नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में कानून मंत्री कपिल मिश्रा को बड़ा झटका लगा है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कर आगे की जांच करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश मोहम्मद इलियास नामक व्यक्ति की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने कपिल मिश्रा की भूमिका पर सवाल उठाए थे।
कोर्ट का आदेश और FIR का मामला
राउज एवेन्यू कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली पुलिस द्वारा प्रस्तुत सामग्री के आधार पर कपिल मिश्रा की उपस्थिति कर्दमपुरी इलाके में पाई गई थी, और यह एक संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में इस मामले की जांच आवश्यक है। अदालत ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर मामले की आगे जांच करे।
दिल्ली पुलिस ने FIR का किया विरोध
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी थी कि कपिल मिश्रा को इस मामले में फंसाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने FIR दर्ज करने के विरोध में कहा कि उनके पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं जो कपिल मिश्रा को सीधे इस घटना से जोड़ते हों। हालांकि, अदालत ने पुलिस के इस तर्क को खारिज करते हुए जांच का आदेश दिया।
मोहम्मद इलियास के आरोप
मोहम्मद इलियास ने अपनी याचिका में दावा किया कि 23 फरवरी 2020 को उन्होंने कपिल मिश्रा और उनके समर्थकों को कर्दमपुरी इलाके में एक सड़क को ब्लॉक करते हुए देखा था। याचिका के मुताबिक, इस दौरान कुछ रेहड़ी-पटरी वालों की गाड़ियों को तोड़ा गया और हिंसा भड़काने की कोशिश की गई।
इलियास ने यह भी आरोप लगाया कि मौके पर तत्कालीन उत्तर-पूर्व दिल्ली के डिप्टी पुलिस कमिश्नर और अन्य पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। याचिका में यह भी कहा गया कि कपिल मिश्रा ने प्रदर्शनकारियों को जगह खाली करने या गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी।
कोर्ट के आदेश के बाद अब दिल्ली पुलिस को FIR दर्ज कर मामले की जांच करनी होगी। यह मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो सकता है, क्योंकि कपिल मिश्रा पर पहले भी दंगों को लेकर विवादित बयान देने के आरोप लगे हैं। अब देखना होगा कि पुलिस की जांच में क्या सामने आता है और क्या मिश्रा के खिलाफ आगे की कोई कानूनी कार्रवाई होती है।