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चुनावी भाषा

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शायद सभी भाषाविद चुनाव के समय में “वनवास” पर जाने की इच्छा रखते होंगे । जिस प्रकार राजनेता भाषा और शब्दों का निम्नस्तरीय प्रयोग करते रहते हैं, वह वास्तव में भाषा और शब्दों का अपमान ही कहा जा सकता है । किसी भी राजनेता को थोडी सी भी लज्जा का अनुभव नहीं होता चुनावी काल में । मैं जीवन भर बोलने का ही काम करता रहा हूं, और अधिकृत रूप से अपने अनुभव के आधार पर कह सकता हूं कि कम बोलने से अधिक बोलना घातक हो जाता है । ज़्यादा बोलने के चक्कर में, व्यक्ति कुछ भी बोल जाता है और बाद में कभी कभी, कोई कोई व्यक्ति पछताता भी है । परंतु राजनेता हमेशा मुस्कुराते रहते हैं और कभी भी न पछताते हैं, न लज्जित होते हैं । जो लोग उनके वक्तव्यों पर हंसते और ताली बजाते रहते हैं उन्हें या तो केवल हंसने और ताली बजाने के लिये ही बुलाया जाता है, या वे कुछ समझे बिना ही केवल वेतन प्राप्त “नौकर” की भांति अपनी “ड्यूटी” पूरी करते रहते हैं । मैं न तो टेलीविज़न देखता हूं, न किसी चुनावी प्रचार सभा में ही उपस्थित रहता हूं, परंतु अनेक समाचार पत्र तो हर दिन पढता हूं । उनमें प्रकाशित वक्तव्यों पर मैं खीज उठता हूं । सबसे बडी बात यह होती है कि अगर कुछ लोग जाने-अनजाने या मजबूरी में हंस देते हैं और ताली बजा देते हैं, तो बोलने वाले की इच्छा कुछ और अधिक बोलने की होने लगती है और इसी इच्छा के चलते हुए वह बेवकूफ़ी भरी कुछ भी बात बोलने लगता है ।

यह बात किसी एक नेता पर लागू नहीं होती । सभी राजनीतिक नेता चुनावी काल में किसी भी दूसरे नेता के बारे में असभ्य और अशोभनीय भाषा और शब्दों का नाटकीय अंदाज़ में प्रयोग करने लगते हैं । किसी “मिमिक्री” कलाकार की तरह दूसरे नेता की भद्दी नकल करना इस चुनावी दौर में सभी नेतागण अपना सबसे आवश्यक कार्य समझने लगते हैं । अनेक बार ऐसे नेता आलोचना के शिकार होते रहते हैं और फ़िर मीडिया को दोष देते हुए कह देते हैं कि मेरे वक्तव्य को तोड-मरोड कर प्रस्तुत कर दिया गया है, या उनका दल अपनी सफ़ाई में कह देता है कि यह उस नेता का व्यक्तिगत मत है । मैं मानता हूं कि कुछ क्षण के लिये कुछ लोगों का ऐसी हरकतों से शायद मनोरंजन हो जाता हो, परंतु यह एक सचाई है कि अधिकांश नागरिक ऐसी बातों को पसंद नहीं करते और आपस में चर्चा करते हुए, इन हरकतों की निंदा भी करते रहते हैं ।

मैंने पंडित जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इन्दिरा गांधी, मोरारजी देसाई, पी0 वी0 नरसिंहाराव, अटल बिहारी वाजपेयी, और ड़ा0 मनमोहन सिंह को ऐसी निम्नस्तरीय भाषा का प्रयोग करते नहीं सुना । उस समय के अन्य लोकप्रिय और चर्चित नेता आचार्य कृपलानी, ड0 राम मनोहर लोहिया, मधु दंडवते, जार्ज फ़र्नांडिस, वी0 के0 कृष्णामेनन, कामरेड डांगे, मधु लिमये, भाई बर्धन आदि भी कभी निम्नस्तरीय भाषा और शब्दों का प्रयोग करते हुए नहीं देखे और सुने गए । इनमें से किसी को बोलते हुए नाटक करते हुए भी मैंने नहीं देखा ।

