दक्षिण चीन सागर पर किए गए वादे से पीछे हट रहा है चीन: अमेरिका

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वॉशिंगटन। अमेरिका का कहना है कि विवादित दक्षिण चीन सागर के एक मानव निर्मित द्वीप पर चीन की सैन्य मौजूदगी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस क्षेत्र के बारे में दिए बयान पर सवाल खड़े करती हैं। विदेश विभाग की प्रवक्ता एलिजाबेथ ट्रूडो ने संवाददाताओं से कहा कि इस तरह की दोहरी निर्माण गतिविधि से क्षेत्र में तनाव बढ़ा है।
उन्होंने चीन की पिछले सितंबर में राष्ट्रपति शी के दिए उस बयान का अनुपालन करने की इच्छा पर भी सवाल उठाया जिसमें कहा गया था कि चीन अपनी बाहरी चौकियों का सैन्यीकरण करने की कोई इच्छा नहीं रखता। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्रीय सहयोगियों के उस भरोसे को कमतर करती हैं कि चीन विवादित मुद्दों का समाधान जबरन बल प्रयोग का तरीका अपनाए बिना ही करना चाहता है।
एलिजाबेथ हाल में वॉशिंगटन स्थित एक विचारक मंडल की ताजा रिपोर्ट के संदर्भ में पूछे गए सवाल का जवाब दे रही थी। इस रिपोर्ट में उपग्रह से खींची गई तस्वीरों के जरिए यह बताया गया है कि चीन ने दक्षिण चीन सागर स्थित अपने मानव निर्मित द्वीप पर सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं।
उन्होंने कहा कि दक्षिण चीन सागर पर अपना अपना दावा पेश करने वाले सभी देशों से गुजारिश है कि वे विवादित क्षेत्र में धरती पर कब्जा करना और वहां नई सैन्य सुविधाओं का विस्तार करना बंद करें और इसकी जगह 12 जुलाई को आई अंतरराष्ट्रीय अदालत की व्यवस्था के जरिए पेश अवसर का लाभ उठाकर आपसी समझदारी से विवाद का समाधान करें।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक इंटरनेशनल स्टडीज के अनुसार ताजा उपग्रह तस्वीरें दिखाती हैं कि चीन ने इस कृत्रिम द्वीप पर विमानों को रखने वाले हैंगर बना लिए हैं। एलिजाबेथ ट्रूडो ने कहा कि इस तरह की गतिविधियां चीन द्वारा जताई उस इच्छा पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं कि वह राष्ट्रपति शी के इस संबंध में दिए बयान का पालन करने की मंशा रखता है।