उत्तराखंड: पुरोला में महापंचायत को लेकर भारी पुलिस बल तैनात, जगह-जगह रोके गए प्रदर्शनकारी

0
41

पुरोला में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यमुना घाटी के तीनों बाजार बंद कर दिए गए हैं। बड़कोट, पुरोला, नौगांव के सभी बाजारों में कोई दुकान नहीं खुली। वहीं महापंचायत के लिए पुरोला जाने की जिद पर अड़े हिंदू संगठनों के कार्यकर्ताओं व व्यापारियों को पुलिस ने पुरोला जाने से रोका। पुलिस के साथ देर तक नोंकझोक के बाद प्रदर्शनकारी यही धरने पर बैठ गए।

पुरोला में प्रस्तावित महापंचायत को लेकर जिला प्रशासन ने बुधवार शाम ही क्षेत्र में धारा-144 लागू कर दी थी। जिले के बॉर्डर भी सील कर दिए गए। भारी संख्या में क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया गया, बावजूद आज व्यापारी और हिंदू संगठनों के लोग महपंचायत करने की जिद पर अड़े हैं।

महापंचायत के लिए पुरोला जाने की कोशिश कर रहे रुद्रसेना के संस्थापक राकेश तोमर उत्तराखंडी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं बजरंग दल का दावा है कई कार्यकर्ता पुरोला पहुंचे हैं।

यमुनाघाटी हिन्दू जागृति मंच के संयोजक केशव गिरी महाराज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके बाद धरने पर बैठे सभी लोगों ने गिरफ्तारी दी। पुलिस वाहन में गिरफ्तार किए व्यापारी और हिन्दू संगठन के लोगों को धरना स्थल से आधा किमी दूर जा कर छोड़ा गया। केशव गिरी महाराज ने अब 25 जून को बड़कोट में महा पंचायत होने की घोषणा की है। धरने की वजह से करीब ढाई घंटे तक पुरोला बफकोट मार्ग बंद रहा।

पुरोला जाते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा रोकने के बाद हिन्दू वादी संगठन धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे लोगों ने जबरन पुरोला जाने की कोशिश की। इस दौरान उनकी पुलिस के साथ धक्का मुक्की हुई, लेकिन मौजूद भारी पुलिस फ़ोर्स के कारण प्रदर्शनकारी आगे नहीं बढ़ पाए। अब प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी पर अड़े हुए हैं। कई हिन्दूवादी संगठन के लोग बड़कोट तिलाडी पौंटी राजगढ़ी मार्ग से पुरोला की ओर निकले। सुबह से ही हिन्दू वादी संगठन के लोगों ने पुलिस प्रशासन को खूब छकाया।

नौगांव से एक किमी आगे राजगढ़ी बैंड पर पुलिस द्वारा रोके जाने पर नौगांव बड़कोट के व्यापारी और हिन्दू संगठन के लोग हरिकी दून मोटर मार्ग पर धरने पर बैठे। जिससे दोनों ओर एक घंटे से वाहनों की आवाजाही बंद है। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारे लग गई है। नौगांव व्यापार मंडल अध्यक्ष जगदीस असवाल का कहना था कि कुछ लोगों द्वारा भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही है कि दूसरे समुदाय के लोगों को क्षेत्र से भगाया जा रहा। जबकि एक भी ऐसा नहीं है।