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फिल्म अवार्ड लौटाने वालों पर बरसे अनुपम-परेश

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पुरुस्कार लौटाने वाले फिल्मकारों पर अभिनेता अनुपम खेर ने निशाना साधा है। उन्होंने पुरुस्कार वापस करने वालों की मंशा पर सवाल उठाया है और अपने ट्वीट में लिखा है, जो लोग नहीं चाहते था कि मोदी पीएम बनें वो अब #AwardWapsi गैंग का हिस्सा बन गए हैं। जय हो।
अनुपम यहीं नहीं रुके। उन्होंने कुछ और ट्वीट भी किए। उन्होंने लिखा कि ये लोग किसी एजेंडे के तहत ऐसा कर रहे हैं। अनुपम ने अवार्ड वापसी को दर्शकों का अपमान करने वाला भी बताया।
जाने माने फिल्मकारों दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन और 11 अन्य लोगों ने बुधवार को एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए और देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए। बनर्जी और अन्य फिल्मकारों ने कहा कि उन्होंने छात्रों के मुद्दों के निवारण और बहस के खिलाफ असहिष्णुता के माहौल को दूर करने में सरकार की ओर से दिखाई गई उदासीनता के मद्देनजर ये कदम उठाए हैं।
बनर्जी ने कहा, ‘मैं गुस्से, आक्रोश में यहां नहीं आया हूं। ये भावनाएं मेरे भीतर लंबे समय से हैं। मैं यहां आपका ध्यान खींचने के लिए हूं। ‘खोसला का घोसला’ के लिए मिला अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाना आसान नहीं है। यह मेरी पहली फिल्म थी और बहुत सारे लोगों के लिए मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म थी।’
उन्होंने कहा, अगर बहस, सवाल पूछे जाने को लेकर असहिष्णुता और पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने की चाहत रखने वाले छात्र समूह को लेकर असहिष्णुता होगी, तो फिर यह असहिष्णुता उदासीनता में प्रकट होती है। इसी को लेकर हम विरोध जता रहे हैं।
जानेमाने डाक्यूमेंट्री निर्माता पटवर्धन ने कहा कि सरकार ने अति दक्षिणपंथी धड़ों को प्रोत्साहित किया है। उन्होंने कहा, मैंने इस तरह से एक समय पर बहुत सारी घटनाएं होती नहीं देखी हैं। क्या होने वाला है, यह उसकी शुरूआत है और मुझे लगता है कि पूरे देश में लोग अलग अलग तरीकों से प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
एफटीआईआई के छात्रों ने बुधवार को अपनी 139 दिनों पुरानी हड़ताल खत्म कर दी, हालांकि वे संस्थान के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति का विरोध और उनको हटाने की मांग जारी रखेंगे।

अब एक साइंटिस्ट ने किया पद्म भूषण लौटाने का ऐलान

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साहित्यकारों और फिल्मकारों के पुरस्कार लौटाए जाने के सिलसिले के बीच अब एक वैज्ञानिक ने पद्म भूषण लौटाने का ऐलान किया है। वैज्ञानिक पीएम भार्गव का कहना है कि तर्कवाद, विचार और विज्ञान पर हमले के विरोध में मैं अवार्ड वापस कर रहा हूं।
सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायलॉजी (सीसीएमबी) के संस्थापक भार्गव ने कहा कि मैं मोदी सरकार में धर्म के आधार पर देश को विभाजित करने की सांप्रदायिक और अलगाववादी तत्वों की कोशिशों को प्रश्रय देने के विरोध में मैं इस्तीफा दे रहा हूं।
पी एम भार्गव ने कहा कि इस वक्त हमारे देश में जो व्यवस्था है, बीजेपी की गवर्नमेंट जो RSS कहता है, वही करती है। आरएसएस हिंदुत्व की लाइन पर चल रहा है, इसीलिए मैंने अवार्ड वापस करने का फैसला किया है। 1996 में मुझे  जैल सिंह से अवार्ड मिला था।
भार्गव ने कहाकि अवार्ड रिटर्न करने से देश की छवि उतनी नहीं ख़राब होती जितनी और चीजों से होती है। क्या जो भागवत साहब कहते हैं उससे देश की छवि नहीं ख़राब होती? उन्होंने अभी कुछ दिन पहले ही कहा था कि शादी एक कॉन्ट्रैक्ट होती है जिसमें महिला घर संभालने का काम करती है। क्या महिलाओं का सिर्फ यही काम है?

लश्कर का टॉप कमांडर अबू कासिम मुठभेड़ में ढेर

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पाकिस्तान के आतंकी गुट लश्कर ए तैयबा को उस समय गहरा झटका लगा जब उसका एक शीर्ष कमांडर अबु कासिम दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के एक गांव में हुई मुठभेड़ में मारा गया। इस साल उधमपुर में बीएसएफ पर हुए हमले सहित कई आतंकी हमलों के संबंध में वांछित 28 वर्षीय कासिम पाकिस्तान के बहावलपुर का रहने वाला था।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि कासिम और उसके एक साथी के कुलगाम स्थित खांदीपुरा गांव में एक मकान में छिपे होने की खुफिया सूचना मिलने के बाद देर रात दो बजे अभियान शुरू हुआ। यह गांव यहां से करीब 80 किमी दूर है। सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के एक संयुक्त दल ने वहां पहुंचकर गांव को घेर लिया।
पुलिस के एक दल ने मोहम्मद अल्ताफ की अगुवाई में सात अक्तूबर को कासिम पर निशाना साधा था। लेकिन वह पुलिस दल पर अंधाधुंध गोली चलाते हुए भाग निकला था। इस गोलीबारी में ‘अल्ताफ लैपटॉप’ कहलाने वाले पुलिस अधिकारी अल्ताफ की जान चली गई थी जिन्होंने कई आतंकी मॉड्यूलों का भंडाफोड़ किया था। जम्मू कश्मीर के पुलिस महानिदेशक के राजेंद्र ने बताया ‘सुरक्षा बलों के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।’
उत्तरी कश्मीर में आतंकवाद फैलाने वाला कासिम दक्षिण कश्मीर में अपनी पकड़ बनाने के लिए प्रयासरत था। पिछले कुछ समय से वह शोपियां और कुलगाम के जंगलों के बाहर भी सक्रिय हो गया था। उसकी गिरफ्तारी पर 20 लाख रूपये का इनाम घोषित था। राज्य पुलिस को वर्ष 2013 में हुए हैदरपुरा मामले में कासिम उर्फ अबुर रहमान की तलाश थी। इस हमले में सेना के आठ कर्मियों को दिनदहाड़े मार डाला गया था।
इस साल अगस्त में उधमपुर में बीएसएफ के एक काफिले पर हुए आतंकी हमले में भी कासिम का नाम सामने आया था। इस हमले में बल के दो कर्मी शहीद हो गए थे। जवाबी कार्रवाई में एक आतंकी मारा गया था और स्थानीय निवासियों ने दूसरे आंतकी मोहम्मद नावेद को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था। नावेद पाकिस्तानी नागरिक है। अल्ताफ कासिम की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहे थे। कासिम की मौत अल्ताफ के पैतृक गांव से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर हुई।

दाऊद का खास गुर्गा रियाज भाटी गिरफ्तार

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