चुनाव आयोग या कोई सरकारी विभाग इस प्रकार की बढती हुई फ़ूहडता के विरुद्ध कोई कार्र्वाई क्यों नहीं करता, यह मुझे मालूम नहीं है; लेकिन “बोलना – एक कला” विषय पर अनगिनत व्याख्यान देश भर में देकर भाषा और शब्दों के प्रभावशाली प्रयोग के बारे में अनेक वर्षों से जो कुछ मैं लोगों को समझाता आया हूं, उसका कोई असर कम से कम आजकल के राजनेताओं पर तो नहीं पड सका है । वैसे भी राजनेता मेरा व्याख्यान सुनने के लिये समय कहां निकाल पाते हैं । मैंने अनेक बडे बडे नेताओं के लिये समय समय पर भाषण लिखे हैं और अनेक अन्य लोग भी भाषण लिखते रहे हैं, परंतु फ़िल्मी संवाद और नाटकीय प्रस्तुतिकरण से भरे भाषण कभी लिखे नहीं गये ।

हां, जबसे फ़िल्मी संवाद लेखकों को भाषण लिखने के लिये बुलाया जाने लगा, तबसे भाषा और शब्दों का निम्नस्तरीय प्रयोग कुछ अधिक बढ गया है । संयमित, सुश्राव्य, शालीन और सभ्य भाषा तथा शब्दों को राजनेता भूलने ही लगे हैं और इसीलिये शायद अपनी और अपने पद की मर्यादा को भूल कर बहुत ही निम्नस्तरीय बनने लगी है, आजकल के अधिकांश राजनेताओं की चुनावी भाषा ।

किशन शर्मा,

901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव,

प्रशांत नगर, नागपुर – 440015 ; मोबाइल-8805001042

अशोक वाजपेयी परिवार पुरस्कार 2018 से सम्मानित

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मुंबई : ‘कविता का काम भाषा और संस्कृति को समृद्ध करना है I आज जब भाषा के साथ भारी अनाचार हो रहा है, शब्द अपने अर्थ खो रहे हैं, ऐसे में कविता का महत्व और भी बढ़ जाता है I हर अच्छी कविता अपने समय से जूझती है और अपने समय की गवाही देती है I’ ये उद्गार हैं हिन्दी के वरिष्ठ कवि अशोक वाजपेयी के, जो उन्होने प्रतिष्ठित ‘परिवार पुरस्कार 2018’ से सम्मानित होने के तुरंत बाद व्यक्त किए I शनिवार 6 अप्रैल को चर्चगेट स्थित इंडियन मर्चेंट्स चेम्बर सभागृह में आयोजित एक भव्य समारोह में मराठी की प्रसिद्ध लेखिका और कला समीक्षक श्रीमती शांता गोखले ने शाल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और दो लाख रुपये का चेक भेंट कर उन्हें ‘परिवार पुरस्कार‘ से सम्मानित करते हुए कहा कि अशोक वाजपेयी ने हिन्दी कविता के साथ साथ भारतीय संस्कृति के संवर्धन और संरक्षण के लिए भी अनूठा कार्य किया हैI भोपाल में भारत भवन का निर्माण इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैI

समारोह के अध्यक्ष डॉ. नंदलाल पाठक ने कहा कि अशोक वाजपेयी का व्यक्तित्व बहुआयामी है, लेकिन वह विराटता के बोझ से रहित हैं I विशिष्ट अतिथि ‘नवनीत’ के संपादक विश्वनाथ सचदेव ने उनकी कविता की एक पंक्ति ‘शब्द कम क्यों हैं, भय ज्यादा क्यों है’ का उल्लेख करते हुए कहा कि अशोक वाजपेयी अपनी कविता में अपने समय को व्यक्त करने से नहीं हिचकते I इससे उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता जाहिर हो जाती है I अतिथि विशेष नवभारत टाइम्स के संपादक सुंदर चंद ठाकुर ने वाजपेयी को अपने समय का सर्वश्रेष्ठ कवि बताते हुए उनके सहज व्यक्तित्व की प्रशंसा कीI उन्होने ‘परिवार’ के महामंत्री सुरेश चन्द्र शर्मा द्वारा संपादित स्मारिका का विमोचन भी किया I

प्रमुख वक्ता के रूप में प्रसिद्ध कवि-आलोचक विजय कुमार ने कहा कि अशोक वाजपेयी के चिंतन में भाषा और संस्कृति के बड़े सवाल परिलक्षित होते हैं I उनकी कविता अतीत और भविष्य को वर्तमान से जोड़ने का काम करती हैI भाषाओं को बचाने की उनकी अपील संस्कृति के संरक्षण के प्रति उनकी चिंता को सामने लाती है I सम्मानीय अतिथि वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन सरल ने वाजपेयी को एक सम्पूर्ण और सजग कवि बताया I युवा कवि हरि मृदुल ने अपने एक लिखित आलेख में वाजपेयी की साठ वर्षों की सृजन यात्रा पर प्रकाश डालाI

