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हल्द्वानी से जा रहे थे बरेली, दर्दनाक हादसे में भाई-बहन की मौत

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हल्द्वानी से उत्तर प्रदेश के बरेली लौट रहे गांव भंडसर निवासी लोगों की कार अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे खाई में पलट गई। बरेली के हाफिजगंज थाना क्षेत्र में आज सुबह तड़के यह हादसा हुआ। हादसे में भाई-बहन की मौत हो गई, जबकि परिवार के चार लोग घायल हो गए।

सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया। हादसे का कारण चालक को नींद की झपकी आना बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक गांव भंडसर निवासी मुन्ने (30 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय बाबू बख्श की बड़ी बहन खुशनुमा हल्द्वानी में रहती है। उसने अस्पताल में बच्चे को जन्म दिया।

उसे देखने के लिए मुन्ने अपने भाई मेहंदी हसन, बन्ने बख्श और बन्ने की पत्नी सीमा और चालक युनुस संग कार से गए थे। देर रात करीब तीन बजे सभी लोग हल्द्वानी से बरेली के लिए रवाना हुए थे। वहां से उनके साथ मुन्ने की छोटी बहन मुस्कीन (40 वर्ष) भी मायके आने के लिए कार में सवार हो गई। मुस्कीन की ससुराल लालकुआं में है।

बताया गया है कि तड़के करीब चार बजे इनकी कार सेंथल रोड पर हाफिजगंज में कर्बला के निकट अनियंत्रित होकर खाई में पलट गई। हादसे में मुन्ने और उनकी बहन मुस्कीन की मौत हो गई। युनुस, मेहंदी हसन, बन्ने और उनकी पत्नी घायल हो गए। राहगीरों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया। इधर, हादसे की सूचना मिलते ही मृतकों के परिवार में कोहराम मच गया।

क्या आप जानते हैं मकर संक्रांति पर क्यों उड़ाई जाती है पतंग?

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मकर संक्रांति का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इसे खिचड़ी और उत्तरायण जैसे नामों से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति का त्योहार फसल और सम्पन्नता से जुड़ा है। अलग-अलग जगहों पर इस त्योहार को अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
इस दिन सूरज की पूजा की जाती है और गंगा स्नान का भी खास महत्व है। इस त्योहार एक खास बात और भी है और वह है पतंग उड़ाना। इस दिन पूरा आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। इन रंग-बिरंगी पतंगों को देखकर सभी मन खुशी से झूम उठता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा क्यों है? आइए जानते हैं इसके पीछे की कहानी।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की धार्मिक मान्यताएं हैं। तमिल रामायण के मुताबिक, मकर संक्रांति के दिन सबसे पहली बार पतंग भगवान श्रीराम ने उड़ाई थी। ऐसा कहा जाता है कि उनकी पतंग इतनी ऊंची उड़ रही थी कि वह इंद्रलोक तक पहुंच गई थी। तभी से मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाने की परंपरा शुरू हो गई।
पतंग उड़ाने को शुभता और खुशी का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए इस दिन बच्चों से लेकर बड़े तक हर कोई पतंग उड़ाने के लिए बेहद उत्सुक नजर आता है। मकर संक्रांति के दिन पतंग उड़ाकर लोग अपने जीवन में खुशहाली और सफलता की कामना करते हैं।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण भी हैं। जैसा कि आप जानते हैं मकर संक्रांति का त्योहार सर्दी के मौसम में आता है। जनवरी का महीना कड़ाके की ठंड का होता है। ऐसे में सुबह के समय छत पर पतंग उड़ाने से शरीर को धूप मिलती है, जिससे विटामिन-डी की कमी पूरी करने में मदद मिलती है।
विटामिन-डी शरीर के लिए बेहद जरूरी होता है। इसकी कमी की वजह से हड्डियां और इम्युनिटी कमजोर हो सकती हैं। विटामिन-डी सबसे ज्यादा धूप से मिलती है, लेकिन सर्दी के मौसम में धूप कम निकलती है और आजकल लोग वैसे भी धूप में कम समय बिताते हैं। ऐसे में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने से उन्हें धूप मिलती है और विटामिन-डी मिलती है।
दूसरा कारण यह है कि पतंग उड़ाते समय फिजिकल एक्टिविटी होती है, जिससे हमारी बॉडी एक्टिव रहती है और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है। एक कारण यह भी है कि सर्दी के मौसम में धूप की कमी की वजह से मूड भी काफी डाउन रहता है। ऐसे में पतंग उड़ाने से मूड अच्छा होता है, जो हमारी मेंटल हेल्थ के लिए फायदेमंद है।
मकर संक्रांति के दिन लोग एक साथ मिलकर पतंग उड़ाते हैं, जिससे सामाजिक एकता बढ़ती है। पतंग उड़ाना बच्चों के लिए एक मजेदार खेल है। इससे उनके बचपन में यादें बनती हैं और बड़ों की बचपन की यादें ताजा होती हैं।

