सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) टीएस ठाकुर ने रविवार को एक बार फिर न्यायपालिका में रिक्तियों और बड़ी संख्या में लंबित मामलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया को अवश्य तेज किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि देश में प्रति 10 लाख की आबादी पर 12 न्यायाधीश हैं और कम से कम तीन करोड़ मामले अदालतों में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों के रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया तेज करने की जरूरत है। न्यायिक अधिकारियों के पहले राज्यस्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति ठाकुर ने न्यायपालिका में ईमानदारी को अहम बताया। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की सबसे बड़ी विशेषता ईमानदारी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी क्षेत्र से जुड़ा व्यक्ति ईमानदार नहीं है तो वह ‘दुकान’ चला रहा है। न्याय करने वाले को ऐसा नहीं होना चाहिए।
सीजेआई ने कहा कि विधि आयोग की 1987 की रिपोर्ट के अनुसार तब 40 हजार न्यायाधीशों की जरूरत थी, लेकिन आज भी न्यायाधीशों की संख्या सिर्फ 18000 है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे ही हालात रहे तो अगले 15-20 साल में लंबित मामलों की संख्या पांच करोड़ के आंकड़े को पार कर जाएगी। सीजेआई ने कहा कि अगले पांच साल में एक लक्ष्य निर्धारित कर नियुक्तियां की जा सकती हैं। सीजेआई ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के सामने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता जताई है।
न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए: सीजेआई
नेपाल में नदियों पर डैम बनाने के बारे में भी बात करेंगे प्रचंड
नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहाल प्रचंड अपने दूसरे कार्यकाल में न केवल भारत से बेहतर संबंधों के हिमायती नजर आ रहे हैं, बल्कि वह दोनों देशों की सीमा के आर- पार की बुनियादी समस्याओं के परस्पर सहयोग से समाधान के भी पक्षधर हैं। नेपाल की चोटियों से निकलने वाली नदियों से हर साल पैदा होने वाली बाढ़ और इससे दोनों तरफ होने वाली भारी क्षति के प्रति भी वह गंभीर हैं।
उनसे जब पूछा गया कि नेपाल में डैम बनाने की बात लंबे समय से चल रही है। डैम बनने से नेपाल में बिजली का उत्पादन होगा तो नेपाल की तराई समेत बिहार, उत्तर प्रद्रेश और उत्तराखंड को बाढ़ से निजात मिलेगी। नेपाली प्रधानमंत्री का रवैया इस मुद्दे पर भी सकारात्मक था। उन्होंने दो टूक कहा कि इसके बारे में भी हमारी बात होगी। मैं अभी इतना ही कहूंगा।
उनसे जब यह पूछा गया कि दोनों देशों की खुली सीमा से कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं। आप इसके समाधान को लेकर भी बात करना चाहेंगे? श्री प्रचंड ने कहा कि खुली सीमा ही हमारे संबंधों का यूनिकनेस है। यही खूबसूरती है। लेकिन इसको लेकर जो खतरा है, उस मोर्चे पर दोनों देशों को मिलकर काम करना होगा।
यह पूछे जाने पर कि आप पटना से काठमांडू हवाई सेवा शुरू चाहेंगे? श्री प्रचंड ने कहा कि पटना से काठमांडू हवाई सेवा शुरू होनी चाहिए। इसके रास्ते में क्या बाधाएं हैं, उसे भी मैं देखूंगा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसी वर्ष 3 मार्च को अपनी काठमांडू यात्रा के दौरान वहा के तत्कालीन प्रधानमंत्री से कोसी नदी पर डैम के निर्माण के लिए सर्वे के काम में तेजी लाने का अनुरोध किया था। श्री कुमार ने पटना से काठमांडू हवाई सेवा शुरू करने पर भी जोर दिया था।
