां सरला घर संभालतीं और कभी-कभी पड़ोसियों के घर झाड़ू-पोंछा करके कुछ पैसे जोड़तीं। घर में राहुल के अलावा दो छोटी बहनें थीं, जिनकी शादी की चिंता सिर चढ़कर बोल रही थी।

स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद राहुल ने इंजीनियरिंग का सपना देखा, लेकिन आर्थिक तंगी ने उसे मजबूर कर दिया। दिल्ली में फैक्ट्री में मजदूरी की, फिर गुजरात के एक कारखाने में काम किया। लेकिन महामारी के बाद नौकरी छूट गई। “घर लौट आया तो पिता बीमार पड़ गए। कर्ज चुकाने के लिए कुछ तो करना था,” राहुल ने पूछताछ के दौरान यूक्रेनी अधिकारियों को बताया।

सोशल मीडिया का जाल

2024 के अंत में राहुल को फेसबुक पर एक विज्ञापन मिला। ‘रूस में हाई सैलरी जॉब, सिर्फ 12वीं पास। मासिक 1 लाख रुपये कमाओ।’ एजेंट ने वादा किया कि यह रूसी सेना में ‘सपोर्ट स्टाफ’ का काम होगा – कुकिंग, ड्राइविंग या लॉजिस्टिक्स। वीजा, टिकट सब कुछ एजेंट संभालेगा। परिवार को 2 लाख रुपये का लोन लेकर राहुल ने एजेंट को पैसे दिए। फरवरी 2025 में वह मॉस्को पहुंचा। लेकिन हकीकत कुछ और थी। रूसी एजेंटों ने उसे धमकाया, “ट्रेनिंग लो, वरना पैसे वापस नहीं मिलेंगे।” दो हफ्तों की बेसिक ट्रेनिंग के बाद उसे यूक्रेन बॉर्डर पर भेज दिया गया। “मैंने सोचा था सपोर्ट का काम है, लेकिन बंदूक थमा दी गई। भागने की कोशिश की तो मारपीट हुई,” राहुल ने कहा।

युद्धक्षेत्र की क्रूरता

रूसी सेना में राहुल को ‘वagner ग्रुप’ जैसी निजी मिलिशिया में डाल दिया गया। डोनेट्स्क क्षेत्र में तैनात, जहां यूक्रेनी ड्रोन और आर्टिलरी हमलों का खतरा हर पल मंडराता था। “रातें डरावनी थीं। साथी सैनिक मरते जाते, लेकिन हमें आगे बढ़ने को कहा जाता। मैंने कभी गोली नहीं चलाई, बस छिपता रहा,” उसने बताया। पिछले महीने, एक यूक्रेनी ऑपरेशन में राहुल का ग्रुप घेर लिया गया। भूखे-प्यासे, घायल अवस्था में वह सरेंडर कर दिया। यूक्रेनी इंटेलिजेंस ने उसे पूछताछ के लिए ले लिया।

यूक्रेन की जांच और दावा

यूक्रेनी मीडिया ‘कीव पोस्ट’ ने मंगलवार को रिपोर्ट किया कि सेना ने डोनबास क्षेत्र में एक ‘फॉरेन फाइटर’ को पकड़ा है। राहुल ने पूछताछ में अपना पूरा ब्योरा दिया। यूक्रेनी अधिकारी अब्दुल्लोह नासिमोव ने कहा, “वह जबरन भर्ती किया गया लगता है। हम भारतीय दूतावास से संपर्क कर रहे हैं।” यूक्रेन ने ऐसे कई मामलों में विदेशी नागरिकों को रिहा किया है, अगर वे स्वेच्छा से न लड़ रहे हों।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय ने मामले को संज्ञान में लिया। प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा, “हमारे नागरिकों की सुरक्षा प्राथमिकता है। दूतावास कीव में राहुल से संपर्क कर रहा है। एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई होगी।” पिछले साल भारत ने रूस को चेतावनी दी थी कि भारतीयों को युद्ध में न भर्ती किया जाए। लेकिन अवैध नेटवर्क अभी भी सक्रिय हैं।

परिवार का दर्द

हरदेवपुर गांव में राहुल की मां सरला रोते हुए कहती हैं, “बेटा नौकरी के बहाने गया, अब युद्ध में फंस गया। कब लौटेगा?” गांव वाले एजेंटों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। राहुल की बहनें स्कूल छोड़कर मजदूरी करने लगी हैं।

एक सबक या चेतावनी?

