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बदरीनाथ धाम में अब धार्मिक और अस्थायी कार्यक्रम के लिए अनुमति जरूरी

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चमोली। बदरीनाथ धाम में धार्मिक आयोजनों और अस्थायी निर्माण पर अब नगर पंचायत की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। नगर पंचायत बदरीनाथ द्वारा जारी तीन नई उपविधियों के तहत भागवत कथा, भंडारा और अन्य विशेष कार्यक्रम बिना अनुमति आयोजित करने पर ₹50,000 तक का जुर्माना लगाया जाएगा। नगर पंचायत की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से अनुमति लेना आवश्यक होगा। इसके अलावा, बदरीनाथ क्षेत्र में मांस लाने या झुग्गी-झोपड़ी बनाने पर भी सख्त रोक लगाई गई है।

  1. मांसाहार परिवहन एवं उपयोग प्रतिबंध उपविधि, 2026 – क्षेत्र में मांस का सेवन और परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित।
  2. झोपड़ी, अस्थायी आवास नियंत्रण एवं स्वच्छता उपविधि – झुग्गी-झोपड़ी बनाने से पहले अनुमति अनिवार्य, और नियमित रूप से शौचालय निर्माण करना भी जरूरी।
  3. भंडारा, भागवत कथा एवं विशेष कार्यक्रम नियंत्रण उपविधि – धार्मिक आयोजन केवल अनुमतियों के साथ ही संभव होंगे।

नगर पंचायत ने इन उपविधियों के साथ यूजर चार्ज की व्यवस्था भी की है ताकि व्यवस्थाएं और नियंत्रण सुनिश्चित किए जा सकें। ज्योतिर्मठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि गजट नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उपविधियां लागू कर दी जाएंगी। नगर पंचायत ईओ सुनील पुरोहित ने बताया कि बीते वर्षों में क्षेत्र में कुछ मजदूर मांस के साथ पकड़े गए थे, अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

नगर पंचायत की यह नई व्यवस्था मुख्य रूप से पर्यावरण संरक्षण, धार्मिक स्थलों की स्वच्छता और तीर्थयात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। अधिकारियों ने आश्वस्त किया कि इन नियमों के बावजूद तीर्थयात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। सभी नियम और उपविधियां यात्रा को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और स्वच्छ बनाने के लिए हैं।

उत्तराखंड: पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल, 30 अधिकारियों के तबादले

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देहरादून में पुलिस महकमे में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। जारी ट्रांसफर सूची के अनुसार 3 थानाध्यक्षों सहित कुल 30 अधिकारियों का तबादला किया गया है।

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यह आदेश आधी रात को जारी किए गए, जिससे पुलिस विभाग में हलचल मच गई। कई थानों में प्रभारी अधिकारियों को बदला गया है, वहीं नए अधिकारियों को जल्द से जल्द कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।

बताया जा रहा है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन का मानना है कि इस बदलाव से पुलिस व्यवस्था में सुधार होगा और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहतर बनेगी।

देहरादून में अपराध पर सख्ती: “ऑपरेशन प्रहार” शुरू, डीजीपी के कड़े निर्देश

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देहरादून। राजधानी में हालिया आपराधिक घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए उत्तराखंड सरकार के निर्देश पर पुलिस ने “ऑपरेशन प्रहार” शुरू करने का फैसला लिया है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने की।

बैठक में आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, आईजी एसटीएफ नीलेश आनंद भरणे, एसएसपी देहरादून प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर नियंत्रण के लिए विस्तृत रणनीति तैयार की गई।

डीजीपी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि देहरादून में कानून-व्यवस्था की दैनिक मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। आईजी गढ़वाल को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि एसएसपी देहरादून को अधीनस्थ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रभावी पुलिसिंग बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
साथ ही क्षेत्राधिकारी और थाना प्रभारियों को फील्ड में सक्रिय रहने, चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने और बैरियरों पर सघन चेकिंग करने को कहा गया है।

विशेष रूप से सुबह के समय पुलिस बल की उपस्थिति और सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया गया।
एसटीएफ को भी देहरादून में सक्रिय आपराधिक तत्वों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, किरायेदारों और पीजी में रहने वालों का सत्यापन अभियान तेज करने तथा होम-स्टे गतिविधियों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

डीजीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्धारित समय के बाद संचालित बार और पब्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन प्रहार” के तहत राजधानी में अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के लिए पुलिस पूरी मुस्तैदी और सतर्कता के साथ काम करेगी, ताकि आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