भारत और नेपाल के बीच बहने वाली मोहाना नदी पर पक्का पुल बनेगा। रविवार को नेपाल की एक टीम सर्वे को पहुंची। भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना नदी के गुलरिया घाट पर पक्का पुल बनाने को लेकर नेपाल से सर्वे करने के लिए टीम पहुंची। इस पुल के बन जाने से बाढ़ प्रभावित भारतीय इलाकों को भी बढ़ी राहत मिलने के आसार हैं।
नेपाल के काठमांडू कांसलटेंट से आये गुलरिया घाट पर पुल निर्माण के सर्वे टीम में इंजीनियर सुदीप कार्को ,सहायक इंजीनियर दिनेश बूढ़ाठोकी ने बताया कि भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना नदी के गुलरिया घाट पर पुल निर्माण कार्य में सर्वे के मुताबिक लगभग 100मीटर लम्बा पुल निर्माण होगा। इसका मानक पुल के डिजाइन के हिसाब से पुल निर्माण विभाग तय करेगा। उन्होंने बताया की इस पुल का निर्माण दोनों देशों की सहमति से होना है। दोनों देशों के उच्चस्तरीय अधिकारियों की वार्ता चल रही है। गुलरिया घाट पर पक्का पुल निर्माण के लिए वर्षो से ग्रामीणों की मांग रही है। प्रतिदिन सैकड़ों लोग दैनिक उपयोग की चीजों को लेने के लिए नाव से आते-जाते हैं। पुल बन जाने से वर्षों पुराना ग्रामीणों का सपना पूरा होगा।
7 हजार चीनी नागरिकों की सुरक्षा में 'दोस्त' PAK ने तैनात किए 15 हजार जवान
पाकिस्तान और चीन की गहरी दोस्ती जगजाहिर है. दोनों मुल्क इस दोस्ती को भारत के खिलाफ एनएसजी से लेकर तमाम मंचों पर निभाते आए हैं. चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर इसी दोस्ती का अगला कदम माना जा रहा है. दिलचस्प बात यह है कि इस प्रोजेक्ट पर मंडराते खतरे को देखते हुए पाकिस्तान ने हर चीनी नागरिक की सुरक्षा के लिए दो जवान तैनात किए हैं. प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 7000 चीनी नागरिकों के लिए पाकिस्तान ने करीब 15000 सैनिकों को ड्यूटी पर लगाया है.
पाकिस्तान में कॉरिडोर प्रोजेक्ट को नुकसान पहुंचाने के लिए कई हमले हो चुके हैं. यही कारण है कि इस क्षेत्र में काम करने वाले 7,036 चीनी कर्मचारियों की सुरक्षा में पाकिस्तान की ओर से 14,503 जवान लगाए गए हैं. सीपीईसी में काम करने वाले अधिकतर चीनी नागरिक पंजाब प्रांत में नियुक्त हैं. समझा जाता है कि इस इलाके जिहादी समूहों की जमीन ज्यादा मजबूत है. इस बाबत एक लिखित जवाब पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में दिया गया है.
असेंबली को बताया गया कि पंजाब में 6364 जवान चीन के 7036 नागरिकों की सुरक्षा के लिए नियुक्त हैं, जबकि बलूचिस्तान में 3134, सिंध में 2654, खैबर पख्तूनख्वाह इलाके में 1912 और इस्लामाबाद में 439 जवान चीन के नागरिकों की सुरक्षा के लिए नियुक्त किए गए हैं. यह लिखित जानकारी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की शाहिदा रहमान के सवाल के जवाब में दी गई.
बताया जाता है कि इस कॉरिडोर को सबसे अधिक खतरा बलूच राष्ट्रवादियों से है. जबकि इससे पहले तालिबान के समर्थक लड़ाके भी पाकिस्तान में काम करने वाले चीनी नागरिकों पर हमला कर चुके हैं. 2000 किमी. के विस्तार वाले सीपीईसी को पाकिस्तान की आर्थिक तरक्की में बड़ा कदम माना जा रहा है. इसके जरिए चीन में काशगर से बलूचिस्तान में ग्वाडर पोर्ट को सीधे जोड़ा जा सकेगा.
पाकिस्तान के लिए रणनीतिक तौर पर भी यह कॉरिडोर महत्वपूर्ण है. प्रोजेक्ट के बाज काराकोरम हाईवे को एक बार फिर से गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से जोड़ा जा सकेगा. इसका सीधा फायदा चीन को भी मिलेगा, क्योंकि चीन के लिए पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तक पहुंचने के लिए रास्ता मिल सकेगा. सीपीईसी के 330 प्रोजेक्ट्स में से सिर्फ आठ बलूचिस्तान के इलाके में हैं, जहां अलगाववादी इसका विरोध कर रहे हैं.