राहुल की कहानी उन हजारों भारतीय युवाओं की है जो विदेशी सपनों के पीछे भागते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध में 100 से अधिक भारतीयों के शामिल होने की खबरें आ चुकी हैं। अधिकांश गरीबी से तंग आकर। विशेषज्ञ कहते हैं, सरकार को रोजगार सृजन पर फोकस करना चाहिए, ताकि युवा युद्ध के जाल में न फंसें। अभी राहुल कीव की एक सुरक्षित जगह पर है। उम्मीद है कि जल्द ही वह घर लौटेगा।

दिवाली से पहले सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, सोना 1.21 लाख और चांदी में 1500 रुपये प्रति किलो की तेजी

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मुंबई: जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आ रही है, सोने और चांदी की कीमतें रॉकेट की रफ्तार से बढ़ रही हैं। बुधवार सुबह 10 बजे मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का भाव 1,21,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार पहुंच गया। वहीं, चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है, जिसमें प्रति किलोग्राम 1500 रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

सोने-चांदी में तेजी का कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, त्योहारी सीजन के चलते सोने और चांदी की मांग में भारी इजाफा हुआ है। दिवाली के दौरान लोग शुभ अवसर पर सोने-चांदी की खरीदारी को प्राथमिकता देते हैं, जिससे बाजार में मांग बढ़ रही है। इसके अलावा, वैश्विक बाजारों में भी कीमती धातुओं की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है, जो भारतीय बाजार को प्रभावित कर रहा है। डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव और मुद्रास्फीति की आशंकाओं ने भी सोने-चांदी को निवेशकों के लिए सुरक्षित विकल्प बना दिया है।

बाजार का माहौल

MCX पर सोने के दाम 1,21,000 रुपये प्रति 10 ग्राम को पार करने के बाद निवेशकों और खरीदारों की नजर इसकी कीमतों पर टिकी हुई है। चांदी की कीमतों में 1500 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की तेजी ने भी बाजार में हलचल मचा दी है। ज्वैलर्स और व्यापारियों का कहना है कि इस साल दिवाली पर सोने-चांदी की बिक्री में और वृद्धि होने की उम्मीद है, क्योंकि लोग शादी-विवाह और निवेश के लिए इन धातुओं की खरीदारी कर रहे हैं।

उपभोक्ताओं पर असर

कीमतों में इस उछाल का असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है। कई लोग बढ़ती कीमतों के कारण अपनी खरीदारी को सीमित कर रहे हैं, जबकि कुछ निवेशक इसे लंबी अवधि के लिए निवेश का सुनहरा अवसर मान रहे हैं। ज्वैलरी शोरूम्स में ग्राहकों की भीड़ बढ़ रही है, लेकिन ऊंची कीमतों के चलते छोटे खरीदार हल्के गहनों की ओर रुख कर रहे हैं।

विशेषज्ञों की राय

बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगले कुछ हफ्तों में सोने और चांदी की कीमतों में और तेजी देखी जा सकती है। वैश्विक अनिश्चितताओं और त्योहारी मांग के चलते कीमती धातुओं की कीमतें ऊंची बनी रहने की संभावना है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार के रुझानों पर नजर रखें और सोच-समझकर निवेश करें।

भविष्य की संभावनाएं

दिवाली और शादी के सीजन को देखते हुए सोने-चांदी की मांग में और इजाफा होने की उम्मीद है। हालांकि, विशेषज्ञों ने उपभोक्ताओं को सावधानी बरतने की सलाह दी है। अगर आप सोने-चांदी में निवेश की योजना बना रहे हैं, तो कीमतों की निगरानी और विश्वसनीय विक्रेताओं से खरीदारी करना महत्वपूर्ण है।

