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ऋषिकेश में शराब ठेके के खिलाफ जन आक्रोश: युवक की हत्या के बाद बंद करने की मांग तेज, कैबिनेट मंत्री पर सवाल

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ऋषिकेश: मुनिकीरेती के खारा श्रोत इलाके में हाल ही में एक युवक की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी, जो शराब के ठेके के पास बनी एक दुकान में हुई। इस घटना ने स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है, और तब से ही शराब ठेके को बंद करने की मांग जोर पकड़ रही है। हालांकि, न तो राज्य सरकार इस पर ध्यान दे रही है और न ही आबकारी विभाग कोई ठोस कार्रवाई कर रहा है।

विरोध कर रहे लोगों का आरोप है कि शराब ठेका खुलने के बाद से इस क्षेत्र में चार हत्याएं हो चुकी हैं, और इसके लिए पूरी तरह से ठेका जिम्मेदार है। उनका कहना है कि ठेका नगर पालिका की जमीन पर अवैध रूप से बनाया गया है, और इसके लिए पालिका से कोई अनुमति नहीं ली गई। जिला आबकारी अधिकारी ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि यह जमीन सरकार की है, और सरकार अपनी जमीन को किसी भी उद्देश्य के लिए उपयोग कर सकती है।

बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब नगर पालिका ने ठेके के आसपास की अन्य दुकानों पर कार्रवाई की, तो शराब ठेके को क्यों बख्शा गया? विरोधियों का दावा है कि ठेका बिना एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) के संचालित हो रहा है। हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान, आबकारी इंस्पेक्टर ने अधिकारियों के निर्देश पर ठेका बंद करने की लिखित सहमति दी थी, लेकिन अब जिला अधिकारी का कहना है कि ठेका पूरी तरह नियमों के अनुरूप चल रहा है।

आक्रोशित लोगों ने इस मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को सीधे निशाने पर लिया है। उनका आरोप है कि ठेके से जुड़ी सारी अनियमितताएं मंत्री के इशारे पर हो रही हैं। साथ ही, प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की और रात भर धरने पर डटे रहे।

एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि ठेका अर्ध कुंभ क्षेत्र के दायरे में आता है, फिर भी यह किन नियमों के तहत खुला हुआ है? स्थानीय निवासियों का मानना है कि ठेके के पीछे कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल का हाथ है, जिसकी वजह से कार्रवाई नहीं हो रही। इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, यह देखना बाकी है, लेकिन जनता का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।

चुनाव आयोग ने की मतदाता सूची पुनरीक्षण की घोषणा, 12 राज्यों में शुरू होगा दूसरा चरण

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नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की घोषणा की है। सोमवार शाम को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि यह प्रक्रिया पहले उन राज्यों में शुरू होगी, जहां निकट भविष्य में चुनाव होने हैं।

उन्होंने कहा कि बिहार में पहले ही एसआईआर की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिसके आधार पर अन्य राज्यों में यह अभियान शुरू किया जाएगा। एसआईआर का दूसरा चरण 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू होगा, जिनमें अंडमान निकोबार द्वीपसमूह, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, लक्षद्वीप, मध्य प्रदेश, पुड्डचेरी, राजस्थान, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल शामिल हैं। प्रत्येक पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1000 मतदाता रखने का लक्ष्य है।

एसआईआर के दूसरे चरण का शेड्यूल भी घोषित किया गया। 28 अक्टूबर से 3 नवंबर, 2025 तक प्रिंटिंग और प्रशिक्षण का कार्य होगा। इसके बाद 4 नवंबर से 4 दिसंबर, 2025 तक घर-घर जाकर मतदाता जानकारी एकत्र की जाएगी। मतदाता सूची का ड्राफ्ट 9 दिसंबर, 2025 को प्रकाशित होगा।

बिहार में एसआईआर का कार्य पहले ही पूरा हो चुका है, जहां 7.42 करोड़ मतदाताओं की अंतिम सूची 30 सितंबर को प्रकाशित की गई थी। बिहार में विधानसभा चुनाव के लिए 6 और 11 नवंबर को दो चरणों में मतदान होगा, और परिणाम 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे।

