उत्तराखंड में फिर शुरू हुई चर्चाएं, दिल्ली दौरे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब भी दिल्ली दौरे पर जाते हैं, उत्तराखंड में चर्चाओं का बाजार गर्म हो जाता है। हर बार मंत्रीमंडल में बदलाव की बात कही जाती है। नेताओं की धड़कनें भी तेज हो जाती हैं। दायित्व बंटवारे को लेकर भी हर बार बातें होती जरूर हैं, लेकिन आज तक कोई निर्णायक फैसला नहीं हो पाया। कहा जाता है कि हाईकमान के की ओर से हरीझंडी मिल चुकी है। बस घोषणा होनी बाकी है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार दिल्ली दौरा कर रहे हैं। पिछले दो-तीन महीनों शायक चार-पांच बार दिल्ली दौरे पर जा चुके हैं। सीएम के हर दौरे पर यही चर्चाएं आम होती हैं। कभी मंत्रीमंडल में बदलाव और विस्तार की बातें, तो कभी दायित्व बंटवारे को हवा दी जाती है। यूसीसी की चर्चाएं भी लगातार हो ही रही हैं।

धामी कैबिनेट में फिलहाल चार मंत्री पद खाली हैं, जिनको भरने को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। भीतरखाने विधायक डिमांड भी कर रहे हैं। पिछले दिनों सीएम धामी के दिल्ली दौरे के बाद बीएल संतोष उत्तराखंड दौरे पर आए थे, जिससे यह माना जा रहा था कि जल्द ही मंत्रीमंड विस्तार का ऐलान किया जाएगा। साथ ही दायित्व बंटवारा भी किया जाएगा। माना जा रहा है कि मंत्रीमंडल में बदलाव कर कुछ नए चेहरों को जगह मिल सकती है।

इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जल्द ही धामी सरकार के कैबिनेट में कुछ लोगों को जगह मिल सकती है। भाजपा फिलहाल 2024 लोसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी है। लेकिन, उससे सपहले बागेश्वर विधानसभा उपचुनाव भी होना है। राजनीति जानकारों की मानें तो भाजपा उपचुनाव के बाद ही कुछ फैसला करेगी। हालांकि, कुछ लोगों का मानना है कि उससे पहले भी कोई फैसला संभव है।

कैबिनेट विस्तार को लेकर भाजपा सभी तरह के समीकरणों पर चर्चा कर रही है। लोकसभा चुनाव से पहले सभी पांचों क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने के साथ ही सभी वर्गों का भी ध्यान रखा जाएगा। जिन नए चेहरों को कैबिनेट में शामिल किए जाने की चर्चा है उनमें नैनीताल से बंशीधर भगत, हरिद्वार से आदेश चौहान, देहरादून से विनोद चमोली या खजानदास और टिहरी से शक्तिलाल शाह के नाम शामिल हैं।

इसके अलावा एक और समीकरण भी बनता हुआ नजर आ रहा है। इस बात की चर्चाएं भी हुई कि ऋतु खंडूड़ी को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी के कैबिनेट में शामिल होने की स्थिति में उनकी जगह किसी वरिष्ठ मंत्री किसी अन्य को विधानसभा अध्यक्ष बनाया जा सकता है।

बहरहाल यह केवल चर्चाएं हैं। इन चर्चाओं से पर्दा तभी हटेगा जब मंत्रीमंडल विस्तार पर मुहर लग जाएगी। दायित्व वितरण को लेकर भी साफ है कि नामों का ऐलान नहीं होने तक केवल अटकलें लगाई जाती रहेंगी। देखना होगा कि भाजपा इस पर कितनी जल्दी फैसला लेती है?