RTO चेंकिंग से डरकर टैंकर ड्राइवर ने LPG ट्रक में मारी टक्कर, 2 घंटे तक फटते रहे 200 सिलेंडर

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जयपुर: राजस्थान के जयपुर-अजमेर राजमार्ग पर मंगलवार देर रात एक भयानक सड़क हादसा हो गया। नेशनल हाइवे पर एलपीजी सिलेंडरों से लदा ट्रक एक टैंकर से टकरा गया, जिससे ट्रक में भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने पर ट्रक में रखे 200 से अधिक सिलेंडर एक के बाद एक फट गए। विस्फोट इतना जबरदस्त था कि कई किलोमीटर दूर तक धमाकों की गूंज सुनाई दी और आग की लपटें दिखाई दीं। इस हादसे में दो से तीन लोगों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।

हादसे का विवरण

घटना मंगलवार रात करीब 11 बजे जयपुर-अजमेर हाईवे पर हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग पर आरटीओ की चेकिंग चल रही थी। चेकिंग से बचने के इरादे से टैंकर चालक ने अचानक अपनी गाड़ी को सड़क के किनारे बने ढाबे की ओर मोड़ दिया। इसी दौरान टैंकर एलपीजी सिलेंडरों से लदे ट्रक से जोरदार टकरा गया। टक्कर के तुरंत बाद ट्रक में आग भड़क उठी, जो तेजी से फैल गई।

ट्रक में कुल 250 से अधिक एलपीजी सिलेंडर लादे गए थे। आग लगने के बाद करीब दो घंटे तक सिलेंडरों के फटने का सिलसिला जारी रहा। आसपास के इलाकों में रहने वाले लोग दहशत में आ गए और घरों से बाहर निकल आए। विस्फोटों की तीव्रता इतनी थी कि हाईवे पर वाहनों का आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।

आग बुझाने में जुटी दमकल टीमें

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। कई दमकल वाहनों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है और चालकों के बयान दर्ज कर रही है।

जनजीवन पर असर

इस हादसे से जयपुर-अजमेर राजमार्ग पर कई घंटों तक यातायात बाधित रहा। राहगीरों और वाहन चालकों को वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ा। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और ट्रैफिक नियमों का पालन करें। विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरलोडिंग और लापरवाही से बचना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

हिमाचल प्रदेश: बिलासपुर में बस पर मलबा गिरा, 15 लोगों की दर्दनाक मौत

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बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में मंगलवार शाम को एक भीषण हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया। बरठीं के भल्लू पुल के पास शुक्र खड्ड किनारे मरोतन से घुमारवीं जा रही 32 सीटर निजी बस पर पहाड़ी से भारी मलबा और चट्टानें गिरने से 15 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में बस की छत उखड़कर खड्ड में जा गिरी और पूरी बस मलबे में दब गई। इस हादसे में दो बच्चों, 10 वर्षीय आरुषि और 8 वर्षीय शौर्य, को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन उनके परिवार के चार सदस्यों की जान चली गई।

हादसे का भयावह मंजर

हादसा मंगलवार शाम करीब 6:30 बजे हुआ, जब मां संतोषी नाम की निजी बस मरोतन से घुमारवीं की ओर जा रही थी। अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और चट्टानें बस पर आ गिरीं। बस में सवार ज्यादातर यात्री नौकरी या काम से लौट रहे थे। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई। पीछे से आ रहे वाहन चालकों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी।

राहत और बचाव कार्य

पुलिस, स्थानीय लोग, एनडीआरएफ, और दमकल विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। साढ़े तीन घंटे की मशक्कत के बाद 15 शवों को मलबे से निकाला गया। दो बच्चों, आरुषि और शौर्य, को सबसे पहले निकालकर बरठीं अस्पताल भेजा गया, जहां से उन्हें एम्स बिलासपुर रेफर किया गया। अंधेरे और लगातार मलबा गिरने के कारण बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आईं। एनडीआरएफ ने कुत्तों और जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम देर रात तक जारी रखा।