कार्यक्रम का प्रारम्भ ‘परिवार पुरस्कार’ प्राप्त दिवंगत कवि विष्णु खरे और संस्था के आजीवन सदस्य विनोद गड़िया की स्मृति में दो मिनिट के मौन से हुआ I स्वागत भाषण किया ‘परिवार’ के कार्याध्यक्ष नंदकिशोर नौटियाल ने I कोषाध्यक्ष राकेश मुरारका, सांस्कृतिक मंत्री अशोक अग्रवाल, संयोजक राजीव नौटियाल, विजय सिंगड़ेदिया और राकेश शर्मा ने अतिथियों का पुष्प गुच्छ से स्वागत किया I अंत में महामंत्री सुरेश चन्द्र शर्मा ने आभार व्यक्त किया I कार्यक्रम का संचालन देवमणि पाण्डेय ने किया I इस अवसर पर नगर के अनेक कवि, लेखक, पत्रकार एवं विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे I

मोदी मॉब लिंचिंग के लिए याद किए जाएंगे : ओवैसी

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नई दिल्ली – ऑल इंडिया मजलिस- ए- इत्तेहादुल मुस्लमीन के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके कार्यकाल में हुई मॉबलिंचिंग की घटनाओं के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाएगा।

असम में कथित रूप से बीफ बेचने पर भीड़ द्वारा एक व्यक्ति के साथ मारपीट करने की खबर का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा, ये घटनाएं मोदी का पूरी जिंदगी भूत की तरह पीछा करेंगी क्योंकि प्रधानमंत्री होने के नाते वह ऐसी घटनाएं नहीं रोक नहीं पाए। उन्होंने इस कथित घटना को भयावह करार दिया और कहा कि 68 वर्षीय व्यक्ति के साथ मारपीट की गयी क्योंकि वह बीफ बेच रहा था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसारहैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने ‘प्रेस से मिलिए’ कार्यक्रम में कहा, ”… वह पिछले 35 सालों से इस धंधे में है। तब उसे पोर्क (सुअर का मांस) खाने के लिए बाध्य किया गया। ये बेढ़ब लोग, …। वे इंसान कहलाने लायक नहीं हैं…। वे जानवर हैं।”

उन्होंने कहा, ”नरेंद्र मोदी की धरोहर… सबसे बड़ी चीज, जिसके लिए मोदी याद किये जाएंगे , वह यह है कि उनके इस महान देश के प्रधानमंत्री रहने और सत्ता में उनके रहने की वजह से भीड़ द्वारा मारपीट और ऐसी घटनाएं बढीं।”

उन्होंने दावा किया कि भीड़ द्वारा मारपीट की घटनाओं में शामिल सभी लोग मोदी के समर्थक हैं और उनकी हिम्मत बढ़ गयी है क्योंकि उन्हें पता है कि उनके पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो उनकी विचारधारा का समर्थन करता है। लोकसभा चुनाव में हैदराबाद से फिर से जीतने की कोशिश में लगे ओवैसी ने आरोप लगाया, ” ‘लव जिहाद’, ‘घर वापसी’, ‘भीड द्वारा मारपीट’ और ‘गाय’ से जुड़ी घटनाएं मोदी के 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद हुईं।”

बीजेपी विधायक समेत पाँच की दंतेवाड़ा में नक्सली हमले में मौत

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दंतेवाड़ा – छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में एक नक्सली हमले में भारतीय जनता पार्टी के एक विधायक समेत पाँच लोगों की मौत हो गई है। छत्तीसगढ़ के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी डीआईजी पी सुंदरराज ने पत्रकारों को बताया कि हमले में दंतेवाड़ा के विधायक भीमा मंडावी, उनके ड्राइवर और तीन सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है।

घटना की जानकारी देते हुए दंतेवाड़ा के एसपी अभिषेक पल्लव ने बताया,”तीन बजे तक कैंपेन था, विधायक को 50 लोगों की लोकल फ़ोर्स सिक्योरिटी दी गई थी। तीन बजे वे बचेली में थे जहाँ से थाना प्रभारी के मना करने के बाद भी वो आगे निकल गए। कुआकोंडा से दो किलोमीटर पहले एक ब्लास्ट हुआ जिसमें विधायक और चार अन्य लोगों की मौत हो गई।”