दूसरी ओर, भारत पीओके में भारत के रास्ते चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर का विरोध कर चुका है. पिछले दिनों विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने इसे अवैध बताते हुए कहा कि यह स्वाभाविक रूप से भारत के लिए चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि अगर बलूचिस्तानम में मानवाधिकारों का उल्लंघन होगा तो हम उस पर चिंता जाहिर करेंगे. वास्तविक हस्तक्षेप बॉर्डर पार से आतंक फैलाना है.
पुलिस के छापे बिरयानी की जांच के लिए होंगे तो इसके गलत संदेश ही जाएंगे
बीफ पर कानून के जरिये प्रतिबंध लगाने वालीं दो राज्य सरकारें ईदुलजुहा या बकरी ईद के ठीक पहले फिर चर्चा में हैं. हरियाणा गौ सेवा आयोग ने राज्य पुलिस से कहा है कि वे मेवात से बिरयानी के सैंपल इकट्ठा करें और उन्हें जांच के लिए भेजें. उधर, प्रधानमंत्री की देरी से आई लेकिन सख्त चेतावनी के बाद महाराष्ट्र ने यह साफ कर दिया है कि इस मुद्दे पर गौरक्षकों जैसी निजी छापेमारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, सिर्फ पुलिस ही गायों के मारे जाने या इस काम के लिए उन्हें ले जाये जाने के आरोपों की जांच कर सकती है.
हरियाणा में खास तौर पर बिरयानी को निशाना बनाया गया है जो पारंपरिक रूप से मुसलमानों के इस त्योहार के साथ जुड़ी हुई है. उधर, महाराष्ट्र सरकार का यह हालिया आदेश कि कानूनी रूप से सिर्फ बकरियों को ही मारा जा सकता है, भी इस त्योहार के साथ जुड़े खाने की तरफ ही ध्यान खींचता है. कानून के हिसाब से ये कदम भले ही सही हों लेकिन, दुर्भाग्य से वे यह संदेश देते हैं कि सरकार एक समुदाय विशेष के त्योहार का मजा खराब करने पर तुली है. जब माहौल में यह डर घुला हुआ हो कि जाने कब गौरक्षक आपके घर में घुसकर बर्तनों की जांच पड़ताल करने लगें तो त्योहार का माहौल वैसा नहीं रह जाता जैसा उसे होना चाहिए.
महाराष्ट्र में मांस के लिए गोवंश के पशुओं को मारना, ऐसा मांस रखना या खाना अपराध बन जाने के बाद से गौरक्षकों की कार्रवाईयां चर्चा में रही हैं. हालांकि हाईकोर्ट ने अब थोड़ी सी छूट देते हुए राज्य के बाहर से लाए गए बीफ को खाने की इजाजत दे दी है. इसी साल जून में महाराष्ट्र सरकार का वह फैसला भी चर्चा में रहा था जिसके तहत हर जिले में मानद पशु कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति की जानी थी. इन अधिकारियों को गौमाता की सुरक्षा के लिए किए जा रहे उपायों में सरकार की आंखें और कान बनना था. सवाल यह है कि जब पुलिस को बीफ से जुड़ा कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की शक्तियां हासिल हैं तो इसके लिए जनता में से एक ना कैडर बनाने की क्या जरूरत समझी गई. अब भले ही महाराष्ट्र सरकार यह संदेश दे रही हो कि गौरक्षा के नाम पर निजी कार्रवाइयां बर्दाश्त नहीं की जाएंगी लेकिन इसका पुराना रिकॉर्ड इस पर संदेह करने की वजह देता है. यह बताता है कि नजरिये और नीयत में राज्य सरकार का हाल हरियाणा से जुदा नहीं है जो बिरयानी की जांच करने के लिए खुद ही गश्त लगाने वाले दल भेज रही है.