एक ही परिवार के चार लोगों की मौत

हादसे में फगोग गांव की कमलेश कुमारी, उनकी चचेरी जेठानी अंजना कुमारी, और उनके दो चचेरे भाई नक्श और आरव की मौत हो गई। दोनों महिलाएं अपने मायके गंगलोह थेह गांव से ससुराल फगोग लौट रही थीं। एक ही परिवार के चार लोगों की मौत से गांव में मातम छा गया। इसके अलावा, स्थानीय निवासी 8 वर्षीय राहुल लापता है, जबकि उसकी मां बिमला का शव बरामद हो चुका है।

मृतकों की सूची

हादसे में मरने वालों में बख्शी राम (भल्लू), नरेंद्र (छत), कृष्णलाल (थापना नरली), रजनीश, चुन्नी (बरड़), सोनू (कच्युत), शरीफ खान (मलांगण), बिमला (देण), आरव, कमलेश, अंजना, नक्श (फगोग), प्रवीण (डोहग), कांता देवी (सियोथा), और संजीव (मैड) शामिल हैं। चालक और परिचालक की भी मौत हो गई। बस का मालिक राजकुमार बरठीं में उतर गया था, जिसके बाद नए परिचालक ने बस संभाली थी।

प्रशासन की लापरवाही पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि भल्लू पुल के पास बरसात के मौसम से ही पहाड़ी से पत्थर गिर रहे थे। इसकी जानकारी प्रशासन और लोक निर्माण विभाग को थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस लापरवाही ने इतने बड़े हादसे को जन्म दिया।

शीर्ष नेताओं ने जताया शोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर गहरा दुख जताया और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह, और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी शोक व्यक्त किया। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कुल्लू दशहरा समापन समारोह छोड़कर हादसा स्थल का दौरा किया।

बरठीं अस्पताल में गमगीन माहौल

शवों को पहचान के लिए बरठीं अस्पताल में रखा गया है। परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। स्थानीय लोग पीड़ित परिवारों को सांत्वना दे रहे हैं। हादसे की जांच के आदेश दिए गए हैं, और प्रशासन ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

हिमाचल में भूस्खलन से लगातार हादसे

हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन एक गंभीर समस्या बन चुका है। मानसून के दौरान पहाड़ियां दरकना आम हो गया है। राज्य में अब तक कई बड़े हादसे हो चुके हैं, जिनमें सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं। कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 12 अगस्त, 2017: मंडी जिले के कोटरोपी में पहाड़ी दरकने से दो बसें चपेट में आईं, 49 लोगों की मौत।

  • 11 अगस्त, 2021: किन्नौर जिले के निगुलसरी में भूस्खलन से 10 लोगों की मौत, 13 घायल।

  • 29 दिसंबर, 2024: मंडी के सात मील में कार पर पत्थर गिरने से एक महिला की मौत, पति व बच्ची घायल।

  • आठ अगस्त, 2025: चंबा जिले के तीसा के भंजराडू-शहवा-भड़कवास मार्ग पर कार पर पत्थर गिरने से 6 लोगों की मौत।

  • तीन सितंबर, 2025: शिमला जिले के रामपुर में निजी बस पर चट्टानें गिरने से 2 महिलाओं की मौत, कई घायल।

  • 11 सितंबर, 2025: चंडीगढ़-मनाली हाईवे (मंडी) पर बस पर पत्थर गिरने से एक बच्ची घायल।

  • 12 अगस्त, 2025: चंबा जिले के चुराह में निजी बस पर चट्टान गिरने से 3 यात्री घायल।

  • 17 अगस्त, 2025: सिरमौर जिले के राजगढ़ में बस पर पत्थर गिरने से चालक सहित कई घायल।

भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला: कंफर्म टिकट की तारीख बदलने की सुविधा जल्द, कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं

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नई दिल्ली: मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से भारतीय रेलवे में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। नई ट्रेनों की सौगात से लेकर पूर्वोत्तर राज्यों तक रेल नेटवर्क के विस्तार तक, रेलवे ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। अब यात्रियों की सुविधा के लिए रेलवे एक और बड़ा फैसला लेने जा रहा है। जल्द ही कंफर्म टिकट की तारीख बदलने की सुविधा शुरू होगी, वो भी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के।

