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साहित्यकार महावीर रवांल्टा की दो नई कृतियां प्रकाशित, “ज आम्म छांट नई” और “धुएं के बादल” पाठकों के बीच

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देहरादून : उत्तराखंड की रवांल्टी बोली की माटी से उठी साहित्यिक खुशबू एक बार फिर पाठकों के दिलों तक पहुंच रही है। प्रख्यात साहित्यकार महाबीर रवांल्टा की दो नई कृतियां  रवांल्टी कविताओं का संग्रह “ज आम्म छांट नई” और लोककथा आधारित नाटक “धुएं के बादल” प्रकाशित हो चुकी हैं। ये दोनों रचनाएं रवांई अंचल की बोली, संस्कृति और संवेदनाओं का जीवंत चित्रण प्रस्तुत करती हैं।

“ज आम्म छांट नई”: कविताओं में रवांल्टी की आत्मा

“ज आम्म छांट नई” रवांल्टी बोली में रचित कविताओं का एक अनमोल संग्रह है, जिसमें हिन्दी अनुवाद भी शामिल है ताकि यह बोली और इसकी भावनाएँ व्यापक पाठक वर्ग तक पहुँच सकें। इस पुस्तक का आवरण प्रसिद्ध चित्रकार शशिभूषण बडोनी की कला से सजा है, और इसकी कीमत ₹120.00 निर्धारित की गई है। यह संग्रह रवांई की मिट्टी, पहाड़ों और वहाँ के जीवन की कहानी को काव्यात्मक रूप में पेश करता है।

“धुएँ के बादल”: लोककथा का नाटकीय रूप

दूसरी कृति “धुएँ के बादल” रवांई की प्रसिद्ध लोककथा “बदला” पर आधारित एक प्रभावशाली नाटक है। इसकी सशक्त कहानी और रवांल्टी बोली का जीवंत प्रयोग इसे अनूठा बनाता है। पुस्तक का आवरण सुप्रसिद्ध कलाकार मुकुल बडोनी के चित्र से सुसज्जित है, और इसकी कीमत ₹125.00 रखी गई है। यह नाटक रवांई की लोकसंस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है।

लेखक की जुबानी

महाबीर रवांल्टा ने कहा, “ये कृतियाँ मेरे लिए केवल किताबें नहीं, बल्कि रवांई की भाषा, संस्कृति और पहचान को जीवित रखने का प्रयास हैं। मैं चाहता हूँ कि हमारी बोली और लोककथाएँ नई पीढ़ियों तक पहुँचें और उनकी गंध हमेशा बनी रहे।”

कौन हैं महाबीर रवांल्टा?

उत्तरकाशी के सरनौल गांव में जन्मे महाबीर रवांल्टा उत्तराखंड के एक बहुमुखी रचनाकार हैं। कवि, कथाकार, नाटककार और लोकसंस्कृति के शोधकर्ता के रूप में पिछले तीन दशकों से वे रवांल्टी बोली और लोककथाओं को सहेजने में जुटे हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में 4 उपन्यास, 11 कहानी संग्रह, 4 कविता संग्रह, 4 नाटक, बाल साहित्य और रवांल्टी लोककथाओं का दस्तावेज़ीकरण शामिल है। वर्ष 2021 में उन्हें उत्तराखंड भाषा संस्थान का सदस्य नामित किया गया था।

रवांल्टी बोली का बढ़ता स्वर

रवांई की पहाड़ियों से निकलकर रवांल्टी बोली अब देहरादून, दिल्ली और अन्य शहरों तक अपनी पहचान बना रही है। महाबीर रवांल्टा की ये नई कृतियाँ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि रवांई की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने का एक अनमोल प्रयास भी हैं। जैसा कि लेखक कहते हैं, “धुएँ के बादल छँट भी जाएँ, उनकी गंध नहीं मिटती; यही रवांल्टी शब्दों की ताकत है, जो पीढ़ियों तक बनी रहती है।”

बड़ी खबर : शासन ने किए कई IAS, IFS और PCS अधिकारियों के ट्रांसफर

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देहरादून: शासन ने कई IAS, IFS और PCS अधिकारियों के ट्रांसफर हुए हैं। अधिकारियों के विभागों में बदलाव किए गए।

