जोशीमठ भू-धंसाव : मंडरा रहा बड़ा खतरा, जमीन के भीतर गहरी दरारें

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जोशीमठ : सभी जानते हैं कि जोशीमठ खतरे में हैं। लोग अब तक यह अंदाजा नहीं लगा पाए हैं कि खतरा कितना बड़ा है। हालांकि, लोग पहले से ही यह मान चुके हैं कि खतरा बहुत बड़ा है। लोगों की आशंकाओं और चिंताएं सही साबित हो रही हैं। जोशीमठ में जांच करने पहुंची देश की विभिन्न एजेंसियों ने अपनी रिपोर्ट एनडीएमए को सौंप दी हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ है, वो चिंताओं और आशंकाओं से बहुत बड़ा और खतरनाक है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भू-धंसाव का सामना कर रहे जोशीमठ का एक बड़ा हिस्सा खोखला हो चुका है। पानी के साथ भारी मात्रा में मिट्टी बह गई है। अब तक करीब 460 जगह जमीन के अंदर 40 से 50 मीटर तक गहरी दरारें मिली हैं। ऐसे में भू-धंसाव से प्रभावित 30þ क्षेत्र कभी भी धंस सकता है। इसलिए इस क्षेत्र में बसे करीब 4000 प्रभावितों को तुरंत विस्थापित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। दरारों वाले भवनों को जल्द ध्वस्त करना होगा।

यह खुलासा केंद्रीय जांच एजेंसियों की प्राथमिक रिपोर्ट से हुआ है। रिपोर्ट राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को सौंप दी गई है। सूत्रों के मुताबिक, एनडीएमए बुधवार को ही केंद्रीय गृह मंत्रालय में इसका प्रस्तुतिकरण भी दे चुका है। वैज्ञानिकों का मानना है कि जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद जोशीमठ की तस्वीर और भयावह हो सकती है।

क्योंकि देर-सबेर पूरा जोशीमठ इसकी जद में आ जाएगा। सबसे चौंकाने वाली रिपोर्ट पानी के रिसाव पर राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान, हैदराबाद की है। जांच में पाया गया कि 460 से अधिक स्थानों पर 40 से 50 मीटर तक गहरी दरारें हैं।
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जोशीमठ का ढलानदार पहाड़ मलबे के ढेर पर बना है, जो मिट्टी बोल्डरों को बांधे थी, वह पानी के साथ बह चुकी है। बोल्डरों के नीचे का हिस्सा खोखला हो चुका है। इसलिए भार सहने की क्षमता धीरे-धीरे खत्म हो रही है। वहीं, सीबीआरआई ने विस्थापन के लिए तीन साइट देख ली है।

राज्य सचिवालय में बुधवार को हुई ब्रीफिंग में सचिव आपदा प्रबंधन डॉ. रंजीत सिन्हा ने बताया कि इस मामले में सीबीआरआई को नोडल एजेंसी बनाया था। उसने सभी संस्थानों की रिपोर्ट का परीक्षण कर इन्हें एनडीएमए को भेज दिया है। अब एनडीएमए इनका विश्लेषण करेगा। इसके बाद ही यह रिपोर्ट राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) को भेजी जाएंगी।

सूत्रों के मुताबिक सर्वे में पाया गया कि भू-धंसाव वाले क्षेत्र में 4000 नहीं, बल्कि 2500 मकान हैं, जिनमें रहने वाले 4000 लोग प्रभावित हैं। वहीं, दरारों वाले 30þ भवन तुरंत ध्वस्त करने की सिफारिश की गई है। जबकि बाकी भवनों की रेट्रोफिटिंग की संभावना तलाशने का भी सुझाव दिया है।

 

  • केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) दरार वाले भवनों की जांच के साथ ही उनके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई, अस्थाई पुनर्वास के लिए प्री-फेब्रीकेटेड मॉडल भवन बनाना।
  • वाडियाः सिस्मोलॉजी भू-भौतिकीय अनवेष्ण के साथ ही जियोफिजिकल सर्वेक्षण का काम, संस्थान को अपनी फाइनल रिपोर्ट दो माह में सौंपनी है।
  • IIT रुड़कीः आईआईटी रुड़की की ओर से जोशीमठ में भू-तकनीकी अध्ययन (जियोटेक्निकल सर्वे) किया जा रहा है। इस अध्ययन में संस्थान के वैज्ञानिक पता लगाएंगे कि जोशीमठ के भूगर्भ में मिट्टी और पत्थरों की क्या स्थिति है। उसकी भार क्षमता कितनी है।
  • NGRI, हैदराबादः जियोफिजिकल और जियोटेक्निकल सर्वे का काम कर रही है। के जरिए जोशीमठ में 30 से 50 मीटर गहराई तक का भूगर्भ का मैप तैयार करेगी। तीन सप्ताह में अपनी अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है।
  • राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NHI): जोशीमठ में हाईड्रोलॉजिकल सर्वे कर रही है। संस्थान की टीम यहां एक जमीन पर सतह और भूगर्भ में बहने वाले पानी का पूरा मैप तैयार करेगी।
  • भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI: जोशीमठ में प्रभावित क्षेत्र का भूमि सर्वेक्षण एवं पुनर्वास किए जाने के लिए चयनित भूमि का भूगर्भीय अध्ययन कर रही है।
  • सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB): जमीन के भीतर स्प्रींग वाटर और उसके बहने की दिशा और दशा का पता लगाएगा।
  • भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) : जोशीमठ के ग्राउंड मूवमेंट पर लगातार नजर बनाए हुए है। संस्थान तीन माह में अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।

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