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मेरी बीवी हि’न्दू, मैं मुसलमा’न और मेरे बच्चे हि’न्दुस्तान हैं: शाहरुख़ ख़ान

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बॉलीवुड के किंग खान शाहरुख एक बार फिर अपने धर्म को लेकर मीडिया की सुर्खियों में हैं. हाल ही में शाहरुख शो डांस प्लस 5 के सेट पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने कुछ ऐसी बातें बोलीं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी हर कोई तारीफ कर रहा है.शो में शाहरुख ने कहा कि उनके घर में कभी भी हिं’दू-मुसलमा’न नहीं होता है. शाहरुख ने कहा, “हमने कभी हिं’दू-मुसल’मान की बात ही नहीं की. मेरी बीवी हिंदू हैं. मैं मु’सलमान हूं और मेरे जो बच्चे है वो हिंदुस्तान हैं.”

इसके बाद शाहरुख ने कहा, “जब उनके बच्चे स्कूल गए तो वहां भरना पड़ता है कि धर्म क्या है? तो जब मेरी बेटी (सुहाना) छोटी थी, तो उसने मुझसे पूछा आकर कि पापा हम कौन से धर्म के हैं, तो मैंने उसमें यही लिखा कि हम इंडियन ही हैं, कोई धर्म नहीं है और होना भी नहीं चाहिए.” शाहरुख की इस बात को सुनकर लोग उनकी काफी तारीफ कर रहे है और तरह-तरह की प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं. यह पहली बार नहीं है जब शाहरुख खान ने खुलकर अपने धर्म को लेकर बात की है. वो अक्सर पब्लिकली यह कहते नजर आए हैं कि वो हर धर्म का सम्मान करते हैं और उनके घर में हर त्यौहार मनाया जाता है.

गणतंत्र दिवस में गूगल ने बनाया अनोखा डूडल

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गूगल ने एक बार फिर अपनी क्रिएटिविटी का नमूना पेश किया है. कम्पनी ने भारत के 71वें गणतंत्र दिवस के मौके पर विशेष डूडल समर्पित किया। डूडल में स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ देश की समृद्ध जैव-विविधता को दिखाया गया है। खास खबर पर छपी खबर के अनुसार, डूडल के बारे में बताते हुए गूगल ने एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा कि भारत के 71वें गणतंत्र दिवस के मौके पर, सिंगापुर के मेहमान कलाकार मेरू सेठ द्वारा तैयार आज के डूडल में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत पर प्रकाश डाला गया है।

जो ताजमहल और इंडिया गेट जैसे अपने विश्व प्रसिद्ध स्थलों से लेकर अपके राष्ट्रीय पक्षी मोर, शास्त्रीय कलाओं, वस्त्रों और नृत्य तक व्याप्त है और उसे एकजुट करती है, जिसमें सभी अपने मतभेदों के बीच सद्भाव खोजने के लिए एक साथ आते हैं।” वर्ष 1950 में आज के ही दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। इसे बनाने में दो वर्ष 11 माह और 18 दिन का समय लगा था। पहले गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर परेड हुई थी, और तभी से यह परंपरा जारी है।

मैरिकोम को मिला पद्म विभूषण, सिन्धु को पद्म भूषण और ज़हीर को भी मिला..

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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की गई है। इस साल के पद्म अवॉर्ड्स में स्पोर्ट्स के आठ बड़े नामों को खेल जगत में उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसमें भारत की छह बार की वर्ल्ड चैंपियन एमसी मैरीकॉम को पद्म विभूषण वहीं ओलंपिक में सिल्वर मेडलिस्ट पीवी सिंधु को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने की घोषणा हुई।

वहीं बात करें पद्म श्री की तो छह खिलाड़ियों को पद्म श्री अवॉर्ड दिए जाएंगे। भारतीय क्रिकेटर ज़हीर ख़ान, फुटबॉल खिलाड़ी बेमबेम देवी, पूर्व हॉकी खिलाड़ी एम पी गणेश, ओलिंपिक मेडलिस्ट जीतू राय के अलावा भारतीय महिला हॉकी कप्तान रानी रामपाल को पद्म श्री अवॉर्ड के लिए चुना गया है।

अब ओवैसी ने दिया अमित शाह को चैलेन्ज, ‘इस टोपी वाले से..’

