नई दिल्ली: लोकसभा में जारी हंगामे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सदन में न आने के बीच विवाद तेज हो गया है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गुरुवार को सदन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें पुख्ता जानकारी मिली थी कि कांग्रेस के कुछ सांसद प्रधानमंत्री की सीट के पास पहुंचकर कोई “अप्रत्याशित हरकत” कर सकते थे। इसी कारण उन्होंने मोदी से सदन में भाषण देने न आने का अनुरोध किया था।
स्पीकर ने विपक्षी सांसदों के व्यवहार को “अभूतपूर्व” और “संसद की गरिमा के खिलाफ” बताते हुए इसे “काला धब्बा” करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा के इतिहास में पहली बार अध्यक्ष के कार्यालय में भी ऐसा अनुचित आचरण देखा गया, जो संसदीय परंपराओं के विपरीत है। बिरला ने सभी दलों से सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करने की अपील की।
इस बयान पर तीखा पलटवार करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं और सरकार स्पीकर से यह सब कहलवा रही है। उन्होंने मोदी पर हमला या नुकसान पहुंचाने की किसी भी योजना के दावे को “पूरी तरह झूठ” और “बकवास” बताया।
प्रियंका ने मीडिया से बातचीत में कहा, “यह सरासर झूठ है। प्रधानमंत्री को नुकसान पहुंचाने या ऐसी किसी योजना का सवाल ही नहीं उठता। ऐसी कोई योजना थी ही नहीं।” उन्होंने आगे कहा, “प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं। कल उनमें सदन में आने की हिम्मत नहीं थी, सिर्फ इसलिए कि तीन महिलाएं उनकी बेंच के सामने खड़ी थीं… यह क्या बकवास है?”
कांग्रेस नेता ने सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता (राहुल गांधी) को बोलने क्यों नहीं दिया गया? उन्होंने यह भी सवाल किया कि क्या किसी सार्वजनिक स्रोत या किताब को उद्धृत करने से रोकने का कोई वैध आधार सरकार के पास है?
यह विवाद बुधवार को लोकसभा में हुए हंगामे के बाद और गहरा गया, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया और सदन बार-बार स्थगित होना पड़ा। प्रधानमंत्री मोदी को अपना जवाब देने का मौका नहीं मिल सका। विपक्ष का कहना है कि सरकार बहस से बच रही है, जबकि सत्तापक्ष का दावा है कि विपक्ष ने संसद की मर्यादा तोड़ी। इस घटना ने संसद में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है।















