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राजस्थान क्रिकेट संघ पर लगा ये आरोप, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत..

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Ashok Gehlot

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत से 4 अक्टूबर को हुए अध्यक्ष पद का चुनाव हारने वाले राम प्रकाश चौधरी ने आरोप लगाया कि बीसीसीआई द्वारा नियुक्त निष्पक्ष निर्वाचन अधिकारी द्वारा नए सिरे से चुनाव कराए जाने चाहिए। यह चुनाव आरसीए लोकपाल न्यायमूर्ति ज्ञान सुधा मिश्रा (उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश) की निगरानी में होने चाहिए। वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामेश्वर डूडी ने आरोप लगाया है कि निर्वाचन अधिकारी ने नागौर, श्री गंगानगर, और अलवर ज़िला संघों पर लगा प्रतिबंध वापस ले लिया था जो ग़लत है। यह तीनों कथित तौर पर आईपीएल के पूर्व आयुक्त ललित मोदी से जुड़े हैं और नतीजतन डूडी और उनके गुट के कुछ लोगों के नामांकन रद्द हो गए।

बता दें कि सत्तारूढ़ धड़े पर उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की सिफारिशों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए आगामी बीसीसीआई चुनाव में आरसीए का मतदान करने का अधिकार वापस लेने की मांग की गई है। वैभव को एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष और विधानसभा के अध्यक्ष सीपी जोशी गुट का समर्थन मिल रहा है। और राजस्थान कांग्रेस की अंतरकलह एक बार फिर से उजागर हुई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामेश्वर डूडी ने सीपी जोशी के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है।

डूडी ने सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार की तरफ से नामांकित 11 इंडिविजुअल जो ज़िला क्रिकेट एसोसिएशन हैं उनकी पैरवी करते नज़र आए, सीपी जोशी गुट के जितने भी लोग हैं और जिनके भी ऑब्जेक्शन लगाए गए हैं उनकी पैरवी नामांकित सदस्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरसीए अध्यक्ष सीपी जोशी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं सरकार को इसके बारे में सोचना चाहिए। डूडी के आरोपों को नकारते हुए वैभव गहलोत का कहना है कि रामेश्वर डूडी ने अपने विचार रखे और आगे जो भी परिस्थितियां बनी हैं, उसके हिसाब से ही हम आगे बढ़े। वह हमारी पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं। सबको अपनी बात रखने का हक़ है।

उन्होंने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग की बात को ख़ारिज किया और कहा कि निर्वाचन की प्रक्रिया है इसमें बीसीसीआई ने अपनी तरफ से ऑब्जर्वर्स भेजे हैं। निर्वाचन आयोग में कार्य कर चुके अधिकारियों को लगाया गया है वैभव ने नागौर क्रिकेट एसोसिएशन को डिसक्वालीफाई करने किए जाने के विवाद पर कहा कि यह तो निर्वाचन से जुड़े लोग ही बता सकते हैं कि इसे क्यों डिसक्वालिफाई किया गया। राजनीति में क़दम रखा था और  उन्हें राजसमंद क्रिकेट एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष पद पर नियुक्त किया गया था इससे पहले वह लोकसभा चुनाव में जोधपुर सीट से गजेंद्र सिंह शेखावत से हार गए थे।