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मसूरी में आज शादी के बंधन में बंधेंगे कुलदीप यादव, बचपन की दोस्त वंशिका संग लेंगे सात फेरे

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मसूरी। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार स्पिनर Kuldeep Yadav आज नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। वह अपनी बचपन की दोस्त Vanshika Chadha के साथ उत्तराखंड के खूबसूरत हिल स्टेशन Mussoorie में शादी के बंधन में बंधेंगे। इस खास मौके पर क्रिकेट जगत और अन्य क्षेत्रों की कई नामी हस्तियां समारोह में शामिल होने के लिए पहुंच चुकी हैं।

शादी समारोह से पहले प्री-वेडिंग कार्यक्रमों की शुरुआत शुक्रवार से हो चुकी है। मेहंदी और संगीत समारोह में परिवार, करीबी दोस्तों और क्रिकेटरों ने जमकर उत्सव मनाया। समारोह में पूर्व क्रिकेटर Suresh Raina, स्पिनर Yuzvendra Chahal और अन्य खिलाड़ी मौजूद रहे और संगीत कार्यक्रम में डांस कर माहौल को और भी खास बना दिया।

शादी के लिए मसूरी स्थित रिसॉर्ट और होटल को फूलों, रोशनी और पारंपरिक सजावट से भव्य तरीके से सजाया गया है। मेहमानों के स्वागत और आवभगत के लिए होटल प्रबंधन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। समारोह में देश-विदेश के कई क्रिकेटरों और मेहमानों के शामिल होने की संभावना है।

बताया जा रहा है कि कुलदीप और वंशिका एक-दूसरे को बचपन से जानते हैं और दोनों का परिवार Kanpur से है। दोनों ने पिछले साल 4 जून 2025 को लखनऊ में सगाई की थी। शादी के बाद 17 मार्च को Lucknow में एक भव्य रिसेप्शन का आयोजन किया जाएगा।

बड़ी राहत, आज से बहाल होगा 20 फीसदी गैस कोटा, ठप पड़े कार्यों में तेजी आने की उम्मीद

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पश्चिम एशिया संकट का असर: पैरासिटामॉल समेत कई दवाएं महंगी, कच्चे माल की कीमतों में 40% तक उछाल

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और Iran–Israel conflict के प्रभाव से दवा उद्योग पर दबाव बढ़ गया है। कच्चे माल यानी Active Pharmaceutical Ingredient (API) की कीमतों में 25 से 40 फीसदी तक वृद्धि होने से पैरासिटामॉल सहित कई दवाओं के दाम तेजी से बढ़ गए हैं। दवा कारोबारियों के अनुसार बाजार में कुछ दवाओं की कीमतों में 20 से 40 फीसदी तक उछाल देखा जा रहा है।

फार्मा उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि एपीआई की कीमतें बढ़ने के बाद कई डिस्ट्रीब्यूटर और उत्पादकों ने पुराने ऑर्डर रद्द कर दिए हैं और नए दामों पर ऑर्डर देने के लिए कहा है। इससे दवा निर्माण की लागत अचानक बढ़ गई है और उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ रही है।

जिला ड्रगिस्ट एंड केमिस्ट एसोसिएशन के अनुसार दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में तेज वृद्धि ने स्थिति को गंभीर बना दिया है। एसोसिएशन का कहना है कि एपीआई महंगा होने के कारण सस्ती दवाएं बनाना कठिन होता जा रहा है। वहीं दवा कंपनियां कई जरूरी दवाओं का उत्पादन सरकार द्वारा तय कीमतों के अनुसार करती हैं, ऐसे में कच्चे माल के महंगे होने के बावजूद दवाओं की कीमत बढ़ाना संभव नहीं होता, जिससे उद्योग को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

एसोसिएशन के महामंत्री Rajneesh Kaushal Rajjan ने बताया कि एपीआई के दाम अचानक बढ़ा दिए गए हैं। उनका कहना है कि यदि इसी तरह कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही तो दवा उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में जीवन रक्षक दवाओं की वैश्विक बाजार में कमी भी देखने को मिल सकती है।