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नई दिल्ली: नागरिकता संशोधन क़ा’नून को लेकर पूरे देश में बहस छि’ड़ी हुई है. देश के कई हिस्सों में लोग प्रद’र्शन कर रहे हैं और शाहीन बाग़, दिल्ली तो जैसे इसका एक केंद्र बन गया है. सरकार NRC पर तो पीछे ह’ट चुकी है लेकिन एनपीआर के बहाने एक रास्ता बनाये रखना चाहती है कि जब वो चाहे तब NRC कर ले. प्रदर्शन’कारी भी इस बात को समझ रहे हैं इसलिए जिन नए म’दों को इस बार एड किया गया है उनको ह’टाए जाने की माँग हो रही है.

वहीँ गृह मंत्री अमित शाह विपक्ष के नेताओं को चु’नौती देते दिखते हैं कि उनसे CAA पर बहस कर लें लेकिन जब चुनौती स्वीका’र कर ली जाती है तो उनका कोई ब’यान नहीं आता है. अब इसको लेकर आल इंडिया मजलिस ए इत्तिहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदउद्दीन ओवैसी ने एक रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह को ही चुनौ’ती दे डाली है. ओवैसी ने गुरुवार को एक रैली में कहा,”सीएए पर किसी विपक्ष के नेता से बहस से बेहतर है कि इस दाढ़ी वाले से बहस के लिए तैयार हों.”

ओवैसी ने यह बात करीमनगर में एक रैली को संबोधित करते हुए की. आपको बता दें कि जब हाल ही में अमित शाह लखनऊ गए तो अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा कि मैं विपक्षी दलों के नेताओं को इस कानून पर सार्वजनिक बहस की चुनौती भी देता हूं. शाह ने विपक्ष पर सीएए के ख़िला’फ़ लोगों को गुमरा’ह करने का आरोप लगाते हुए राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और मायावती को सार्वजनिक तौर पर इस पर बहस करने की चुनौती दी थी.
अमित शाह की चुनौ’ती पर प्रतिक्रिया देते हुए औवेसी ने कहा कि मैं यहां हूं, मेरे साथ बहस करें.इन लोगों के साथ क्यों बह’स करनी है. जो ब’हस करना है वो दा’ढ़ी वाले से करो ना. हम सीएए, एनपीआर और एनआरसी पर बह’स और बात करेंगे. इस दौरान एआईएमआईएम प्रमुख ने केन्द्रीय बजट की ‘हलवा’ रस्म का ज़ि’क्र करते हुए भाजपा पर स्थानों का नाम बदलने को लेकर निशा’ना साधा. उन्होंने भाजपा नेताओं पर क’टाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा ने कहा है कि वह नाम ब’दलेंगे. मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि ‘हल’वा’ शब्द कहां से आया है? यह अरबी शब्द है. यह हिंदी या उर्दू शब्द नहीं है. अब अरबी शब्द भी ह’टा दें.

वा’मपंथी पार्टियाँ, भा’जपा, कांग्रेस ने शि’क्षा संस्थानों को राजनीतिक वर्च’स्व की ल’ड़ाई बना दिया है: किशन शर्मा