श्रेयस अय्यर की चोट पर बीसीसीआई का अपडेट: प्लीहा में कट, सिडनी के अस्पताल में आईसीयू में भर्ती

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने भारतीय वनडे टीम के उप-कप्तान श्रेयस अय्यर की स्वास्थ्य स्थिति पर ताजा अपडेट जारी किया है। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 25 अक्टूबर, 2025 को सिडनी में खेले गए तीसरे वनडे मैच के दौरान श्रेयस को बाईं निचली पसली में गंभीर चोट लगी थी। चोट के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां स्कैन से पता चला कि उनके प्लीहा (स्प्लीन) में चोट के कारण कट आया है।

वर्तमान में श्रेयस सिडनी के एक अस्पताल में आईसीयू में भर्ती हैं। बीसीसीआई ने बताया कि उनकी स्थिति स्थिर है और वे धीरे-धीरे रिकवरी की ओर बढ़ रहे हैं। बीसीसीआई की मेडिकल टीम, सिडनी और भारत के विशेषज्ञ डॉक्टरों के साथ मिलकर उनकी स्थिति पर लगातार नजर रख रही है। भारतीय टीम के डॉक्टर भी सिडनी में उनके साथ रहकर रोजाना उनकी रिकवरी की प्रगति का आकलन कर रहे हैं।

चोट उस समय लगी जब 34वें ओवर में श्रेयस बैकवर्ड पॉइंट पर एलेक्स कैरी का कैच पकड़ रहे थे। कैच लेने के बाद वे दर्द से कराहते दिखे, और फिजियो टीम ने तुरंत उन्हें मैदान से बाहर ले जाकर प्रारंभिक जांच की। ड्रेसिंग रूम में उनकी हालत बिगड़ने और आंतरिक रक्तस्राव (इंटरनल ब्लीडिंग) की आशंका के चलते उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। पसली टूटने के कारण हुए आंतरिक रक्तस्राव की वजह से उन्हें आईसीयू में रखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि रक्तस्राव से उत्पन्न होने वाले संभावित संक्रमण को रोकने के लिए उन्हें 2 से 7 दिन तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है।

ये होंगे भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश, सीजेआई गवई ने की सिफारिश

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नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में न्यायमूर्ति सूर्यकांत की सिफारिश की है, जिससे देश के अगले मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो गई है। न्यायमूर्ति गवई 23 नवंबर, 2025 को 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त होंगे। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने हाल ही में सीजेआई गवई से प्रक्रिया ज्ञापन (एमओपी) के तहत अगले मुख्य न्यायाधीश के लिए सिफारिश मांगी थी। एमओपी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ और उपयुक्त न्यायाधीश को इस पद के लिए अनुशंसित किया जाता है।

इसके तहत, वरिष्ठता के आधार पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत को 53वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में अनुशंसित किया गया है। राष्ट्रपति की औपचारिक मंजूरी के बाद, वे 24 नवंबर, 2025 को पदभार ग्रहण करेंगे और 9 फरवरी, 2027 तक लगभग 15 महीने तक सेवा देंगे।

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10 फरवरी, 1962 को जन्मे न्यायमूर्ति सूर्यकांत का कानूनी और न्यायिक करियर प्रभावशाली रहा है। सुप्रीम कोर्ट में आने से पहले वे हरियाणा के महाधिवक्ता रहे और युवावस्था में ही वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्राप्त किया। वर्तमान में वे राष्ट्रीय विधि अध्ययन एवं अनुसंधान विश्वविद्यालय, रांची के कुलाध्यक्ष और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने अनुच्छेद 370 के निरसन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, लोकतंत्र, भ्रष्टाचार, पर्यावरण, और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर ऐतिहासिक फैसले दिए हैं। उन्होंने औपनिवेशिक काल के राजद्रोह कानून को स्थगित करने और बिहार में 65 लाख मतदाताओं के नाम हटाने के मामले में पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का आदेश दिया।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वन रैंक-वन पेंशन (ओआरओपी) को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया और सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन की मांग पर सुनवाई की। वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार और पेगासस स्पाइवेयर मामले की जांच से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों का हिस्सा रहे। उन्होंने 2022 में प्रधानमंत्री की पंजाब यात्रा के दौरान सुरक्षा चूक की जांच के लिए समिति गठन में भी योगदान दिया।