तहसीलदार निलंबित, पहले ही हो चुकी गिरफ्तार, KBC में जीते थे 50 लाख

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श्योपुर (मध्यप्रदेश)। श्योपुर जिले से एक बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) में 50 लाख रुपये जीतकर चर्चा में आईं तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को निलंबित कर दिया गया है। चंबल संभागायुक्त ने श्योपुर कलेक्टर की रिपोर्ट के आधार पर मंगलवार को यह आदेश जारी किया।

अमिता सिंह तोमर को 26 मार्च 2026 को बाढ़ राहत राशि घोटाले के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उन्हें कोर्ट में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया, जहां वह अभी भी बंद हैं। उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई मंगलवार को प्रस्तावित थी, लेकिन किसी कारणवश तारीख आगे बढ़ा दी गई।

ढाई करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
तहसीलदार अमिता सिंह तोमर पर वर्ष 2021 में आई बाढ़ के दौरान राहत राशि वितरण में लगभग 2.57 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। आरोपों के अनुसार, उस समय बड़ौदा तहसील में पदस्थ रहते हुए उन्होंने करीब दो दर्जन पटवारियों और दलालों के साथ मिलकर 127 फर्जी खातों में यह राशि ट्रांसफर कर दी।

यह अनियमितता डिप्टी कलेक्टर द्वारा किए गए ऑडिट में सामने आई, जिसके बाद बड़ौदा थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच में 100 से अधिक लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनमें अमिता तोमर और 25 पटवारी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत
गिरफ्तारी से पहले अमिता सिंह तोमर ने अग्रिम जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि मामले में अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता।

KBC से मिली थी पहचान
अमिता सिंह तोमर वर्ष 2011 में ‘कौन बनेगा करोड़पति’ सीजन-5 में 50 लाख रुपये जीतने के बाद चर्चा में आई थीं। इसके बाद उन्हें ‘KBC वाली मैडम’ के नाम से भी जाना जाने लगा।

पहले भी रही हैं विवादों में
अपने 14 साल के सेवा कार्यकाल में अमिता तोमर कई बार विवादों में रही हैं। सोशल मीडिया पर विवादित पोस्ट और प्रशासनिक टिप्पणियों के चलते उन्हें पहले भी निलंबित किया जा चुका है। इसके अलावा, बार-बार तबादलों को लेकर उन्होंने प्रधानमंत्री और तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर भी सुर्खियां बटोरी थीं।

अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़, आईएमए उपाध्यक्ष समेत छह गिरफ्तार

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कानपुर। शहर में पिछले दो वर्षों से सक्रिय अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस गिरोह के तार विदेशों तक जुड़े होने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, गिरोह अब तक 50 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कर चुका है।

मामले का खुलासा 29 मार्च को हुआ, जब कल्याणपुर स्थित आहूजा हॉस्पिटल में एक संदिग्ध ट्रांसप्लांट की सूचना पर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारा। जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

कार्रवाई के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत आहूजा, दलाल शिवम अग्रवाल और तीन अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने कुल 15 आरोपियों के खिलाफ मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

विदेशी मरीजों तक पहुंचा नेटवर्क
जांच में सामने आया है कि 3 मार्च को इसी अस्पताल में दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का भी अवैध किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। गिरोह गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनकी किडनी 5 से 10 लाख रुपये में खरीदता था और अमीर मरीजों को 60 लाख से एक करोड़ रुपये तक में बेचता था।

फर्जी दस्तावेजों से करते थे खेल
पुलिस के मुताबिक, किडनी देने वाले और लेने वाले को फर्जी बीमारी दिखाकर अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया जाता था। हालिया मामले में डोनर बिहार का छात्र आयुष और रिसीवर मुजफ्फरनगर की पारुल तोमर थीं। दोनों को गॉल ब्लैडर की बीमारी बताकर भर्ती किया गया था।

नोएडा से आती थी डॉक्टरों की टीम
ट्रांसप्लांट करने के लिए नोएडा से डॉक्टरों की टीम बुलाई जाती थी, जिसमें डॉ. रोहित, डॉ. अफजाल, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग शामिल बताए जा रहे हैं। ये सभी आरोपी फिलहाल फरार हैं और उनकी तलाश में पुलिस की टीमें दिल्ली-एनसीआर में दबिश दे रही हैं। गिरोह के सदस्य आपस में टेलीग्राम के जरिए संपर्क में रहते थे।

