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सांसद नवनीत कौर राणा शामिल हो सकती हैं BJP में

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नई दिल्ली – पहली बार सांसद बनी नवनीत कौर राणा देश की सबसे खूबसूरत सांसद मानी जाती हैं। वो अमरावती से निर्दलीय सांसद बनी हैं। अब खबर है कि वो BJP में शामिल हो सकती हैं। लोकमत की खबर के अनुसार राणा ने हाल ही में BJP अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात भी की है।

राणा तेलुगू फिल्म इंडस्ट्री की जानी मानी एक्ट्रेस रही हैं। ​नवनीत के अभिनय और खूबसूरती को देखकर महाराष्ट्र के विधायक रवि राणा का दिल उन पर आ गया और एक सामूहिक विवाह समारोह में दोनों ने शादी कर ली। शादी के बाद ही साल 2011 में नवनीत कौर ने अपने फिल्मी सफर को अलविदा कह दिया।

राजनीति से जुड़े परिवार में शादी के होने के कारण, एक्ट्रेस ने भी साल 2014 में राजनीति में कदम रखा और एनसीपी के टिकट पर चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और दूसरी बार हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की।

34 वर्षीय अभिनेत्री और निर्दलीय उम्मीदवार ने शिवसेना नेता और दो बार के सांसद आनंदराव अडसुल को 36,000 से अधिक मतों से हराया। अभिनेत्री नवनीत कौर की जीत को चारो तरफ काफी सराहा जा रहा है।

वीवीआईपी कल्चर (भाग 2)