छठ पूजा 2025: आज संध्या अर्घ्य के साथ लोक आस्था का महापर्व, सूर्यदेव और छठी माता की पूजा

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देशभर में आज लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा धूमधाम से मनाया जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व का तीसरा दिन, जो कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को पड़ता है, सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। आज शाम को व्रती महिलाएं पवित्र नदियों और तालाबों के किनारे डूबते सूर्य को संध्या अर्घ्य अर्पित करेंगी और छठी माता की पूजा करेंगी। पंचांग के अनुसार, आज सूर्यास्त का समय शाम 5:40 बजे है, जब व्रती सूर्यदेव को जल, दूध और गंगाजल अर्पित करेंगे।

छठ पूजा का यह पर्व 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत के साथ मनाया जाता है, जिसमें व्रती सूर्यदेव और उनकी बहन छठी माता की आराधना करते हैं। इस दिन बांस के सूप में मौसमी फल, सब्जियां, ठेकुआ और चावल के लड्डू सजाकर प्रसाद के रूप में अर्पित किए जाते हैं। दीपक जलाकर सूर्यदेव और छठी माता की आरती की जाती है, और व्रत कथा सुनकर भक्ति भाव से गीत गाए जाते हैं।

छठ पर्व का महत्व हिंदू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व है। यह त्योहार दीपावली के छठे दिन शुरू होता है और कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि पर समाप्त होता है। पर्व की शुरुआत पहले दिन ‘नहाय-खाय’ से होती है, दूसरे दिन ‘खरना’ मनाया जाता है, तीसरे दिन संध्या अर्घ्य के साथ छठ पूजा का मुख्य अनुष्ठान होता है, और चौथे दिन सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है। मान्यता है कि यह व्रत संतान की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है।

षष्ठी तिथि का समय हिंदू पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि का आरंभ 27 अक्टूबर को सुबह 6:04 बजे हुआ और इसका समापन 28 अक्टूबर को सुबह 7:59 बजे होगा। इस दौरान देशभर के घाटों पर भक्तों की भीड़ सूर्यदेव और छठी माता की पूजा के लिए उमड़ेगी।

छठ की शुभकामनाएं छठ पर्व के अवसर पर लोग अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और परिजनों को शुभकामनाएं भेज रहे हैं। सोशल मीडिया पर छठ पूजा की बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया है। कुछ लोकप्रिय शुभकामना संदेश इस प्रकार हैं:

  • “छठ का व्रत देता संतान को दीर्घायु का वरदान, ये छठ आपके जीवन में लाए उमंग अपार। छठ पूजा की शुभकामनाएं!”
  • “सूरज की पूजा, जल की धार, छठ का त्योहार लाए खुशियों की बहार। छठी माता का आशीर्वाद मिले बार-बार!”
  • “गेहूं का ठेकुआ, चावल के लड्डू, छठी माता करें आपकी हर मुराद पूरी। छठ पूजा की हार्दिक बधाई!”

छठ पूजा का यह पर्व न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का प्रतीक भी है। देशभर में भक्त इस पर्व को पूरे उत्साह और भक्ति के साथ मना रहे हैं, और घाटों पर सूर्यदेव की आराधना के लिए भारी भीड़ जुट रही है।

राम मंदिर समेत यूपी के धार्मिक स्थलों पर थी हमले की तैयारी, ISI संदिग्ध अदनान की गिरफ्तार

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नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आईएसआईएस से जुड़े एक संदिग्ध आतंकी अदनान को गिरफ्तार किया है, जो राम मंदिर सहित उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख हिंदू धार्मिक स्थलों पर हमले की योजना रच रहा था। भोपाल निवासी इस आतंकी की गिरफ्तारी के बाद उत्तर प्रदेश एटीएस की टीम दिल्ली पहुंची है और पिछले 48 घंटों से उसके मंसूबों का पर्दाफाश करने में जुटी हुई है। यह गिरफ्तारी एक बड़े आतंकी मॉड्यूल को तोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, खासकर जब 21 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर के ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं।

