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RSS के नाम की अमर सिंह ने अपनी करोड़ों की संपत्ति

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आजमगढ – अपने गांव के पैतृक सम्पत्ति मकान और जमीन अपने बयानों के जरिए हमेशा सुर्खियों में रहने वाले लालगंज तहसील के तरवां गांव निवासी सांसद अमर सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के हवाले की।

आज़मगढ़ जिले के लालगंज तहसील इसके लिए बुधवार को गए और संघ से जुड़े सेवा भारती के नाम रजिस्ट्री की। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 12 करोड़ की संपत्ति को अमर सिंह ने सेवा भारती के नाम रजिस्ट्री की। पहले यह संपत्ति लीज पर दी जाने वाली थी। लेकिन बाद में उन्होंने पूरी तरीके से रजिस्टर्ड करके आर एस एस को देने का फैसला किया ।

सेवा भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री ऋषि पाल सिंह ददवाल भी अमर सिंह के साथ उपस्थित रहेंगे। मिली जानकारी के मुताबिक अमर सिंह 23 फरवरी को कानपुर में होने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एवं प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। यह कार्यक्रम केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का निजी कार्यक्रम होगा। अमर सिंह द्वारा अपने पैतृक गांव की सम्मत्ति दान करने की चर्चा पूरे जिले में जोरों शोर से की जा रही है।

जयपुर सेंट्रल जेल में पाकिस्तानी कैदी की कैदियोंने पीट-पीटकर कर दी हत्या

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जयपुर – आज राजस्थान के केंद्रीय कारागृह जयपुर में कैदियों के संघर्ष में एक पाकिस्तानी कैदी की मौत हो गई। इस बारे में जानकारी देते हुए कारागृह के महानिरीक्षक रूपेंद्र सिंह ने बताया कि पाकिस्तानी कैदी शकरउल्ला की मध्यान्ह करीब एक बजे स्थानीय कैदियों से टीवी देखते समय आवाज बढ़ाने की बात को लेकर कहासुनी हो गई। इसके बाद हुए झगड़े में पाकिस्तान कैदी शकरउल्ला के सिर में पत्थर से गहरी चोट लग गई जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी, खुफिया अधिकारी एवं अन्य मौके पर पहुंचे और घटनास्थल की जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में चार कैदियों के नाम सामने आये हैं। यह पता नहीं चल सका कि पत्थर किसने मारा तथा कहां से आया। पाकिस्तान कैदियों से भी पूछताछ की जा रही है। श्री सिंह ने बताया कि शकरउल्ला पाकिस्तान के सियालकोट का निवासी था। उसे आतंकवादियों को धन मुहैया कराने के आरोप में 2010 में गिरफ्तार किया गया था और 2017 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

26 से सुप्रीम कोर्ट की संविधान बेंच अयोध्या मसले पर करेगी सुनवाई

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नई दिल्ली – 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच अयोध्या मसले पर सुनवाई करेगी। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोब्डे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर इस संविधान बेंच में शामिल हैं।

पिछले 29 जनवरी को इस मसले पर सुनवाई होनी थी, लेकिन जस्टिस एसए बोब्डे के उपलब्ध नहीं होने की वजह से सुनवाई टल गई थी। जस्टिस यूयू ललित ने पिछले 10 जनवरी को वकील राजीव धवन की ओर से एतराज जताए जाने के बाद खुद ही बेंच से हटने की बात कही थी। धवन ने कहा था कि 1995 में जस्टिस ललित बतौर वकील यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के लिए पेश हुए थे। जस्टिस यूयू ललित के सुनवाई से हटने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई टाल दी थी।

अयोध्या मामले में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अविवादित जमीन से यथास्थिति का आदेश वापस लेने की मांग की है। केंद्र सरकार ने 67 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था और सिर्फ 0.313 एक़ड़ जमीन पर विवाद है। बाकी जमीन को रिलीज करने के लिए याचिका दायर की गई है।

इस्माइल फारुकी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा है कि जो जमीन बचेगी उसे उसके सही मालिक को वापस करने के लिए केंद्र सरकार बाध्य है। इसमें 40 एकड़ जमीन राम जन्मभूमि न्यास की है। हम चाहते हैं कि इसे उन्हें वापस कर दी जाए| केंद्र सरकार ने कहा है कि जमीन वापस करते समय यह देखा जा सकता है कि विवादित भूमि तक पहुंच का रास्ता बना रहे। उसके अलावा जमीन वापस कर दी जाए ।

केंद्र सरकार ने याचिका में कहा है कि 2003 में जब सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर में शिलापूजन की अनुमति नहीं दी थी तो विवादित भूमि और अधिगृहित की गई 67 एकड़ की जमीन पर यथास्थिति बहाल रखने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने 1993 में इस जमीन का अधिग्रहण किया था। ।

भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली अखिल भारतीय हिन्दू महासभा और 7 रामभक्तों की याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट 26 फरवरी को ही सुनवाई करेगा। 27 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत के फैसले से अयोध्या मसले पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि इस्माइल फारुकी का मस्जिद संबंधी जजमेंट अधिग्रहण से जुड़ा हुआ था। इसलिए इस मसले को बड़ी बेंच को नहीं भेजा जाएगा। जस्टिस अशोक भूषण ने फैसला सुनाया था जो उनके और चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा का फैसला था। जस्टिस एस अब्दुल नज़ीर ने अपने फैसले में कहा कि इस्माईल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार के लिए बड़ी बेंच को भेजा जाए।

पुलवामा शहीदों के परिजनों के लिए भिखारी ने जमा किए लाखों रुपए

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अजमेर – देशभर के लोग पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों के परिजनों की आर्थिक मदद करने में आगे आ रहे हैं। लोग ऑनलाइन रुपए भेजने के साथ-साथ चेक भी सौंप रहे हैं। राजस्थान की एक महिला भिखारी का नाम भी इसी कड़ी में शामिल हो गया है। मंदिर के सामने भीख मांगकर पेट भरने वाली इस महिला भिखारी का यह योगदान खासे मायने रखता है।

इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार लम्बे समय से अजमेर के जय अम्बे माता मंदिर बजरंगगढ़ चौराहे पर देवकी शर्मा नाम की एक महिला भीख मांगा करती थी। बैंक ऑफ बड़ौदा के खाते में वह अपने रुपए संदीप गौड़ और अंकुर अग्रवाल के नाम से जमा करवाती थी। देवकी की इच्छा थी कि उसके मरने के बाद यह राशि किसी अच्छे कार्य के लिए इस्तेमाल की जाए।

पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर हुए अब तक के सबसे बड़े आतंकी हमले में राजस्थान के पांच जवानों समेत देश के 40 जवान शहीद हो गए थे। इस समय देशभर से शहीद परिवार की आर्थिक मदद की जा रही है। देवकी शर्मा की इच्छा के अनुरूप संदीप गौड़ व अंकुर अग्रवाल आदि ने मंगलवार को उसके बैंक में जमा 6 लाख 61 हजार 600 रुपए की डीडी अजमेर जिला कलेक्टर को पुलवामा हमले के शहीदों के परिजनों के लिए सौंप दी।

SBI ने पुलवामा शहीद जवानों का बकाया कर्ज किया माफ

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नई दिल्ली – पुलवामा में शहीद हुए 23 जवानों के परिवार को देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने बड़ी राहत दी है। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को हुए आतंकी हमले में शहीद हुए 23 सीआरपीएफ जवानों के बकाया लोन को एसबीआई ने माफ करने का ऐलान किया है। साआरपीएफ के 40 जवान इस आतंकी हमले में शहीद हो गए और पांच जख्मी हो गए थे। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने एक बयान में कहा, ‘इनमें से 23 सीआरपीएफ कर्मियों ने बैंक से कर्ज लिया हुआ था और बैंक ने तत्काल प्रभाव से बकाया कर्ज माफ करने का निर्णय किया है।’

बैंक की तरफ से कहा गया कि सभी सीआरपीएफ जवान बैंक के ग्राहक थे। उनका वेतन एसबीआई में आता था। इन खातों पर बैंक प्रत्येक रक्षा कर्मियों को 30-30 लाख रुपये का बीमा कवर उपलब्ध कराता है। बैंक की तरफ से कहा गया कि शहीद जवानों के आश्रितों को बीमा राशि जल्द से जल्द जारी करने को लेकर कदम उठाया जा रहा है। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि आतंकवादी हमले में हमेशा देश की सुरक्षा के लिए खड़े सुरक्षाकर्मियों का शहीद होना बहुत दु:खद और पीड़ादायी है।

पीएम मोदी 27 फरवरी को अमेठी में करेंगे AK-103 फैक्ट्री का शिलान्यास

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अमेठी – लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में सौगातों की बौछार करने पहुंच रहे हैं। पीएम मोदी आगामी 27 फरवरी को यहां मुंशीगंज स्थित एचएएल में स्थापित ऑर्डिनेंस फैक्ट्री में नई तकनीक से बनने वाली एके-103 का शिलान्यास करेंगे। प्रधानमंत्री साथ ही साथ एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और यही से अमेठी को कई सौगातें देंगे।

इस बारे में जानकारी देते हुए बीजेपी जिलाध्यक्ष दुर्गेश त्रिपाठी ने बताया कि प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर अंतिम रूप दिया जा रहा है। सभास्थल का भी चयन कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक अमेठी में जो विकास हुआ है, उसको और गति देने के लिए प्रधानमंत्री योजनाओ का पिटारा खोलेंगे।

