ED ने संजय सिंह के 3 करीबियों को भेजा समन, आमने-सामने होगी पूछताछ

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दिल्ली के कथित शराब नीति में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद उनके सहयोगियों को भी दायरे में लेना शुरू कर दिया है। ED ने AAP नेता के तीन करीबियों को समन जारी कर पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया है।

ED ने संजय सिंह के तीन सहयोगियों विवेक त्यागी, सर्वेश मिश्रा और कंवरबीर सिंह को पूछताछ के लिए तलब किया है। बताया जा रहा है कि सर्वेश मिश्रा आज ईडी के सामने पेश हो सकते हैं। ED का दावा  है कि संजय सिंह के सहयोगी सर्वेश को उनके आवास पर आप नेता की ओर से दो बार में 2 करोड़ रुपये मिले थे। वहीं, संजय सिंह के पीए विजय त्यागी को आरोपी अमित अरोड़ा की कंपनी अरालियास हॉस्पिटैलिटी की व्यावसायिक में हिस्सेदारी की गई थी।

ईडी की तरफ से पेश हुए विशेष लोक अभियोजन नवीन मट्टा ने कहा कि दो किस्तों में तीन करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। उक्त धनराशि संजय सिंह के आवास पर दी गई। दिनेश अरोड़ा ने इसे संजय सिंह से क्रास-चेक किया था और उन्होंने इसकी पुष्टि की थी। जांच में पता चला है कि कुल तीन करोड़ में से दो करोड़ रुपये नकद दिए गए थे।

संजय सिंह की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने आरोप लगाया कि सरकारी गवाह बने दिनेश अरोड़ा ने अपनी स्वतंत्रता सुरक्षित करने के लिए संजय सिंह को फंसाया है। उन्होंने तर्क दिया कि दिनेश अरोड़ा के बदले रुख को अदालत को देखना चाहिए। दिनेश अरोड़ा मार्च और अप्रैल में बयान देते हैं, लेकिन संजय सिंह का नाम नहीं आता है। अचानक से वह सरकारी गवाह बनकर नाम लेते हैं और उन्हें जमानत मिल जाती है। उन्होंने ईडी पर सिंह को गिरफ्तार कर अपमानित करने का आरोप लगाया। मोहित माथुर ने अरोड़ा को मामले में संजय सिंह को फंसाने के लिए मजबूर करने का दावा किया।

ED के अधिवक्ता शोएब हुसैन ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि प्रलोभन के आधार पर दिनेश अरोड़ा के बयान देने का तर्क पूरी तरह से निराधार है। अमित व दिनेश अरोड़ा को पहले याद नहीं आया मेरा नाम: संजय सिंह सुनवाई के दौरान संजय सिंह ने कहा कि मैं कोई अनजान व्यक्ति नहीं हूं कि अमित अरोड़ा व दिनेश अरोड़ा को मेरा नाम याद नहीं आया। इससे पहले अपने बयानों में उन्होंने कभी मेरा नाम नहीं लिया, लेकिन अचानक ऐसा क्या हुआ कि सारा बयान मेरे खिलाफ दिया।

कहा कि गिरफ्तारी से पहले उन्हें नोटिस और समन नहीं दिया गया। कहा कि आप न्याय की कुर्सी पर हैं, मेरे लिए कोई अलग कानून नहीं हो सकता है, अगर मेरी गलती है तो अदालत मुझे सजा दे। संजय सिंह की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मोहित माथुर ने रिमांड मांगने का विरोध किया। कहा, ऐसे व्यक्ति के लिए दस दिन के रिमांड की मांग करना बेतुका प्रस्ताव है, जो इसमें शामिल ही नहीं था। शराब नीति से संजय सिंह का कोई लेना-देना नहीं है।