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कोरो’ना के बढ़ते मामलों के बीच CM ममता बनर्जी का फैसला, इन इलाकों में हुआ…

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देश भर में कोरो’ना वाय’रस बहुत ही तेज़ी के साथ बढ़ रहा है। तेज़ी से बढ़ते मामलों के चलते अब देशभर में इससे संक्र’मित लोगों का आंकड़ा 7.93 लाख से ज़्यादा पहुंच गया है। वहीं अब तक इस वाय’रस से अब तक 21 हजार से भी ज़्यादा लोग अपनी जा’न ग’वां चुके है। इसी के बीच पश्चिम बंगाल से खबर आई है कि बढ़ते मामलों को देख बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लॉ’कडा’उन को बढ़ाने का फैसला लिया है। खबर के मुताबिक बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी सरकार ने राज्य के कन्टेन्मेंट जोन्स में गुरुवार से अगले सात दिनों के लिए लॉ’कडा’उन लगाने का फैसला किया है। ममता ने अपने बयान में कहा कि ज़रूरत पढ़ने पर इस साथ दिन के लॉ’क डा’उन को बढ़ाया भी जा सकता है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि “पश्चिम बंगाल के कन्टेन्मेंट जोन्स में गुरुवार शाम 5 बजे से सात दिनों के लिए यह लॉ’कडा’उन रहेगा। सात दिन के बाद स्थिति की समीक्षा के बाद अगली कार्र’वाई पर निर्णय लिया जायेगा। यदि यह दिखता है कि इस अवधि के दौरान कोरो’नावाय’रस के मामलों की संख्या कम हुई तो कुछ रियायतें भी दी जाएंगी।” साथ ही उन्होंने लोगों से निय’मों का पालन करने को कहा। उन्होंने कहा कि नि’यमों का उल’लघंन करने वाले के ऊपर स’ख्त से स’ख्त कार्र’वाई की जाए और जो शख्स बिना मस्क के घर से बाहर पाया जाए तो उसको घर वापस जाने का आदेश दिया जाए।
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इससे पहले उन्होंने कहा था कि “CBSE से संबद्ध सभी स्कूलों के कक्षा 9 से 12 तक के अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम (syllabuse) से लोकतांत्रिक अधिकार (Democratic rights), संघवाद (Federalism) और धर्मनिरपेक्षता (Secularism) जैसे अहम चैप्‍टर हटाने के केंद्र सरकार के फैसले से वह “है’रान” हैं।” साथ ही उन्होंने कहा कि “हम महत्त्वपूर्ण विषयों को हटाने के सीबीएसई के फैसले का कड़ा वि’रोध करते हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास (HRD) मंत्रालय मंत्रालय को सुनिश्चित करना चाहिए कि इन महत्‍वपूर्ण अध्‍यायों को नहीं हटाया जाए। मैं इस बात से अचंभित हूं कि केंद्र ने सीबीएसई पाठ्यक्रम के ‘भार’ को कम करने के नाम पर नागरिकता, संघवाद जैसे बेहद महत्‍वपूर्ण विषयों को कैसे हटा दिया?” उन्होंने अपने बयान में आगे कहा कि “हम इस पर कड़ी आपत्ति जताते हैं और मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार से अपील करते हैं कि इन महत्वपूर्ण पाठों को किसी भी कीमत पर हटाया नहीं जाए।”