आपको बता दें कि अब एके-103 अमेठी के मुंशीगंज स्थित आर्डिनेंस फैक्टरी में तैयार की जाएगी। इसके लिए ऑर्डिनेंस फैक्टरी में नई यूनिट लगाई जाएगी। यह प्रोडक्ट पूरी तरह से मेक इन इंडिया कार्यक्रम पर आधारित होगा। केंद्र की यूपी सरकार के दूसरे कार्यकाल में मुंशीगंज स्थित हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास स्थापित ऑर्डिनेंस फैक्टरी में जल्द ही एके-47 की तीसरी पीढ़ी की असाल्ट राइफल एके-103 तैयार की जाएगी।

इस संबंध में केंद्र की मोदी सरकार और रूस सरकार के करार को पूरा करने की जिम्मेदारी अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्टरी और रूस की कलाश्निकोव कंसर्न को दी गई है। करार में अमेठी की ऑर्डिनेंस फैक्टरी में नई यूनिट लगाने की बात कही गई है। यह भी तय हुआ है कि पहले चरण में 7।47 लाख एके-103 राइफल तैयार की जाएगी।

शांति के नारे लगाने से अब नहीं बनेगी बात : बाबा रामदेव

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रायपुर – बाबा रामदेव ने पुलवामा में हुए आतंकी हमले पर कहा कि शांति के नारे लगाने से अब बात नहीं बनेगी। पाकिस्तान के तीन टुकड़े कर देना चाहिए। जो बच्चो को भारत का नक्शा पढ़ाते हैं, अब वह जमीं हमारे कब्जे में आनी चाहिए।

ख़बरों के अनुसार रामदेव ने कहा कि अब आर-पार की लड़ाई ही आखिरी विकल्प है। पाकिस्तान की 70 सालों से नापाक हरकतों के चलते हमने 50 हजार से ज्यादा जवानों की शहादत दी। सरकार को अब कुछ न कुछ क्रांतिकारी कदम उठाने पड़ेंगे। राम मंदिर पर सारा राष्ट्र एक है। हमें बड़े मुद्दों पर एक होना चाहिए। राम के नाम पर बंटवारा नहीं होना चाहिए। मुसलमानों को भी कहना चाहिए कि हां राम मंदिर बनाओ।

तमिलवाडू में बीजेपी और अन्नाद्रमुक का गठबंधन

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चेन्नई – आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर तमिलनाडु में आज बीजेपी और अन्नाद्रमुक के गठबंधन का ऐलान कर दिया गया है। इस बारे में जानकारी देते हुए बीजेपी नेता पीयूष गोयल ने कहा कि उनकी पार्टी 21 असेंबली सीटों के उपचुनावों में अन्नाद्रमुक को समर्थन करेगी। इसके साथ ही उन्होने कहा केंद्र में ओपीसी और ईपीएस के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। जबकि केंद्र में मोदी जी के नेतृत्व में बीजेपी और अन्नाद्रमुक चुनाव लड़ेंगी।

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल दोपहर को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ई. के पलानीस्वामी से उनके घर में मुलाकात करने पहुंचे। गठबंधन का ऐलान दोनों के बीच बातचीत के बाद किया गया। शाम को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी चेन्नई पहुंच कर अन्नाद्रमुक नेताओं से मुलाकात करेंगे।

बीजेपी और अन्नाद्रमुक गठबंधन के अलावा पीएमके की ओर से भी अन्नाद्रमुक के साथ गठजोड़ का ऐलान हो सकता है। विजयकांत की डीएमडीके भी अन्नाद्रमुक से अलायंस का ऐलान कर सकती है। 2014 में तमिलनाडु की 39 सीटों में अन्नाद्रमुक ने 37 सीटों पर जीत हासिल की थी। पीएमके ने एक सीट पर जीत हासिल की थी। इस चुनाव में बीजेपी का अन्नाद्रमुक से गठबंधन नहीं था, लेकिन, जयललिता के निधन के बाद पैदा हुए राजनीतिक शून्य का फायदा उठाने के लिए बीजेपी बेताब है। जयललिता के निधन बाद अन्नाद्रमुक के विभिन्न गुटों में टकराव के हालात हैं। बीजेपी इसका फायदा उठा सकती है और यहां कुछ सीटें जीत सकती है।