अगर बीफ से जुड़े कानून जरूरी हैं तो उन्हें अमल लाने की शक्तियां सिर्फ पुलिस के पास ही होनी चाहिए. और ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि इन कानूनों को एक समुदाय विशेष के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाए. इस बार ईद का त्यौहार दो राज्यों की सरकारों के चलते गलत वजहों से चर्चा में रहा है. यह कोई बहुत छिपी हुई बात नहीं है कि ऐतिहासिक रूप से हाशिये पर और मुख्यधारा के भूगोल के बाहर रहे समुदाय प्रोटीन के मुख्य स्रोत के रूप में बीफ का इस्तेमाल करते रहे हैं. अगर भविष्य को लेकर उनके मन में आशंकाएं जग रही हैं तो इसके कारण हैं.
खेल मंत्रालय ने शुरु की रियो ओलंपिक में खराब प्रदर्शन की जांच
नई दिल्ली: खेल मंत्रालय ने रियो ओलंपिक में भारत के निराशाजनक प्रदर्शन की ‘संपूर्ण समीक्षा’ शुरू कर दी है और उसने इस खेल महाकुंभ में भाग लेने वाले खिलाड़ियों से उनकी प्रतिक्रिया और सुझाव भी मांगे हैं.
पिछले महीने दो हफ्ते तक चले इस महाकुंभ में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था, उसके लिये सिर्फ पीवी सिंधु बैडमिंटन में सिल्वर और साक्षी मलिक कुश्ती में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर सकी थीं.
इससे बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने के लिये खिलाड़ियों के बीते प्रदर्शन को देखने और इसका आकलन करने के लिये बाध्य होना पड़ा.
मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में कहा, ‘‘खेल मंत्री विजय गोयल ने मंत्रालय के अंदर ही भारत के रियो ओलंपिक 2016 में प्रदर्शन की संपूर्ण समीक्षा कराने का फैसला किया. ’’ इसके अनुसार, ‘‘खेल मंत्री ने रियो ओलंपिक में भाग लेने वाले प्रत्येक एथलीट को व्यक्तिगत रूप से पत्र लिखे, उनसे उनकी प्रतिक्रिया और सुझाव मांगे. उन्होंने साथ ही लिखा कि खिलाड़ी उन्हें किसी भी समय व्यक्तिगत रूप से या मेल के जरिये अपने सुझाव और प्रतिक्रिया देने के लिये स्वतंत्र महसूस करें. ’’
विज्ञप्ति के अनुसार, ‘‘इस पत्र में मंत्री ने उनसे और ज्यादा बेहतरीन प्रदर्शन करने पर जोर दिया है ताकि विश्व स्तरीय एथलीटों का पूल बनाया जा सके और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा सके. ’’ रियो ओलंपिक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले तीन ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए एक ‘टास्क फोर्स’ गठित करने की भी घोषणा की थी.
गोयल के विभाग ने विज्ञप्ति लिखा, ‘‘मंत्रालय ने भारतीय ओलंपिक संघ को भी रियो ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन की प्रतिक्रिया सौंपने और भविष्य में प्रदर्शन में सुधार के लिये उठाये जाने वाले कदमों को बताने के लिये लिखा है. ’’
इसके अनुसार, ‘‘इस तरह की प्रतिक्रिया राष्ट्रीय खेल महासंघों से भी मांगी गयी है. खेल मंत्री इस संदर्भ में आईओए और राष्ट्रीय खेल महासंघें से विस्तृत चर्चा के लिये बैठक भी करेंगे. ’’ जांच के लिये मंत्रालय के अधिकारी साई के कुछ केंद्रों का भी दौरा करेंगे.
