कोरोना से रिकवर होने के बाद भी रहता है खतरा, जा सकती है…

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कोरोना वायरल की दूसरी लहर ने देश में काफी तबाही मचाई। लेकिन अब धीरे धीरे इसका खतरा कम होता जा रहा है। एक समय वो था जब देश में हर रोज कोरोना के 4 लाख से भी ज्यादा मरीज दर्ज किए जा रहे थे। लेकिन अब ये संख्या 80 हजार के पास पहुंची गई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार देश में बीते 24 घंटों में 80,834 मरीज दर्ज किए गए हैं। अब देश में कोरोना से रिकवर होने वालों की भी संख्या बढ़ती जा रही है। लेकिन इस बीच रिकवर होने वालों में भी बहुत सी परेशानियां देखी जा रही हैं। डॉक्टर्स की माने तो कोरोना से रिकवर होने वाले लोगों की आंखों में परेशानियां देखी गई हैं।

दिल्ली के मणिपाल हॉस्पिटल के डॉक्टर वानुली बाजपेयी ने बताया कि कोरोना से रिकवर होने के बाद किस तरह की परेशानियां देखने को मिल सकती हैं। साथ ही उन्होंने इससे उभरने का भी तरीका बताया। उन्होंने कहा कि “कोविड के दौरान सबसे आम लक्षण कंजंक्टिवाइटिस हैं, जो दवा से जल्दी ठीक हो जाते हैं. हालांकि, कुछ मामलों में, रेटिना पर वायरस का प्रभाव दिखता है। ये आंखों की रोशनी पर असर डाल सकता है। कई बार आखों की रेटिना की धमनियों में ब्लॉकेज हो जाते हैं। इससे आंखों की रोशनी जाने का भी खतरा बना रहता है। लिहाज़ा ऐसे मामलों में इलाज की जरूरत पड़ती है। इतना ही नहीं ऐसे केस में कुछ लोग पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। जबकि कुछ लोगों के आंखों की रोशनी चली जाती है।”

उन्होंने आगे कहा कि “म्यूकोर्मिकोसिस कोविड रोगियों में उभरने वाली एक खरतरनाक बीमारी है। इसका आंखों पर भी असर पड़ता है। म्यूकोर्मिकोसिस अगर दिमाग तक पहुंच जाए तो फिर मरीज़ों की मौत भी हो सकती है। कई बार लोगों को सर्जरी की भी जरूरत पड़ती है। ऐसे में आंख की सर्जरी बेहद खरनाक होती है और कई बार तो पूरी आंख को हटाना पड़ता है।” इसके साथ ही उन्होंने बताया कि “कोविड से ठीक होने वाले रोगियों, खासकर अगर उन्हें मधुमेह है, तो ऐसे लोगों को म्यूकोर्मिकोसिस के सामान्य लक्षणों के बारे में जरूर बता दें।”

इसके लक्षणों के बारे में बात करें तो नाक में भारीपन, नाक बहना, नाक से दुर्गंध आना, नाक से खून निकलना, आंखों के आसपास या चेहरे पर सूजन। धुधंला दिखना, आंखों/नाक/चेहरे के आसपास की त्वचा के रंग में बदलाव, नाक/आंखों/चेहरे के आसपास दर्द होने इसके लक्षण हैं। अगर किसी को इन लक्षणों का एहसास हो तो उसको डॉक्टर के पास जाने की सलाह दी जाती है। डॉक्टर वानुली बाजपेयी ने कहा कि “अगर मरीजों को ऐसे लक्षणों में से कोई भी अनुभव होता है, तो उन्हें तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।”