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नेता जी के साथ अनगिनत वाहनों का काफ़िला होना आवश्यक होता है अन्यथा लोगों को पता कैसे चलेगा कि कोई नेता जी आये हैं, या जा रहे हैं । एक मुख्य मंत्री जी ने केवल कुछ दिन तक सामान्य विमान में किसी भी आसन पर बैठकर यात्रा की और उसका भरपूर प्रचार-प्रसार किया । लोगों ने प्रशंसा करनी शुरू करदी कि कितना सीधा-सरल मुख्य मंत्री है । परंतु कुछ समय बाद ही जो सरकारी विशेष विमान से यात्रा करने की शुरूवात की, तो आजतक सामान्य विमान में यात्रा करना ही भूल गये । प्रधान मंत्री, उप राष्ट्रपति, राष्ट्रपति जैसे अति प्रमुख विशिष्ट नेता या प्रमुख की किसी शहर में यात्रा के पहले सैकडों वाहनों को उन रास्तों पर पूर्वाभ्यास के लिये दौडाया जाता रहता है, जिन रास्तों पर उन्हें जाना है या प्रस्त्वावित है । यह दुरुपयोग क्यों किया जाता है, यह या तो नेतागण ही जानते होंगे या वे चापलूस अधिकारी, जो अपना सारा सरकारी और सार्वजनिक काम छोडकर केवल इसी अनावश्यक काम म्कें व्यस्त होते रहते हैं । एक व्यक्ति के स्वागत के लिये अनगिनत अधिकारी हवाई अड्डे पर उपस्थित रहते हैं और फ़िर एक व्यक्ति के लिये 70-80 वाहनों का काफ़िला उन सडकों पर तेज़ रफ़्तार से दौडाया जाता है, जिनपर अन्य नागरिकों के वाहनों के आवागमन पर बहुत देर पहले से ही पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है । सभी सम्बन्धित पुलिस अधिकारी और पुलिस कर्मी, उनके काफ़िले के गुज़रते ही तुरंत कहीं गायब हो जाते हैं । मैंने एक बार एक मुख्य मंत्री जी की पत्नी के व्यक्तिगत दौरे के समय भी उनके काफ़िले में 36 कारों को गिना था और इस बारे में मैंने सम्बन्धित मुख्य मंत्री जी को पत्र भी लिखा था । उसके बाद, स्वयं उन मुख्य मंत्री महोदय के साथ भी केवल 7 या 8 ही वाहनों को ही काफ़िले में देखा जाता रहा । हवाई जहाज़ में हर नेता को पहली पंक्ति में विशिष्ट आसन ही चाहिये होता है । उस नेता का हल्का और छोटा सा ‘हैंड बैग” भी उठाने के लिये प्रस्थान के हवाई अड्डे और आगमन के हवाई अड्डे पर दो-तीन सेवक तैयार खडे रहते हैं । जो नेतागण, नेता बनते ही, अपने हल्के से छोटे से हैंड बैग का बोझ भी स्वयं नहीं उठा पाते, वे देश और नागरिकों की समस्याओं का भारी भरकम बोझ कैसे उठा सकते हैं, यह नेतागण ही सोचकर बताएं । मैं आजतक समझ नहीं सका हूं कि जिन देशवासियों ने उन नेताओं की भिखारी जैसी दयनीय हालत देखकर उनको अपना वोट देकर चुना, उन्हीं से उन नेताओं को किस प्रकार का खतरा पैदा होने लगता है । मेरा स्पष्ट मत है कि यह सब अनावश्यक दिखावा किया जाता है, क्योंकि किसी नेता को इन सब सुविधाओं के लिये अपने पास से एक रुपया भी खर्च नहीं करना पडता । करोडों रुपये कमाने और जमा करने वाले अति अमीर नेतागण कम से कम अपने लिये किये जाने वाले सारे खर्च तो स्वयं की घोषित-अघोषित आय से कर ही सकते हैं । ऐसा होने लगे तो मैं देखना चाहूंगा कि कितने नेतागण ये सारी सुविधाएं प्राप्त करने का साहस दिखा पायेंगे । जीवन भर मुफ़्त में यात्रा करने, हज़ारों-लाखों रुपये की अनावश्यक “पेंशन” प्राप्त करते रहने, और अनेक अन्य सुविधाओं का लाभ उठाते रहने के आदी ये नेतागण क्या कभी सामान्य नागरिक की तरह जीवन जीने का प्रयास कर सकेंगे । बैंक की लाइन में लगना, सामान खरीदने के लिये बाज़ार जाना, प्रोपर्टी टैक्स या बिजली का बिल या पानी का बिल भरने की पद्धति भी नहीं मालूम होगी अब तो इन नेताओं को । यातायात सिग्नल पर रुकना नेताओं की शान के खिलाफ़ होता है । उनके वाहन पर से भले ही “लाल बत्ती” हटा दी गई हो, और उनके वाहनों में लगे “सायरन” भले ही बंद कर दिये गये हों, परंतु उनके आगे-पीछे चलने वाले वाहनों में तो पीली, नीली, लाल बत्ती लगी ही होती है और वे वाहन सायरन का दुरुपयोग हमेशा करते ही रहते हैं । मैं किसी की प्रशंसा और किसी की आलोचना नहीं कर रहा हूं, परंतु यह सर्वविदित सत्य है कि पहले के समय में अनेक बहुत बडे नेतागण भी आम लोगों से सहज ही मिल लिया करते थे । एक प्रधान मंत्री जी ने तो एअरफ़ोर्स के विशेष विमानों या सरकारी विशेष विमानों के स्थान पर सामान्य नागरिक की तरह से सामान्य विमानों में यात्रा करना शुरू कर दिया था, जिस प्रथा को उनके पद से हटते ही तुरंत बंद कर दिया गया था । भले ही प्रधान मंत्री बार बार कहते रहें, परंतु क्या उनके किसी स्थान पर जाने के पहले से लेकर वापस लौटने तक अति विशेष सुरक्षा प्रबंध और सारा दिखावा नहीं होता रहता है ? क्या उन्हें यह जानकारी नहीं है कि उनके और उनके मतदाताओं-नागरिकों के बीच अनावश्यक दूरी बढाई जाती रहती है ? क्या वास्तव में कभी नेतागण सामान्य नागरिक का जीवन जीने के लिये तैयार हो सकेंगे और क्या कभी नेताओं द्वारा छोडी और तोडी जा सकेगी, इस वी0वी0आई0पी0 कल्चर में जीने की प्रथा ?