अदनान पहले भी आतंकी गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है। पिछले साल जून में उसने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर सर्वे के आदेश देने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज रवि कुमार दीवाकर को सोशल मीडिया पर धमकी दी थी। अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर जज की फोटो पोस्ट कर उसने लाल रंग से “काफिर” लिखा और अंग्रेजी में मैसेज दिया, “काफिर का खून हलाल है, उन लोगों के लिए जो दीन के लिए लड़ रहे हैं।” इस धमकी के बाद यूपी एटीएस ने उसे भोपाल से गिरफ्तार किया था, लेकिन करीब पांच महीने बाद वह जमानत पर रिहा हो गया। जेल से छूटने के बाद अदनान ने भोपाल में जिहादी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश तेज कर दी, जिसकी जानकारी दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को मिली।

स्पेशल सेल ने अदनान को दिल्ली के सद्दीक नगर से गिरफ्तार किया, जबकि एक अन्य आरोपी अदनान (भोपाल से) को भी इसी मॉड्यूल से जोड़ा गया है। दोनों संदिग्ध आईएसआईएस के विदेशी हैंडलरों से संपर्क में थे, जो सीरिया-तुर्की सीमा से संचालित हो रहे हैं। जांच में सामने आया है कि अदनान मुस्लिमों और उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने को लेकर बेहद नाराज था। सीरिया में बैठे खलीफा द्वारा भेजे गए वीडियो में राम मंदिर समेत यूपी के कई धार्मिक स्थलों का जिक्र था, जो एजेंसियों की चिंता बढ़ा रहा है। एटीएस अब यह पता लगा रही है कि अदनान कितनी बार यूपी आया, किन शहरों में घूमा और उसके नेटवर्क का दायरा क्या है।

दिल्ली में भी धमाकों की साजिश गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक सामग्री, एक रिस्टवॉच और आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए। दोनों संदिग्धों ने आईएसआईएस के प्रति निष्ठा का वीडियो भी रिकॉर्ड किया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, ये आतंकी दिवाली के दौरान राजधानी के हाई-फुटफॉल एरिया जैसे एक प्रमुख मॉल और पब्लिक पार्क में हमला करने की तैयारी में थे। दोनों ने फिदायीन (सुसाइड) अटैक के लिए ट्रेनिंग ली थी और कई इंस्टाग्राम अकाउंट्स के जरिए उग्रवादी कंटेंट शेयर कर रहे थे।

एटीएस की सतर्कता, सुरक्षा बढ़ी इस गिरफ्तारी ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर ला दिया है। एटीएस अधिकारी लगातार अदनान से यूपी के धार्मिक स्थलों पर हमले की योजनाओं के बारे में पूछताछ कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साजिश पैन-इंडिया स्तर पर फैली हुई हो सकती है, क्योंकि हाल के महीनों में दिल्ली पुलिस ने अल-कायदा और आईएसआईएस से जुड़े कई मॉड्यूल्स को तोड़ा है। अदनान को तीन दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है, और जांच आगे बढ़ रही है।

उत्तराखंड में पर्यटन: तीन साल में 23 करोड़ पर्यटक

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देहरादून: उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयास रंग ला रहे हैं। बीते तीन वर्षों में राज्य में 23 करोड़ से अधिक पर्यटकों ने दस्तक दी है, जिससे होम स्टे, होटल, ढाबा संचालकों, महिला स्वयं सहायता समूहों और परिवहन कारोबारियों की आजीविका को मजबूत समर्थन मिला है।

बहुआयामी पर्यटन का विस्तार

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड का पर्यटन अब केवल बड़े शहरों और प्रसिद्ध हिल स्टेशनों तक सीमित नहीं रहा। पर्यटक अब दूरदराज के छोटे-छोटे स्थानों तक पहुंच रहे हैं। राफ्टिंग, ट्रैकिंग, बंजी जम्पिंग और पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों में देसी-विदेशी पर्यटकों की भागीदारी बढ़ी है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है। वर्तमान में 6,000 से अधिक होम स्टे संचालक पर्यटन की बढ़ती गतिविधियों से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं।

