23 को पढ़ी जाएगी ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की वसीयत, दी जाएगी श्रद्धांजलि

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देहरादून :  100वें वर्ष में प्रवेश कर ब्रह्मलीन हुए। द्विपीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती महाराज ने ब्रह्मलीन होने से पूर्व ही अपनी वसीयत लिख दी थी।

जगद्गुरु शंकराचार्य ने अपने तीन दशकों से सक्रिय दो दंडी सन्यासियों स्वामी सदानंद  सरस्वती महाराज को द्वारका शारदा पीठ और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज को ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य का उत्तराधिकारी घोषित कर अपनी वसीयत लिख दी थी।

ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती महाराज के निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज ने बताया कि पूज्य महाराज ने उन्हें यह दायित्व सौंपा था कि उनके उत्तराधिकारी की घोषणा उनकी वसीयत के अनुसार वे ही करेंगे।

महाराज की समाधि के समक्ष ही ब्रह्मचारी सद्बूद्धानंद महाराज द्वारा द्वारका शारदा पीठ पर स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज एवं ज्योतिष पीठ पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज के नामों की घोषणा कर अभिषेक तिलक कर दिया था।

23 सितंबर को आयोजित होने जा रही श्रद्धांजलि सभा के वृहद कार्यक्रम में परमहंसी गंगा आश्रम में महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित करने के बाद महाराज की वसीयत का वाचन उनके निजी सचिव ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज के द्वारा किया जाएगा। उसी सभा में दोनों पीठों के आचार्यों के पट्टा अभिषेक महोत्सव की तिथि की भी घोषणा कर दी जाएगी।

परमहंसी गंगा आश्रम में तीन दिवसीय समाराधना कार्यक्रम आयोजित होंगे। 27 सितंबर को यति पार्वड़े और 22 सितंबर को नारायण बलि और आराधना संपन्न होगी। 23 सितंबर को भंडारा एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होगा।

23 सितंबर को नरसिंहपुर जिले और अन्य  जिलों से शंकराचार्य के भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें 50 हजार से अधिक लोगों को भोजन कराए जाने की व्यवस्था की जा रही है।

इस भोजन व्यवस्था के लिए वाटरप्रूफ पंडाल भी निर्मित हो रहा है। भंडारे में बनने वाले भोजन को तैयार करने के लिए कोलकाता एवं वाराणसी से 150 से अधिक रसोइए परमहंसी गंगा आश्रम पहुंच रहे हैं।

वहीं, इस तीन दिवसीय आयोजन में सम्मिलित होने के लिए देश भर से शंकराचार्य जी के आश्रमों से जुड़े संतगण तथा अन्य भक्तजन भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। इस तीन दिवसीय आयोजन में तैयारियां भव्य स्तर पर चल रही हैं। मुख्य सभा का आयोजन मेला मैदान में होगा।

समाराधना कार्यक्रम के अध्यक्ष ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द महाराज हैं। कार्यक्रम के संरक्षक द्वारका शारदा पीठ के शंकरचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती महाराज हैं। वहीं, कार्यक्रम के संयोजक ज्योतिष पीठ के शंकरचार्य स्वामी अवि मुक्तेश्वरानंद महाराज है।