किशन शर्मा, 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव,

प्रशांत नगर, नागपुर – 440015;

मोबाइल – 8805001042

इसी वर्ष शुरू हो जाएगा राम मंदिर का निर्माण – सुब्रह्मण्यम स्वामी

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मथुरा: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सदस्य प्रो। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने यहां कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण इसी वर्ष शुरू हो जाएगा और उसके बाद मथुरा व काशी में भगवान कृष्ण व शिव के मंदिरों के निर्माण का नंबर आएगा।

स्वामी आपातकाल लागू होने की 44वीं बरसी पर यहां एक निजी कॉलेज में लोकतंत्र रक्षक सेनानी समिति द्वारा मंगलवार को आयोजित सेमिनार को संबोधित करने पहुंचे थे।

उन्होंने कहा, ‘दरअसल राम मंदिर निर्माण के मसले में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाकर ही गलती की। जब वह जमीन सरकार के ही नियंत्रण में है तो उसे राम मंदिर के लिए दे देना चाहिए था। मंदिर निर्माण का रास्ता आसानी से खुल जाएगा। मैंने सरकार को भी यही रास्ता सुझाया है। यह एक सही और आसान उपाय है।’

उन्होंने कहा, ‘जो जमीन विवादित है, उस पर बाद में निर्णय आता रहेगा कि कौन उसका मालिक है। इस साल राम मंदिर का निर्माण जरूर शुरू होगा। चाहे कुछ भी हो जाए। साल में अब भी छह माह बाकी हैं। सरकार जमीन दे दे, तो काम भी तुरंत ही शुरू हो जाएगा। सभी कुछ प्री-फैब्रिकेटेड है। यानि मंदिर में लगने वाले पत्थर और डिजायन तैयार हैं। दो वर्ष में राम मंदिर बन जाएगा।’

स्वामी ने कहा, ‘इसके बाद अब मथुरा में स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि और उससे जुड़े शाही ईदगाह विवाद को समाप्त किया जाना है। यह अयोध्या के मामले से अलग है। यह बहुत आसान है। यहां तो ईदगाह पहले से ही एक एग्रीमेंट के तहत वजूद में है।’

कर्मचारियों पर भड़के कुमारस्वामी

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बेंगलुरु – मुख्यमंत्री एचडी कुमार स्वामी को कर्नाटक के रायचूर जिले में येरमरूस थर्मल पावर स्टेशन के कर्मचारियों द्वारा अपनी मांगों की सूची सौंपने के लिए काफिले का रास्ता रोकना नागवार गुजरा। कर्मचारियों का एक समूह जब कुमारस्वामी के पास पहुंचा तो वह उन पर भड़क गए। मुख्यमंत्री अपने ‘ग्राम वास्तव्य’ (गांव प्रवास) कार्यक्रम के लिए प्रदेश के रायचूर में थे।

मुख्यमंत्री ने थर्मल कर्मचारियों से कहा, ‘आपने नरेंद्र मोदी को वोट किया है और काम आप मुझसे करवाना चाहते हैं । आप मुझसे चाहते हैं कि मैं आपका आदर करूं । क्या मुझे आप पर लाठीचार्ज कराना चाहिए । यहां से जाइए ।’ मुख्यमंत्री के इस रवैये से हर व्यक्ति हैरान रह गया । इसके बाद मुख्यमंत्री वहां से चले गए ।

बाद में कुमारस्वामी ने एक चैनल से कहा कि उन्होंने कर्मचारियों की समस्या के समाधान के लिए 15 दिन का वक्त मांगा था लेकिन उन्होंने सड़क जाम कर दी और इससे उन्हें गुस्सा आ गया । उन्होंने पूछा कि अगर प्रधानमंत्री का काफिला रोका जाएगा तो क्या कोई स्वीकार करेगा ।

कुमारस्वामी ने कहा कि यह सरकार सहिष्णु है लेकिन यह अक्षम नहीं है और इसे पता है कि स्थिति से कैसे निपटा जाए । इस बीच कर्नाटक भाजपा ने मुख्यमंत्री के इस रवैये की निंदा की है और कहा है कि अगर उन्होंने लोगों से माफी नहीं मांगी तो राज्यव्यापी प्रदर्शन किया जाएगा ।

भाजपा के विधान पार्षद एवं प्रवक्ता एन रवि कुमार ने कहा है कि लगता है कि मुख्यमंत्री यह भूल गए हैं कि वह राज्य के 6।5 करोड़ लोगों के मुख्यमंत्री है न कि जद(एस) के कुछ कार्यकर्ताओं और विधायकों के। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की यह कार्रवाई लोकतंत्र के खिलाफ है ।