एसपी ने कहा,”हमने सबसे कहा था कि तीन बजे के बाद कैंपेन बंद हो रहा है और तीन बजे के बाद केवल घर-घर जाकर शहरी इलाक़ों में ही कैंपेन करें, अंदरूनी इलाक़े में ना करें, पर उनका इलाक़ा देखा हुआ था, तो उन्होंने हल्के में लिया, और बीच में एक मेले में भी रुके जिससे उनका लोकेशन भी आउट हो गया।”

एसपी ने बताया कि आइडी सड़क के बीचोंबीच लगी थी जिससे बुलेटप्रूफ़ गाड़ी के परखच्चे उड़ गए और सभी लोगों की मौक़े पर ही मौत हो गई। धमाका दंतेवाड़ा-सुकमा रोड पर नकुलनार नाम की जगह पर हुआ जो इतना ज़बरदस्त था कि गाड़ी 200 मीटर दूर जा गिरी।

एसपी ने ये भी कहा कि दोनों तरफ़ से लगभग आधे घंटे तक भारी गोलीबारी भी हुई। विधायक के पीछे वाली गाड़ी पर भी हमला हुआ जिसमें पाँच लोग थे। इन पाँच लोगों का फ़ोन लग रहा है और लौटाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि धमाका जितना बड़ा था उससे ऐसा अनुमान है कि आईडी की मात्रा 50 किलोग्राम से ज़्यादा ही होगी। दंतेवाड़ा के ज़िलाधिकारी तोपेश्वर वर्मा ने बीबीसी को बताया कि श्यामगिरी में साप्ताहिक बाज़ार लगा था जिसमें चुनाव प्रचार के लिए विधायक भीमा मंडावी गए थे। दंतेवाड़ा में 11 अप्रैल को पहले चरण का चुनाव होना है। हमला चुनाव प्रचार के आख़िरी दिन हुआ।

थम गया लोकसभा चुनाव के पहले चरण का चुनाव प्रचार

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नई दिल्ली – लोकसभा चुनाव के पहले चरण के लिये 11 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिये चुनाव प्रचार मंगलवार शाम थम गया। पहले चरण में 20 राज्यों की 91 लोकसभा सीटों के लिये मतदान होगा।

चुनाव आयोग द्वारा पहले चरण के मतदान के लिये 18 मार्च को अधिसूचना जारी होने के बाद प्रचार अभियान जोर शोर से शुरु हो गया था। आयोग ने 17वीं लोकसभा के गठन के लिये सात चरण में होने वाले चुनाव का कार्यक्रम दस मार्च को घोषित किया था। चुनाव आयोग के अनुसार पहले चरण के लिए 91 सीटों पर 1279 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। आयोग द्वारा अधिसूचना के अनुसार पहले चरण के मतदान वाली 91 सीटों पर सुबह सात बजे मतदान शुरु होगा। इनमें से कुछ सीटों पर शाम चार बजे तक, कुछ पर पांच बजे तक और कुछ सीटों पर छह बजे तक मतदान होगा। निर्वाचन नियमों के अनुसार मतदान खत्म होने के समय से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार थम जाता है। इसके मुताबिक जिन सीटों पर शाम चार बजे तक मतदान है, उन सीटों पर मंगलवार शाम चार बजे से प्रचार थम गया। इसी प्रकार पांच और छह बजे तक मतदान वाली सीटों पर आज शाम पांच बजे और छह बजे से प्रचार पर पाबंदी होगी। उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर सुबह सात बजे से शाह छह बजे तक और बिहार की चार सीटों पर सुबह सात बजे से शाम चार बजे तक मतदान की समय सीमा को देखते हुये उत्तर प्रदेश की आठ सीटों पर मंगलवार शाम छह बजे और बिहार की चार सीटों पर शाम चार बजे चुनाव प्रचार रुक जायेगा।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में महाराष्ट्र में नागपुर सीट से केंद्रीय मंत्री नितिन जयराम गडकरी व चंद्रपुर से गृह राज्यमंत्री हंसराज गंगाराम अहीर का मुकाबला होना है, वहीं अरुणाचल प्रदेश वेस्ट से गृह राज्यमंत्री किरेन रिजिजू के अलावा उत्तराखंड की अल्मोडा से अजय टमटा, यूपी की गजियाबाद से विदेश राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह, गौतमबुद्धनगर से पर्यटन मंत्री महेश शर्मा, बागपत से जल संसाधन राज्यमंत्री डा। सत्यपाल सिंह की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। जबकि जिन पूर्व केंद्रीय मंत्रियों की अग्नि परीक्षा इस पहले चरण में होनी हैं, उनमें भाजपा के डा। संजीव बालियान व डी। पुरंदेश्वरी, तेदेपा के अशोक गणपति राजू व पान्नबा लक्ष्मी, रालोद के चौधरी अजित सिंह, कांग्रेस की रेणुका चौधरी व वीसेंट एच पाला शामिल हैं। इसके अलावा उत्तराखंड में दो पूर्व मुख्यमंत्रियों कांग्रेस के हरीश रावत व भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक के भविष्य का फैसला भी इस पहले चरण के चुनाव में तय होगा।