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मैं यह समझ पाने में पूरी तरह असमर्थ होता जा रहा हूं कि अंतत: विभिन्न शिक्षा संस्थान किस उद्देश्य से स्थापित किये गये हैं । क्या छात्र-छात्राएं वहां वास्तव में केवल शिक्षा ग्रहण करने के लिये जाते हैं ? मेरे सामने यह एक अनुत्तरित प्रश्न बनता जा रहा है । पढा तो मैं भी था । लेकिन उस समय शिक्षा संस्थाओं में पढाई के साथ साथ नाटक, संगीत, अन्त्याक्षरी, वाद-विवाद और खेल-कूद पर ही सारा ध्यान केन्द्रित रहता था । अध्यापकगण चुन चुन कर प्रतिभाशाली छात्रों को अलग अलग विधा में विविध स्तर की प्रतियोगिता के लिये तैयार करते थे और दिन-रात उनके प्रशिक्षण में जुटे रहते थे । अंतर विद्यालयीन, फ़िर जिला स्तरीय, उसके बाद सम्भागीय स्तर पर, फ़िर प्रदेश स्तर पर और अंत में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में पुरस्कार प्राप्त करने के लिये छात्रों को प्रेरित किया जाता था ।

छात्र संघ के चुनाव तो उस समय भी होते थे, परंतु छात्र संघ की कुछ निर्धारित सीमाएं हुआ करती थीं । शिक्षकों के समक्ष विद्यार्थी कभी अशोभनीय व्यवहार नहीं किया करते थे । खुरजा के एन0 आर0 ई0 सी0 डिग्री कॉलेज में पढाई करते समय और फ़िर जटिया पॉलीटेक्निक में मेकेनिकल इंजीनियरिंग की पढाई करते समय मैं वहां की क्रिकेट टीम का कैप्टेन भी रहा, गायन-नाटक-लेखन-अन्त्याक्षरी-वाद विवाद आदि का अति लोकप्रिय और पुरस्कृत युवा भी रहा और छात्र संघ का शक्तिशाली नेता भी रहा । परंतु कभी तो’डफ़ो’ड, मा’रपी’ट, और अनुशासनहीन’ता की कोई कार्रवाई नहीं की । राजनीति के बडे बडे नेता विभिन्न समारोहों में भाग लेते थे, परंतु कभी किसी ने छात्रों को उकसाया नहीं ।

वे छात्रों को छात्र जीवन में अनुशासन और अपने से बडों का आदर करने की ही सीख दिया करते थे । आकाशवाणी में भी मैं कलाकारों की यूनियन का पश्चिम क्षेत्रीय सचिव और केन्द्रीय सचिव भी रहा, और सफ़लता पूर्वक कलाकारों के हित में कार्य भी करता रहा । हमारे मुख्य नेता, प्रख्यात समाचार वाचक श्री अशोक बाजपेयी थे । हमने भूख हडताल भी की, आंदोलन भी किये; परंतु आकाशवाणी के प्रसारण पर इसका कोई असर नहीं पडने दिया । विभिन्न राजनीतिक दलों के वरिष्ठतम नेतागण हमसे जुडे रहे, परंतु हम सब लोग अपनी सीमा में रहकर अपना अपना कार्य करते रहे । मुझे यह देख कर दुख होता है कि पिछले कुछ वर्ष में शिक्षा केन्द्रों का अत्यधिक दुरुपयोग केवल राजनीतिक दलों द्वारा ही किया जाने लगा है ।

अब छात्र कौन है, यही निर्धारित करना मुश्किल होता जा रहा है । अलग अलग राजनीतिक दलों के लोग, विद्यार्थी के रूप में अनेक वर्ष नि:शुल्क सारी सुविधाएं लेते रहते हैं और अपने अपने दल के प्रभुत्व को बढाने में लगे रहते हैं । इन्हीं में से कुछ तो देश के प्रधान मंत्री को भी चुनौती देने लग गये । कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस पार्टी, आदि सभी राजनीतिक दल अपना अपना प्रभुत्व दिखाने और बढाने में शिक्षा संस्थाओं का दुरुपयोग करने लगे हैं । मा’र-पी’ट, तो’ड-फ़ोड जैसे कार्य शिक्षा संस्थाओं में खुले आम होने लगे हैं हिन्दू-मुस्लिम, पिछडे वर्ग, क्षेत्रीय भेदभाव और ऐसे कोई भी शिक्षा से सम्बन्ध नहीं रखने वाले विवादों में शिक्षा संस्थाओं को उलझा कर तरह तरह की राजनीति करते रहना इन तथाकथित “छात्रों” का मुख्य उद्देश्य बन गया है ।

