जंगली हाथी के तांडव से दहशत, एक सप्ताह में 16 से अधिक लोगों को उतार चुका मौत के घाट

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चाईबासा : झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में एक आदमखोर दंतैल जंगली हाथी का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नोवामुंडी प्रखंड के जेटेया थाना क्षेत्र अंतर्गत बाबरिया गांव में 6 जनवरी की रात करीब 10 बजे हुए हमले में एक ही परिवार के चार सदस्यों सहित कुल पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई और उनके दो मासूम बच्चे शामिल हैं। इसी गांव में दूसरे परिवार के मोगदा लागुरी भी हाथी की चपेट में आकर मारे गए।

ग्रामीणों के अनुसार, सभी लोग अपने घरों में सो रहे थे जब अचानक हाथी ने कच्चे घरों पर हमला बोल दिया। इस दौरान परिवार का एक बच्चा किसी तरह भागकर जान बचाने में सफल रहा। घटना के बाद गांव में चीख-पुकार मच गई और पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

हाथी का आतंक यहीं नहीं रुका। पास के बड़ा पासीया और लांपाईसाई गांवों में भी एक-एक ग्रामीण की मौत हुई, हालांकि इन मृतकों की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो पाई थी।

सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। हाथी की निगरानी की जा रही है और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के साथ-साथ सुरक्षा उपायों का आश्वासन दिया गया है।

एक सप्ताह में लगातार मौतें: तिथिवार घटनाएं

पिछले एक सप्ताह में इस दंतैल हाथी ने कई गांवों में तांडव मचाया है। प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:

  • 1 जनवरी: टोंटो प्रखंड के बांडीझारी गांव में मंगल सिंह हेंब्रम (35), बिरसिंहहातु गांव में उर्दू बहंदा (55) और सदर प्रखंड के रोरो गांव में विष्णु सुंडी (57) की मौत। दो महिलाएं घायल।
  • 2 जनवरी: गोइलकेरा थाना क्षेत्र के सायतवा गांव में रेंगा कयोम (13) की मौत। चक्रधरपुर के बाईपी गांव में ढिंगी गागराई (10) घायल।
  • 4 जनवरी: गोइलकेरा के अमराई कितापी गांव में एक 47 वर्षीय महिला की मौत, उनके पति रंजन टोपनो और बेटे काहिरा टोपनो घायल।
  • 5 जनवरी: गोइलकेरा के मिस्त्रीबेड़ा गांव में जोंगा लागुरी (50) की मौत, उनके पति चंद्र मोहन लागुरी घायल। सोवा गांव में कुंदरा बाहदा, उनके 6 वर्षीय बेटे कोदमा और 8 माह की बेटी सामू की मौत; 3 वर्षीय जिंगीं बाहदा घायल।
  • 6 जनवरी: सोवा से पाटुंग होते हुए कुईलसूता गांव में जगमोहन सवईया (21) की मौत। इसके बाद बाबरिया और आसपास के गांवों में 7 मौतें।

इन घटनाओं में कुल 16 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन की कमी और मानवीय हस्तक्षेप के कारण हाथी बस्तियों की ओर भटक रहे हैं। वन विभाग ने विशेष टीम तैनात की है, लेकिन ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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