दवा कारोबारियों के अनुसार कई सामान्य दवाओं के दाम में पहले ही बढ़ोतरी हो चुकी है। गले के संक्रमण में उपयोग होने वाली Azithromycin की तीन गोलियां, जो पहले करीब 80 रुपये में मिलती थीं, अब लगभग 98 रुपये की हो गई हैं। इसी तरह Glycerin की 100 ग्राम की शीशी के दाम बढ़कर 160 रुपये हो गए हैं।

वहीं Paracetamol की 10 गोलियों का पत्ता आठ रुपये से बढ़कर करीब 14 रुपये हो गया है। एलर्जी और सांस से जुड़ी समस्याओं में इस्तेमाल होने वाली Montelukast Sodium की 10 गोलियों की कीमत 180 रुपये से बढ़कर 240 रुपये तक पहुंच गई है।

इसके अलावा दर्द निवारक Diclofenac Sodium की 10 गोलियों का पत्ता 20 रुपये से बढ़कर 35 रुपये हो गया है। एंटीबायोटिक Ciprofloxacin की 10 गोलियां अब 48 रुपये के बजाय करीब 60 रुपये में मिल रही हैं, जबकि Amikacin की 10 गोलियों का पत्ता 113 रुपये से बढ़कर लगभग 140 रुपये तक पहुंच गया है।

रसोई गैस की जमाखोरी पर कार्रवाई, 102 जगहों पर छापेमारी; 741 सिलेंडर जब्त

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रसोई गैस (Liquefied Petroleum Gas (LPG)) की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए खाद्य विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमों ने राज्यभर में बड़े स्तर पर कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार, 102 स्थानों पर छापेमारी कर कुल 741 गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

सरकारी अधिकारियों ने बताया कि राज्य में घरेलू एलपीजी के साथ-साथ Petrol और Diesel का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। इनकी उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

बताया गया कि 12 मार्च को मुख्य सचिव Vikas Sheel ने खाद्य विभाग की सचिव Reena Baba Saheb Kangale और तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। बैठक में आपूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए।

इस बीच शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में गैस सिलेंडर को लेकर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। कई राज्यों में लोग गैस एजेंसियों पर लंबी कतारों में खड़े नजर आए। हालांकि केंद्र सरकार ने साफ किया है कि देश में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और उपभोक्ताओं को घबराहट में बुकिंग करने की आवश्यकता नहीं है। कुछ जगहों से भोजनालयों के बंद होने और गैस की जमाखोरी की खबरें भी सामने आई हैं।

सरकार ने लोगों से पाइप से मिलने वाली रसोई गैस यानी Piped Natural Gas (PNG) कनेक्शन अपनाने की भी अपील की है। सरकार के अनुसार, पीएनजी नेटवर्क के करीब रहने वाले करीब 60 लाख परिवार इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

सरकार ने जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों को सख्त चेतावनी दी है। अधिकारियों ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का फायदा उठाकर अगर कोई कालाबाजारी करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव Sujata Sharma ने बताया कि 5 मार्च से अब तक घरेलू एलपीजी उत्पादन में लगभग 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जा चुकी है।

बड़ी खबर : सोनम वांगचुंग तत्काल होंगे रिहा, सरकार ने हिरासत रद करने का लिया फैसला

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने एक्टिविस्ट Sonam Wangchuk की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का फैसला लिया है। गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (National Security Act) के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह निर्णय लिया।

गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सरकार Ladakh में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के मुताबिक यह कदम क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख को आवश्यक सुरक्षा उपाय उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और उम्मीद करती है कि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद और रचनात्मक सहभागिता के जरिए निकाला जाएगा। इसके लिए उच्च-स्तरीय समिति समेत अन्य उपयुक्त मंचों के माध्यम से बातचीत जारी रखी जाएगी।

दरअसल, वांगचुक की हिरासत पिछले साल सितंबर में Leh में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद हुई थी। इन प्रदर्शनों के दौरान क्षेत्र में तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत Jodhpur जेल में रखा गया था। सरकार का कहना था कि उस समय हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया था।

