सोशल मीडिया अपनी बात कहने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। देश-विदेश के बड़े राजनेता हों या बिज़नेसमैन, फ़िल्म स्टार हों या स्पोर्ट्स स्टार, जाने-माने लोग हों या आम इंसान सबको एक प्लेटफार्म देता है, सोशल मीडिया, जिसके ज़रिए हमें हर क्षेत्र की सारी अपडेट मिलती रहती है। और जहां हम अपने विचार साझा कर सकते हैं। यह सोशल मीडिया एक तरह से हमारे जीवन का एक अहम हिस्सा बन गया है। लेकिन, इसका सबसे बड़ा नुकसान यह है, कि सोशल मीडिया पर बने अकाउंट्स असली हैं या फ़र्ज़ी इसका हमें पता ही नहीं चल पाता है।
अब इसी दिशा में काम करते हुए फ़ेसबुक ने एक बड़ा क़दम उठाया है। और फ़ेसबुक ने अपनी लेटेस्ट ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट में कहा है कि अब फ़ेसबुक ने फ़र्ज़ी अकाउंट्स को पहचानने की अपनी क्षमता को बेहतर किया है। और डिटेक्शन सिस्टम की सहायता से कंपनी हर रोज़ लाखों फ़र्ज़ी अकाउंट्स को बनने से रोकती है। फ़र्ज़ी अकाउंट्स वो होते हैं, जिन्हें किसी व्यक्ति या संस्थान के नाम से ऐसे ही बना दिया जाता है, जो पूरी तरह से ग़लत होते हैं या झूठे होते हैं।
फ़ेसबुक ने एक बड़ा क़दम लेते हुए अपने प्लेटफॉर्म से लगभग 540 करोड़ इसी तरह के फ़र्ज़ी खाते हटा दिए हैं। जो फ़र्ज़ी थे, और ग़लत ख़बर या अफ़वाह फैलाते थे। इसके अलावा 25 लाख से ज़्यादा पोस्ट पिछले तिमाही में हटाए गए थे, जिसमें से ज़्यादातर पोस्ट में उपयोगकर्ताओं को आत्महत्या या ख़ुद को चोट पहुंचाने के लिए उकसाने वाले पोस्ट थे। साथ ही फ़ेसबुक ने 44 लाख ऐसी पोस्ट भी अपने नेटवर्किंग साइट से हटा दी हैं, जो ड्रग्स और नशे के व्यापार को बढ़ावा दे रही थीं। बता दें कि पिछले साल चर्चा में रहे डेटा चोरी विवाद के बाद फ़ेसबुक ने अपनी निजता नीति में लगातार बदलाव किए हैं।














