देहरादून/श्रीनगर। उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में वरिष्ठ नागरिकों को दी जा रही निःशुल्क यात्रा सुविधा को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता और वरिष्ठ नागरिक गोदांबरी देवी कांडपाल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर आरोप लगाया है कि रोडवेज कर्मियों द्वारा उन्हें और अन्य वरिष्ठ नागरिकों को बस में यात्रा करने से रोकने का प्रयास किया गया।
गोदांबरी देवी कांडपाल के अनुसार, वह अपने घर से यात्रा करते हुए पहले श्रीनगर पहुंचीं। जिस बस से वह आई थीं, वह कोटद्वार जा रही थी, जबकि उन्हें देहरादून जाना था। काफी देर इंतजार के बाद उन्हें उत्तराखंड परिवहन निगम की बस संख्या UK 07 PA 6694 मिली। उनके अनुसार बस में भीड़ होने के बावजूद कुछ सीटें खाली थीं।

कांडपाल का आरोप है कि बस में बैठने के बाद परिचालक ने उनसे कहा कि “आधार कार्ड वाले यात्री इस बस में नहीं बैठ सकते, हमें इसके ऑर्डर मिले हैं।” उन्होंने बताया कि बस में उनके साथ दो अन्य वरिष्ठ नागरिक भी थे, जो सरकार की वरिष्ठ नागरिक निःशुल्क यात्रा योजना के तहत यात्रा कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जब यात्रियों ने परिचालक से इस संबंध में लिखित आदेश या सरकारी निर्देश के बारे में पूछा तो विवाद की स्थिति बन गई। इसी दौरान एक अन्य यात्री भी बातचीत में हस्तक्षेप करते हुए उनसे उलझने लगा और बस से उतर जाने की बात कहने लगा। कांडपाल का आरोप है कि इस व्यवहार से वे स्वयं को असुरक्षित और अपमानित महसूस करने लगीं, जिसके बाद उन्होंने पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड किया।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में कथित तौर पर बस के भीतर हुई बहस और यात्रियों की आपत्तियां दर्ज हैं। कांडपाल का यह भी आरोप है कि परिचालक उन्हें ऋषिकेश तक तो लेकर आया, लेकिन यात्रा के दौरान लिया गया उनका आधार कार्ड वापस नहीं लौटाया गया।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के साथ होने वाले व्यवहार पर कड़ी निगरानी रखी जानी चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी परिवहन में यात्रा करने वाले लोगों को सुरक्षा, सम्मान और सुविधाएं मिलनी चाहिए, लेकिन यदि बुजुर्गों को ही यात्रा से रोका जाएगा तो आम जनता का भरोसा कमजोर होगा।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पहाड़ के विभिन्न क्षेत्रों से सार्वजनिक सेवाओं और यात्री सुविधाओं को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं कि यदि सरकार वरिष्ठ नागरिकों को निःशुल्क यात्रा की सुविधा देती है तो क्या परिवहन निगम के कर्मचारी उस व्यवस्था का पालन नहीं कर रहे हैं या फिर कहीं स्तर पर मनमानी हो रही है।
फिलहाल इस मामले में उत्तराखंड परिवहन निगम की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि निगम या संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होता है तो समाचार को अद्यतन किया जाएगा।