‘मोदी सरकार कर रही है भारतीय क्रिकेट टीम का भगवाकरण’

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नई दिल्ली – World Cup 2019 में टीम इंडिया भारत को विश्वकप दिलाने की जद्दोजहद में लगी है। वहीं दूसरी तरफ टीम इंडिया की जर्सी को लेकर देश में राजनीति अपने चरम पर है। महाराष्ट्र से कांग्रेस पार्टी के मुस्लिम विधायक और समाजवादी पार्टी के मुस्लिम विधायक ने भारतीय टीम के नारंगी रंगी की जर्सी का विरोध किया है।

कांग्रेस विधायक एमए खान ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में सबकुछ भगवाकरण करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने टीम इंडिया की जर्सी का भगवाकरण किया है। मोदी सरकार देश को भगवाकरण की तरफ ले जा रही है। टीम इंंडिया 30 जून को विश्व कप मैच में इंग्लैंड के खिलाफ नारंगी जर्सी में खेलेगी।

इससे पहले महाराष्ट्र राज्य विधानसभा में मुस्लिम विधायकों ने टीम इंडिया की नारंगी जर्सी की निंदा की। समाजवादी पार्टी के विधायक अबू आसिम आज़मी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इस फैसले के पीछे है और देश भगवाकरण को बढ़ावा दे रही है।

उन्होंने कहा कि एक मुसलमान ने भारतीय तिरंगे को डिजाइन किया था। तिरंगे में दो और रंग मौजूद हैं, लेकिन नारंगी ही क्यों चुना गया? अबू आजमी ने कहा कि यह बेहतर होता कि टीम इंडिया की जर्सी तिरंगे पर आधारित होती। वहीं पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक नसीम खान ने कहा कि मोदी सरकार भगवा राजनीति खेल रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश में जब से मोदी सरकार आई है, तब से वह भगवा राजनीति खेल रही है। तिरंगे का सम्मान किया जाना चाहिए और राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। लेकिन यह सरकार हर चीज का भगवाकरण करना चाहती है।

गौरतलब है कि आईसीसी ने इस विश्वकप के लिए एक नया नियम जारी किया है। नियमानुसार, मेजबान इंग्लैंड को छोड़कर 2019 विश्व कप में खेलने वाली सभी टीमों को दो अलग-अलग रंगों की जर्सी में खेलना होगा। इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम और इंग्लैंड की जर्सी का रंग नीला है। इसलिए, टीम इंडिया के खिलाड़ी केवल एक मैच के लिए अपनी जर्सी नारंगी रंग की पहनेंगे।

धोनी का सौरव गांगुली ने बचाव किया

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लंदन – भारत के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने दिग्गज विकेटकीपर-बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी का बचाव किया है। धोनी विश्व कप में अफगानिस्तान के खिलाफ खराब पारी खेलने के कारण आलोचना झेल रहे हैं। धोनी ने साउथैम्प्टन में हुए मैच में अफगानिस्तान के खिलाफ 52 गेंदों पर केवल 28 रन बनाए और पूरी टीम 224 ही बना पाई। हालांकि, भारतीय टीम मैच जीतने में कामयाब रही।

सचिन तेंदुलकर समेत कई खिलाड़ियों ने इस धीमी पारी के कारण धोनी की आलोचना की, लेकिन गांगुली मानते हैं कि ऐसा सिर्फ एक बार हुआ है और टूर्नामेंट के बाकी बचे मैचों में वह टीम के बहुत काम आएंगे।

‘डीएनए’ ने गांगुली के हवाले से बताया, “धोनी बहुत अच्छे बल्लेबाज हैं और अफगानिस्तान के खिलाफ खराब प्रदर्शन के बावजूद वह इस साल विश्व कप में निश्चित रूप से खुद को साबित करेंगे। वह एक केवल एक मैच में खराब खेले।”

धोनी की आलोचना करने के कारण धोनी के प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर तेंदुलकर के खिलाफ नाराजगी जताई। इस विश्व कप में अब तक चार मैचों में धोनी ने 90 रन बनाए हैं।