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पाक-अफगान सीमा पर तनाव: अफगानी सेना के ऑपरेशन में 15 पाकिस्तानी सैनिक ढेर

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अफगानिस्तान: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच दुरंड रेखा पर तनाव चरम पर पहुंच गया है। शनिवार आधी रात को शुरू हुए संघर्ष में अफगानी सेना ने पाकिस्तानी सीमा पर जोरदार हमला बोला, जिसमें 15 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। अफगानिस्तान ने कई पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया और भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद जब्त किया। जवाब में पाकिस्तान ने भी अफगान चौकियों पर हमले किए, जिसमें कई अफगानी सैनिकों के मारे जाने की खबर है।

क्या है पूरा मामला? 5 पॉइंट्स में समझें

आधी रात को भड़का संघर्ष

शनिवार देर रात अंगूर अड्डा, बाजौर, कुर्रम, दीर, चित्राल और बलूचिस्तान जैसे सीमावर्ती इलाकों में गोलाबारी शुरू हुई। अफगानी सेना ने दुरंड रेखा पार कर कई पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा कर लिया।

पाकिस्तान की एयर स्ट्राइक

पाकिस्तान ने काबुल पर हवाई हमले किए, जिसे उसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को शरण देने का जवाब बताया। पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा, “अफगानिस्तान की गोलाबारी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। हम इसका कड़ा जवाब देंगे।”

अफगानिस्तान का जवाबी ऑपरेशन

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इनायत खोवाराजम ने कहा कि बीती रात का ऑपरेशन खत्म हो चुका है, लेकिन अगर पाकिस्तान ने फिर से सीमा उल्लंघन किया तो कड़ा जवाब दिया जाएगा।

कुनर और हेलमंद में तनाव

कुनर और हेलमंद प्रांतों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष जारी है। अफगानिस्तान ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान की कई चौकियों पर कब्जा कर लिया है।

पाकिस्तान का दावा

पाकिस्तान का कहना है कि उसने यह कार्रवाई TTP को अफगानिस्तान द्वारा दी जा रही शरण के खिलाफ की। पाकिस्तान ने भविष्य में भी ऐसी कार्रवाइयों की चेतावनी दी है।

दोनों देशों में बढ़ती तल्खी

अफगानिस्तान के प्रवक्ता मौलवी मोहम्मद कासिम रियाज ने कहा कि दुरंड रेखा पर ऑपरेशन अभी भी जारी है। दूसरी ओर, पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर रिहायशी इलाकों में गोलाबारी का आरोप लगाया है। दोनों देशों के बीच यह तनाव क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है।

मनीष गुप्ता की मुहिम लाई रंग, राष्ट्रपति सचिवालय से आया आदेश और बनने लगी सड़क

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देहरादून: एक आम नागरिक की दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रयासों ने आखिरकार रंग दिखाया। प्राइवेट कंपनी में कार्यरत मनीष गुप्ता, जो रोजाना शिमला बाईपास रोड से अपने दफ्तर जाते हैं, बदहाल सड़क की स्थिति से लंबे समय से परेशान थे। खस्ताहाल सड़क उनकी रोजमर्रा की यात्रा को मुश्किल बना रही थी। स्थानीय स्तर पर कई बार अनुरोध करने के बावजूद जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो मनीष ने हार नहीं मानी और सीधे राष्ट्रपति शिकायत प्रकोष्ठ में याचिका दायर कर दी।

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मनीष की इस मुहिम का असर जल्द ही दिखा। राष्ट्रपति सचिवालय ने उनकी शिकायत पर त्वरित संज्ञान लिया और उत्तराखंड के मुख्य सचिव को इस मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए। परिणामस्वरूप, याचिका दायर होने के मात्र 15 दिनों के भीतर शिमला बाईपास रोड से अन्ना हजारे चौक तक सड़क निर्माण का काम शुरू हो गया।

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मनीष गुप्ता ने इस त्वरित कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति सचिवालय और संबंधित अधिकारियों का आभार जताया। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरे प्रयासों से न केवल मेरी, बल्कि इस मार्ग पर यात्रा करने वाले हजारों लोगों की समस्या का समाधान हो रहा है।”