देहरादून स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में अनियमितताओं की पुष्टि: कांग्रेस ने लगाए घोटाले के आरोप, सीबीआई जांच की मांग

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देहरादून : देहरादून में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत हुए कार्यों में गंभीर अनियमितताओं और वित्तीय खामियों की पोल नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में खुल गई है। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने आज पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सीएजी रिपोर्ट ने कांग्रेस के पुराने आरोपों की पुष्टि कर दी है और यह भाजपा सरकार के संरक्षण में हुआ सबसे बड़ा घोटाला साबित हो रहा है। उन्होंने तत्काल सीबीआई जांच की मांग की है।

धस्माना ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2017 में तीसरे चरण में देहरादून को स्मार्ट सिटी चुनते हुए 2023 तक योजना पूरी करने की मंजूरी दी थी। लेकिन समय पर कार्य न होने पर बार-बार समय विस्तार दिया गया। 2025 में आधे-अधूरे और निम्न स्तर के कार्यों के बावजूद तत्कालीन सीईओ ने प्रोजेक्ट पूर्ण होने की घोषणा कर दी। छह-सात वर्षों में शहर को खोद-खोदकर बिगाड़ा गया, सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन शहर की स्थिति पहले से बदतर हो गई।

सीएजी रिपोर्ट (रिपोर्ट नंबर 5 ऑफ 2025) में प्रमुख अनियमितताएं सामने आई हैं, जिनमें शामिल हैं:

बिना टेंडर के 2.93 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए।

समय पर कार्य पूरा न होने पर कार्यदायी संस्थाओं से 19 करोड़ रुपये की वसूली नहीं की गई।

5.91 करोड़ रुपये खर्च कर तीन सरकारी स्कूलों में स्मार्ट सुविधाएं (कंप्यूटर लैब, इंटरेक्टिव बोर्ड, प्रोजेक्टर, ई-कंटेंट, सीसीटीवी, बायोमेट्रिक) लगाई गईं, लेकिन बिजली बिलों के बोझ के कारण इन्हें शुरू नहीं किया गया और वे बेकार पड़ी हैं।

सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 4.55 करोड़ रुपये का बायोमेट्रिक और सेंसर-आधारित मॉड्यूल मार्च 2022 में तैयार हुआ, लेकिन फरवरी 2025 तक इस्तेमाल नहीं हुआ, जिससे खर्च बेकार साबित हुआ।

ई-रिक्शा और अन्य स्मार्ट वेस्ट वाहनों की खरीद के बाद दो वर्ष तक संचालन नहीं हुआ।

कुल 737 करोड़ रुपये में से 634.11 करोड़ खर्च होने के बावजूद कई प्रोजेक्ट अधूरे या गैर-कार्यात्मक रहे, जैसे केवल 130 स्मार्ट पोल में से 27 ही लगे।

धस्माना ने आरोप लगाया कि भूमिगत विद्युतीकरण, ट्रैफिक सिस्टम, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्कूल-कॉलेजों में सीसीटीवी-वाईफाई, स्मार्ट बोर्ड और स्मार्ट शौचालय जैसे कार्यों पर सैकड़ों करोड़ खर्च हुए, लेकिन ज्यादातर दिखावे के लिए निम्न गुणवत्ता के या आधे-अधूरे रहे। कांग्रेस ने कई बार यह मुद्दे उठाए, लेकिन सरकार ने अनसुना किया और घोटाले जारी रहे।

उन्होंने कहा, “यह घोटाला पूरी तरह राज्य सरकार के संरक्षण में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के अधिकारियों और अध्यक्ष की देखरेख में हुआ। अगर सीबीआई से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तो भाजपा सरकार का यह सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा।”

रिपोर्ट विधानसभा में 10 मार्च 2026 को पेश की गई थी, जिसमें 2017-18 से 2022-23 तक की अवधि की समीक्षा की गई है। कांग्रेस ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और जनता के पैसे की बर्बादी पर रोक लगाई जाए।

देहरादून में जिला प्रशासन ने घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के अवैध व्यावसायिक उपयोग पर सख्त कार्रवाई

