पाकिस्तान की निकृष्टता

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पाकिस्तान के हुक्मरानों ने अपना असली रंग दिखा ही दिया। दहशतगर्दी को मदद देने की उनकी करतूतें दुनिया को सुनाई ना दें, इसके लिए उन्होंने ऐसा तरीका अपनाया जिसे अंतरराष्ट्रीय शिष्टाचार का उल्लंघन माना जाएगा। गृह मंत्री राजनाथ सिंह दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के गृह मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने इस्लामाबाद गए थे। मगर राजनाथ सिंह के भाषण को मीडिया कवरेज से रोक दिया गया।
खबरों के मुताबिक राजनाथ सिंह से हाथ मिलाने से पाकिस्तान के गृह मंत्री चौधरी निसार अली खान बचते रहे। यह शायद पहला मौका है, जब पाकिस्तान ने किसी भारतीय नेता की व्यक्तिगत तौर पर ऐसी अनदेखी की हो। इसे असभ्यता के अलावा और क्या कहा जाएगा! इस पर राजनाथ सिंह का खफा होना वाजिब ही था। शायद इसीलिए वे सम्मेलन स्थल पर मेजबान द्वारा आयोजित भोज में शामिल नहीं हुए। पाकिस्तान के इस सलूक से हर भारतीय की भावनाएं आहत हुई हैं। पाकिस्तान को इसका भरपूर जवाब दिया जाना चाहिए।
दरअसल, अब जरूरी हो गया है कि पाकिस्तान से संबंध व संपर्क रखने की अपनी नीति पर भारत सरकार पुनर्विचार करे। इस घटना से यह भी साफ हुआ है कि पाकिस्तान सार्क जैसी बहुपक्षीय बैठकों का मेजबान बनने योग्य नहीं है। बहुपक्षीय बैठकों का अलग संदर्भ होता है। यह तय करना मेजबान की जिम्मेदारी होती है कि किसी देश से उसके द्विपक्षीय तनाव का असर ऐसी बैठकों पर ना पड़े। अगर टीवी चैनलों ने वहां आए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के भाषण का प्रसारण किया, तो अपेक्षित और तार्किक था कि उन्हें सभी नेताओं के भाषण को दिखाने की अनुमति मिलती। किंतु पाकिस्तान ने इस मूलभूत मर्यादा का उल्लंघन किया।
इसी वर्ष पाकिस्तान में सार्क शिखर सम्मेलन होने वाला है। जाहिर है, इस घटना के बाद उसमें भाग लेने के सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुविधा बढ़ जाएगी। बहरहाल, राजनाथ सिंह की तारीफ होनी चाहिए कि ऐसे प्रतिकूल माहौल में भी पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब देने में उन्होंने कोई हिचक नहीं दिखाई। दो-टूक कहा कि आतंकवादियों को शहीद बताकर उनका महिमामंडन नहीं किया जाना चाहिए। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नवाज शरीफ ने कश्मीर में सुरक्षा बलों के हाथों मारे गए हिज्बुल मुजाहिदीन के दहशतगर्द बुरहान वानी को शहीद बताया था।
सार्क बैठक के एजेंडे में आतंकवाद भी एक मुद्दा है। अत: पाकिस्तानी नेताओं को अंदाजा था कि उनकी सीमापार आतंकवाद प्रायोजित करने की नीति पर राजनाथ अपनी बात रखेंगे। तो उन्होंने उनके भाषण का प्रसारण रोक दिया। लेकिन ऐसा करके उन्होंने अपने अपराधबोध का ही परिचय दिया। न सिर्फ सार्क देश, बल्कि पूरी दुनिया इसे इसी रूप में देखेगी। पाकिस्तान अब और ज्यादा बेपर्दा हो गया है।