यह घटना न केवल मनीष की जागरूकता और हिम्मत की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही मंच पर आवाज उठाने से बदलाव संभव है। शिमला बाईपास रोड का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे जल्द ही क्षेत्रवासियों को बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है।

कांतारा चैप्टर 1 का बॉक्स ऑफिस पर धमाल, 400 करोड़ क्लब से बस कुछ दूर

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ऋषभ शेट्टी की फिल्म ‘कांतारा चैप्टर 1’ बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही है। यह फिल्म न केवल दर्शकों का दिल जीत रही है, बल्कि कमाई के मामले में भी एक के बाद एक रिकॉर्ड तोड़ रही है। सुपरहिट फिल्मों जैसे ‘सैयारा’ (329.2 करोड़), ‘वॉर 2’ (236.55 करोड़) और ‘कुली’ (285 करोड़) को पीछे छोड़ते हुए ‘कांतारा चैप्टर 1’ अब ‘छावा’ (600 करोड़) को टक्कर देने की राह पर है। यह फिल्म साल की दूसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बन चुकी है।

10वें दिन 37 करोड़ की कमाई, कुल कलेक्शन 396.65 करोड़

Sacnilk के अनुसार, ‘कांतारा चैप्टर 1’ ने अपने दूसरे शनिवार यानी 10वें दिन 37 करोड़ रुपये का शानदार कलेक्शन किया। हालांकि, इस दिन के आधिकारिक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन अगर यह आंकड़ा सही है तो फिल्म का कुल कलेक्शन अब 396.65 करोड़ रुपये हो गया है। यह फिल्म 400 करोड़ क्लब में शामिल होने से बस कुछ कदम दूर है।

दिन-ब-दिन कलेक्शन का लेखा-जोखा

फिल्म ने पहले दिन 61.85 करोड़ रुपये की धमाकेदार ओपनिंग दी। दूसरे दिन 45 करोड़, तीसरे दिन 55 करोड़ और चौथे दिन 63 करोड़ का कलेक्शन किया। पांचवें दिन फिल्म ने 31.5 करोड़, छठे दिन 34 करोड़, सातवें दिन 25.25 करोड़ और आठवें दिन 21.15 करोड़ रुपये कमाए। पहले हफ्ते में फिल्म ने कुल 337.4 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया। इसके बाद नौवें दिन 22.25 करोड़ और दसवें दिन 37 करोड़ रुपये की कमाई के साथ फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।

‘कांतारा’ का जादू और स्टारकास्ट

‘कांतारा चैप्टर 1’ 2022 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कांतारा’ का प्रीक्वल है। इस फिल्म का निर्देशन और अभिनय दोनों ही ऋषभ शेट्टी ने किया है। उनके साथ रुक्मिणी वसंत, गुलशन दैवेया और जयराम जैसे शानदार कलाकारों ने फिल्म को और भी खास बनाया है।

सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी से क्लैश, लेकिन कांतारा अडिग

बॉक्स ऑफिस पर ‘कांतारा चैप्टर 1’ का मुकाबला जाह्नवी कपूर और वरुण धवन की फिल्म ‘सनी संस्कारी की तुलसी कुमारी’ से है। हालांकि, इस क्लैश का ‘कांतारा’ की कमाई पर कोई असर नहीं पड़ा है। फिल्म दर्शकों के बीच जबरदस्त उत्साह बटोर रही है और अपनी रफ्तार से 400 करोड़ के आंकड़े को जल्द ही छूने की ओर बढ़ रही है।

‘कांतारा चैप्टर 1’ की यह कामयाबी न केवल ऋषभ शेट्टी की प्रतिभा को दर्शाती है, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए भी एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रही है।

UKSSSC पेपर लीक पर कांग्रेस का सरकार पर हमला, पूछा कब होगी CBI जांच और मर्तोलिया की बर्खास्तगी 

