नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को लोकसभा में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया। सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया है। सरकार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के सुधारों के बाद भारत की मध्यम अवधि की संभावित विकास दर (Potential Growth) अब 7 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है, जो अब ‘नया सामान्य’ बन चुकी है।
सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता और भारी टैरिफ (विशेषकर अमेरिकी टैरिफ नीतियों) के बावजूद भारत ने चुनौतियों को अवसर में बदला। जीएसटी दरों में कमी से मांग को समर्थन मिला है और अगले वित्त वर्ष में घरेलू मांग तथा निवेश में मजबूती बनी रहने की उम्मीद है। महंगाई दर लक्ष्य सीमा के अंदर नियंत्रित है, जबकि कॉर्पोरेट और बैंकिंग सेक्टर की बैलेंस शीट पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है, जिससे निवेश का माहौल अनुकूल बना हुआ है।
- बुनियादी ढांचे पर निवेश: सरकार का पूंजीगत व्यय (Capex) अब जीडीपी के 4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। फिजिकल इंफ्रा (सड़क, रेल) और डिजिटल इंफ्रा (UPI, डिजिटल इंडिया) दोनों में भारी निवेश जारी।
- एमएसएमई को बढ़ावा: छोटे उद्योगों के लिए क्रेडिट गारंटी योजनाओं का विस्तार, क्रेडिट पहुंच में सुधार।
- कृषि क्षेत्र: एमएसपी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और फसल बीमा के जरिए किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस।
- स्वदेशी निर्माण: निर्माण लागत घटाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नई नीतियां बनाई जाएंगी।
- बड़े सुधार: जीएसटी रेशनलाइजेशन, डिरेगुलेशन और कंप्लायंस सरलीकरण से व्यापार करना आसान हुआ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वेक्षण से पहले कहा कि सरकार का मूल मंत्र “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” है। उन्होंने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को तेज करने का जिक्र करते हुए सभी सांसदों का आभार जताया। भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को आत्मनिर्भर और महत्वाकांक्षी भारत की झलक बताया। वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील भी इसी साल संभव है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि कमजोर वैश्विक परिदृश्य में भारत के आंकड़े एक आदर्श उदाहरण हैं।