सीएम आतिशी पर दिल्ली पुलिस ने दर्ज की FIR

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नई दिल्ली : नॉर्थ एवेन्यू थाने में आम आदमी पार्टी (AAP) के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि AAP फोटो लगाकर प्रचार कर रही है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की है। वहीं, गोविंद पुरी में मुख्यमंत्री आतिशि पर सरकारी वाहन के चुनाव में इस्तेमाल करने पर FIR दर्ज की गई है।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा और आम आदमी पार्टी के बीच जुबानी हमलों के साथ ही अब कानूनी हमले भी शुरू हो गए हैं। पूर्व सीएम और आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पहले ही इस बात की आशंका जाहिर की थी कि भाजपा उनके खिलाफ कोई भी हथकंडा अपना सकती है।

MAHAKUMBH : महाकुंभ में मकर संक्रांति पर अखाड़ों का अमृत स्नान

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प्रयागराज महाकुंभ में मकरसंक्रांति के महास्नान के लिए देश-दुनिया का जन ज्वार-जीवनदायिनी गंगा, श्यामल यमुना व पौराणिक सरस्वती के पावन संगम में महाकुंभ के प्रथम अमृत स्नान पर्व पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़ा है। पौष पूर्णिमा स्नान पर्व के बाद आज महाकुंभ का महास्नान शुरू हो चुका है।
प्रयागराज महाकुंभ मेला प्रशासन की तरफ से पूर्व की मान्यताओं का पूरी तरह से पालन किया जा रहा है। महानिर्वाणी अखाड़े के अमृत साधु-संत स्नान के लिए जा रहे हैं। मकर संक्रांति पर श्रीपंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने सबसे पहले अमृत स्नान किया। जिसके साथ श्रीशंभू पंचायती अटल अखाड़ा ने अमृत स्नान किया।
दूसरे स्थान पर श्रीतपोनिधि पंचायती श्रीनिरंजनी अखाड़ा एवं श्रीपंचायती अखाड़ा आनंद अमृत स्नान किया। तीन संन्यासी अखाड़े अमृत स्नान करेंगे, जिसमें श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा एवं श्रीपंच दशनाम आवाहन अखाड़ा तथा श्रीपंचाग्नि अखाड़ा शामिल हैं।
पंचायती निर्वाणी अखाड़े के नागा साधुओं ने भाला, त्रिशूल और तलवारों के साथ अपने शाही स्वरूप में अमृत स्नान किया। साधु-संत घोड़े और रथों पर सवार होकर शोभायात्रा में शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो गया। उनके साथ चल रही भजन मंडलियों और श्रद्धालुओं के जयघोष ने माहौल को और दिव्य बना दिया।

 

महाकुम्भ नगर में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए। हर मार्ग पर बैरिकेडिंग लगाकर वाहनों की गहन जांच की गई। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती से पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहा। डीआईजी कुम्भ मेला वैभव कृष्ण, एसएसपी राजेश द्विवेदी समेत पुलिस टीम ने घोड़े के साथ मेला क्षेत्र में पैदल मार्च किया और अमृत स्नान जा रहे अखाड़ा साधुओं का मार्ग प्रशस्त किया।

निकाय चुनाव: नेता-वोटर दोनों साइलेंट, किसका फायदा, किसको नुकसान?

