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Haridwar Road Accident: दर्दनाक हादसा, सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई स्कूटी, दादा-दादी और 5 साल की पोती की मौत

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हरिद्वार : उत्तराखंड के हरिद्वार से एक बेहद दुखद खबर सामने आ रही है। हरिद्वार-नजीबाबाद हाईवे पर मंगलवार देर रात हुए एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मृतकों में दादा-दादी और उनकी पांच वर्षीय मासूम पोती शामिल हैं। इस दिल दहला देने वाले हादसे के बाद से पीड़ित परिवार और पूरे गाजीवाली गांव में कोहराम मचा हुआ है।

कांगड़ी फ्लाईओवर के पास हुआ हादसा

श्यामुपर थाना पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, हादसा मंगलवार देर रात का है। श्यामपुर के ग्राम गाजीवाली निवासी वीर सिंह अपनी पत्नी मंजू और पांच साल की पोती शिव सिंह के साथ स्कूटी पर सवार होकर हरिद्वार की तरफ से अपने घर लौट रहे थे। तभी देर रात हाईवे पर कांगड़ी फ्लाईओवर के पास उनकी स्कूटी सड़क किनारे खड़ी एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कूटी के परखच्चे उड़ गए और तीनों गंभीर रूप से घायल हो गए।

पुलिस के पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

धमाके की आवाज सुनकर आसपास के स्थानीय लोग और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे और पुलिस को मामले की सूचना दी। हालांकि, टक्कर इतनी जबरदस्त थी और चोटें इतनी गंभीर थीं कि पुलिस और एंबुलेंस के पहुंचने से पहले ही तीनों दम तोड़ चुके थे। मृतकों की पहचान ग्राम गाजीवाली, थाना श्यामपुर, हरिद्वार के रूप में हुई।

मृतक 

  • वीर सिंह (53), पुत्र मोहर सिंह (दादा)

  • मंजू (50), पत्नी वीर सिंह (दादी)

  • शिव सिंह (5), पुत्र अनुज सिंह (पोती)

अंधेरा और लापरवाही बनी काल:

घटना की सूचना मिलते ही श्यामपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। मामले की जानकारी देते हुए सीओ सिटी शिशुपाल सिंह नेगी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रात का अंधेरा होने और हाईवे के किनारे बिना किसी इंडिकेटर या रिफ्लेक्टर के ट्रैक्टर-ट्रॉली का खड़ा होना इस दर्दनाक हादसे की मुख्य वजह हो सकता है। फिलहाल पुलिस ने वाहन को कब्जे में ले लिया है और हादसे के सभी कानूनी व तकनीकी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है।”

सोशल मीडिया पर बढ़ा गुस्सा

हाईवे पर अवैध रूप से खड़े होने वाले भारी वाहनों के कारण उत्तराखंड में यह कोई पहला हादसा नहीं है। इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों में एनएचएआई (NHAI) और ट्रैफिक पुलिस के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर हाईवे पर रात के समय पेट्रोलिंग पुख्ता होती और खड़े वाहनों पर कार्रवाई की जाती, तो आज एक हंसता-खेलता परिवार तबाह होने से बच जाता।

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