उत्तराखंड : स्टूडेंट्स को लिखना नहीं आता अपना नाम, गुरु जी गायब, यहां का है हाल

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पुरोला: पहाड़ी जिलों में सरकारी स्कूलों का हाल बुरा है। शिक्षा विभाग के मंत्री से लेकर अधिकारी तक लगातार शिक्षा व्यवस्था में सुधार के दावे करते हैं, लेकिन जमीनी कहीकत कुछ और ही बयां कर रही है। पिछले दिनों नेशनल रिपोर्ट भी जारी की गई थी, जिसमें उत्तराखंड के स्कूलों की रैंकिंग सबसे निचले पायदान पर थी। अब ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण में एक बार फिर स्कूलों की बदहाली, मानमानी और शिक्षा के स्तर का खुलासा हुआ है।

मामला विकासखंड पुरोला के सुदूरवर्ती सर बडियार क्षेत्र का है। पुरोला ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अजीत भंडारी ने जब औचक निरीक्षण किया तो दो विद्यालयों में प्रधानाध्यापक अनुपस्थित मिले। बच्चों से सामान्य सवाल पूछे तो बच्चे कोई उत्तर नहीं दे पाए। यहां तक की जूनियर हाई स्कूल के बच्चे अपना नाम तक इंग्लिश में नहीं लिख पाए।

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अजीत भंडारी ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई, साथ ही छह शिक्षकों का वेतन रोकने की संस्तुति की। वहीं स्कूलों में गैरहाजिर मिले दो प्रधानाध्यापकों पर विभागीय कार्रवाई करने की संस्तुति की।

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी अजीत भंडारी ने बताया कि उन्होंने सर बडियार पट्टी के प्राथमिक विद्यालय सर पौंटी किमडार डिंगाड़ी व जूनियर विद्यालय सर डिंगाड़ी का औचक निरीक्षण किया।

प्राथमिक विद्यालय पौंटी के प्रधानाध्यापक विजेंद्र पाल व प्राथमिक विद्यालय डिंगाड़ी के प्रभारी प्रधानाध्यापक अतोल सिंह के विद्यालय में अनुपस्थित मिले। जिसके विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति उच्च अधिकारियों से की गई है।

जूनियर विद्यालय डिंगाड़ी, प्राथमिक विद्यालय डिंगाड़ी व पौंटी में शैक्षिक स्तर निम्न होने सहित आदि अनियमितताएं पाए जाने पर जूनियर विद्यालय डिंगाड़ी के तीन तथा प्राथमिक विद्यालय डिंगाड़ी के दो एवं प्राथमिक विद्यालय पौंटी के एक शिक्षक की वेतन रोकने के लिए संस्तुति की गई।

उन्होंने बताया कि डिंगाड़ी में विद्यालय भवन पुनर्निर्माण हेतु ग्रामीणों के साथ भूमि विवाद भी चल रहा है। इसको लेकर ग्रामीणों ने कई बार शिकायत भी की है। इस संबंध में रिपोर्ट जिला स्तर के अधिकारियों को भेजी गई है।