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उत्तराखंड में दिन दिनों निकाय चुनाव जोरों पर है। चुनाव कौन जीतेगा? कौन हारेगा? यह कह पाना अभी मुश्किल है। चुनावी माहौल में अभी उस तरह की तेजी नजर नहीं आ रही है। जैसा आमतौर पर होता है। पहाड़ों पर चुनावी शोर कुछ हद तक जोर पकड़े हुए है। लेकिन, मैदानी जिलों खासकर राजधानी देहरादून में अब तक चुनाव प्रचार रफ्तार पकड़ता नजर नहीं आ रहा है। हर कोई यही पूछ रहा है कि साइलेंट वोटर किसकी मवासी घाम लगाएंगे?

खासकर राष्ट्रीय दलों के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में कुछ ज्यादा जोर लगाते नजर नहीं आ रहे हैं। बात चाहे मेयर प्रत्याशियों की हो या फिर पार्षद पदों के प्रत्याशियों की। अब तक दोनों ही दलों के प्रत्याशी कम ही नजर आ रहे हैं।

कुछ वार्डों में डीजे बॉक्स के जरिए प्रचार होता हुआ नजर आ रहा है। लेकिन, अब तक जत्थों में जो प्रचार नजर आता था। मुद्दों की बातें होती थी, फिलहाल वह सब नदारद है। प्रत्याशियों के पोस्टर तक नजर नहीं आ रहे हैं।

मेयर पद के प्रत्याशी भी चुनाव खर्च में कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। अब तक जनसभाएं भी नजर नहीं आई हैं। देहरादून नगर निगम में 100 वार्ड हैं, लेकिन अब तक जो जानकारी है, उसके अनुसार मेयर प्रत्याशी मुख्य बाजार के अलावा किसी दूर के वार्ड में अब तक नहीं आए हैं।

ऐसा क्यों हो रहा है, यह फिलहाल किसी के समझ में नहीं आ रहा है। सवाल यह है कि प्रत्याशी जनता के बीच क्यों नहीं जा रहे हैं? चुनाव की यह चुप्पी किसके पक्ष में जाने वाली है यह कह पाना थोड़ा जल्दबाजी होगी। लेकिन, अगर ऐसा ही चलता रहा तो आने वाले समय में चुनाव को लेकर जो उदासीनता है, वह बढ़ती चली जाएगी।

लेकिन, इस सबक के बीच जो एक बात नजर आ रही है। वह यह है कि वार्डों में भाजपा-कांग्रेस से ज्यादा निर्दलीय सक्रिय नजर आ रहे हैं। भाजपा को उन वार्डों में नुकसान होना तय है, जिन वार्डों में कांग्रेस से आए नेताओं को भाजपा ने टिकट दिया है। भाजपा के इस फैसलों से कार्यकर्ता नाराज हैं और वो भाजपा के बजाय भाजपा से टिकट की दावेदारी कर रहे निर्दलीयों के समर्थन में खड़े नजर आ रहे हैं।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी ने कांग्रेस के उन नेताओं को टिकट दिया है, जो 5-6 महीने पहले ही भाजपा में आए हैं। जिन नेताओं ने भाजपा के विरोध में अपना पूरा जीवन खपा दिया। आज उनको कार्यकर्ताओं पर थोपा जा रहा है। जबकि, सालों से भाजपा को सींचने का काम कर रहे नेताओं को नकारा जा रहा है। इससे भाजपा को नुकसान होना तय है।

चर्चा में परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष का बयान, 4 बच्चे पैदा करो, 1 लाख पाओ