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देहरादून: उत्तराखंड में यूके ट्रिपल एससी परीक्षा पेपर लीक प्रकरण के रद्द होने की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने सरकार और भाजपा पर युवाओं के साथ विश्वासघात का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा कि 21 सितंबर को हुई इस परीक्षा के पेपर लीक को सरकार ने शुरू में नकारा और इसे मामूली नकल का मामला बताया। इसके खिलाफ आंदोलन कर रहे युवाओं को ‘अर्बन नक्सल’, ‘देशद्रोही’, ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ और ‘नकल जिहादी’ जैसे अपमानजनक शब्दों से नवाजा गया। धस्माना ने मांग की कि सरकार और भाजपा को युवाओं से माफी मांगनी चाहिए।

धस्माना ने कहा कि एकल सदस्य जांच आयोग की सिफारिश पर पेपर रद्द कर दिया गया, लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कब शुरू होगी, जिसकी सिफारिश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की थी। साथ ही, यूके ट्रिपल एससी के अध्यक्ष गणेश मर्तोलिया को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की।

उन्होंने जोर देकर कहा कि केवल पेपर रद्द करना पर्याप्त नहीं है। कांग्रेस की मांग है कि सीबीआई जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में शुरू हो और नकल माफिया के संरक्षकों का पर्दाफाश हो। धस्माना ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह मांगें पूरी नहीं कीं, तो कांग्रेस अपना आंदोलन और तेज करेगी।

केदारनाथ धाम में वीवीआईपी श्रद्धालुओं से दर्शन के लिए रिश्वत लिए जाने के आरोपों पर धस्माना ने इसे अत्यंत गंभीर मामला बताया। उन्होंने कहा कि आम श्रद्धालुओं को दर्शन में हो रही परेशानियों और खराब सुविधाओं पर सरकार को तत्काल ध्यान देना चाहिए। इस मुद्दे पर वे मुख्यमंत्री और सरकार से बात करेंगे।

स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द: धामी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई

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देहरादून। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय परीक्षा को रद्द करने का बड़ा निर्णय सरकार ने ले लिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) यू.सी. ध्यानी की अध्यक्षता में गठित एकल सदस्यीय जांच आयोग की रिपोर्ट के बाद लिया गया। आयोग ने आज अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंपी।

गौरतलब है कि 21 सितंबर को प्रदेशभर में यह परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें करीब 1 लाख 5 हजार अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया था। लेकिन परीक्षा के दौरान हरिद्वार के एक केंद्र से प्रश्नपत्र के तीन पन्ने मोबाइल के जरिए बाहर आ गए थे, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। इस लीक के बाद छात्रों ने परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया था।

आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री धामी स्वयं आंदोलन स्थल पर पहुंचे और छात्रों को न्याय का भरोसा दिलाते हुए सीबीआई जांच की घोषणा की थी। इसके साथ ही राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया और जांच के लिए एकल सदस्यीय आयोग नियुक्त किया गया था।

जांच आयोग ने राज्यभर में जनसंवाद और साक्ष्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की और शुक्रवार को सरकार को सौंपी। रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला किया है।

मुकेश अंबानी ने बदरीनाथ-केदारनाथ धाम को 10 करोड़ का दिया दान

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बदरीनाथ/केदारनाथ: प्रसिद्ध उद्योगपति और रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने शुक्रवार को श्री बदरीनाथ और श्री केदारनाथ धाम के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने दोनों मंदिरों के लिए 10 करोड़ रुपये का दान दिया। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने उनका भव्य स्वागत किया और उत्तराखंडी टोपी व मफलर भेंटकर सम्मानित किया।

मुकेश अंबानी ने दर्शन के बाद बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी से बातचीत में उत्तराखंड सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अगुआई में चारधाम यात्रा की व्यवस्थाओं की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि धामी सरकार ने यात्रियों की सुविधाओं के लिए अभूतपूर्व व्यवस्थाएं की हैं, जो अन्य धार्मिक स्थलों पर कम ही देखने को मिलती हैं। अंबानी ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से उत्तराखंड आ रहे हैं, लेकिन इस बार की व्यवस्थाएं ऐतिहासिक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि अगले 10 वर्षों में उत्तराखंड में तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि होगी।

