दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला, अब ग’र्भवती महिलाओं को…

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देश भर में कोरो’ना संक्र’मण तेज़ी के साथ बढ़ता जा रहा है। अब तक देश बाहर के लगभग सभी राज्य इससे प्रभा’वित हो चुके है। बता दें कि भारत में सबसे अधिक प्रभा’वित राज्य महाराष्ट्र है। वहीं दूसरे स्थान पर तमिल नाडु और तीसरे पर दिल्ली है। खबर है कि दिल्ली सरकार द्वारा प्रे’ग्नेंट महिलाओं को लेकर एक बहुत ही एहम फैसला लिया है। दिल्ली सरकार ने कहा कि अब प्रे’ग्नेंट हुई महिलाओं को डिलीवरी से पहले कोरो’ना टेस्ट करवाना अनिवार्य नहीं है। दिल्ली सरकार ने उच्च न्यायालय के सामने इस बात का खुलासा किया है कि अब अस्पता’ल में डिलिवरी कराने आने वाली हर महिला को कोरो’ना टेस्ट कराने की जरूरत नहीं है।

बता दें कि कोरो’ना वाय’रस को मद्देनजर रखते हुए मार्च के महीने में लॉ’क डा’उन जारी किया गया था। जिसमें सरकार ने आदेश दिया था कि अस्पता’ल में आने वाले हर म’रीज़ को इला’ज से पहले कोरो’ना टेस्ट करवाना अनिवार्य है। सरकार के इस फैसले का पालन करते हुए अस्पता’लों में आई हर प्रेग्नेंट महिला की डिलीवरी से पहले कोरो’ना जां’च करवाई गई। जिसके चलते बहुत सी महिलाओं ने अपनी जान भी गवां दी। दिल्ली सरकार का कहना है कि अस्पता’ल में जां’च के लिए प्रसव में देरी नहीं की जा सकती।

दिल्ली सरकार के मुताबिक केवल उन ग’र्भवती महिलाओं की कोविड-19 की जांच की जाएगी जो इस संक्रा’मक रोग से सबसे अधिक प्रभा’वित इलाके यानी हॉटस्पॉट से आ रही हैं या वे किसी संक्रमि’त व्यक्ति के संपर्क में आई हैं। दिल्ली सरकार ने कहा कि प्रे’ग्नेंट महिला की हालत नाज़ुक भी हो सकती है और कोरो’ना टेस्ट के कारण उनकी और उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौ’त भी हो सकती है। गर्भ’वति महिलाओं के लिए प्रसव के दौरान इंतजार उनकी और उनके बच्चे की जान के लिए ख’तरा बन सकता है। दिल्ली सरकार ने कहा कि कोरो’ना की रिपोर्ट को आने में 48 घंटे का समय लगता है। इस दौरान महिला की जा’न भी जा सकती है।