लोकसभा चुनाव के लिए पहले चरण की चुनावी जंग में उतरे 1279 प्रत्याशियों में जहां 213 आपराधिक पृष्ठभूमि के हैं तो वहीं वहीं 401 करोड़पति प्रत्याशियों पर भी विभिन्न दलों ने दांव आजमाया है। दिलचस्प बात है कि इस पहले चरण की इस चुनावी जंग में भाजपा से कहीं ज्यादा कांग्रेस ने दागियों व कुबेरों को प्रत्याशी बनाया है। मसलन कांग्रेस पार्टी 69 करोड़पति प्रत्याशियों को चुनावी मैदान में लाकर पहले पायदान पर है, जबकि भाजपा ने 65 अमीरों को चुनावी मैदान में उतारा है। इसी प्रकार कांग्रेस ने 35 ऐसे प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतरा है, जिनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। जबकि भाजपा के ऐसे 30 प्रतयाशी चुनावी मैदान में हैं।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण में होने वाले 1279 प्रत्याशियों में सर्वाधिक 411 प्रत्याशियों की आयु 25 से 40 साल तक है, जिनमें 105 प्रत्याशी 25 से 30 साल और 306 प्रत्याशी 31 से 40 साल के बीच की उम्र के हैं। पहले चरण की 91 सीटों पर 388 प्रत्याशियों की उम्र 41 से 50 साल, 283 नेताओं की उम्र 51 से 60 साल, 155 सियासी योद्धा 61 से 70 साल और 17 प्रत्याशी 71 से 80 साल की उम्र में चुनावी जंग का स्वाद ले रहे हैं। जबकि दो प्रत्याशी 81 से 100 के बीच चुनावी जंग में हैं तो 10 ऐसे प्रत्याशी भी हैं जिन्हों अपनी उम्र ही नहीं बताई है।

प्रमुख राज्य जहां की सीटों पर होगा मतदान
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर
बिहार: औरंगाबाद, गया, नवादा, जमुई
जम्मू-कश्मीर: बारामूला, जम्मू
महाराष्ट्र: वर्धा, रामटेक, नागपुर, भंडारा-गोंदिया, गढ़चिरौली-चिमूर, चंद्रपुर, यवतमाल-वाशिम
पश्चिम बंगाल: कूच बिहार, अलीपुरद्वार
छत्तीसगढ़: बस्तर
ओडिशा: कालाहांडी, नबरंगपुर, बेरहामपुर, कोरापुट
असम: तेजपुर, कलियाबोर, जोरहट, डिब्रूगढ़, लखीमपुर
मणिपुर: बाहरी मणिपुर
त्रिपुरा: त्रिपुरा पश्चिम

अब देश के मुसलमान भी महबूबा और फारुख अब्दुल्ला को मुंह तोड़ जवाब दें

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नई दिल्ली – कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती और फारुख अब्दुल्ला ने जो देश विरोधी बयान दिया है उसका मुंह तोड़ जवाब अब देश के मुसलमानों को भी देना चाहिए। देश का कोई नागरिक जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं कभी नहीं चाहेगा कि उनका अपना वतन हिन्दुस्तान मिट जाए। यह भी कोई नहीं चाहेगा कि कश्मीर भारत से अलग हो जाए। कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने के संबंध में महबूबा का कहना है कि यदि ऐसा हुआ तो हिन्दुस्तान मिट जाएगा।

