किसानों ने इस शर्त के साथ ख़त्म किया प्रदर्शन, साथ ही कह दी बड़ी बात

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    कर्ज़ माफी, सस्ती बिजली, पेंशन और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने सहित किसानों की 15 मांगे हैं। किसानों ने दिल्ली कूच 11 सितंबर को सहारनपुर से शुरू किया था। इसके बाद नोएडा पहुंचने पर किसानों ने सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत की। लेकिन मामले का कोई समाधान नहीं निकला। जिसके बाद किसान पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चौधरी चरण सिंह की समाधि ‘किसान घाट’ जाना चाहते थे। लेकिन उत्तर प्रदेश की सीमा पर पहुंचने पर शनिवार सुबह किसानों को दिल्ली में प्रवेश करने से रोक दिया गया।

    इसके बाद से ही किसानों का दल वहीं धरने पर बैठ गया। हालांकि, किसानों के शिष्टमंडल को कृषि-भवन जाकर केंद्र सरकार के अधिकारियों से मिलने की अनुमति दे दी गई थी। किसान संगठन के प्रवक्ता ने बताया कि किसान शिष्टमंडल ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल से मुलाक़ात की। अधिकारी ने किसान संगठन को आश्वासन दिया है, कि उनकी 15 में से 5 मांगे स्वीकार कर ली जाएंगी।

    किसानों कि जिन पांच मांगों को स्वीकार किए जाने का आश्वासन मिला है। वह हैं- गन्ना बकाए का जल्दी भुगतान, पश्चिम उत्तर प्रदेश में प्रदूषित हो चुकी गंगा की सहायक नदियों की सफ़ाई, फ़सलों का न्यूनतम मूल्य तय करने वाली समिति में किसान प्रतिनिधियों की नियुक्ति, और बीमा का लाभ सिर्फ़ परिवार के मुखिया को ही नहीं बल्कि परिवार के सभी सदस्यों को दिया जाए। किसान संगठन के प्रवक्ता ललित राणा ने कहा, ‘हमारा विरोध अभी समाप्त नहीं हुआ है, यह तो सिर्फ़ इंटरवल है, क्योंकि फ़सल खेतों में पक चुकी है, इसलिए फ़सल का भी ख़्याल रखना है, यदि हमारी सभी मांगें नहीं मानी गईं तो किसान फिर से सड़कों पर उतरेंगे।’