इसके अनसार, ‘‘मंत्री कुछ अकादमियों और साई केंद्रों का भी दौरा करेंगे ताकि वे खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिये उपलब्ध सुविधाओं और उनके प्रदर्शन में सुधार के लिये जानकारी प्राप्त कर सकें. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इस महीने की 17 की तारीख को वह हैदराबाद में गोपीचंद बैडमिंटन अकादमी का दौरा करेंगे, जहां वह खिलाड़ियों, कोचों और अन्य सहयोगी स्टाफ से मुलाकात करेंगे. वह हैदराबाद में साई केंद्र का भी दौरा करेंगे. ’’
ICC ने दी क्वींस पार्क ओवल को चेतावनी, भारत टेस्ट के लिये खराब रेटिंग
आईसीसी ने पोर्ट ऑफ स्पेन में क्वींस पार्क ओवल की पिच और आउटफील्ड को खराब रेटिंग देते हुए आधिकारिक चेतावनी दी जिस पर पानी के निकासी की खराब व्यवस्था के कारण भारत और वेस्टइंडीज के बीच टेस्ट मैच के दौरान चार दिन का खेल नहीं हो पाया था।
इसी तरह की चेतावनी डरबन के किंग्समीड को भी दी गयी है जिस पर दक्षिण अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच टेस्ट मैच के दौरान साढ़े तीन दिन से ज्यादा का खेल नहीं हो सका था।
आईसीसी के प्रेस नोट के अनुसार, डरबन और पोर्ट ऑफ स्पेन को आईसीसी की पिच और आउटफील्ड निगरानी प्रक्रिया के अंतर्गत आधिकारिक चेतावनी दी गयी है जिन पर पिछले महीने क्रमश: दक्षिण अफ्रीका बनाम न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज बनाम भारत मैच खेले गये थे।
आईसीसी मैच रैफरियों के एमिरेटस एलीट पैनल के एंडी पाईक्रोफ्ट और रंजन मदुगले ने पिच और आउटफील्ड निगरानी प्रक्रिया की तीसरी धारा के अंतर्गत इन दोनों मैचों के मैदान की आउटफील्ड के स्तर को खराब रेट किया है।
विज्ञप्ति के मुताबिक डरबन और पोर्ट ऑफ स्पेन के स्टेडियमों पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की अच्छी परिस्थितियों के इतिहास को देखते हुए अधिकारिक चेतावनी दी गयी है और दोनों देशों को बोर्डों को उचित कदम उठाने चाहिए ताकि इस तरह की घटना भविष्य में नहीं हो।
क्या ‘xXx' के प्रमोशन के लिए भारत आयेंगे दीपिका और विन डीजल!
बॉलीवुड अभिनेत्री दीपिका पादुकोण इनदिनों अपनी आगामी पहली हॉलीवुड फिल्म ‘xXx: The Return Of Xander Cage’ को लेकर खासा उत्साहित हैं. फिल्म में वे विन डीजल संग नजर आयेंगी. दोनों ही कलाकार सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव रहते हैं और अपने फैंस को फिल्म से जुड़ी खास बातें और तस्वीरों से रुबरु करवाते रहते हैं.
इसबार दोनों ने अपने यूएस और भारत के फैंस से जुड़ने के लिए फेसबुक का सहारा लिया है. उन्होंने एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें विन डीजल दीपिका से मिलवाते नजर आ रहे हैं. साथ ही यह भी बता रहे हैं कि ‘xXx’ के रिलीज होने के बाद पता चल पायेगा कि दीपिका कौन है. उनका कहना है कि वे इस बात से बेहद खुश हैं कि फिल्म में दीपिका उनके साथ हैं.
बता दें कि ‘xXx’ एक सुपरहिट एक्शन फ्रेंचाइजी फिल्म है. इस फिल्म का इंतजार पूरी दुनियां कर रही है. वहीं दीपिका इस फिल्म में हैं तो इंडिया में भी इस फिल्म को लेकर खास उत्साह है. दीपिका बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार की जाती है. कहा जा रहा है कि इस फिल्म को प्रमोट करने के लिए फिल्म के लीड एक्टर विन डीजल को भारत आना चाहिए, लेकिन फिल्म को डिस्ट्रीब्यूट करने वाली कंपनी वायाकॉम 18 के सीओओ अजीत अंधारे विन के यहां आने को लेकर कांफिडेंट नहीं हैं.
हालांकि सोशल मीडिया पर फिल्म का प्रमोशन जारी है. वहीं अजीत का कहना है कि,’ दीपिका और विन डीजल फिल्म का प्रमोशन सोशल मीडिया पर कर रहे हैं. हम भारत में फिल्म का प्रमोशन तब शुरू करेंगे जब रिलीज डेट नजदीक होगी.’ बता दें कि फिल्म 20 जनवरी को अमेरिका में रिलीज होगी. खैर फैंस तो जरूर चाहेंगे कि विन डीजल और दीपिका फिल्म की पूरी टीम के साथ प्रमोशन के लिए भारत आये!
