बारिश से लामबगड़ बना आफत, बदरीनाथ धाम में फंसे 140 यात्री

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बदरीनाथ हाईवे दूसरे दिन बुधवार को भी नहीं खुला। लामबगड़ में भूस्खलन थमने को नहीं है। हाईवे बंद होने से आवाजाही पूरी तरह ठप है। 50 यात्रा वाहन और 140 तीर्थयात्री अभी भी बदरीनाथ धाम में ही फंसे हैं।
हालांकि 40 तीर्थयात्री लामबगड़ से बैनाकुली तक पैदल और वहां से वाहन की मदद से बदरीनाथ धाम में मत्था टेकने पहुंचे। उधर, सीमा क्षेत्र में सेना के वाहनों की आवाजाही सुचारु हो गई है। बीआरओ ने जोशीमठ-मलारी हाईवे पर तमक गांव के पास समीप वैकल्पिक मार्ग बनाकर वाहनों की आवाजाही शुरू कराई है।
बुधवार को लामबगड़ के साथ ही मैठाणा भूस्खलन जोन में भी चार घंटे हाईवे अवरुद्ध रहा। मैठाणा गदेरे से भारी मात्रा में मलबा आने से वाहनों की आवाजाही ठप रही। सुबह नौ बजे बीआरओ की मशीनों ने हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए खोला।
बीआरओ के कमान अधिकारी मेजर रुपज्योति दास का कहना है कि लामबगड़ क्षेत्र में रुक-रुककर हो रही बारिश से वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। यहां चट्टान से मलबा और बोल्डरों के छिटकने का सिलसिला जारी है।
लामबगड़ गांव से बदरीनाथ को जाने वाला पैदल रास्ता भी फिसलन भरा बना हुआ है, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को आवाजाही में दिक्कतें हो रही हैं। उधर सीमांत क्षेत्र में बुधवार को वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। बीती छह अगस्त को तमक गदेरे के उफनाने से मलारी हाईवे पर पुलिया क्षतिग्रस्त हो गई थी, जिससे सीमा क्षेत्र का संपर्क टूट गया था।
बीआरओ के कमांडर कर्नल आर सुब्रमण्यम ने बताया कि तमक गदेरे में भारी मात्रा में मलबा आने से हाईवे को पूरी तरह से सुचारु करने में समय लगेेगा। फिलहाल वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कर वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी गई है।