अंबानी ने हाल ही में उत्तराखंड में बादल फटने की घटनाओं और इससे हुए नुकसान पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा, “रिलायंस फाउंडेशन और मैं उत्तराखंड की हर आवश्यकता में साथ खड़े रहेंगे।” उन्होंने यह भी कहा कि लाखों तीर्थयात्री बदरीनाथ और केदारनाथ धाम पहुंचते हैं, लेकिन मास्टर प्लान के तहत की गई व्यवस्थाओं के कारण किसी को असुविधा नहीं होती। इससे सरकार का आस्था और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भव्य विजन स्पष्ट होता है।

बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बताया कि अंबानी परिवार लंबे समय से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में दर्शन के लिए आता रहा है। उनके परिवार की इन मंदिरों के सौंदर्यीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अंबानी की इन धामों के प्रति गहरी आस्था और श्रद्धा है, जिसके कारण वे हर साल यहां नतमस्तक होने आते हैं और श्रद्धा के पुष्प अर्पित करते हैं।

अंबानी ने पर्यावरण संरक्षण और धामों की सुरक्षा के लिए उत्तराखंड सरकार के साथ हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस अवसर पर बीकेटीसी अध्यक्ष ने अंबानी के दान और समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया।

गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए कार्यकारिणी समिति का गठन

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देहरादून : गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के लिए कार्यकारिणी समिति का गठन राष्ट्रीय संयोजक विनोद प्रसाद रतूड़ी (IASIAS, पूर्व सचिव, उत्तराखंड सरकार) की सलाह पर किया गया। यह समिति 12 अक्टूबर को देहरादून में आयोजित धरना प्रदर्शन का संचालन करेगी।

समिति के प्रमुख पदाधिकारी 

मुख्य संयोजक:  विनोद प्रसाद रतूड़ी

दिल्ली संयोजक  देवेंद्र कुमार रतूड़ी

दिल्ली सह-संयोजक:

  • जसपाल सिंह रावत
  • देवेन एस. खत्री
  • बलराज सिंह नेगी

देहरादून संयोजक (नगर निगम क्षेत्र): आशा राम कुमेडी

सह-संयोजक (देहरादून):

रायपुर विकासखंड: संदीप खत्री

डोईवाला विकासखंड: सरोज थपलियाल

सहसपुर विकासखंड: अरुण रतूड़ी

विकासनगर विकासखंड: प्रमोद गुप्ता

चकराता विकासखंड: अंब्रेस शर्मा

देहरादून नगर निगम क्षेत्र:

  • एल.पी. रतूड़ी
  • नागेंद्र सिंह रावत

संयोजक (नगर निगम ऋषिकेश): प्रकाश मोहन डिमरी, एडवोकेट

सचिव एवं प्रवक्ता:

  • मुकेश राणा
  • अवधेश शर्मा

मुख्य प्रवक्ता: शंभू प्रसाद रतूड़ी

सोशल मीडिया प्रभारी: पार्थ रतूड़ी

मीडिया सलाहकार:

  • राकेश ध्यानी
  • नीरज कोहली
  • हरीश जोशी, पत्रकार (पहाड़ का सच)
  • डॉ. विनोद कुमार पोखरियाल

देहरादून मीडिया समन्वयक:

  • राकेश रतूड़ी
  • भरत नौटियाल

कोषाध्यक्ष:

  • जे.एस. गुसाईं
  • शंभू प्रसाद सेमवाल

कानूनी सलाहकार:

  • मुकेश राणा, एडवोकेट
  • पंकज गुसाईं, एडवोकेट
  • प्रकाश मोहन डिमरी, एडवोकेट
  • भुवन चंद जुयाल, एडवोकेट

सामाजिक सलाहकार:

  • सत्य प्रकाश कौठियाल
  • रमेश थपलियाल
  • दिनेश मलगुड़ी
  • सुनील जेदली
  • अनिल बहुगुणा

राजनीतिक सलाहकार:

  • भुवन नौटियाल
  • डी.पी. ढोडियाल
  • उमेश डोभाल
  • भूपेंद्र वशिष्ट
  • प्रेम प्रकाश शैली
  • हरीश चंद्र रतूड़ी
  • वी.डी. रतूड़ी
  • गिरीश बहुगुणा

देहरादून कार्यकारिणी समिति सलाहकार: लोकेश प्रसाद नौटियाल

  • सुधीर गैरोला
  • दयाल सिंह राणा
  • गोपाल सिंह बिष्ट
  • कृष्ण स्वरूप वडोली
  • प्रोफेसर चंद्रशेखर जोशी
  • महिपाल पुंडीर