स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई
स्वास्थ्य विभाग ने मेडलाइफ हॉस्पिटल को सील कर दिया है, जबकि आहूजा और प्रिया हॉस्पिटल को बंद करने के नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि जांच के दौरान कुछ अस्पतालों में गतिविधियां जारी मिलने से विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कड़ी सजा का प्रावधान
आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। दोषी पाए जाने पर उन्हें 10 साल तक की सजा और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। साथ ही, मेडिकल पेशे से जुड़े आरोपियों के लाइसेंस भी रद्द किए जा सकते हैं।

ऋषिकेश बाईपास को मिली बड़ी मंजूरी: ₹1105.79 करोड़ की 4-लेन परियोजना

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देहरादून। उत्तराखण्ड में सड़क अवसंरचना को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए Ministry of Road Transport and Highways ने ऋषिकेश बाईपास के 4-लेन निर्माण कार्य को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने इस बहुप्रतीक्षित परियोजना के लिए 1105.79 करोड़ की तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति जारी की है।

यह परियोजना Rishikesh क्षेत्र में National Highway 7 पर टीनपानी फ्लाईओवर (किमी 529.750) से खरासोटे पुल (किमी 542.420) तक विकसित की जाएगी। करीब 12.670 किलोमीटर लंबा यह 4-लेन बाईपास भट्टोवाला और ढालवाला क्षेत्रों से होकर गुजरेगा। परियोजना को EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एवं कंस्ट्रक्शन) मोड पर क्रियान्वित किया जाएगा।

मंत्रालय के अनुसार, परियोजना की प्रारंभिक लागत 1151.18 करोड़ आंकी गई थी, जिसे संशोधित कर 1139.40 करोड़ किया गया और अंततः 1105.79 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई। निर्माण कार्य को तीन वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि न तो लागत में वृद्धि स्वीकार की जाएगी और न ही समयसीमा में देरी।

परियोजना पर होने वाला व्यय वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार के बजट प्रावधान (GBS) के तहत किया जाएगा। देहरादून स्थित क्षेत्रीय अधिकारी को इस परियोजना के लिए ड्रॉइंग एवं डिस्बर्सिंग ऑफिसर (DDO) नामित किया गया है।

इस बाईपास के निर्माण से ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा तथा जाम की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है। साथ ही, चारधाम यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी बेहतर और सुगम आवागमन की सुविधा मिलेगी।

बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 65 IAS अधिकारियों का तबादला, इन जिलों के कलेक्टर बदले

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जयपुर। राजस्थान सरकार ने मंगलवार देर रात बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए 65 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के तबादले कर दिए। इस व्यापक फेरबदल में 25 जिलों के कलेक्टरों को बदला गया है, जिससे राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

इस सूची में चर्चित आईएएस अधिकारी Tina Dabi का भी नाम शामिल है। उन्हें बाड़मेर से स्थानांतरित कर टोंक जिले का नया कलेक्टर नियुक्त किया गया है। वहीं उनकी बहन Ria Dabi का भी तबादला किया गया है। रिया डाबी को उदयपुर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पद से हटाकर मुख्यमंत्री कार्यालय में ओएसडी (ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) बनाया गया है।

प्रशासनिक फेरबदल के तहत जयपुर के कलेक्टर Jitendra Soni को मुख्यमंत्री का सचिव और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (DIPR) का सचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सचिव और विशिष्ट सचिव स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं।

एयरपोर्ट पर 25 किलो हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त, आम गांजे से कितना अलग ?

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हैदराबाद। तेलंगाना की राजधानी में बड़ी ड्रग तस्करी का मामला सामने आया है। Directorate of Revenue Intelligence (DRI) ने शमशाबाद स्थित Rajiv Gandhi International Airport (RGIA) पर कार्रवाई करते हुए 25 किलोग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद किया है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Indo-Asian News Service (IANS) के मुताबिक, जब्त किए गए गांजे की अनुमानित कीमत करीब 8.9 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

अधिकारियों के अनुसार, यह खेप बैंकॉक से आए एक यात्री के पास से बरामद की गई। संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर जांच के दौरान यात्री के सामान में प्रतिबंधित पदार्थ छिपाकर लाया जा रहा था। इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ NDPS Act के तहत कार्रवाई की गई है।