तीर्थाटन में अभूतपूर्व उछाल

उत्तराखंड में तीर्थाटन भी चरम पर है। इस वर्ष चारधाम यात्रा में अब तक 50 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। केदारनाथ और यमुनोत्री के पैदल मार्गों पर 4,300 से अधिक घोड़ा-खच्चर संचालकों ने अपनी सेवाएं दीं। शीतकालीन चारधाम यात्रा को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार सक्रिय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदि कैलाश यात्रा ने पिथौरागढ़ के सीमांत क्षेत्रों में तीर्थाटन और पर्यटन को नई गति प्रदान की है।

पर्यटन: उत्तराखंड की आर्थिक रीढ़

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “पर्यटन उत्तराखंड की आर्थिक रीढ़ है। यह स्थानीय लोगों को सीधे लाभ पहुंचाता है। हमारा लक्ष्य वर्षभर पर्यटन और तीर्थाटन गतिविधियों को बढ़ावा देना है।” उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और मार्गदर्शन से उत्तराखंड में पर्यटन को नई दिशा मिली है।

उत्तराखंड में लागू होगा “ग्रीन सेस” राज्य गठन के 25 साल पूर्ण होने पर सरकार की नई पहल

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देहरादून। उत्तराखण्ड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “ग्रीन सेस” लागू करने की घोषणा की है। यह सेस अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर वसूला जाएगा, जिससे प्राप्त धनराशि वायु प्रदूषण नियंत्रण, हरित अवसंरचना और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन पर खर्च की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “उत्तराखण्ड के 25 वर्ष पूरे होने पर यह हमारी प्रतिबद्धता है कि हम राज्य को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण-मुक्त बनाएं। ‘ग्रीन सेस’ से प्राप्त राजस्व का उपयोग वायु गुणवत्ता सुधार, हरित अवसंरचना और स्मार्ट यातायात प्रबंधन में किया जाएगा।”

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि बोर्ड के अध्ययन के अनुसार देहरादून में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत सड़क की धूल (55%) है, जबकि वाहन उत्सर्जन (7%) भी एक प्रमुख कारण है। ग्रीन सेस के माध्यम से सड़क धूल नियंत्रण और स्वच्छ वाहन नीति अपनाना शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने का सबसे प्रभावी कदम होगा।

भारत सरकार के “स्वच्छ वायु सर्वेक्षण – 2024” में उत्तराखण्ड के शहरों ने शानदार प्रदर्शन किया है — ऋषिकेश को 14वाँ और देहरादून को 19वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार इस उपलब्धि को और सुदृढ़ करने के लिए ग्रीन सेस से मिलने वाली आय का उपयोग करेगी।

मुख्य उद्देश्य

• वायु प्रदूषण में कमी और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में सुधार

• पुराने प्रदूषणकारी वाहनों पर नियंत्रण

• स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को प्रोत्साहन

• सड़क धूल, वृक्षारोपण और वायु निगरानी नेटवर्क में सुधार

मुख्य विशेषताएं

• बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से “ग्रीन सेस” वसूला जाएगा

• इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, सोलर और बैटरी वाहनों को छूट दी जाएगी

• इससे राज्य को लगभग ₹100 करोड़ प्रतिवर्ष की आय होने का अनुमान

• यह राशि वायु निगरानी, रोड डस्ट नियंत्रण, हरित क्षेत्र विस्तार और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम पर व्यय होगी

राज्य सरकार ने कहा कि यह पहल उत्तराखण्ड को “स्वच्छ वायु – स्वस्थ जीवन” की दिशा में एक नई पहचान देगी।

अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी की 135वीं जयंती पर देश का नमन

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  • सांप्रदायिक सद्भाव के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारी की शहादत को याद किया गया.

