दिल्ली हिं’सा पर बोले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, कहा “हमारी भी कुछ सीमाएं हैं..”

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सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे ने सोमवार को दिल्ली हिं’सा पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी शांति चाहता है, लेकिन उसकी भी कुछ सीमाएं हैं। बोबडे ने अपनी यह बात याचिकाओं पर फ़ैस’ला सुनाने के बीच कही।

दरअसल दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए विवादित बयानों पर वि’पक्षी नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कराई थी। इन याचिकाओं में भाजपा नेताओं जैसे अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा, कपिल मिश्रा और अभ’य वर्मा के खि’लाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की थी।

बता दें कि दिल्ली हिं’सा में कम से कम 42 लोगों की मौ’त हुई है और 200 से अधिक लोग घा’यल हुए हैं। सांप्रदायिक हिं’सा के 10 पी’ड़ितों द्वारा दायर याचिका का अविलंब सुनवाई के लिये प्रधान न्यायाधीश बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया, जिसने कहा कि इसपर बुधवार को सुनवाई होगी।

अधिवक्ता कोलिन गोंजाल्विस का इन याचिकाओं को अविलंब सूचीबद्ध करने के अनुरो’ध पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, “हम यह नहीं कह रहे हैं कि लोगों को मरना चाहिये। इस तरह के दबाव से निपटने के लिये हम सक्षम नहीं हैं। चीजों को होने से नहीं रोक सकते। हम एहतियाती राहत नहीं दे सकते। हम अपने ऊपर एक तरह का दबाव महसूस करते हैं।”

जब गोंजाल्विस ने कहा कि अदालत स्थिति को और बिगड़ने से रोक सकती है तो सीजेआई ने कहा कि “जिस तरह का हमपर दबा’व है, आपको जानना चाहिये कि हम उससे नहीं निपट सकते हैं।” आगे उन्होंने कहा कि “हम भी समाचार पत्र पढ़ते हैं और टिप्पणियां ऐसे की जाती हैं, मानो अदालत ही जिम्मेदार है।” साथ ही कहा कि “हम भी शांति चाहेंगे, लेकिन आप जानते हैं कि कुछ सीमाएं हैं।”

उच्च न्यायालय की हिं’सा से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई पर गोंजाल्विस ने कहा कि उच्च न्यायालय ने करीब छह सप्ताह के लिये सुनवाई स्थगित कर दी है और यह नि’राशाजनक है। उन्होंने शीर्ष अदालत से याचिका को मंगलवार को सुनवाई के लिये सूचीबद्ध करने का अनुरो’ध करते हुए कहा, “जब लोग अब भी मर रहे हैं, तो उच्च न्यायालय क्यों नहीं इसपर अविलंब सुनवाई कर सकता है।” बुधवार को पीठ ने याचिका की सुनवाई पर कहा कि ” हम देखेंगे की हम क्या कर सकते हैं।”

पीड़ितों की ओर से दायर याचिका में दिल्ली के बाहर के अधिकारियों को लेकर एक विशेष जांच दल गठित करने और इसकी अगुवाई ऐसे ‘ईमानदार और प्रतिष्ठित’ अधिकारी को सौंपने की मांग की गई है। वहीं अधिवक्ता उत्सव सिंह बैंस ने दायर याचिका में हिं’सा रोकने में विफल रहे पुलिस अधिकारियों के खि’लाफ विभागीय कार्रवाई करने का अनुरो’ध किया है।