वीवीआईपी कल्चर (भाग 1)

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प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी अनेक बार यह कह चुके हैं कि राजनेताओं, विशेषकर विधायक, सांसद, मंत्री गण को वी0वी0आई0पी0 कल्चर का त्याग करना चाहिये और सामान्य सेवक बनकर जन जन के हित में काम करना चाहिये । परंतु, क्या इस कथन या सुझाव का कहीं कोई असर दिखाई देता है ? केवल और केवल चुनाव के दौरान कुछ दिन के लिये पैदल चलने, गंदी-संकरी गलियों में गंदे बच्चों को नकली हंसी के साथ गोदी में उठाने, सभी गरीब लोगों के पैर छूने, और हाथ जोडते हुए वोट की भीख मांगने का नाटक करने में माहिर राजनेतागण, चुनाव जीतकर सत्ता में आते ही अकडकर उन्हीं लोगों से दूर हो जाते हैं, जिनके वोट ने उन्हें सत्ता दिलवाई । चारों तरफ़ सुरक्षा कर्मियों का घेरा, घर और दफ़्तर में चाटुकारों की फ़ौज, सहायकों और सेवकों की भारी भीड, और बडी बडी देशी-विदेशी कारों के काफ़िले में नेता जी अपने वास्तविक “मालिकों” से दूरी बनाते चले जाते हैं । उनका जन्मदिन आने वाला हो या विवाह की वर्षगांठ का दिवस आने वाला हो; उनके सहायकगण अनगिनत अमीर लोगों को फ़ोन पर याद दिलाना शुरू कर देते हैं । उनके बच्चे से लेकर कुत्ते तक के जन्मदिन धूमधाम से मनाये जाते हैं । मतलब परस्त स्वार्थी लोग अपने अपने हित में कुछ आदेश प्राप्त कर लेने की जुगाड में नकली हंसी चेहरे पर दिखाते हुए, भारी भरकम भेंट लेकर हाज़िर हो जाते हैं । दिवाली, दशहरा, नया वर्ष, क्रिसमस, ईद आदि त्यौहारों पर भी कीमती भेंट चढाने का सिलसिला जारी रखा जाता है । कार ड्राइवर, साहब की कार की वातानुकूलन मशीन कम से कम एक-दो घंटे पहले ही शुरू कर देते हैं, ताकि साहब को एक क्षण भी गर्मी न लगे । उनके कार्यालय की वातानुकूलन मशीन भी साहब आयें या न आयें, सुबह से ही शुरू कर दी जाती है । साहब को कब पानी, ठंडा पेय, चाय, मेवा, फ़ल, भोजन आदि दिया जाना है, इसकी पूरी जानकारी सभी सेवकगण और सहायकगण को होती ही है और उन सबको इसकी तैयारी हर क्षण रखनी ही पडती है । चाहे घर हो, दफ़्तर हो, या कोई भी जगह हो, जहां भी नेता जी को जाना हो, वहां पहले से पूरी तैयारी कर ली जाती है । बन्दूकधारी अनेक सुरक्षा कर्मियों की भीड में नेता जी वास्तव में अनेक बार दिखाई भी नहीं देते । बिना सुरक्षा कर्मियों के कोई नेता कहीं जाता ही नहीं । वे ही लोग, जिनके पैर छूकर, जिनके सामने हाथ जोडकर, जिनसे वोट की भीख मांगकर ये नेतागण “नेता” बनते हैं, उन्हीं से इन नेतागणों को “जान का खतरा” महसूस होने लगता है । चूंकि एकबार नेता बनने के बाद आमतौर पर पांच वर्ष तक उन्हें सारी सुख सुविधायें मुफ़्त में मिलती रहती हैं, इसलिये वे हर क्षण इन सुविधाओं का दुरुपयोग करने में व्यस्त होते रहते हैं । मंत्रालय की अधिकृत कारें, विभागों की अनगिनत कारें, अनेक स्वार्थी लोगों के वाहन उनकी सेवा में लगे रहते हैं और नेता जी स्वयं, उनके परिवार के सभी सदस्य, उनके रिश्तेदार, उनके मित्र, उनके सहायक, उनके सेवक, यहां तक कि उनके कुत्ते भी इन वाहनों का भरपूर दुरुपयोग करते ही रहते हैं । विदेश के अनेक प्रधान मंत्री भी सुरक्षा कर्मियों के बिना, स्वयं साइकिल पर बाज़ार और अपने कार्यालय तक चले जाते हैं, परंतु भारत के नेतागण एक कदम भी पैदल नहीं चल सकते । मैंने स्वयं देखा था कि भोपाल रेलवे स्टेशन पर एक बडे भारी भरकम मंत्री जी की सुविधा के लिये उनको लाने वाली रेलगाडी को दो नम्बर के स्थान पर एक नम्बर के प्लेटफ़ार्म पर लाया गया, और प्लेटफ़ार्म पर जहां उनका डिब्बा आने वाला था, वहीं सारे उच्च अधिकारी उनकी विशेष कार के साथ उपस्थित थे । मैंने जिज्ञासावश एक अधिकारी से इस बारे में पूछ लिया तो उसने बताया कि पिछली बार कार प्लेटफ़ार्म पर नहीं लाई गई थी तो कुछ अधिकारियों के तबादले कर दिये गये थे और एक अधिकारी को निलम्बित कर दिया गया था । एक नम्बर प्लेटफ़ार्म पर आने वाली रेलगाडी को दो नम्बर पर भेज दिया गया और सभी बच्चे, युवा, वृद्ध, अपंग, महिला और पुरुष यात्री अपने अपने भारी सामान के साथ एक नम्बर से दो नम्बर की तरफ़ भागने के लिये मजबूर कर दिये गये । केवल एक दिन के लिये भी कोई “नेता” बन गया, तो जीवन भर मुफ़्त में यात्रा करने, पेंशन की भारी रकम हर महीने प्राप्त करने, और कभी कभी सरकारी आवास में रहने तक की सारी सुवाधाओं का भरपूर लाभ उठाने से कोई चूकता नहीं । दूसरों की हर छोटी-बडी सुविधा पर सकारात्मक निर्णय लेने से पहले लम्बी बहस करने वाले नेतागण, स्वयं अपने वेतन और भत्तों तथा सुविधाओं को बढाने आदि की मांग को एक क्षण में बिना किसी विरोध के मंज़ूर कर देते हैं । उस समय कोई भी दल किसी प्रकार का विरोध नहीं करता ।