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मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष ने जनसंख्या बढ़ाने पर पुरस्कार देने का एलान किया है। उन्होंने चार बच्चे पैदा करने वालों को ऑफर दिया है।  विष्णु राजोरिया ने चार बच्चे पैदा करने का फैसला करने वाले युवा ब्राह्मण कपल के लिए एक लाख रुपए के पुरस्कार का एलान किया है।
भोपाल में आयोजित एक सामाजिक कार्यक्रम में मध्य प्रदेश परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पंडित विष्णु राजोरिया ने ये घोषणा की है। भोपाल में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, राजोरिया ने कहा कि ‘विधर्मियों’ की संख्या बढ़ रही है क्योंकि ‘हमने बड़े पैमाने पर अपने परिवारों पर ध्यान देना बंद कर दिया है।
राजोरिया ने अपने एलान में युवाओं पर जोर दिया है। मुझे युवाओं से बहुत उम्मीदें हैं। हम वृद्ध लोगों से ज्यादा उम्मीद नहीं कर सकते। ध्यान से सुनिए, आप भावी पीढ़ी की सुरक्षा के लिए जिम्मेदार हैं। युवा व्यवस्थित हो जाते हैं और एक बच्चे के बाद रुक जाते हैं। मैं आग्रह करता हूं आपके पास कम से कम चार बच्चे होने चाहिए।
इसके बाद उन्होंने एलान किया कि परशुराम बोर्ड चार बच्चों वाले कपल को 1 लाख रुपये का पुरस्कार देगा। चाहे मैं बोर्ड अध्यक्ष रहूं या न रहूं, पुरस्कार दिया जाएगा। राजोरिया ने कहा कि युवा अक्सर उनसे कहते हैं कि शिक्षा अब महंगी है। किसी तरह गुजारा करो, लेकिन बच्चे पैदा करने में पीछे मत रहना। नहीं तो विधर्मी इस देश पर कब्जा कर लेंगे।
उनका एलान एक व्यक्तिगत पहल थी, न कि सरकारी पहल। उन्होंने कहा, ‘यह मेरा सामाजिक वक्तव्य है, जो एक सामुदायिक कार्यक्रम में दिया गया है। ब्राह्मण समाज उच्च पदों के लिए बच्चों की शिक्षा और ट्रेनिंग इन प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सकता है।

2024 में मारे गए आतंकियों में से 60 फीसदी पाकिस्तानी: सेना प्रमुख

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चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ उपेंद्र द्विवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि मेरा मिशन है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मजबूत आधार स्तम्भ के लिए भारतीय सेना को आत्मनिर्भर फ्यूचर रेडी फोर्स के रूप में तैयार करना।

सेना प्रमुख ने कहा कि ‘मैं उत्तरी सीमा से बात शुरू करता हूं। जैसा कि आप सबको पता है कि स्थिति सेंसिटिव है, मगर स्थिर है। पूर्वी लद्दाख के डेपसांग और डेमचोक में समस्या सुलझ गई है। मैंने अपने को कमांडर्स को ग्राउंड लेवल पर हालात से निपटने के लिए ऑथराइज किया है।

सेना प्रमुख ने कहा कि ‘जम्मू-कश्मीर में स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है। डीजीएमओ की सहमति के बाद से ही फरवरी 2021 से सीजफायर जारी है। लेकिन पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की कोशिशें लगातार की जा रही हैं।

पिछले साल जो आतंकी मारे गए, उसमें से 60 फीसदी पाकिस्तानी मूल के थे। हाल के दिनों में उत्तरी कश्मीर और डोडा-किश्तवाड़ में आतंकी गतिविधियां बढ़ी हैं। अमरनाथ यात्रा के लिए 5 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे। टेररिज्म से टूरिज्म की थीम धीरे-धीरे आकार ले रही है।

सेना प्रमुख उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि नॉर्थ ईस्ट में हालात लगातार सुधर रहे हैं। मणिपुर में सुरक्षा बलों के प्रयास और सक्रिय सरकारी कोशिश से स्थिति नियंत्रण में है। हालांकि, हिंसा की चक्रीय घटनाएं जारी हैं। हम क्षेत्र में शांति स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं।

 

महाकुंभ में अब तक 60 लाख लोगों ने लगाई डुबकी

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गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी के तट पर महामिलन 45 दिन तक चलेगा। पौष पूर्णिमा के प्रथम दिन करीब 60 लाख लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। पौष पूर्णिमा की प्रथम डुबकी के साथ महाकुंभ का शुभारंभ हो गया है। अब तक 60 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया है।

