हरियाणा सरकार राम रहीम को परोल के पक्ष में क्यों ?

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नई दिल्ली – रेप और हत्या के मामले में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की परोल पर रिहाई की खबरें सुर्खियों में हैं। हरियाणा सरकार साफ-साफ तो कुछ नहीं कह रही, लेकिन संकेत राम रहीम के समर्थन में ही दिख रहे हैं। राम रहीम के परोल पर राज्य के जेल मंत्री के एल पंवार का कहना है कि अच्छे आचरण वाले हर दोषी को 2 साल की जेल के बाद परोल मिलती है। खुद सीएम खट्टर कह रहे हैं कि देश में एक कानूनी प्रक्रिया है, जिसमें सभी को परोल की मांग रखने का अधिकार है और किसी को रोका नहीं जा सकता। हालांकि वो ये भी कहते हैं कि राम रहीम के परोल पर अभी तक कोई फैसला नहीं किया गया है।

स्वयंभू संत गुरमीत राम रहीम की तरफ से परोल मांगने का कारण भी अपने आप में बेहद दिलचस्प है, टाइमिंग इसे और भी खास बना देती है। दरअसल, राम रहीम परोल लेकर खेती करना चाहता है। वो भी ऐसी स्थिति में जब किसी जमीन पर उसका मालिकाना हक ही नहीं है।

इस साल हरियाणा में विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि कहीं हरियाणा की बीजेपी सरकार चुनावों में डेरा का समर्थन पाने के लिए ही तो नहीं, राम रहीम के तमाम गुनाहों को नजरअंदाज कर उसे परोल देने की पैरवी कर रही है? वैसे भी डेरा का पॉलिटिक्ल कनेक्शन जगजाहिर रहा है।

डेरा का दावा है कि उसके पांच करोड़ समर्थक हैं। सिर्फ हरियाणा में ही इसके 25 लाख समर्थक बताए जाते हैं। यही वजह है कि गुरमीत राम रहीम का डेरा सच्चा सौदा बीते एक दशक से कई दलों के लिए अहम वोटबैंक रहा है। 2007 में डेरे में राजनीतिक मामलों की शाखा का गठन किया गया था।

शाखा ये फैसला करती है कि डेरा समर्थकों को किस पार्टी या नेता को समर्थन देना है। 2007 के पंजाब विधानसभा चुनाव में डेरा ने कांग्रेस को समर्थन दिया था, जबकि 2014 के आम चुनावों में उसने खुलकर बीजेपी का समर्थन किया। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2014 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में राम रहीम का समर्थन लेने के लिए पार्टी के बड़े नेताओं ने उनसे मुलाकात की थी। इस मुलाकात के कुछ ही दिन बाद डेरा ने बीजेपी को हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में समर्थन देने का ऐलान किया था। डेरा के इतिहास में यह पहली बार था कि डेरा ने किसी राजनीतिक दल का खुलकर समर्थन किया हो।

वहीं 15 अक्टूबर, 2014 को इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक, 2014 लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भी कुछ नेताओं ने भी गुरमीत राम रहीम से मिलकर समर्थन मांगा था।

मतलब कि गुरमीत राम रहीम के समर्थक रूपी वोटरों की जरूरत तो हर पार्टी को है। क्योंकि कहा ये जाता है कि डेरे से जो आदेश गुरमीत राम रहीम जारी कर देता था, अनुयायी उसका आंख बंद करके पालन करते थे। ऐसे में राजनीतिक दलों और नेताओं में बाबा के दर पर जाने के बाद एकमुश्त वोट मिलने की उम्मीद पैदा हो जाती है।