अनेक साहित्यकार, फ़िल्म कलाकार तथा अन्य प्रभावशाली व्यक्ति अपने अपने निजी हित और स्वार्थ के तहत ऐसे लोगों का समर्थन करने लग जाते हैं । कभी किसी ने यह पूछने की हिम्मत नहीं की कि जो लोग अपने आप को छात्र कहला कर, अनेक वर्ष तक सारी सुविधाएं नि:शुल्क प्राप्त करते हुए पढाई या शोध के नाम पर राजनीति करते रहते हैं, वे आखिर कभी पढाई करते भी हैं या केवल राजनीति ही करते रहते हैं । जनता के धन का इस प्रकार से दुरुपयोग रोकना अत्यंत आवश्यक हो गया है । मेरा ऐसा मत है कि ऐसे छात्रों को एक समय सीमा के बाद शिक्षा संस्थान से बाहर निकाल दिया जाना चाहिये और केवल एक निश्चित अवधि तक ही सारी सुविधाएं प्रदान की जानी चाहियें । अगर इसी प्रकार शिक्षा केन्द्रों में अराजकता फ़ैलाने वाले तत्वों को आश्रय दिया जाता रहेगा, तो यह निश्चित रूप से शिक्षा के मूल उद्देश्य के लिये ही घातक साबित होगा । मेरा स्पष्ट मत है कि इस प्रथा पर तुरंत अंकुश लगाना आवश्यक है; क्योंकि देश, जनता, सरकार और राजनीतिक दलों के लिये बहुत विनाशकारी होगा, शिक्षा संस्थाओं का ऐसा राजनीतिक दुरुपयोग ।

(किशन शर्मा, 901, केदार, यशोधाम एन्क्लेव, प्रशांत नगर, नागपुर-440015; मोबाइल-8805001042)
#इस लेख में प्रदर्शित विचार लेखक के अपने हैं, नूतन सवेरा का इनसे कोई सम्बन्ध नहीं है.

रात में बालों को धोना हो सकता है ख़तरनाक

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क्या आप भी अक़्सर रात को बाल धोकर सोते हैं, तो जान लीजिए कि यह आदत आपके प्यारे बालों की खूबसूरती बिगाड़ देगी। बहुत से लोग सुबह जल्दी में रहते हैं, और वह बालों को धोना झंझट समझते हैं, इसीलिए वह सुबह बाल धोना पसंद नहीं करते, और रात को ही बाल धोकर सो जाते हैं। लेकिन, आपकी ये आदत बालों की सेहत के लिए बहुत हानिकारक है। क्योंकि रात को बाल धोने से बालों की जड़ें कमज़ोर हो जाती हैं। और जब हम बाल गीले रख कर सोते हैं, तो बाल गीले होने पर बालों का क्यूटिकल ज़्यादा ऊपर उठा हुआ होता है। जिसकी वजह से बाल ज़्यादा टूटते भी हैं।

इंदौर में हुई भाजपा नेताओं की गिरफ़्तारी, कर रहे थे प्रद”र्शन

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BJP leaders

देश में इन दिनों प्रदर्शनों का दौर चल रहा है। एक ओर जहाँ CAA, NRC के ख़िलाफ़ प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं भाजपा भी समर्थन में रैलियाँ निकाल रही हैं। इंदौर में भाजपा के नेताओं ने वहाँ की सर’कार के ख़िला’फ़ प्रदर्शन की बात कही गयी। इस पर वहाँ धा’रा 144 लगा दी गयी थी लेकिन इसके बाद भी भाजपा के नेताओं ने प्रदर्शन किया और उनहन गिर;फ़्तार कर लिया गया है।

