रवांल्टी कवि सम्मेलन में व्यवस्थाओं पर चोट, भाषा को बचाने की अपील

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बड़कोट : बसंतोत्सव गंगानी (कुंड की जातर) में रवांल्टी कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। रवांई के प्रसिद्ध कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, जिस पर श्रोताओं ने जमकर ठहाके तो लगाए ही साथ ही गंभीर विषयों पर हुए कविता पाठ पर को भी पूजा तन्मयता से सुना। कुंड की जातर में पहली बार कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।

रवांल्टी कवि सम्मेलन का आयोजन प्रसिद्ध साहित्यकार महावीरा रवांल्टा की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मेलन में पहली बार किसी बड़े मंच पर कविता पाठ करने पहुंचे तरवीन राणा ने गांव के बदलते परिवेश पर अपनी रचना प्रस्तुत की। धीरेंद्र चौहान ने पर्यावरण र आधारित रचना सुनाई।

राजुली बत्रा ने बेटियों और पर्यावरण पर कविता पाठ किया। कुलवंती रावत ने बेटियों के मायके नहीं जिसने और दोफारी (कलेव) की परंपरा के समाप्त होने की दिशा में बढ़ते कदमों पर तंज कसा। भारती आनंद ने भ्रष्टाचार और बदले सामाजिक ताने-बाने में आती कड़वाहट को दूर करने का संदेश दिया

अनुरूपा ‘अनुश्री’ ने पारिवारिक व्यवस्था पर तंज कहते हुए बताया कि किस तरह से भाइयों के बीच खाई पैदा हो रही है। साथ ही उजड़ती खेतीपर चिंता जाहिर करती चना सुनाई। नीरज उत्तराखंडी ने पति-पत्नी के रिश्तों और नशाखोरी पर कविता पाठ किया।

पहली बार कविता पाठ कर रहे जगमोहन रावत ने खूब तालियां बटोरी। युवा कवि अनोज रावत ‘बनाली’ ने नेताओं के जीत और हार के बाद के व्यवहार और युवाओं के प्रेम पर आधारित हास्य कविता ने लोगों को खूब गुदगुदाया। वरिष्ठ कवि सेमवाल ने चुनाव मैदान में पति-पत्नी के बीच के झगड़े को हास्य व्यंग में पेश किया।

प्रसिद्ध साहित्यकार महावीर रवांल्टा ने कवि सम्मेलन का संचालन किया। इस दौरान उन्होंने अपने चिरपरिचित अंदाज में सामाजिक ताने-बाने में आ रहे बदलाव पर जहां तंज कसा। वहीं, लोगों को संदेश भी दिया कि कंस तरह से समाज को बिखरने से बचाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपनी भाषा को बचाने की अपील भी की।

वरिष्ठ पत्रकार और कवि प्रदीप रावत (रवांल्टा) खाली होते घरों के दर्द को अपनी रचना के जरिए सामने रखा। शादियों के पैटर्न और इसमें होती खानापूर्ति पर आधारित कविता का पाठ किया।

साथ ही उन्होंने ‘ज ना सरकार चोर, कोई फांडी ना आंच, त काली ना करांदी सरकार सीबीआई जांच, जिस पर लोगों ने उनको भरपूर समर्थन दिया और सरकार के रवैए के प्रति अपना आक्रोश भी दिखाया। कार्यक्रम के बाद कवियों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित भी किया।