आधी रात से ही श्रद्धालु मेला क्षेत्र में विभिन्न रास्तों से प्रवेश करने लगे और संगम पर भीड़ बढ़ने लगी थी। हर-हर गंगे और जय गंगा मैया के घोष के बीच स्नान शुरू हुआ तो सुबह का उजाला होते होते संगम नोज स्नानार्थियों से पट गया। संगम क्षेत्र में सोमवार से ही माह भर का कल्पवास भी प्रारंभ हो गया।

मुख्‍यमंत्री योगी ने कहा, ”विश्व के विशालतम आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक समागम ‘महाकुम्भ’ का आज से तीर्थराज प्रयागराज में शुभारंभ हो रहा है। अनेकता में एकता की अनुभूति के लिए, आस्था एवं आधुनिकता के संगम में साधना एवं पवित्र स्नान के लिए पधारे सभी पूज्य सन्तों, कल्पवासियों, श्रद्धालुओं का हार्दिक स्वागत है। माँ गंगा आप सभी की मनोकामना पूर्ण करें। महाकुंभ प्रयागराज के शुभारंभ एवं प्रथम स्नान की मंगलमय शुभकामनाएं। सनातन गर्व-महाकुम्भ पर्व।

डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा रुपया, शेयर बाजार भी हुआ धड़ाम

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शेयर बाजार खुलते ही धड़ाम हो गया। रियल एस्टेट, फाइनेंशियल सर्विस और कंज्यूमर ड्यूरेबल स्टॉक तेजी से नीचे आ गए। वहीं रुपया भी इतिहास के सबसे निचले स्तर पर आ गया है।
डॉलर के मुकाबले रुपया सोमवार को 86.27 रुपये पर पहुंच गया। अभी दो दिन पहले शुक्रवार को भी रुपया लाइफ टाइम लो पर पहुंच गया था। सुबह 9:20 बजे बीएसई 677.22 प्वाइंट और एनएसई 212.90 प्वाइंट टूट गया।

रुपया आज यानी 13 जनवरी को अपने रिकॉर्ड ऑल टाइम लो पर आ गया है। इसमें अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 27 पैसे की गिरावट देखने को मिली और यह 86.31 रुपए प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर पर है। इससे पहले 11 जनवरी को डॉलर के मुकाबले रुपया 86.12 पर बंद हुआ था।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, रुपए में इस गिरावट की वजह हाल ही में भारतीय शेयर मार्केट में विदेशी निवेशकों के जरिए की जा रही बिकवाली है। इसके अलावा जिओ पॉलिटिकल टेंशन्स कारण भी रुपए पर नेगेटिव असर पड़ा है।

रुपये में गिरावट का मतलब है कि भारत के लिए चीजों का इंपोर्ट महंगा होना है। इसके अलावा विदेश में घूमना और पढ़ना भी महंगा हो गया है। मान लीजिए कि जब डॉलर के मुकाबले रुपए की वैल्यू 50 थी तब अमेरिका में भारतीय छात्रों को 50 रुपए में 1 डॉलर मिल जाते थे। अब 1 डॉलर के लिए छात्रों को 86.31 रुपए खर्च करने पड़ेंगे। इससे फीस से लेकर रहना और खाना और अन्य चीजें महंगी हो जाएंगी।

डॉलर की तुलना में किसी भी अन्य करेंसी की वैल्यू घटे तो उसे मुद्रा का गिरना, टूटना, कमजोर होना कहते हैं। अंग्रेजी में करेंसी डेप्रिशिएशन। हर देश के पास फॉरेन करेंसी रिजर्व होता है, जिससे वह इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन करता है। फॉरेन रिजर्व के घटने और बढ़ने का असर करेंसी की कीमत पर दिखता है।