वहीं फारुख का कहना है कि कश्मीर आजाद हो जाएगा। असल में यही तो पाकिस्तान चाहता है कि कश्मीर अलग हो जाए और हिन्दुस्तान मिट जाए। यानि सिर्फ मुस्लिम राष्ट्र पाकिस्तान रहे। भारत में इन दिनों लोकसभा चुनाव का दौर चल रहा है। पहले चरण का मतदान 11 अप्रैल को होगा। चुनाव में ऐसे दल भी भाग ले रहे हैं जिनके नेता महबूबा और अब्दुल्ला के समर्थक हैं।

देश के नागरिकों के पास यह सही मौका है कि जब हिन्दुस्तान को मिटाने वालों और उनके समर्थकों को सबक सिखाया जा सकता है। चूंकि लोकतंत्र में वोट ही बुलेट है, इसलिए इस बार वोट का उपायोग बुलेट की तरह ही करना चाहिए। वोट के माध्यम से देश विरोधी नेताओं को सबक सिखाना चाहिए। देश के नागरिक यह अच्छी तरह समझ लें कि महबूबा और फारुख परिवार की नीतियों से चार लाख हिन्दुओं को कश्मीर से पीट पीट कर भगा दिया गया। अब जब कश्मीर में एक तरफा माहौल है तो हिन्दुस्तान को मिटाने की बात की जा रही है। सवाल उठता है कि कश्मीर से 370 हटने से देश के आम मुसलमान का क्या नुकसान होगा? अनुच्छेद 370 के लागू रहने पर क्या यूपी, बंगाल, बिहार आदि राज्यों में रहने वाला मुसलमान कश्मीर में बस सकता है?

जब देश के आम नागरिक को अनुच्छेद 370 से कोई लाभ नहीं है तो फिर लागू रखने का क्या फायदा है? जब हम धर्म निरपेक्षता की बात करते हैं तो फिर कश्मीर में देश के आम लोग क्यों नहीं रह सकते? क्या देश में ऐसी सरकार नहीं होनी चाहिए जो कश्मीर में हिन्दुओं को वापस बसाए? महबूबा और अब्दुल्ला खानदान कश्मीर की आजादी की बात करते हैं, उन्हें जरा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुसलमानों के हालात देख लेने चाहिए। पाक कब्जे वाले कश्मीर के मुसलमान भूखों मरने की स्थिति में है, जबकि हमारे कश्मीर के मुसलमानों को अनेक रियायतें दी जा रही हैं। यदि महबूबा और फारुख जैसे नेता कश्मीर के युवाओं को भड़काना छोड़ दें, तो कश्मीर फिर से स्वर्ग बन जाएगा। कश्मीर की तरक्की तभी है, जब हिन्दु मुसलमान भाईचारे के साथ रहे। केन्द्र सरकार को चाहिए कि महबूबा और फारुख जैसे नेताओं की सुरक्षा तत्काल छीन ली जाए। जब ये नेता हिन्दुस्तान को ही मिटाने में लगे हुए हैं तो फिर इन्हें सरकारी सुरक्षा और सुविधा क्यों दी जा रही है?

दिल्ली स्थित जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने इस बार लोकसभा चुनाव के मौके पर मतदान को लेकर सकारात्मक पहल की है। 9 अप्रैल को बुखारी ने एक बयान जारी कर कहा है कि इस बार मतदान के लिए मुसलमानों से कोई अपील नहीं की जाएगी। मुसलमान अपने विवेक से वोट दें। आमतौर शाही इमाम किसी राजनीतिक दल को वोट देने की अपील करते हैं, लेकिन इस बार जामा मस्जिद की ओर से सकारात्मक पहल की गई है।

लोगों के अकाउंट में 15 लाख रुपये आएंगे ऐसा कभी नहीं कहा :राजनाथ सिंह

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नई दिल्ली – 2019 लोकसभा चुनावो को लेकर बयानों का सिलसिला तेज होता जा रहा है। ऐसे में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि भाजपा ने 2014 में लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान कभी भी लोगों के बैंक खातों में 15 लाख रुपए ट्रांसफर करने का वादा नहीं किया था।

केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा- कभी नहीं कहा कि 15 लाख रुपये (लोगों के खातों में) आएंगे। हमने कहा था कि हम काले धन के खिलाफ कार्रवाई करेंगे और काले धन के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह हमारी सरकार थी जिसने काले धन को लेकर एसआईटी बनाई। गौरतलब है कि राजनाथ का बयान ऐसे समय में आया है जब भारत के लोगों को लुभाने के लिए विपक्षी दल भाजपा को झूठे वादे करने के लिए आलोचना कर रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि 2014 लोकसभा चुनावों के पहले भी ऐसे झूठे वादे किए गए थे।गौरतलब है कि विदेशों में जमा काला धन लाना 2014 के चुनावों में से एक प्रमुख मुद्दा था और भाजपा ने विदेशी बैंकों में जमा काले धन पर नकेल कसने का वादा किया था। इस साल के घोषणापत्र में समानांतर अर्थव्यवस्था पर नकेल कसने का जिक्र है। वहीं विपक्ष खासतौर से कांग्रेस पार्टी 2019 लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा पर आरोप लगा रही है कि काले धन को वापस लाने का वादा बीजेपी ने पूरा नहीं किया है।

अजय देवगन न्यासा को ट्रोल करने वालों पर बरसे

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फिल्म अभिनेता अजय देवगन ने बेटी न्यासा की ड्रेस को लेकर ट्रोल किए जाने पर अपनी चुप्पी तोड़ी है। अजय ने कहा कि 14 साल की बच्ची के साथ जिस तरह से बर्ताव किया गया और जो कुछ उसे लेकर लिखा गया वो हैरान करने वाला है। उन्होंने कहा कि न्यासा ने शॉर्टस पहने थे, इसके बावजूद जो लिखा गया वो ठीक नहीं था। अजय देवगन ने कहा कि ट्रोल करने वाले ये तक ख्याल नहीं करते हैं कि उसकी उम्र क्या है और इसका उसके जहन पर क्या असर होगा।

हाल ही में अजय देवगन और काजोल की बेटी न्यासा को सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल किया गया था। एक लंबी शर्ट पहनकर वो घर से निकली थीं जिस पर ड्रेसिंग सेंस को लेकर वो ट्रोलर के निशाने पर आ गईं। अजय देवगन ने अपने एक इंटरव्यू में बेटी को इस तरह ट्रोल करने पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह की ट्रोलिंग से न सिर्फ न्यासा बल्कि पूरी फैमिली प्रभावित होती है। न्यासा अभी सिर्फ 14 साल की है और मुझे लगता है कि कभी-कभी लोग गरिमा भूल जाते हैं। न्यासा ने लॉन्ग ड्रेस के अंदर शॉर्ट्स पहने थे। लॉन्ग ड्रेस होने की वजह से वो दिखाई नहीं दिए और लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। ये बिल्कुल गलत बर्ताव है।

अजय देवगन का कहना है कि बच्चों पर इस तरह से हमला ठीक नहीं। मैं तो ऐसे लोगों से यहीं कहूंगा कि हमारे बच्चों को अकेला छोड़ दें। बच्चों को अपना स्पेस चाहिए। बच्चे हर समय घर से तैयार होकर नहीं निकलना चाहते हैं ये बहुत ही खराब बात है कि ऐसी चीजें हो रही हैं।

अजय देवगन की बेटी न्यासा की कुछ समय पहले तस्वीरें सामने आई थीं जिसमें वो लंबी सी शर्ट पहने हुए थीं। इन तस्वीरों पर सोशल मीडिया पर कहा जाने लगा कि नीचे बिना कुछ पहने वो ऐसे ही घूम रही हैं। इस तस्वीर को काफी वायरल किया गया। अब अजय देवगन ने कहा है कि न्यासा ने एक लॉन्ग शर्ट पहनी हुई थी, शर्ट की लंबाई के कारण उनकी शॉर्ट्स दिख नहीं रही थी और इस तस्वीर पर उल्टा-सीधा कहा गया। अजय देवगन और काजोल के दो बच्चे बेटा युग और बेटी न्यासा हैं। न्यासा बड़ी हैं और वो फिलहाल सिंगापुर में अपनी पढ़ाई कर रही हैं।

पीएम मोदी की विदेश यात्राओं का एअर इंडिया ने जारी किए बिल

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नई दिल्ली – देश की सरकारी एयरलाइंस एअर इंडिया ने पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा पिछले पांच साल में की गई विदेशी यात्राओं का बिल जारी किया है। एअर इंडिया ने अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की आधिकारिक विदेश यात्राओं के लिए 443.4 करोड़ रुपये का बिल सरकार को थमाया है। पीएमओ के अनुसार , पीएम द्वारा की गई पांच और विदेशी यात्राओं पर होने वाले खर्च का एयरलाइन को भुगतान होना बाकी है। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं के लिए आधिकारिक एअर इंडिया एयरलाइन है।