मार्गदर्शक मंडल:

  • आदित्य पुरोहित

संस्कृति सलाहकार: मृणाल रतूड़ी

केंद्रीय समन्वयक:

  • सुभाष चंद्र रतूड़ी
  • वी.पी. डयूंडी

स्थायी राजधानी गैरसैंण’ की मांग को लेकर पूर्व IAS विनोद प्रसाद रतूड़ी का अनिश्चितकालीन आंदोलन: ‘राज्य बने 25 साल, पर राजधानी कहां?’

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देहरादून:  उत्तराखंड की स्थायी राजधानी गैरसैंण की मांग को लेकर पूर्व आई.ए.एस. अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी एक बार फिर बड़ा आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं। राज्य गठन के लगभग 25 वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन उत्तराखंड को अभी तक उसकी स्थायी राजधानी नहीं मिल पाई है, जिसके कारण पहाड़ों में शिक्षा, चिकित्सा, और रोजगार की कमी से भारी पलायन हो रहा है।

इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित करने के लिए, श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी 12 अक्टूबर, 2025 को सुबह 11:00 बजे से देहरादून के परेड ग्राउंड में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यह प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार गैरसैंण को स्थायी राजधानी घोषित नहीं कर देती।

IAS सेवा के दौरान संघर्ष और उपेक्षा

श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी को उत्तराखंड के उन चुनिंदा अधिकारियों में गिना जाता है जो मुख्यमंत्री और मंत्रियों को गलत नीतियों पर भी सही सलाह देने और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रहने के लिए जाने जाते हैं।

स्थानांतरण की मार: अपनी सेवा के दौरान, उन्होंने 50 से ज़्यादा स्थानांतरणों का सामना किया, जो व्यवस्था के सामने उनकी निडरता का प्रमाण है।

सरकार की उपेक्षा: जब वह IAS सेवा में थे, उन्होंने इस संबंध में (स्थायी राजधानी गैरसैंण) सरकार से सूचना और योजनाएं मांगी थीं। लेकिन इसके बदले उन्हें ट्रांसफर के अलावा कुछ नहीं मिला। सरकार ने उनकी जनहितैषी सलाह को अनसुना कर दिया। इसी उपेक्षा से आहत होकर, उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद जन-आंदोलन का रास्ता चुना।

आंदोलन की मुख्य वजहें

शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा: राज्य निर्माण आंदोलन के दौरान 42 से अधिक लोगों ने राजधानी की मांग को लेकर अपना बलिदान दिया था। इन शहीदों के सपने को पूरा करने और उनके बलिदान को सम्मान देने के लिए यह आंदोलन आवश्यक है।

पलायन और पहाड़ों की दुर्दशा: स्थायी राजधानी के अभाव में सरकारी नीतियां मैदानों तक सीमित रह गई हैं। पहाड़ों में मूलभूत सुविधाओं (शिक्षा, स्वास्थ्य) की कमी के चलते गांव के गांव खाली हो रहे हैं, जिससे राज्य का मौलिक स्वरूप खतरे में है।

स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति: पूर्व में ‘स्थायी राजधानी गैरसैंण समिति’ का गठन किया गया था। इसी क्रम में श्री रतूड़ी ने 21 सितंबर, 2025 को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी एक बड़ा प्रदर्शन किया था।

आगामी कार्यक्रम

श्री विनोद प्रसाद रतूड़ी ने घोषणा की है कि 12 अक्टूबर को देहरादून में धरने के बाद, वह गैरसैंण की ओर मार्च निकालेंगे। उनका कहना है, “यह मेरी नहीं, यह उत्तराखंड के भविष्य की लड़ाई है। जब तक स्थायी राजधानी गैरसैंण घोषित नहीं हो जाती, हम रुकेंगे नहीं।”

उत्तराखंड के सभी नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, और राजनैतिक दलों से अनुरोध है कि वे इस महत्वपूर्ण आंदोलन में शामिल होकर राज्य के भविष्य को सुरक्षित करने में सहयोग करें।