बैंकॉक से अंडर गारमेंट में मुंबई लाए गए सोने के बिस्किट, कस्टम ने छह यात्रियों को धरदबोचा
मुंबई: मुंबई कस्टम की एयर इंटेलिजेंस यूनिट ने आज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब एक करोड़ 36 लाख के सोने के बिस्किट पकड़े. कुल 24 सोने के बिस्किट बैंकॉक से आए छह यात्रियों के पास से बरामद हुए. यात्री सोने के बिस्किट अपने अंडर गारमेंट में छुपाकर लाए थे.
मुम्बई कस्टम के मुताबिक उन्हें लुधियाना की डीआरआई यूनिट से खुफिया रिपोर्ट मिली थी कि बैंकॉक से आने वाली एयर इंडिया की उड़ान से कुछ लोग सोने की तस्करी कर रहे हैं. सूचना के आधार पर कस्टम यूनिट ने मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरे छह यात्रियों को पकड़ा.
पकड़े गए सभी यात्रियों के पास हिंदुस्तानी पासपोर्ट मिले हैं. तस्करों के पास से 15500 यूरो भी मिले हैं. सभी पर कस्टम कानून 1962 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है. सभी पर संगठित तस्कर गिरोह का सदस्य होने का शक है.
भर्ती के लिए आए युवकों में मची भगदड़, दर्जनों जख्मी
मुंबई। मुंबई में नेवी की भर्ती के दौरान भगदड़ मचने से दर्जनों युवकों के जख्मी होने की खबर है। जानकारी के मुताबिक मुंबई के मलाड में आईएनएस हमला नेवल बेस पर नेवी की ओपन भर्ती परीक्षा होनी है। इस परीक्षा के लिए करीब 10 हजार नौजवान आईएनएस हमला पर मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि इतनी ज्यादा तादाद में जुटी भीड़ को मैनेज करने का कोई इंतजाम नहीं था। भर्ती के लिए आए नौजवान खाने-पीने और बैठने का इंतजाम नहीं होने से नाराज थे।
इसी दौरान भगदड़ मचने से कई युवक पैरों तले दबकर जख्मी हो गए। आईएनएस हमला पश्चिमी मुंबई के समुद्री तट पर नेवी का बेस है।
कॉमेडियन कपिल शर्मा से मांगी गई घूस? ट्वीट कर पूछा- 'क्या यही हैं अच्छे दिन'
नई दिल्ली: कॉमेडियन कपिल शर्मा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद की है। दरअसल कपिल ने दो ट्वीट के जरिए खुद के भ्रष्टाचार का शिकार होने की बात कही है और पीएम नरेंद्र मोदी के अच्छे दिन पर सवाल उठाए है। भ्रष्टाचार को लेकर कॉमेडी किंग कपिल शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ट्वीट कर अपनी शिकायत दर्ज कराई है।
कपिल ने ट्वीट करते हुए कहा कि वो पिछले 5 साल से 15 करोड़ रुपए इनकम टैक्स जमा कर रहे हैं। इसके बावजूद उनसे ऑफिस बनाने के लिए बीएमसी 5 लाख रुपए की घूस मांग रही है। कॉमेडियन शर्मा ने दूसरा ट्वीट करते हुए मोदी के ‘अच्छे दिन’ पर तंज कसा है। कपिल ने ट्वीट में लिखा, ‘ये हैं आपके अच्छे दिन’। कपिल ने ट्वीट कर यह बात जनता के सामने रखी है और इस ट्वीट में पीएम मोदी को टैग किया है।
कपिल शर्मा के इन आरोपों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि कपिल सारी जानकारी मुहैया कराएं। हम दोषी को नहीं बख्शेंगे। उन्होंने कहा कि मैंने बीएमसी को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
कपिल शर्मा के इस आरोप पर बीएमसी के विजिलेंस अफसर अशोर पवार का बयान आया है। पवार ने कहा कि कपिल शर्मा घूस मांगने वाले अफसर का नाम बताएं। कपिल ने प्रधानमंत्री के ऑफिशियल ट्विटर हैंडल @narendramodi भी इस ट्वीट के साथ जोड़ा है। बहरहाल, प्रधानमंत्री, या उनके ऑफिस या महाराष्ट्र सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन बड़ी संख्या में ट्वीटर यूजर्स ताबड़तोड़ अपनी टिप्पणियां दे रहे है।