महाकुंभ : सनातन का सबसे बड़ा समागम, हर तरफ गूंज रहा हर-हर महादेव

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प्रयागराज : महाकुंभ इस बार बेहद खास है। ग्रहों की स्थिति बेहद दुर्लभ संयोग बना रही है। 144 साल के बाद महाकुंभ में समुद्र मंथन के संयोग बन रहे हैं। बुधादित्य योग, कुंभ योग, श्रवण नक्षत्र के साथ ही सिद्धि योग में त्रिवेणी के तट पर श्रद्धालु महाकुंभ में डुबकी लगाएंगे।

पौष पूर्णिमा के स्नान के साथ भव्य और दिव्य महाकुंभ मेले की शुरुआत हो चुकी है. सोमवार की तड़के से ही देशी-विदेशी लाखों श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। आज से ही 45 दिनों के कल्पवास की शुरुआत भी भक्त करेंगे। करीब 12 किलोमीटर क्षेत्र के स्नान घाटों पर जबरदस्त भीड़ है। एपल को-फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल जॉब्स भी प्रयागराज पहुंच चुकी हैं। निरंजनी अखाड़े में उन्होंने धार्मिक अनुष्ठान किया।

कल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन महाकुंंभ में पहला अमृत स्नान है। अखाड़े मकर संक्रांति के दिन अमृत स्नान करेंगे। प्रशासन ने इसकी भी तैयारी पूरी कर ली है. संगम की ओर बल्लियां लगाई जा रहीं हैं। नागा साधु इसी रास्ते से दौड़ते हुए शाही स्नान के लिए जाएंगे।

इस साल मकर संक्रांति 14 जनवरी को है. पहला शाही स्नान भी इसी दिन है। खास बात यह है कि इस बार कोई भद्रा नहीं है, यह सुबह से शाम तक शुभ रहेगा।

महाकुंभ के महासंयोग 

चंद्र एवं बृहस्पति के प्रिय ग्रह बुध मकर राशि में हैं जो बुधादित्य योग बना रहे हैं। कुंंभ योग और राशि परिवर्तन योग इस महाकुंभ को अति विशिष्ट बना रही है। शनि की कुंभ राशि एवं शुक्र तथा बृहस्पति के राशि परिवर्तन की स्थिति का यह संयोग 144 सालों के बाद बन रहा है।

सूर्य, चंद्र और शनि तीनों ग्रह शनि की राशि मकर एवं कुंभ में गोचर कर रहे हैं। यह संयोग देवासुर संग्राम के समय निर्मित हुआ था। असुर गुरु शुक्र उच्च राशि में होकर बृहस्पति की राशि में तथा बृहस्पति शुक्र की राशि में हैं। इसके अलावा श्रवण नक्षत्र सिद्धि योग में सूर्य चंद्र की स्थिति तथा उच्च शुक्र एवं कुंभ राशि के शनि के कारण यह महाकुंभ परम योगकारी होगा। 

जब देवगुरु बृहस्पति शुक्र की राशि वृषभ में और जब सूर्य देव मकर राशि में गोचर करते हैं, तब देवगुरु बृहस्पति की नवम दृष्टि सूर्य देव पर पड़ती है। यह काल अत्यंत पुण्यदायी होता है। जब देवगुरु बृहस्पति अपनी 12 राशियों का भ्रमण कर वापस वृषभ राशि में आते हैं, तब हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन होता है। इसी तरह जब बृहस्पति का वृषभ राशि में गोचर 12 बार पूरा हो जाता है।

यानी जब बृहस्पति के वृषभ राशि में गोचर के 12 चक्र पूरे हो जाते हैं, तो उस कुंभ को पूर्ण महाकुंभ कहा जाता है। जब देवासुर संग्राम हुआ था तो राक्षसों के गुरु शुक्र थे। इस बार वह उच्च स्थिति में राहु और केतु के साथ हैं। जबकि देवगुरु बृहस्पति शुक्र की राशि में हैं। देवासुर संग्राम के समय जो ग्रहों की स्थिति थी शुक्र दैत्य गुरु तथा बृहस्पति देवगुरु पूरी तरह से समुद्र मंथन के नायकों का दायित्व निभा रहे हैं।