POCSO में फौरन गिरफ्तारी के नियम, फिर बृजभूषण सिंह को क्यों मिल रही छूट?

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कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृजभूषण सिंह पर FIR दर्ज हुए भी 10 दिन बीत चुके हैं। नाबालिग समेत 7 महिला रेसलर्स ने उनके खिलाफ यौन शोषण का केस दर्ज कराया है। इनमें POCSO जैसी गंभीर धाराएं हैं, जिनमें आरोपी को फौरन गिरफ्तार करने के नियम हैं। इसके बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है।

बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और सेक्शुअल हैरेसमेंट के केस दर्ज हुए हैं। नाबालिग से होने वाले सेक्शुअल हैरेसमेंट को रोकने के लिए पॉक्सो एक्ट कानून बना है। ये कानून काफी सख्त है। इस केस में आरोपी को पुलिस बेल नहीं दे सकती है। पुलिस सबसे पहले आरोपी को गिरफ्तार करती है और उसके बाद जांच आगे बढ़ाती है।

यूपी के पूर्व DGP विक्रम सिंह के मुताबिक पुलिस गिरफ्तारी से पहले आरोप की सत्यता की जांच कर सकती है। प्राइमरी जांच में पुलिस को आरोप सही लगता है तो आरोपी को गिरफ्तार होने से कोई नहीं रोक सकता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता के मुताबिक पॉक्सो कानून में केस दर्ज होने के बाद अपराधों की जांच और उनके ट्रायल के लिए विशेष व्यवस्था बनी है। ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के बाद जमानत मिलने में भी मुश्किल होती है। FIR और गिरफ्तारी के लिए CrPC में कानूनी व्यवस्था बनाई गई है।

केस दर्ज करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में अरनेश कुमार और बिहार सरकार के मामले में गाइडलाइन बनाई थीं, लेकिन बृजभूषण शरण सिंह के मामले में उनका पालन नहीं हुआ। सुप्रीम कोर्ट में मामला जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज की है। CrPC की धारा-41 और 42 के तहत पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।