अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं गुरू- मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी

0
76
  • जिज्ञासाओं के समाधान का पर्व है गुरुपूर्णिमा।

जोशीमठ : अलग-अलग संस्कृतियों, परम्पराओं को मानने वाले भारत बर्ष को ज्ञानोपदेश से मार्गदर्शन करने और विश्वगुरु बनाने वाले हमारे गुरु हैं । गुरू हमें अज्ञान रूपी अन्धकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं। बिना गुरु के जीवन मूल्यहीन है । यह बात ज्योतिर्मठ के प्रभारी मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी ने ज्योतिर्मठ परिसर में आयोजित गुरु पूर्णिमा के अवसर पर ही।

गुरु परम्परानुसार तोटकाचार्य गुफा, शंकराचार्य पीठ, ज्योतिर्मठ में आयोजित कार्यक्रम के तहत गुरुव्यास मण्डल की पूजा के साथ ही परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज के पादुकापूजन किया गया । यह अनुष्ठान आचार्य वाणीविलास डिमरी ने सम्पन्न कराया ।

व्यास मण्डल की पूजा के बाद मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी ने बताया की इस चातुर्मास्य व्रत में प्रतिदिन सायंकाल 5 बजे से शंकराचार्य जी महाराज के प्रवचन का Live प्रसारण किया जाएगा । साथ ही अगले 3 मास तक विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम सम्पन्न होंगे । पूजा के बाद उपस्थित भक्तों ने प्रसाद प्राप्त कर गुरुचरणों में भेंट समर्पित किया ।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर विष्णुप्रियानन्द ब्रह्मचारी,रामदयाल मैदुली , जानकीप्रसाद बहुगुणा , अनिल डिमरी , नन्दादत्त सिलोडी , परशुराम खण्डूडी , महिमानन्द उनियाल, समीर डिमरी, अमित सती , सतीशचन्द्र डिमरी , शुभम रावत , वैभव सकलानी, सुरेन्द्र दीक्षित, देवेश्वरी शाह , गीता देवी, सरिता उनियाल, ऊषा उनियाल, रमा उनियाल, अरुण ओझा, अभिषेक बहुगुणा , प्रवीण नौटियाल आदि उपस्थित रहे ।

————

बदरीनाथ धाम के शंकराचार्य मठ में मनाया गया गुरुपूर्णिमा महोत्सव

भूवैकुण्ठ बदरीनाथ धाम स्थित श्रीशंकराचार्य मठ, टैक्सी-स्टैण्ड में आज सायं एक विद्वत् संगोष्ठी और गुरुपादुका पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया । जिसमें गुरुतत्व पर विद्वानों ने प्रकाश डालते हुए अपने व्याख्यान प्रस्तुत किए । अध्यक्षीय उद्बोधन में मठ के प्रभारी मुकुन्दानन्द ब्रह्मचारी ने कहा कि – पारस पत्थर के अन्दर एक दुर्लभ गुण है अपने से स्पर्श हुए लोहे को वो सोना बना देता है पर पारस नही बना पाता है, पर गुरु तो अपने सान्निध्य में रखकर शिष्य को गुरु ही बना देते हैं । इसलिए इस गुरु परम्परा में आए शिष्यों की गुरु के रूप में ही ख्याति होती है । ऐसी अद्भुत है ये गुरुपरम्परा । जब हम गुरुतत्व का चिन्तन करते हैं तो उससे हमारा ऐहिक और आमुष्मिक दोनो ही जीवन सुधर जाता है ।

गुरु पादुकापूजन कार्यक्रम में बदरीनाथ धाम के विशिष्ट जनों ने उपस्थित होकर अपने भाव समर्पित किए । व्याख्यान के अनन्तर परमाराध्य परमधर्माधीश उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर अनन्तश्रीविभूषित जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती ‘१००८’ जी महाराज के पादुकाओं की आरती उतारी गई, फिर सभी भक्तजनों को प्रसाद वितरित किया गया। साथ ही वर्तमान आचार्य के लिए बदरीनाथ धाम स्थित शंकराचार्य मठ में विराजमान श्रीमणिरत्नेश्वर महादेव जी का दुग्धाभिषेक किया गया ।