क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा?
हाइड्रोपोनिक गांजा, गांजे की एक उन्नत किस्म है, जिसे मिट्टी की बजाय विशेष पोषक तत्वों वाले घोल (सॉल्यूशन) में उगाया जाता है। नियंत्रित वातावरण, जैसे तापमान, रोशनी, pH स्तर और नमी में तैयार होने के कारण इसकी गुणवत्ता अधिक मानी जाती है। यह पौधा तेजी से बढ़ता है, कम समय में तैयार हो जाता है और इसका उत्पादन भी पारंपरिक खेती की तुलना में ज्यादा होता है।

सामान्य गांजा से अंतर
हाइड्रोपोनिक तकनीक से उगाए गए पौधों में रोग और कीटों का खतरा कम होता है, जबकि मिट्टी में उगने वाले पौधे कई बाहरी कारकों पर निर्भर रहते हैं। इसके अलावा, हाइड्रोपोनिक गांजा अपेक्षाकृत तेजी से विकसित होता है और इसकी पैदावार अधिक होती है।

बढ़ती तस्करी और कानूनी स्थिति
हाल के समय में हाइड्रोपोनिक गांजा की तस्करी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ देशों में इसके सीमित उपयोग, विशेषकर औषधीय उद्देश्यों के लिए अनुमति दी गई है, लेकिन भारत में यह पूरी तरह प्रतिबंधित है।

कानून के अनुसार, देश में गांजा रखना, बेचना या परिवहन करना दंडनीय अपराध है। NDPS Act के तहत छोटी मात्रा में भी गांजा रखने पर एक साल तक की सजा या 10,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।

प्रीमियम पेट्रोल-डीजल महंगे, जेट फ्यूल कीमतों में भी बढ़ोतरी

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नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर आम उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर दिखने लगा है। राजधानी दिल्ली में प्रीमियम पेट्रोल और डीजल के दामों में इजाफा किया गया है।

सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation (IOC) ने अपने प्रीमियम फ्यूल वेरिएंट्स की कीमतों में बढ़ोतरी की है। कंपनी का 100-ऑक्टेन प्रीमियम पेट्रोल XP100 अब 149 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। यह पेट्रोल विशेष रूप से हाई-एंड लग्जरी कारों और सुपरबाइक्स के लिए तैयार किया गया है।

इसी तरह, प्रीमियम डीजल Xtra Green की कीमत में भी 1.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। अब यह दिल्ली में 91.49 रुपये प्रति लीटर के मुकाबले 92.99 रुपये प्रति लीटर में उपलब्ध होगा।

वहीं, विमानन क्षेत्र भी इससे अछूता नहीं रहा। जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में भी चारों प्रमुख महानगरों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली में जेट फ्यूल की कीमत 207,341.22 रुपये प्रति किलोलीटर हो गई है। कोलकाता में यह 205,953.33 रुपये, मुंबई में 194,968.67 रुपये और चेन्नई में 214,597.66 रुपये प्रति किलोलीटर पर पहुंच गई है।

बड़ी खबर : 5 किलो और कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगे, घरेलू एलपीजी के दाम स्थिर

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नई दिल्ली। आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों पर महंगाई का एक और झटका लगा है। 1 अप्रैल 2026 से 5 किलोग्राम वाले एलपीजी सिलेंडर के दाम में 51 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। इस श्रेणी के सिलेंडर का उपयोग मुख्यतः मजदूर वर्ग और सीमित आय वाले परिवारों द्वारा किया जाता है, ऐसे में यह वृद्धि उनके बजट पर सीधा असर डालेगी।

इसके साथ ही 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। सूत्रों के अनुसार, दिल्ली में इसकी कीमत 195.50 रुपये बढ़कर 2078.50 रुपये हो गई है, जबकि कोलकाता में 218 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चालू वर्ष में यह पांचवीं बार है जब कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक इसकी कीमतों में कुल लगभग 498 रुपये की वृद्धि हो चुकी है।

हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और राजधानी में इसकी कीमत 913 रुपये पर स्थिर बनी हुई है। इससे पहले 7 मार्च को इसमें 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि कमर्शियल गैस की कीमतों में इस वृद्धि का सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायों पर पड़ेगा, जो बड़े पैमाने पर एलपीजी पर निर्भर हैं।

वैश्विक स्तर पर बढ़ती ईंधन कीमतें इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण मानी जा रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 116 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। खासतौर पर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में व्यवधान की आशंका ने आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है। बताया जा रहा है कि हाल के हफ्तों में वैश्विक तेल कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत तक उछाल आया है।