टिकट रि-शेड्यूलिंग की नई सुविधा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रेलवे कंफर्म टिकट की तारीख बदलने की सुविधा पर काम कर रहा है। इस नई व्यवस्था के तहत यात्रियों को टिकट रद्द कराने और नया टिकट बुक करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उदाहरण के तौर पर, अगर आपके पास 10 नवंबर को हैदराबाद से लखनऊ के लिए कंफर्म टिकट है और अचानक आपको यात्रा की तारीख बदलनी पड़ती है, तो आप उसी टिकट पर नई तारीख चुन सकेंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।

अभी क्या है नियम?

वर्तमान में, अगर यात्री को अपनी यात्रा की तारीख बदलनी हो तो पहले टिकट रद्द कराना पड़ता है, जिसमें कैंसिलेशन चार्ज कटता है। इसके बाद नई तारीख के लिए टिकट बुक करना होता है, जिसमें कंफर्म टिकट मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। इस प्रक्रिया में समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है।

रेल मंत्री ने दी जानकारी

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एनडीटीवी से बातचीत में बताया कि रेलवे कंफर्म टिकट की रि-शेड्यूलिंग के लिए एक योजना तैयार कर रहा है। उन्होंने कहा, “यह सुविधा पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।” हालांकि, यह सुविधा तुरंत लागू नहीं होगी। रेलवे इस पर काम शुरू करेगा और उम्मीद है कि 2026 में यह सुविधा यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी।

उपलब्धता पर निर्भर होगी टिकट

रेल मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि टिकट की तारीख बदलने पर नया टिकट कंफर्म ही मिले, यह जरूरी नहीं है। यह पूरी तरह से सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा। साथ ही, अगर नई तारीख के किराए में कोई अंतर होता है, तो उसे भी चुकाना होगा।

टिकट कैंसिलेशन के मौजूदा शुल्क

वर्तमान में टिकट रद्द करने पर अलग-अलग श्रेणियों के लिए शुल्क इस प्रकार है:

  • AC फर्स्ट क्लास/एग्जीक्यूटिव क्लास: 240 रुपये + जीएसटी

  • AC 2 टियर/फर्स्ट क्लास: 200 रुपये + जीएसटी

  • AC 3 टियर/AC चेयर कार/AC 3 इकोनॉमी: 180 रुपये + जीएसटी

  • स्लीपर क्लास: 120 रुपये + जीएसटी

यात्रियों को मिलेगी राहत

रेलवे की इस नई पहल से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह सुविधा न केवल समय और पैसे की बचत करेगी, बल्कि यात्रा को और सुगम बनाएगी। रेलवे का यह कदम यात्रियों की बढ़ती मांग और उनकी सुविधा को ध्यान में रखकर उठाया जा रहा है।

ऐतिहासिक गौचर मेला 14 नवंबर से शुरू होगा

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जिला चमोली का ऐतिहासिक गौचर मेला

73वां राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक गौचर मेला तैयारी की प्रथम बैठक सम्पन्न जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में संपन्न

14 नवंबर से शुरू होगा गौचर मेला

चमोली, 07 अक्टूबर।
आगामी 73वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक गौचर मेले की तैयारियों को लेकर मंगलवार को मेला अध्यक्ष/ जिलाधिकारी संदीप तिवारी की अध्यक्षता में राजकीय इंटर कॉलेज गौचर के सभागार कक्ष में प्रथम बैठक आयोजित की गई। बैठक में अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, व्यापार संघ के पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मेले को भव्य और सफल बनाने के लिए अपने-अपने सुझाव प्रस्तुत किए मेला 14 नवंबर से शुरू होगा।

