पिछले कारोबारी सत्र में हल्की राहत के बाद उम्मीद थी कि बाजार संभलेगा, लेकिन सोमवार, 23 मार्च भारतीय शेयर बाजार के लिए भारी गिरावट लेकर आया। बाजार खुलते ही BSE Sensex करीब 1700 अंक यानी 2.25% से ज्यादा टूटकर 72,854 पर पहुंच गया, जबकि Nifty 50 532 अंक गिरकर 22,582 पर आ गया।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा होर्मुज को लेकर दिए गए अल्टीमेटम और Iran की जवाबी चेतावनी ने वैश्विक तनाव बढ़ा दिया, जिसका सीधा असर बाजार पर पड़ा।
मिनटों में 12 लाख करोड़ रुपये साफ
बाजार खुलते ही निवेशकों को भारी झटका लगा। कुछ ही मिनटों में करीब 12 लाख करोड़ रुपये की दौलत खत्म हो गई। Bombay Stock Exchange (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप 429 लाख करोड़ रुपये से घटकर 417 लाख करोड़ रुपये पर आ गया। यह गिरावट इतनी बड़ी है कि इसकी तुलना देश के वार्षिक रक्षा बजट से भी की जा सकती है।
इस नुकसान का असर सिर्फ बड़े निवेशकों पर ही नहीं, बल्कि उन लाखों छोटे निवेशकों पर भी पड़ा है, जिन्होंने SIP और म्यूचुअल फंड के जरिए बाजार में पैसा लगाया हुआ है।
छोटे निवेशकों पर सबसे ज्यादा मार
मुख्य सूचकांकों में 2% की गिरावट दिखती है, लेकिन असली झटका मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगा। BSE Midcap Index और BSE Smallcap Index दोनों में 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा रिटर्न के लालच में बड़ी संख्या में रिटेल निवेशक इन सेगमेंट्स में आए थे, लेकिन गिरावट के समय यही शेयर सबसे ज्यादा टूटते हैं। बड़े संस्थागत निवेशकों के पास जोखिम प्रबंधन के बेहतर साधन होते हैं, जबकि छोटे निवेशकों के पास अक्सर इंतजार ही एकमात्र विकल्प बचता है।
वैश्विक बाजारों का दबाव
भारत ही नहीं, बल्कि एशिया के अन्य प्रमुख बाजार भी दबाव में रहे। Nikkei 225 और KOSPI जैसे बाजारों में भी भारी गिरावट देखने को मिली।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ेगी और केंद्रीय बैंकों को सख्त मौद्रिक नीतियां अपनानी पड़ सकती हैं, जो शेयर बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।















