उत्तराखंड : टूट रहे लोगों के आशियाने और दुकानें, विधानसभा में गूंजेगा मुद्दा

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उत्तरकाशी: जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण हमेशा ही लोगों की समस्याओं को लेकर सक्रिय नजर आते हैं। जब भी लोगों पर कुछ संकट आता है। दीपक उनके साथ खड़े नजर आते हैं। इन दिनों राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रदेश भर में चल रही है। ऐसे में हाईवे के किनारे की कई दुकानें और मकान इसकी जद में आ रहे हैं।

जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण इसको लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और पूर्व नेता प्रतिपक्ष चकराता से कांग्रेस के सीनियर विधायक प्रीतम सिंह को पत्र लिखा है। दीपक ने अपने पत्र में उत्तरकाशी जिले के प्रभावित क्षेत्रों की समस्या को दोनों ही वरिष्ठ नेताओं से 5 सितंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में उठाने की मांग की है।

अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि सीमान्त जनपद उत्तरकाशी के विधान सभा क्षेत्र पुरोला के डामटा, बर्नीगाड, नौगांव, गडोली, हुडोली, पुरोला, खरसाडी, मोरी, नैटवाड, सांकरी, आराकोट टिकोची, चिंवा, द्रोणी भितरी गुन्दियाटगांव अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के जद में हैं।

यमनोत्री विधान सभा के बडकोट, राजगढी, राजतर गंगनानी, खरादी, कुथनौर, पालीगाड, स्यानाचट्टी, रानाचट्टी, हनुमानचट्टी, जानकीचट्टी, धरासू, ब्रहमखाल, सिलक्यारा, शिवगुफा, ग्योनोटी, बडेथी, बनचौरा, देवीसौड, जिब्याकोटधार, जोगथ, कामदा, दिवारीखौल समेत कई क्षेत्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

साथ ही गंगोत्री विधान सभा के डुण्डा, मातली बडेथी, ज्ञानसू, उत्तरकाशी, जोशियाडा, गंगोरी, नेताला, चौरगीखाल, धौन्तरी, गणेशपुर, हर्षिल, सुक्की झाला. धराली, गंगनानी, भटवाडी, मल्ला, मनेरी आदि क्षेत्रों के अन्तर्गत छोटे बाजारों ग्रामीण बाजारों / बसावटों को प्रशासन लोक निर्माण विभाग व वन विभाग द्वारा अतिक्रमण के नाम पर ध्वस्त किया जा रहा है, जिससे जनता औ व्यापारियों भयवाह स्थिति पैदा हो गई है।

उन्होंने कहा कि इस तरह की अमानवीय, अन्याय प्रिय कार्यावाही से राज्य के समूचे पहाड़ी क्षेत्र की जनता और व्यापारी हताश हैं। दीपक का कहना है कि हम पहाड़ियों ने पहाड़ जैसे कष्टमय, श्रमसाध्य जीवन व्यतीत कर अपनी वर्षो-वर्षो की पूंजी से अपने आशियानें व छोटे-छोटे बाजार विकसित किये और आज अतिक्रमण के नाम पर हम पहाड़ियों के साथ अन्याय किया जा रहा है।

आप जानते ही हैं कि राज्य के समूचे पहाड़ी क्षेत्र में बसावटें सिविल व रिजर्ब भूमि पर अवस्थित हैं। अतिक्रमण के नाम पर की जा रही कार्यावाही से पहाड़ी क्षेत्रों में पलायन जैसी गंम्भीर समस्या विकराल रूप धारण करेगी और उत्तराखण्ड राज्य का मूल अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।

उन्होंने मांग की है कि पहाड़ियों को मालिकाना हक दिया जाय। मालिकाना हक मिलने से लोगों के आशियानों को बचाया जा सकता है। जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने दोनों ही नेताओं से इस मसले को विधानसभा में उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह किसी एक क्षेत्र की समस्या नहीं है। बल्कि, पूरे उत्तराखंड किसर पहाड़ी श्रेत्रों की है।