दूसरी ओर अन्नाद्रमुक को डीएमके से कड़ी चुनौती मिल रही है। डीएमके कांग्रेस नेतृत्व वाले यूपीए का हिस्सा है। पिछले दिनों डीएमके चीफ करुणानिधि ने बेटे स्टालिन को पार्टी चीफ बनाया था। उनके निधन के बाद स्टालिन अब यूपीए के साथ हैं। डीएमडीके ने अन्नाद्रमुक से गठबंधन की बातचीत जारी रखने की पुष्टि की है। संभव है कि विजयकांत की पार्टी भी मंगलवार को भी अलायंस का ऐलान कर सकते हैं । बीजेपी डीएमडीके को भी लुभा रही ताकि अन्नाद्रमुक के साथ बड़ा गठबंधन बनाया जा सके।

वाईएसआर कांग्रेस में शामिल हुए टीडीपी सांसद रविंद्र बाबू

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अमरावती – आंध्र प्रदेश के अमलापुरम से सांसद पांडुला रविंद्र बाबू तेलुगू देशम पार्टी छोड़ने के बाद सोमवार को वाईएसआर कांग्रेस में शामिल हो गए। लोकसभा की अपनी सदस्यता से भी रविंद्र बाबू ने इस्तीफा दे दिया है। बाबू का पार्टी में वाईएसआर कांग्रेस के मुखिया जगनमोहन रेड्डी ने स्वागत किया। एक सप्ताह के भीतर एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) से ये दूसरे सांसद का इस्तीफा है। वाईएसआर कांग्रेस आंध्र प्रदेश में मुख्य विपक्षी दल है।

पूर्वी गोदावरी जिले में अमलापुरम (सुरक्षित) संसदीय क्षेत्र से रविंद्र बाबू सांसद चुने गए थे। आगामी लोकसभा चुनाव में अमलापुरम से बाबू का टिकट काटे जाने की चर्चा थी, जिसे उनकी पार्टी छोड़ने की वजह बताया जा रहा है। बाबू ने वाईएसआर कांग्रेस में आने को अपनी घर वापसी बताया है। वहीं बाबू ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू पर आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे पर कई बार पलटने और विशेष आर्थिक पैकेज के नाम पर राज्य की जनता को धोखा देने का आरोप लगाया है।

बीते हफ्ते तेदेपा के अनाकापल्ली से सांसद एम श्रीनिवास राव भी पार्टी से इस्तीपा देकर वाईएसआर में शामिल हो गए थे। चिराला से तेदेपा विधायक अमनची कृष्ण मोहन भी हाला ही में जगनमोहन रेड्डी की वाईएसआर में शामिल हुए हैं।

सरकार को 28,000 करोड़ रुपया देगा रिजर्व बैंक

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मुंबई – रिजर्व बैंक सरकार के खजाने में कुल कितनी रकम डिविडेंड के तौर पर देगा, इस पर माथापच्ची चल रही है, लेकिन रिजर्व बैंक ने जब तक ये तय नहीं होता, तब तक अंतरिम डिविडेंड के तौर पर 28 हजार करोड़ रुपये भारत सरकार के खाते में ट्रांसफर करने का ऐलान किया है।

रिजर्व बैंक बोर्ड की सोमवार को बैठक के बाद ये फैसला हुआ। इससे सरकार को फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य 3.4 फिसदी तक लाने में मदद मिलेगी। ये लगातार दूसरा साल है, जब रिजर्व बैंक अंतरिम डिविडेंड ट्रांसफर कर रहा है। रिजर्व बैंक का वित्तीय साल जुलाई से जून तक चलता है। इसलिए जुलाई या अगस्त में पैसा ट्रांसफर किया जाता है। 2017-18 में रिजर्व बैंक ने सरकार को 50 हजार करोड़ रुपए दिए थे, जिसमें 10 हजार करोड़ अंतरिम डिविडेंड के तौर पर दिए गए थे।

जानकारों के मुताबिक, इस रकम का इस्तेमाल सरकार फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य हासिल करने में करेगी, जो जीडीपी का 3.4 परसेंट होने का अनुमान है। मौजूदा वित्तीय साल (2018-19) में सरकार ने बैंक, फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट और रिजर्व बैंक से 74,140 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान लगाया है। पहले इससे 54,817 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान लगाया गया था।

डिविडेंड को लेकर रिजर्व बैंक और सरकार के बीच पहले जमकर ठनी रही है। यहां तक कि उर्जित पटेल के गवर्नर पद छोड़ने की वजह भी यही बताई गई। रिजर्व बैंक ने सबसे ज्यादा 65,896 करोड़ रुपए 2015-16 में दिए थे। लेकिन 2016-17 में ये घटकर सिर्फ 30,659 करोड़ रुपए रह गया था। डिविडेंड के अलावा सरकार और रिजर्व बैंक बोर्ड ये फॉर्मूला तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं कि कितना पैसा आरबीआई के पास रहना चाहिए। पूर्व रिजर्व बैंक गवर्नर बिमल जालान की अगुआई में एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है, जिसमें पूर्व डिप्टी गवर्नर राकेश मोहन भी हैं।