अद्‍भुत कहानियां कहती 'स्टोरीज ऑफ केनवास'

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खबरें [मुम्बई]

अद्‍भुत कहानियां कहती ‘स्टोरीज ऑफ केनवास’

मुंबई के कलाप्रेमियों के लिए फोर्ट इलाके में स्थित शिवाजी महाराज वास्तु संग्रहालय (प्रिंस ऑफ वेल्स म्यूजियम) की आनंद कुमारस्वामी कला दीर्घा में हाल ही संपन्न ‘इंडियन ऑइल’ की प्रदर्शनी- ‘स्टोरीज ऑफ केनवास’ विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इसमें जहां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर के करीब 40 प्रतिष्ठित कलाकारों की कलाकृतियां प्रदर्शित हुईं, वहीं करीब इतने ही युवा कलाकारों को उनके कृतित्व को रोशनी में लाने का सुअवसर मिला। इन सभी युवा कलाकारों ने प्रदर्शनी के लिए अपनी नई कृतियों का सृजन किया, जिनमें से कइयों को सुधी दर्शकों की भरपूर सराहना मिली।
इस नुमाइश का औपचारिक रूप से उद्घाटन 25 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित समकालीन सिद्धहस्त कलाकार लक्ष्मण श्रेष्ठ ने किया था और समापन 31 अगस्त को हुआ। इसमें करीब 100 कलाकारों के कार्यों का सारग्रही मिश्रण प्रदर्शित हुआ जिनमें से हरेक मेंजीवन के अनुभव कल्पना के आधार पर कैनवास पर उतरकर मानो एक अद्भुत कहानी कहते नजर आते थे। सम्मिलित किए गए प्रादर्शों में थे- कैनवास, कैनवास पर एक्रिलिक, कलम व स्याही, मिश्रित मीडिया, सिरेमिक्स, टेराकोटा, बलुआ पत्थर आदि के विभिन्न माध्यमों पर अमूर्त, अर्द्ध-अमूर्त पेंटिंग्स व मूर्तिकला के कार्य।
पारंपरिक व आधुनिक प्रभावों की प्रचुरता, जीवन शक्ति का सुंदर समन्वय प्रतिबिंबित करती हुई इस नयनाभिराम प्रदर्शनी में विशिष्ट आमंत्रितों में प्रतिष्‍ठित अमूर्त पेंटर लक्ष्मण श्रेष्ठ के अलावा दिनकर थोप्ते, मुरली लाहोटी, सुहास बहुलकर, वासुदेव कामथ, प्रमोद बाबू रामटेके, श्रीकांत जाधव, उषा फेनानी पाठक, आनंद सोनार एवं नीलकांति पाटेकर भी शामिल थे।
इसमें प्रतिष्ठित कलाकार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता गणपत भड़के, सुरेन्द्र जगताप, दिलीप बड़े, अरविंद हते, मनोज साकले व चंडीगढ़ के प्रमोद आर्य की प्रस्तुतियां भी दर्शकों को आल्हादित कर गईं। प्रतिष्ठित मूर्तिकार जैसे कि बापूसाहेब झांझे, किशोर ठाकुर, राजेश कुलकर्णी, शेखर दहीवाल, उदयपुर के नेमा राम व चेन्नई के के. रामकुमार के सृजन के माध्यम से कलाप्रेमियों को शैलियों की विस्तृत विविधताएं देखने को मिलीं।
इस कला प्रदर्शनी में इंदौर की श्रीमती शुभा वैद्य, जो कि मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ एप्लाइड आर्ट्स की पूर्व छात्रा हैं, भी शामिल थीं। वे जीवन और उसके विविध आयामों पर अपने अनुभव और घटनाओं को गहरे रंगों में सिद्धहस्तता के साथ चित्रित करती हैं। उनका कार्य उनकी शैली की गंभीरता और स्पंदन की वजह से दर्शकों को बांध लेता है।
प्रदर्शनी में इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारियों-कर्मचारियों का सृजनशील कृतित्व भी सामने आया। अपने व्यावसायिक कार्य की जटिलता के बावजूद कला की सुरुचि दृढ़ता से विकसित करने वाले ‘इनहाउस’-प्रति‍भाओं में शामिल थे- के. लक्ष्मीपति, एनएम रोकड़े, श्राबनी घोष, अंजन भट्टाचार्य तथा आशिमा भाटिया आदि।
इनमें विशेष उल्लेखनीय हैं कृष्ण कुमार मालवीय, जो कंपनी के मुंबई स्थित पश्चिम क्षेत्रीय कार्यालय में मैनेजर (आंतरिक लेखा परीक्षण) हैं। वे दक्ष पेंटर हैं और जो अपने वैविध्यपूर्ण ‘सब्जेक्ट्स’ को ऐसे खास तरह से चित्रित करते हैं कि उनका सत्व और सार जीवंत हो उठता है।
मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के बाबई ग्राम में 1967 में जन्मे और भोपाल के हमीदिया कॉलेज से पेंटिंग में स्नातक और अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर उपाधिधारी कृष्णकुमार की कलाकृतियां तीन समूह प्रदर्शनियों में प्रदर्शित हो चुकी हैं और उनसे कृतित्व के लिए समर्पित उनके सक्रिय मस्तिष्क और उत्कट भावना की झलक मिलती है। उन्हें वर्ष 2014 में मुंबई में आयोजित इंडियन ऑइल कला प्रदर्शनी में उनके कैनवास पर ऑइल पेंटिंग ‘इन द रेन’ के लिए प्रथम पुरस्कार मिला था। इस बार उनकी कृति- ‘एक्शन टू सर्व’ नुमाया की गई।
भारत सरकार के प्रतिष्ठान ‘इंडियन ऑइल’ द्वारा हर दूसरे साल आयोजित कला प्रदर्शनी का यह 21वां संस्करण था। इसके संयोजन में आमंत्रित कलाकार श्रीमती प्रतिभा वाघ व मूर्तिकार बापूसाहेब झांझे ने सहयोग दिया। प्रदर्शनी के दौरान स्थल पर पहली बार एक जीवंत पेंटिंग कॉर्नर भी निर्मित किया गया, जहां सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स के पांच वरिष्ठ छात्रों ने कला प्रक्रिया का आरंभ से पूर्णता तक का प्रदर्शन आगंतुकों के समक्ष किया और उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे अपनी समझ से कार्यों का अनुभव लें और उसे सराहें।
सार रूप में यह कहना मुनासिब होगा कि यह नुमाइश प्रेषण के उन विचारों को खोजने और उन माध्यमों को जाहिर कराने में सफल रही, जो कला को दर्शक के साथ भौतिक रूप से संबद्ध कर देते हैं, खासकर यह स्पष्ट करते हुए कि किस प्रकार किसी कलाकृति का अर्थ इस आकस्मिक मिलन से उद्भूत हो सकता है