सेना की महिला अफसरों के लिए SC का बड़ा फैसला, 2 महीने के अंदर ही…

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सेना (Army) में महिलाओं के स्थायी कमीशन को लेकर देश के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिला अफसरों को स्‍थायी कमीशन देने की प्रक्रिया को भेदभावपूर्ण बताया है। महिला अधिकारियों की सेना में स्थायी कमीशन देने की मांग को लेकर दायर की गईं याचिकाओं पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और इसको भेदभावपूर्ण बताया। बता दें कि इस दौरान 80 महिलाओं की याचिकाओं पर सुनवाई की थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी किया कि जिन महिला अफसरों को मेडिकल ग्राउंड पर PC से बाहर किया गया है उन पर एक महीने में फिर से विचार किया जाए। बता दें कि दिल्ली HC ने इस पर 2010 में पहला फैसला दिया था। जिसके करीब 10 साल बाद कोर्ट ने कहा कि मेडिकल फिटनेस और शरीर के आकार के आधार पर स्थायी कमीशन न देना सही नहीं है। कोर्ट ने कहा कि “एक महीने के भीतर महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन देने पर विचार करे और नियत प्रक्रिया का पालन करते हुए 2 महीने के भीतर इन अधिकारियों को स्थायी कमीशन दे।”

साल 2010 में दिल्ली हाई कोर्ट ने महिलाओं को परमानेंट कमीशन देने का आदेश दिया था। जिसमें 284 में से सिर्फ 161 महिलाओं को परमानेंट कमिशन दिया गया और बाकी को रिजेक्ट कर दिया गया। जिसको लेकर कोर्ट ने कहा कि “जिनको रिजेक्ट किया है उनको एक और मौका दिया जाए। आर्मी का मेडिकल क्राइटेरिया सही नही था। महिलाओं के खिलाफ भेदभाव हुआ। इस दौरान कोर्ट ने बोर्ड पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि “हमें पता लगा है कि जिन्होंने स्पोर्ट्स में शानदार प्रदर्शन किया, उन्हें भी नजरअंदाज किया गया। ऐसा लगता है कि बोर्ड सेलेक्शन के बजाए रिजेक्शन के लिए बैठता है।”