फ़िल्म निर्देशक ने दिया इमरान ख़ान को करारा जवाब, “अनपढ़ जैसी बातें…”

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Imran khan

पाकि’स्तान हो या भारत पड़ोसी देश के बारे में अक्सर टिप्पणी करने से ख़ुद को नहीं रोक पाते। यूँ तो अब तक पाकि’स्तानी प्रधानमंत्री ने राजनीति पर ही टिप्पणी करते थे लेकिन हाल ही में उन्होंने एक अनोखा इल्ज़ा’म लगाया भारत के सिनेमा और संस्कृति पर। इमरान ख़ान ने कहा कि “भारतीय संस्कृति और सिनेमा पाकि’स्तान में बढ़ते अप’राधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं” उनका ये बयान सुनकर उन्हें भारतीय निर्देशक ने एक क’रारा जवाब दिया।

महाराष्ट्र की सियासत में नया मो’ड़, राज ठाकरे ने लिया ये फै’सला

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मुंबई. महाराष्‍ट्र का सियासी माहौल बदलता दिख रहा है. बरसों से भाजपा की साथी शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के हाथ थाम लिया है. राज्य में सरकार बनाने के लिए उद्धव ठाकरे के नेतृत्‍व वाली शिवसेना ने बीजेपी से पुराना नाता तोड़कर कांग्रेस और एनसीपी से गठबंधन कर लिया. गठबंधन में सरकार चलाने के कारण शिवसेना को हिंदुत्‍व समेत कई मुद्दों को ठंडे बस्‍ते में डालना पड़ गया है.

रतन टाटा ने शेयर की अपनी जवा’नी की तस्वीर..

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नई दिल्ली: इस देश में लाखो ऐसे युवा हैं जो रतन टाटा के जैसे बनना चाहते हैं. बिज़नस टाइकून रतन टाटा की कामयाबी के किस्से किसी से छुपे नहीं हैं. टाटा ने अथक मेहनत से टाटा कंपनी को मजबूती दी. गुरुवार के रोज़ इन्स्टाग्राम पर उन्होंने एक पुरानी तस्वीर पोस्ट की. ये तस्वीर इन्स्टाग्राम पर वायरल हो गई है. रतन टाटा ने लगभग 3 महीने पहले ही इंस्टाग्राम ज्वाइन किया है. उन्होंने यह तस्वीर #ThrowbackThursday के साथ शेयर की और अपने पुराने दिनों की एक झलक फॉलोअर्स को दिखाई.

आपको बता दें कि रतन टाटा 82 वर्ष के हैं. उन्होंने अपनी पुरानी तस्वीर को शेयर करते हुए लिखा है,”मैं इस तस्वीर को बुधवार को शेयर करने वाला था लेकिन तब मुझे पता चला कि थ्रोबैक तस्वीरें गुरुवार को शेयर की जाती है. इस वजह से यह मेरी एक पुरानी तस्वीर, जब मैं लॉस एंजेलिस में रहा करता था”.

उन्होंने ये भी बताया कि वो 1962 के अंत में भारत वापस आने से पहले रतन टाटा ने लॉस एंजेलिस में जोन्स और एममन्स के साथ काम किया था. तस्वीर को शेयर किए जाने के एक घंटे के अंदर रतन टाटा की इस फोटो पर हजारों लोगों के कमेंट्स आ गए. फोटो और वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर इसे 1 लाख से अधिक बार लाइक किया गया है. एक शख्स ने कमेंट करते हुए लिखा, ”शुक्रिया सर कि आप भारत लौट आए”. वहीं एक अन्य ने लिखा, ”आप हमेशा से ही स्मार्ट हैं”. तीसरे ने लिखा, ”तस्‍वीर को शेयर करते हुए आपने जो लिखा, वो मुझे पसंद आया”.