चुनाव आयो’ग के इस फ़ै’सले पर अम’ल होने के बाद मत’दाता कहीं से भी कर सकते हैं मतदान..

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अब आप दूसरे राज्य में रहकर भी अपने रा’ज्य में हो रहे चुनाव के लिए मतदान कर सकेंगे। क्योंकि चुनाव आयोग ई-वोटिंग के विक’ल्पों पर विचार कर रहा है। चुनाव आयोग दूरस्थ मतदान की सुवि’धा मुहैया कराने के विक’ल्पों को विक’सित करने जा रहा है।

इस परियोजना से जु’ड़े एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए कहा कि ई-वोटिंग मतदान का प्रयो’ग सबसे पहले 2010 में गुजरात के स्था’नीय निकाय चुनाव में किया गया था। लेकिन इस प्रक्रिया में मतदाता पहचान पत्र को आधा’र से लिं’क किया जाता है।

मतदाता पहचान पत्र को आधा’र से लिं’क करने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौ’ती देने की वजह से यह परियो’जना रो’क दी गयी थी। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने आधा’र संबं’धी पूर्वनि’र्धारित दिशानि’र्देशों के तहत इसे मतदाता पहचान पत्र से जो’ड़ने की मं’जूरी दी है। इसलिए अब इस परि’योजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

ई-वोटिंग के वि’कल्प के शुरू होने से देश में लगभग 45 करोड़ प्रवा’सी दू’र रहकर भी वोटिंग के जरिए मतदान कर सकेंगे। क्योंकि रोज’गार की वजह से एक अनु’मान के अनु’सार देश में लगभग 45 करोड़ प्र’वासी लोग अपने मूल निवास स्थान छो’ड़कर अन्य राज्यों में रहते हैं।

अधिकारी ने कहा कि देश के 30 करोड़ मतदाता पहचान पत्र को आधा’र से पहले ही लिंक किया जा चुका है। अभी भी 61 करोड़ मतदाताओं के मतदाता पहचान पत्र को आधा’र से जो’ड़ना बाकी है। क्यूंकि देश में कुल 91.12 करोड़ वोटर्स पंजी’कृत है।

भारत में झारखंड और दिल्ली विधानसभा चुनाव में यह क़दम उठाया जा चुका है। 8 फरवरी को हुये दिल्ली विधान’सभा चुनाव में 80 साल से अधि’क उम्र वाले मतदाताओं, दिव्यां’ग और रेल, चिकित्सा एवं अन्य आपात सेवा कर्मियों को डाक मत’पत्र के जरिये घर से ही मतदान की सुवि’धा देने की शुरुआत हुई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने कहा है कि पूरे देश में इस श्रे’णी के मतदाताओं को जल्द ही इस सेवा से जोड़ दिया जायेगा। आयोग के विशेषज्ञों के अनु’सार मतदान की विश्वसनीयता को ध्या’न में रखते हुये फर्जी वोटिंग सहित अन्य गड़बड़ियों की सम’स्या से बचने में भी दूरस्थ मतदान कारगर विकल्प साबित होगा। निर्वा’चन प्रक्रि’या में इस प्र’कार के बदलाव के लिये आयोग को कानून मंत्रालय से जन प्रतिनिधित्व कानून के मौजूदा प्राव’धानों में बदलाव की दर’कार होगी।

सू’त्रों से मिली जानकारी के अनु’सार, आने वाली 18 फरवरी को चुनाव आयोग और कानून मंत्रालय के बड़े अधिकारियों के प्रस्ता’वित बैठक में इन वि’कल्पों पर विचार हो सकता है।