 

किशन शर्मा, 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव,

प्रशांत नगर, नागपुर – 440015;

मोबाइल – 8805001042

इन तिथियों को करें गणपति पूजा, होगी हर मनोकामना पूरी

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हमारी संस्कृति देव पूजा में विश्वास करती है। शास्त्रों के अनुसार देव पूजा एक प्रकार से सद्गुणों उत्तम सामर्थ्यों और उन्नति के गुप्त तत्वों की पूजा है। वास्तव में हमारे धर्मग्रंथों में वर्णित देव शक्तियां गुप्त रूप से संसार में नाना प्रकार के परिवर्तन और उत्कर्ष उत्पन्न करती हैं। उपद्रव भी इन्हीं शक्तियों द्वारा कारित होता है। मनुष्य के जीवन में उत्पन्न दुःख, सुख, रोग, शोक, भय आदि उपद्रवों के शमन के लिए इन्हीं देव शक्तियों की पूजा करने का विधान हमारे शास्त्रों में दिया गया है।
वेदों में पूजा शब्द के अर्थ की योजना करते हुए कहा गया है – पूर्जायते अनेन इति पूजा। यह पूजा शब्द की व्युत्पत्ति है। पूः का अर्थ है भोग और फल की सिद्धि। वह जिस कर्म से संपन्न होती है उसका नाम पूजा है। सकाम भाव वाले को अभीष्ट भोग अपेक्षित होता है और निष्काम भाव वाले को अर्थ – पारमार्थिक ज्ञान।
अभीष्ट की प्राप्ति के लिए यदि भली भांति वार, नक्षत्र आदि का विचार करके अनुष्ठान हुआ हो तो वह तत्काल फलदायी होता है।
जिस देवता की पूजा करनी हो उसके लिए कुछ विशेष तिथियों का निर्धारण किया गया है। आज हम आपको विघ्न विनाशक भगवान गणेशजी की पूजा की सर्वोत्तम और शीघ्र फलदायी तिथियों के बताते हैं।
विद्येश्वर संहिता के अनुसार प्रत्येक शुक्रवार को, श्रावण और भाद्रपद माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को, और पौष मास में शतभिषा नक्षत्र के आने पर भगवान् गणेश की विधिवत पूजा करनी चाहिए। इसके अलावा प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को की हुई महागणपति की पूजा उत्तम भोगरूपी फल देनेवाली होती है। चैत्र मास में चतुर्थी तिथि को की हुई पूजा सभी प्रकार के शोक का नाश करने वाली होती है। भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि को जब सूर्य सिंह राशि पर स्थित हों तब उस समय की हुई पूजा मनोवांछित फलप्रद होती है। कृत्तिकायुक्त शुक्रवार को भगवान गजानन गणेश की पूजा करने तथा अन्नदान करने से मनुष्य के भोग्य पदार्थों में वृद्धि होती है।

