उत्तराखंड में महाराष्ट्र की भक्तिभाव की सरस्वती प्रवाहित हुई- किशन शर्मा

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उत्तराखंड में श्री बदरीनाथ धाम के पास माना गांव में पौराणिक श्री गणेश गुफ़ा, श्री व्यास गुफ़ा, और भीम पुल के निकट पावन सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है । वहां एक बहुत ही छोटा सा सरस्वती मंदिर भी था, जो जर्जर हालत में था। लगभग दस वर्ष पहले, जब हिन्दी ब्लिट्ज़ के संपादक और चार धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित नंद किशोर नौटियाल जी के नेतृत्व में प्रख्यात शिक्षाविद और आध्यात्मिक व्यक्तित्व, एम0आई0टी0 विश्वशांति विश्वविद्यालय पुणे के संस्थापक अध्यक्ष प्रो0 डॉ0 विश्वनाथ कराड जी और विश्व विख्यात कम्प्यूटर वैज्ञानिक पद्मभूषण डॉ0 विजय भटकर जी के साथ मुझे वहां जाने का अवसर मिला, तब अमेरिका से आये वैज्ञानिक डॉ0 बिजोय कुमार दाश जी की उपस्थिति में दोनों महानुभावों ने उस जीर्ण-क्षीर्ण मंदिर के जीर्णोद्धार का संकल्प ले लिया।

बहुत समय बीत गया परंतु उस संकल्प के बारे में कोई चर्चा किसी ने नहीं की। एक दिन डॉ0 विजय भटकर जी ने फ़ोन पर मुझसे बात की और अपने संकल्प की चर्चा की । उन्होंने कहा कि अगर कराड साहब किसी कारणवश साथ नहीं दे रहे होंगे तो वे छोटे ही रूप में सही मगर मंदिर का पुनर्निमाण करवाएंगे । इसकी जानकारी मिलने पर कराड साहब ने घोषणा कर दी कि वे संकल्प को भूले नहीं हैं और तुरंत माना गांव के प्रधान श्री पीताम्बर मोल्पा जी को मिलने के लिये आमंत्रित किया । मोल्पा जी से लिखित अनुमति मिलने के बाद कराड साहब ने इस दिशा में कार्य करवाना भी शुरू करवा दिया ।

राजस्थान से पत्थर भिजवाने की व्यवस्था करदी, और एम0आई0टी0 की निर्माण कार्य की टीम को माना भेज दिया गया । मोल्पा जी के सहयोग से वहां निर्माण कार्य केवल प्रारंभ ही नहीं हुआ बल्कि केवल दो महीने के बहुत कम समय में भयंकर सर्दी के कष्ट सहते हुए भी उस टीम के सदस्यों ने वहां सुन्दर मंदिर भवन बना डाला और उसमें वेद व्यास जी, श्री गणेश जी, संत ज्ञानेश्वर जी, संत तुकाराम जी, भगवान श्री विट्ठल जी, हनुमान जी, और सरस्वती जी की मूर्तियां भी स्थापित कर दीं । सरस्वती भी एक नहीं, वहां तीन तीन विराजित कर दी गईं । एक, शिक्षा-कला की देवी माता सरस्वती जी, दूसरी, पौराणिक नदी सरस्वती जी, और तीसरी, कराड साहब की माता सरस्वती कराड जी ।

इनके अतिरिक्त कराड साहब की बडी बहन त्यागमूर्ती प्रयाग अक्का कराड जी की मूर्ती भी वहां स्थापित की गई है । 21 अक्टूबर 2021 को उस पुनर्निमित मंदिर का उद्घाटन करवाना निश्चित कर दिया गया । अक्टूबर महीने में वहां का मौसम बहुत ही भयंकर रूप धारण कर लेता है । भीषण बर्फ़बारी, भारी वर्षा, भूस्खलन और असहनीय सर्दी के कारण वहां सामान्य व्यक्तियों का पहुंचना, रुकना और रहना असंभव ही हो जाता है । महाराष्ट्र के राज्यपाल महामहिम श्री भगत सिंह कोश्यारी साहब उद्घाटन समारोह में उपस्थित होने के लिये पहुंच भी गये । वे मूलत: उत्तराखंड के ही हैं, इसलिये उन्हें कोई असुविधा नहीं हुई ।

जोशीमठ में फ़ंसे हुए कराड साहब और भटकर साहब को अंतत: हैलीकॉप्टर से जोशीमठ से बदरीनाथ पहुंचना पडा । मोल्पा जी ने स्थानीय महिलाओं-पुरुषों को समारोह स्थल पर जुटाया और 21 अक्टूबर को निर्धारित समय पर मंदिर का उद्घाटन हो गया । राज्यपाल महोदय ने कराड साहब की भरपूर प्रशंसा की और उन्हें सम्मानित भी किया । बाद में पुणे, लातूर, पंढरपुर, आलंदी आदि स्थानों के कीर्तनकार और कथाकार भी जुड गये । वारकरी सम्प्रदाय के गायकों और कथाकारों ने पूरे सप्ताह उत्तराखंड की उस जगह को महाराष्ट्र के भक्ति रस से सराबोर कर दिया । महाराष्ट्र के देवी-देवताओं और संतों की जयजयकार पूरे सात दिन तक वहां गूंजती रही ।

सभी तरफ़ कराड साहब की प्रशंसा और जयजयकार सुनाई दे रही थी । इतने सारे लोगों की यात्रा की व्यवस्था, उनके रहने की व्यवस्था, उनके नाश्ते-भोजन आदि की व्यवस्था करना आसान काम नहीं था परंतु कराड परिवार के सभी सदस्यों ने और एम0आई0टी0 के अधिकारियों-कर्मचारियों ने इस मुश्किल कार्य को सफ़लतापूर्वक पूरा कर दिया । कुछ लोग अस्वस्थ भी हुए, परंतु अंतत: भागवत कथा सहित सात दिवसीय यह महायज्ञ पूर्ण हो गया और उत्तराखंड में महाराष्ट्र की भक्तिभाव की सरस्वती प्रवाहित हो ही गई ।

किशन शर्मा, 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर-440015; मोबाइल-8805001042