बैठक के दौरान मेलाधिकारी / उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग सोहन सिंह रांगण ने पिछले वर्ष आयोजित 72वें गौचर मेले की प्राप्त एवं व्यय की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मेले के खाते में ब्याज सहित कुल 57,206 रुपये की राशि अवशेष है, जिसके आधार पर इस वर्ष के मेले को भव्य और दिव्य स्वरूप देने हेतु योजनाबद्ध तैयारी की जा रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता भुवन नौटियाल ने कहा कि मेले को भव्य स्वरूप देने हेतु कम से कम 50 लाख रुपये की धनराशि शासन से मांगी जानी चाहिए, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने नंदा देवी राजजात यात्रा को मेले से जोड़कर प्रचार-प्रसार करने का भी सुझाव दिया। व्यापार संघ अध्यक्ष राकेश लिंगवाल ने जनभावनाओं के अनुरूप मेले के आयोजन की आवश्यकता बताते हुए दुकानों के किराये में कमी लाने का आग्रह किया।हरिकेश भट्ट ने कहा कि मेले के माध्यम से युवाओं को आपदा प्रबंधन एवं बचाव का प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, जिसके लिए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के कैम्प लगाए जाएँ। सुरेन्द्र कनवासी ने आपदा प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए आर्थिक सहयोग की अपील की तथा दुकानों के आवंटन में पारदर्शिता बनाए रखने की बात कही।

स्थानीय लोगों ने सुझाव दिया कि मेले में आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए कैरियर काउंसलिंग स्टॉल लगाए जाएँ, जिससे उन्हें भविष्य के रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिल सके। चैतन्य बिष्ट ने कहा कि स्किल इंडिया योजना के तहत युवाओं को स्वरोजगार प्रशिक्षण देने हेतु विशेष स्टॉल स्थापित किए जाएँ।नवनिर्वाचित सभासदों ने गौचर मेले को एक आदर्श मेला के रूप में विकसित करने के लिए मेले परिसर में प्लास्टिक प्रतिबंध लागू करने की मांग की। इसके साथ ही पेयजल, पार्किंग, सुरक्षा एवं स्वच्छता व्यवस्था को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर बल दिया गया।

नगर पालिका अध्यक्ष गणेश शाह ने कहा कि गौचर मेला हमारी सांस्कृतिक विरासत और गौरव का प्रतीक है। इसे भव्यता और परंपरा के साथ मनाने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।

इस अवसर पर मेला अध्यक्ष /जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं देते हुए उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों, अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि बैठक में प्राप्त सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। जिलाधिकारी ने कहा कि कैरियर काउंसलिंग स्टॉल की व्यवस्था छात्रों के लिए उपयोगी होगी तथा स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान कर उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक मुक्त मेला बनाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रशासन व जनता दोनों को मिलकर प्रयास करना होगा।
उन्होंने आश्वासन दिया कि दुकानों के किराये और आवंटन प्रक्रिया से संबंधित विषयों पर उचित विचार विमर्श कर पारदर्शी निर्णय लिया जाएगा, ताकि हर वर्ग की सहभागिता सुनिश्चित हो सके। इस दौरान अपर जिला अधिकारी विवेक प्रकाश, जिला विकास अधिकारी केके पंत स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि, व्यापारी वर्ग एवं जनपद स्तरीय अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।

गौचर मेला परिचयIMG 20251007 WA0102
उत्तराखण्ड राज्य के चमोली जनपद अंतर्गत गौचर (तहसील कर्णप्रयाग) में आयोजित गौचर मेला प्रदेश के सबसे लोकप्रिय मेलों में से एक है। समुद्र तल से लगभग 800 मीटर की ऊँचाई पर स्थित गौचर अपने विशाल समतल मैदान और ऐतिहासिक व्यापारिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। वर्ष 1943 में तत्कालीन गढ़वाल के डिप्टी कमिश्नर के सुझाव पर यह मेला प्रारंभ हुआ था। प्रारंभ में यह एक व्यापारिक मेला था, जो समय के साथ औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में विकसित हुआ।यह मेला प्रत्येक वर्ष 14 नवम्बर को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं० जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन के अवसर पर प्रारंभ होता है। यह मेला न केवल व्यापारिक दृष्टि से, बल्कि लोक संस्कृति, लोककला, और सामाजिक सद्भावना का प्रतीक बन चुका है, जो उत्तराखण्ड की समृद्ध परंपरा और लोक जीवन का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।