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देहरादून: गैस कालाबाजारी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तेज अभियान चलाया है। डोईवाला क्षेत्र में छापेमारी के दौरान 12 घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए, जबकि विकासनगर में 2 सिलेंडर बरामद हुए। कुल मिलाकर इन स्थानों से 14 घरेलू सिलेंडर जब्त किए गए हैं।

ये सिलेंडर नियमों का उल्लंघन करते हुए होटलों, ढाबों या अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किए जा रहे थे। प्रशासन के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर केवल घरेलू उपयोग के लिए ही हैं और इनका व्यावसायिक उपयोग गैरकानूनी है।

जिला प्रशासन ने सख्त चेतावनी जारी की है कि आगे भी ऐसी गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सिलेंडर जब्त करने के अलावा जुर्माना और कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है।

यह कार्रवाई हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर गैस संकट और देहरादून में व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने के कारण घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी बढ़ने के बीच की गई है। प्रशासन ने सभी एसडीएम और पूर्ति विभाग की टीमों को नियमित छापेमारी के निर्देश दिए हैं।

विधानसभा में सवालों की बौछार, विभागीय मंत्रियों को घेरा

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उत्तराखंड विधानसभा के भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में चल रहे बजट सत्र में स्वास्थ्य योजना को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जोरदार हमला बोला। विपक्षी विधायकों ने राज्य सरकार स्वास्थ्य योजना (गोल्डन कार्ड योजना) के अंशदान आधारित ढांचे पर सवाल उठाए, जिसमें कर्मचारियों और पेंशनरों से मासिक अंशदान लिया जाता है, लेकिन इलाज पर होने वाला खर्च इससे कहीं अधिक है।

विपक्ष ने सदन में पूछा कि योजना के लिए कितनी धनराशि की व्यवस्था की गई है, कर्मचारियों का कितना योगदान आ रहा है, और तकनीकी कारणों से लंबित भुगतान वाले कितने कर्मचारियों/दावों का अभी तक निपटारा नहीं हो सका तथा उसके लिए कितनी राशि का प्रावधान है। मंत्री जवाब देने में टालमटोल करते दिखे, जिसके बाद विपक्ष बार-बार सटीक और स्पष्ट उत्तर मांगता रहा। यह चर्चा सत्र के दौरान काफी गरमाई।

योजना की वर्तमान स्थिति
यह योजना सरकारी कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को सूचीबद्ध अस्पतालों में असीमित कैशलेस इलाज प्रदान करती है। प्रदेश में लगभग 5.16 लाख गोल्डन कार्ड धारक हैं। योजना के तहत अब तक भर्ती इलाज पर 641 करोड़ रुपये से अधिक और ओपीडी पर 300 करोड़ रुपये का खर्च हो चुका है।

हालांकि, कर्मचारियों से प्राप्त अंशदान इस खर्च की तुलना में कम रहा है, जिससे अस्पतालों के बकाया भुगतान में देरी हो रही है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, अंशदान से अधिक खर्च होने के कारण योजना पर वित्तीय दबाव बढ़ा है और तकनीकी/प्रशासनिक कारणों से कई दावों का भुगतान लंबित है।

गैरसैंण को स्मार्ट सिटी बनाने की योजना
सत्र के दौरान गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के सपने पर भी चर्चा हुई। सरकार ने गरैसैंण को स्मार्ट सिटी विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना पर जोर दिया। अवस्थापना विकास के कार्य तेजी से चल रहे हैं, लेकिन स्थायी राजधानी के पूर्ण साकार होने में अभी काफी समय लगेगा।

ईरान युद्ध की आंच दून की रसोई तक, गैस सिलेंडर के लिए एजेंसियों पर लंबी कतारें

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देहरादून: अंतरराष्ट्रीय हालात का असर अब देहरादून की रसोई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है। शहर में एलपीजी गैस की किल्लत से उपभोक्ता परेशान हैं और गैस एजेंसियों व गोदामों के बाहर सिलेंडर लेने के लिए लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोगों को घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है।