रद्द होगी मेहुल चोकसी की नागरिकता, लाया जाएगा वापस

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मुंबई – पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में आरोपी मेहुल चोकसी (60 वर्ष) को जल्द ही भारत वापस लाया जाएगा। वह अभी तक एंटिगुआ में रह रहा था, लेकिन वहां के प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन ने बयान दिया है कि वह जल्द ही मेहुल चोकसी की नागरिकता रद्द करने वाले हैं। उनके मुताबिक, भारत की ओर से लगातार इसको लेकर दबाव बनाया जा रहा था। इसी के साथ ही मेहुल चोकसी को भारत लाने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।PNB घोटाले के तहत नीरव मोदी और मेहुल चोकसी पर 13 हजार करोड़ रुपये के गबन का आरोप था। ये मामला 2018 में सामने आया था, तभी से ही विपक्ष इस मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरे हुए है।

मेहुल चोकसी के मामले में भारत अभी इंतजार करेगा। सरकारी सूत्रों की मानें तो भारत अभी इस इंतजार में है कि पहले एंटिगुआ की सारी कानूनी प्रक्रिया खत्म हो जाए। उसके बाद ही अपने स्तर पर प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। भारत को अभी तक नागरिकता रद्द होने पर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। एंटिगुआ के प्रधानमंत्री के मुताबिक, मेहुल चोकसी को पहले यहां की नागरिकता मिली हुई थी। लेकिन अब इसे रद्द किया जा रहा है और भारत प्रत्यर्पित किया जा रहा है। हम किसी भी ऐसे व्यक्ति को अपने देश में नहीं रखा जाएगा, जिसपर किसी भी तरह के आरोप लगे हों।

प्रधानमंत्री गैस्टन ब्राउन के अनुसार, अब एंटिगुआ में मेहुल चोकसी पर किसी तरह का कानूनी रास्ता नहीं बचा है, जिससे वह बच निकले इसलिए उसकी भारत वापसी लगभग तय है। उन्होंने कहा कि अभी मेहुल चोकसी से जुड़ा पूरा मामला कोर्ट में है, इसलिए हमें पूरी प्रक्रिया का पालन करना होगा। एंटिगुआ के प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने इसको लेकर भारत सरकार को पूरी जानकारी दे दी है। हालांकि, मेहुल चोकसी को सभी कानूनी प्रक्रिया पूरा करने का समय दिया जाएगा। जब उसके पास कोई भी कानून ऑप्शन नहीं बचेगा, तो उसे भारत प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा।

बता दें कि मेहुल चोकसी और नीरव मोदी के मसले पर मोदी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर रही थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के दौरान लगातार ये मुद्दा उठाया था। लेकिन अब अगर मेहुल चोकसी की वापसी होती है तो ये मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली बड़ी कामयाबी मानी जा सकती है।

मेहुल चोकसी को कई बार सरकार, एजेंसियों और अदालत की तरफ से समन भेजा गया था, लेकिन उसने हर बार आने से मना किया। मेहुल चोकसी का तर्क था कि अगर वह हिंदुस्तान आएगा तो उसकी लिंचिंग कर दी जाएगी। हालांकि, अब जब एंटिगुआ ने ही उसकी नागरिकता रद्द करने का फैसला कर लिया है तो उसे भारत वापस आना ही होगा।

ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले आदेश पर ट्रंप ने किए हस्ताक्षर

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वाशिंग्टन – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए। उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों से ईरान के सर्वोच्च नेता और अन्य अधिकारी अमेरिकी क्षेत्र में किसी भी बैंकिंग सुविधा के लाभ नहीं उठा पाएंगे। ईरान ने कहा था कि उसने बृहस्पतिवार को क्षेत्र में अमेरिका के एक ड्रोन को मार गिराया गया है जिसके कुछ दिन बाद ट्रंप ने नए प्रतिबंध लगाने का कदम उठाया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को जवाबी सैन्य हमले के आदेश को वापस ले लिया था । ट्रंप ने अपने ओवल दफ्तर में पत्रकारों के साथ संक्षिप्त बातचीत में कहा कि हम ईरान या किसी भी देश के साथ संघर्ष नहीं चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि मैं आपसे यह कह सकता हूं कि हम ईरान को परमाणु हथियार कभी भी हासिल नहीं करने देंगे। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने जिस कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, वो ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाएगा और ईरान के सर्वोच्च नेता तथा अन्य अधिकारियों को बैंकिग सुविधा के लाभ लेने से रोकेगा। उन्होंने वित्त मंत्री स्टीवन म्नूचिन की मौजूदगी में आदेश पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने कहा कि मेरे ख्याल से हमने बहुत संयम दिखाया है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम भविष्य में भी सयंम दिखांएगे। उन्होंने कहा कि हम तेहरान पर दबाव बढ़ाना जारी रखेंगे। यह पूछे जाने पर कि अमेरिकी ड्रोन पर ईरानी हमले के जवाब में ये प्रतिबंध लगाए गए हैं तो राष्ट्रपति ने कहा कि आप संभवत: इसे उसमें शामिल कर सकते हैं, लेकिन होने जा रहा था। मैं न्यूयॉर्क में रहने वाले कई ईरानी लोगों को जानता हूं। वे शानदार लोग है।

गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को कहा था कि ईरान के साथ वार्ता के लिए कोई पूर्व शर्त नहीं है, सिवाय इसके कि वह उसे परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे। सत्ता में आने के बाद ट्रम्प ने अमेरिका को ईरान परमाणु समझौते से हटा लिया था और तेहरान पर प्रतिबंध लगा दिए थे जो भारत जैसे देशों को ईरान से तेल खरीदने से रोकते हैं। एनबीसी के ममीट द प्रेसफ में जब ट्रंप से सवाल किया गया था कि क्या ईरान के साथ बातचीत के लिए कोई पूर्व शर्त है, तो उन्होंने कहा था कि जहां तक मेरा सवाल है, कोई पूर्व शर्त नहीं है। चक टोड ने ट्रंप से सवाल किया कि क्या आप कहीं पर भी बात करेंगे?

ट्रम्प ने कहा था कि देखिये, आपके (ईरान के) पास परमाणु हथियार नहीं हो सकते। यदि आप (ईरान) इसके बारे में बात करना चाहते हैं, तो अच्छा है। अन्यथा आप आने वाले लंबे समय में कमजोर होती अर्थव्यवस्था में रह सकते हैं। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका पश्चिम एशिया में एक मानव रहित ड्रोन को कथित तौर पर मार गिराने के जवाब में ईरान पर हमला करने की कगार पर था। लेकिन उन्होंने आधे घंटे पहले अपनी अनुमति वापस ले ली। ट्रंप ने कहा था कि हमले से पहले उन्हें बताया गया कि हमले की तैयारी है। ट्रंप ने कहा था कि हम हमले के लिए तैयार हैं। मैंने पूछा कितने लोग मारे जाएंगे, ईरानी? उन्होंने कहा, श्रीमान लगभग 150 और मैंने इसके बारे में एक सेकंड के लिए सोचा और कहा, आप जानते हैं कि उन्होंने क्या किया है? उन्होंने एक मानवरहित ड्रोन, या विमान, आप जो भी कहें, उसे मार गिराया है। यहां हम 150 लोगों की मौतों की बात कर रहे हैं। मैं नहीं समझता कि यह सही होगा ।