कानपुर: आज देश ने सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले अमर शहीद गणेश शंकर विद्यार्थी की 135वीं जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वतंत्रता संग्राम के नायक, निडर पत्रकार और कुशल राजनीतिज्ञ गणेश शंकर विद्यार्थी ने 25 मार्च 1931 को कानपुर के सांप्रदायिक दंगों में शांति स्थापित करने के प्रयास में अपने जीवन का बलिदान दे दिया। उनकी शहादत आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

महात्मा गांधी ने उनकी शहादत पर कहा था, “विद्यार्थी जी एक बहादुर और निर्भीक कांग्रेस कार्यकर्ता थे, जिन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। मैं चाहता हूं कि मुझे भी ऐसी मृत्यु प्राप्त हो। उन्होंने देशवासियों को एकता का रास्ता दिखाया, जो देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपनाना होगा।”

इसी तरह, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “गणेश शंकर विद्यार्थी एक बहादुर की तरह शहीद हुए। उनकी शहादत ने वह सबक दिया, जो शायद वे लंबे समय तक जीवित रहकर भी नहीं दे सकते थे। उनकी शहादत से भारत ने एक चमकता सितारा खो दिया।”

सांप्रदायिक दंगों में शहादत

1931 में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत के बाद देश में क्रांति की लहर दौड़ रही थी। अंग्रेजी साम्राज्यवाद ने इस विद्रोह को दबाने के लिए सांप्रदायिक दंगे भड़काए। 25 मार्च 1931 को कानपुर भी दंगों की चपेट में आ गया। उस समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे गणेश शंकर विद्यार्थी ने दंगों की आग में झुलस रहे शहर में शांति स्थापित करने का बीड़ा उठाया।

नंगे पांव और नंगे सिर पटकापुर और बंगाली मोहल्ले में पहुंचे विद्यार्थी जी ने वहां जल रहे लोगों को बचाने का प्रयास किया। उन्होंने कई हिंदुओं और मुसलमानों को दंगाइयों के चंगुल से बचाया, लेकिन इस दौरान कट्टरपंथियों ने उन पर हमला कर दिया। सांप्रदायिक सद्भाव के लिए लड़ते हुए वे शहीद हो गए। उनकी शहादत ने उन्हें देश का पहला सेल्यूलर हीरो बना दिया।

आज भी प्रासंगिक है उनका बलिदान

स्वतंत्रता आंदोलन यादगार समिति के अध्यक्ष और सिनेमेटोग्राफर प्रशांत सी. बाजपेयी ने कहा, “गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान हमें सिखाता है कि सांप्रदायिकता का जहर फैलाने वाली शक्तियों से हमें एकजुट होकर लड़ना होगा। उनकी शहादत राष्ट्रीय एकता और धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह विडंबना है कि आज भी कुछ ताकतें सांप्रदायिकता का जहर फैलाकर समाज को बांटने का प्रयास कर रही हैं। विद्यार्थी जी का जीवन और बलिदान हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है।”

नमन और प्रेरणा

गणेश शंकर विद्यार्थी की 135वीं जयंती पर देश भर में विभिन्न संगठनों और नागरिकों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके द्वारा स्थापित मूल्यों को अपनाने और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा देने का संकल्प लिया गया।

प्रशांत सी. बाजपेयी, अध्यक्ष, स्वतंत्रता आंदोलन यादगार समिति, और पुत्र स्व. शशि भूषण (पद्म भूषण, 2006), संसद सदस्य (4th और 5th लोकसभा)

मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: क्रिप्टोकरेंसी को माना संपत्ति, वजीरएक्स को निवेशक के XRP क्वॉइन पर कार्रवाई से रोका

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चेन्नई: मद्रास हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में क्रिप्टोकरेंसी को भारतीय कानून के तहत संपत्ति माना है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही क्रिप्टोकरेंसी कानूनी मुद्रा नहीं है, लेकिन इसमें संपत्ति के सभी गुण मौजूद हैं। यह फैसला एक निवेशक की याचिका पर आया, जिसके XRP क्वॉइन वजीरएक्स प्लेटफॉर्म पर साइबर हमले के बाद फ्रीज कर दिए गए थे।