बुधवार को राजधानी के कई गैस गोदामों और एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ देखने को मिली। लोग सुबह से ही गैस सिलेंडर लेने के लिए लाइन में खड़े रहे। उपभोक्ताओं का कहना है कि मोबाइल से गैस बुकिंग भी नहीं हो पा रही है। बुकिंग नंबर पर लगातार कॉल करने के बावजूद कॉल कनेक्ट नहीं हो रही, जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।

नया गांव स्थित इंडेन गैस एजेंसी पर सुबह आठ बजे से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतार लग गई थी। दोपहर बाद तक करीब 320 उपभोक्ताओं को सिलेंडर वितरित किए गए, लेकिन इसके बाद स्टॉक खत्म हो गया। परिणामस्वरूप 60 से अधिक लोगों को बिना सिलेंडर के वापस लौटना पड़ा। इसी तरह की स्थिति शहर की अन्य एजेंसियों पर भी देखने को मिली।

उपभोक्ताओं का कहना है कि जब गैस की बुकिंग ही नहीं हो पा रही है तो सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। इससे लोग एजेंसियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

रेस्टोरेंट और ढाबों पर संकट के बादल

घरेलू उपभोक्ताओं को सीमित मात्रा में गैस आपूर्ति की जा रही है, लेकिन वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों जैसे होटल, ढाबे और रेस्टोरेंट को गैस नहीं मिल पा रही है। जिले में 19 हजार से अधिक वाणिज्यिक गैस कनेक्शन हैं और हर महीने करीब 40 हजार से ज्यादा सिलेंडरों की खपत होती है।

गैस आपूर्ति बाधित होने से रेहड़ी-पटरी, होटल और ढाबा संचालकों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि जल्द गैस उपलब्ध नहीं हुई तो कारोबार बंद करने की नौबत आ सकती है।

प्रशासन ने किया इनकार

जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने गैस संकट की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जिले में गैस की आपूर्ति निरंतर जारी है और उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर अफवाह फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने उपभोक्ताओं से गैस बुकिंग कर इंतजार करने की अपील करते हुए कहा कि एजेंसियां घर तक सिलेंडर की डिलीवरी कर रही हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।

उत्तराखंड में खाद्य एवं रसद आपूर्ति पर कड़ी नजर: सीएम धामी के निर्देश पर SEOC में विशेष तैनाती

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देहरादून: वैश्विक स्तर पर उत्पन्न मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने राज्य में खाद्य सामग्री और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कदम उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देश पर राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC), देहरादून में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों की तत्काल विशेष तैनाती की गई है। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और आगे के आदेश तक जारी रहेगी।

सरकारी आदेश के मुताबिक, इन अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य प्रदेश भर में खाद्यान्न, एलपीजी, चीनी, नमक जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता, आपूर्ति श्रृंखला और वितरण व्यवस्था की निरंतर निगरानी करना है। तैनात टीम प्रतिदिन स्थिति की समीक्षा करेगी, संबंधित सूचनाओं का संकलन और विश्लेषण करेगी तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग सहित अन्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगी। रोस्टर के अनुसार अधिकारी SEOC में मौजूद रहेंगे और किसी भी संभावित कमी या समस्या पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में कहा, “राज्य सरकार प्रदेशवासियों को हर हाल में आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त और निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में खाद्यान्न, एलपीजी या अन्य जरूरी सामग्रियों की आपूर्ति प्रभावित न हो। हम लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।”

सीएम धामी ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में उत्तराखंड में खाद्य एवं आवश्यक वस्तुओं का भंडार पर्याप्त है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। राज्य सरकार सभी व्यवस्थाओं को मजबूत बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है ताकि आम जनता को किसी तरह की असुविधा न हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं (जैसे मौसम, व्यापार या अन्य कारकों) के मद्देनजर यह पूर्व सतर्कता वाला कदम सराहनीय है। इससे न केवल日常 आपूर्ति सुचारू रहेगी, बल्कि किसी संभावित आपात स्थिति में भी त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी। यह पहल उत्तराखंड को खाद्य सुरक्षा के मामले में और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण साबित होगी।