एअर इंडिया के विमान को मई 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद की 44 देशों की अंतरराष्ट्रीय यात्राओं पर भेजा गया है। इन यात्राओं का एयरलाइन पीएमओ को बिल भेजती है। तब सरकार द्वारा पैसा एअर इंडिया को हस्तांतरित किया जाता है। प्रधानमंत्री के इस महीन संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा पर जाने की उम्मीद है। ऐसा माना जा रहा है कि, यह उनके इस कार्यकाल की अंतिम आधिकारिक यात्रा हो सकती है। वे यूएई में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार प्राप्त करने के लिए जा सकते हैं। बता दें कि, उन्होंने दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई है। पीएम मोदी ने पिछले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अधिक यात्राएं की हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, पीएम मोदी की विदेश यात्राओं का कुल खर्च पिछले पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के 2009-2014 के कार्यकाल के दौरान की गई विदेश यात्राओं से 50 करोड़ रुपए कम है। पूर्व पीएम मनमोहन सिंह के 2009-2014 के पांच साल के कार्यकाल में 38 अधिकारिक विदेश यात्राएं की थी। जिसमें कुल 493.22 करोड़ रुपए खर्च किया गया है। मोदी की विदेश यात्राओं की कम लागत (कुल मिलाकर और औसतन) की एक वजह यह है कि वह अक्सर एक ही यात्रा पर कई देशों में गए हैं।

पीएम के रूप में पदभार संभालने के बाद मोदी ने कहा था कि वह एक विदेशी यात्रा के दौरान कई स्थलों की यात्रा पर विश्वास करते हैं। जबकि मनमोहन सिंह ने एक ट्रिप में ज्यादातर एक या दो स्थानों की यात्रा की। मोदी ने 2015 में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, रूस, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान समेत छह से अधिक देशों की एक ही ट्रिप में यात्राएं की हैं। उनकी ऐसी 16 यात्राएं हैं जिसमें वे एक साथ कई देशों की यात्राएं की थी।

पीएम मोदी के विदेशी दौरों की लागत कम होने का एक और कारण यह भी है कि छह अन्य अंतर्राष्ट्रीय यात्राओं में उन्होंने भारतीय वायु सेना (IAF) के बिजनेस जेट का उपयोग किया था। जिससे कोई अतिरिक्त खर्च नहीं हुआ। मोदी भारतीय वायुसेना के बोइंग 737 बिजनेस जेट से नेपाल, बांग्लादेश, ईरान और सिंगापुर गए थे। जिनका उपयोग साल भर वीवीआईपी यात्रा के लिए किया जाता है। जबकि सिंह के कार्यकाल के दौरान एअर इंडिया इंडिया का उपयोग बांग्लादेश और सिंगापुर जैसे करीबी स्थलों के लिए भी किया गया था।

हिंदू और मुसलमान को आपस में लड़वाकर कांग्रेस ने की राजनीति : मनोज तिवारी

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रुद्रपुर – भोजपुरी स्टार और दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने रुद्रपुर में जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हिंदू और मुसलमान को आपस में लड़वाकर राजनीति की है।

उन्होंने आह्वान किया कि देश विकास के पथ पर तेजी से दौड़ रहा है। इसलिए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को जितवा कर केंद्र में एक बार फिर नरेंद्र मोदी की सरकार बनाएं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसारमनोज तिवारी ने कहा कि नरेंद्र मोदी भारत का बेटे हैं।

भ्रष्टाचारियों के साथ देश के दुश्मनों को मुहतोड़ जवाब के लिए मोदी का एक बार फिर प्रधानमंत्री बनना जरूरी है। पाकिस्तान को घर में घुस कर सेना ने आईना दिखाया तो कांग्रेस के पेट में दर्द होने लगा और वह सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगने लगी। मनोज तिवारी ने देश की जनता से देश मे पल रहे जयचंदों को बेनकाब करने के लिए पांच साल और भाजपा को मौका देने का आह्वान किया।

किच्छा के मुख्य बाजार में भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट के समर्थन में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए मनोज तिवारी ने भाजपा प्रत्याशी अजय भट्ट के पक्ष में मतदान करने की अपील की।