निवेशक की याचिका और साइबर हमला

जस्टिस आनंद वेंकटेश ने 54 पन्नों के अपने फैसले में कहा, “क्रिप्टोकरेंसी न तो भौतिक संपत्ति है और न ही मुद्रा, लेकिन यह एक ऐसी संपत्ति है जिसे व्यक्ति अपने पास रख सकता है या ट्रस्ट में रख सकता है।” याचिकाकर्ता ने जनवरी 2024 में वजीरएक्स पर 1,98,516 रुपये का निवेश कर 3,532.30 XRP क्वॉइन खरीदे थे। जुलाई 2024 में वजीरएक्स पर हुए साइबर हमले में करीब 230 मिलियन डॉलर के Ethereum और ERC-20 टोकन चोरी हो गए, जिसके बाद प्लेटफॉर्म ने सभी यूजर अकाउंट्स फ्रीज कर दिए। इससे निवेशक अपने XRP क्वॉइन तक नहीं पहुंच पाए।

निवेशक की दलील और कोर्ट का निर्णय

निवेशक ने कोर्ट में दलील दी कि उनके XRP क्वॉइन चोरी हुए टोकनों से अलग हैं और वजीरएक्स उनकी संपत्ति को ट्रस्ट कस्टोडियन के रूप में संभाल रहा था। उन्होंने मांग की कि कंपनी को उनके क्वॉइन को पुनर्वितरित या इस्तेमाल करने से रोका जाए। वजीरएक्स की भारतीय ऑपरेटर कंपनी Zanmai Labs ने दावा किया कि असली मालिकाना हक सिंगापुर की Zettai Pte Ltd के पास है, जो साइबर हमले के बाद पुनर्गठन की प्रक्रिया में है। कंपनी ने कहा कि सिंगापुर हाईकोर्ट की मंजूरी के तहत नुकसान को सभी यूजर्स में ‘प्रो-राटा’ आधार पर बांटा जाएगा।

हालांकि, मद्रास हाईकोर्ट ने माना कि निवेशक का लेनदेन भारत से हुआ था, इसलिए उसे अधिकार क्षेत्र प्राप्त है। कोर्ट ने कहा कि ब्लॉकचेन पर मौजूद क्रिप्टो टोकन पहचाने जा सकते हैं, ट्रांसफर किए जा सकते हैं और निजी कुंजी के जरिए नियंत्रित किए जा सकते हैं, जो संपत्ति के गुण हैं। कोर्ट ने भारतीय मामलों जैसे अहमद जीएच आरीफ बनाम CWT और जिलूभाई नानभाई खाचर बनाम स्टेट ऑफ गुजरात का हवाला देते हुए संपत्ति की परिभाषा को रेखांकित किया। साथ ही, रूस्कॉ बनाम क्रिप्टोपिया और AA बनाम पर्सन अननोन जैसे अंतरराष्ट्रीय मामलों का भी जिक्र किया, जहां क्रिप्टो को संपत्ति माना गया।

XRP क्वॉइन पर कोर्ट का रुख

कोर्ट ने पाया कि साइबर हमले में केवल Ethereum और ERC-20 टोकन चोरी हुए थे, जबकि निवेशक के 3,532.30 XRP क्वॉइन उससे पूरी तरह अलग थे। इसलिए, वजीरएक्स का इन क्वॉइन पर दावा या उन्हें पुनर्वितरण योजना में शामिल करना गलत है। कोर्ट ने कहा कि अगर सिंगापुर की पुनर्गठन योजना के तहत निवेशक की संपत्ति का मूल्य घटाया गया, तो वे कमजोर पक्ष बन जाएंगे।

कोर्ट का आदेश

मद्रास हाईकोर्ट ने Zanmai Labs और उसके निदेशकों को आदेश दिया कि वे निवेशक के 3,532.30 XRP क्वॉइन को पुनर्वितरित, बांट या पुनः आवंटित न करें, जब तक कि मध्यस्थता में अंतिम फैसला नहीं आ जाता। यह फैसला क्रिप्टोकरेंसी को संपत्ति के रूप में मान्यता देने वाला भारत में पहला बड़ा कदम है, जो भविष्य में इस क्षेत्र के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत कर सकता है।

निवेशकों के लिए राहत

यह फैसला उन निवेशकों के लिए राहत की खबर है, जो क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते हैं और साइबर हमलों या प्लेटफॉर्म की मनमानी के कारण अपनी संपत्ति खोने के डर से जूझ रहे हैं। कोर्ट का यह कदम क्रिप्टोकरेंसी के कानूनी दर्जे को स्पष्ट करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।